5
Advertisement

साहित्य सागर Sahitya Sagar

प्रिय मित्रों , ICSE Board के ९वीं  और १० वीं  कक्षा के साहित्य सागर Sahitya Sagar  के लिए छात्र उपयोगी प्रश्न उत्तर को हिंदीकुंज.कॉम में संकलित किया गया है ( ICSE Sahitya Sagar A Collection of Short Stories & Poems - 9 & 10 ).इस सामग्री को तैयार करने के लिए बहुत सारी पाठ्य पुस्तकों का उपयोग किया गया है ,जिनके लिए हम धन्यवाद प्रकट करते हैं . साहित्य सागर में संक्षिप्त कहानियाँ पाठ के लिए सारांश ,प्रमुख पात्रों का चरित्र चित्रण ,उद्देश्य  ,शीर्षक की सार्थकता तथा परीक्षा उपयोगी प्रश्नों का संकलन किया गया है .पद्य भाग के लिए भावार्थ ,शब्दार्थ ,पाठ्यक्रम के अनुसार प्रश्न एवं पाठ पर आधारित परीक्षा के लिए उपयोगी प्रश्न सरल एवं बोधगम्य भाषा में दिए गए हैं Helpful in understanding ICSE Hindi textbook to students. आशा है कि सभी छात्रों व सुधि पाठकों के लिए यह संकलन उपयोगी व लाभदायक रहेगा .इस प्रकार हिंदीकुंज.कॉम ,साहित्य सागर Sahitya Sagar के लिए एक सम्पूर्ण अध्ययन सामग्री प्रस्तुत करती है और छात्रों के अन्दर एक गहन आत्मविश्वास पैदा करती है .

हिंदीकुंज.कॉम में संकलित साहित्य सागर Sahitya Sagar के पाठों का विवरण निम्नलिकित है - 

Short Stories संक्षिप्त कहानियाँ 


१. बात अठन्नी - सुदर्शन 
२. काकी - सियारामशरण गुप्त 
३. महायज्ञ का पुरस्कार  - यशपाल 
४. नेता जी का चश्मा - स्वयं प्रकाश 
५. अपना अपना भाग्य  - जैनेन्द्र कुमार 
६. बड़े घर की बेटी - प्रेमचंद 
७. संदेह - जयशंकर प्रसाद 
८. जामुन का पेड़ - कृष्ण चंदर 
९. भेड़ें और भेड़िये - हरिशंकर परसाई 
१०. दो कलाकार - मन्नू भंडारी 


Poems पद्य भाग 


१. साखी - कबीरदास 
२. गिरिधर की कुण्डलियाँ - गिरिधर कविराय 
३. स्वर्ग बना सकते हैं - रामधारी सिंह दिनकर 
४. वह जन्मभूमि मेरी - सोहनलाल द्विवेदी 
५. मेघ आए - सर्वेश्वरदयाल सक्सेना 
६. सूर के पद - सूरदास
७. विनय के पद - तुलसीदास
८. भिक्षुक - सूर्यकांत त्रिपाठी निराला 
९. चलना हमारा काम है - शिवमंगल सिंह सुमन 
१० . मातृ मंदिर की ओर - सुभद्राकुमारी चौहान 

एक टिप्पणी भेजें

  1. शब्द कम हो और सिख बडी दे जाये,तो वो कविता है

    मोहब्बत के मारे शायर बना फिरता है
    वो शायरी प्रकृति से मिल जाए,तो वो कविता है

    मेरे दिल से निकली बात तेरे दिल को छू जाए
    मेरे लिखे शब्द तेरे अल्फाज बन जाए,तो वो कविता है

    मेरी ज़ुबां से नही स्याही से निकलकर
    कागज पर उतर जाए,तो वो कविता है

    मेरे अरमाँ तेरे अरमाँ से मिल जाए
    मेरी रुह तेरी रुह हो जाए,ये कही बात भी एक कविता है

    टूटा हुआ पर् भी जमीन पे आराम से गिरता है
    पेड फिर उगने की चाह मे बीज बनता है

    साथ है,और जो साथ निभा जाए
    दोनो मे जो अंतर बता जाए,तो वो कविता है

    जिसकी उड़ान अनन्तता मे हो तो वो कविता है

    टूटकर भी जो मंजिल तक पहुँच जाता है
    अपनी दास्ताँ कुछ यूँ सुनाता है

    के अब तक लिखी बात जो समझ जाए तो वो कवि है
    और वो कवि मेरी समझ को तेरी समझ से मिला दे , तो वो कविता है………

    श.र.मणि

    उत्तर देंहटाएं
  2. विद्यार्थियों के लिए यह साईट कल्पवृक्ष के समान है।

    उत्तर देंहटाएं

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top