0

काकी कहानी

काकी कहानी श्री सियारामशरण गुप्त जी द्वारा लिखी गयी एक प्रसिद्ध कहानी है . जिसमें उन्होंने बालमनोविज्ञान का चित्रण किया है . श्यामू बचपन में ही अपनी माँ को खो देता है .जब उसकी माँ की मौत हुई थी तब वह एक नादान बालक था .वह अपनी माँ को शमशान घाट पर ले जाने से रोकता  है .लोग उसे यह कहकर बहला देते है की उसकी माँ मामा के यहाँ गयी है और कुछ दिन वहां रहकर लौट आएगी .लेकिन कुछ ही दिनों में आस - पास के लड़कों से उसे पता चला की उसकी माँ भगवान् के यहाँ गयी है .श्यामू उदास व बेचैन आँखों से आसमान की ओर अपनी माँ को खोजता रहता तभी अचानक उसे कुछ ख्याल आया . वह दौड़ा - दौड़ा अपने पिता के पास गया और पतंग खरीदने  के लिए पैसा  माँगा .लेकिन पिता ने इनकार कर दिया .बाद में श्यामू ने पिता विश्वेश्वर के कोट एक चवन्नी चुरा ली . वह अपने हमउम्र सुखिया दासी का बेटा भोला से मिला और उसे अपनी योजना बताई .वह अपनी काकी के नाम एक पतंग भेजना चाहता था ,जिसकी डोर पकड़ कर काकी नीचे उतर आये . भोला ने बताया की डोर पतली है ,काकी काकी इसे पकड़कर उतर नहीं सकती ,यह डोर टूट जायेगी . भोला ने कहा की काकी के लिए एक मोटी रस्सी भेजी जानी चाहिए ताकि काकी उसे पकड़ कर आसानी से आ जाए. श्यामू ने फिर अपने पिता के जेब से एक रूपया चुराया .यह बात श्यामू के पिता को पता चल गयी और उन्होंने क्रोध में आकर शामू को मारा . श्यामू को पतंग को फाड़ दी जिस पर लिखा था - काकी .

काकी कहानी शीर्षक की सार्थकता 

किसी भी कहानी का शीर्षक उस कहानी के बारे में पाठकों को बताता है . कहानी के शीर्षक के इर्द - गिर्द ही पूरी कहानी घूमती है .इस दृष्टि से काकी कहानी सही साबित होती है .
कहानी के आरंभ से काकी के देहांत से कथा आरंभ होती है .काकी के शोक में श्यामू हमेशा डूबा रहता है ,वह दिन रात काकी के लिए रोता रहता है .वह हर -हाल में चाहता है की उसकी माँ काकी उसके पास आ जाएँ . काकी को पाने के लिए राम के पास पतंग भेजने ,उसके लिए पिता के जेब से पैसे चोरी करने ,पतंग ,रस्सी तथा पतंग पर काकी के नाम चिट लगाने से जिससे काकी अपना नाम पढ़ कर वापस आ जाए. यह सब बातें श्यामू के काकी प्रेम को ही दर्शित करता है . जब श्यामू के पिता ने उसे मारा और पतंग फाड़ डाली तो पतंग पर लिखा था - काकी . इन सब बातों से यही पता चलता है - यह कहानी आरंभ से लेकर अंत तक काकी के इर्द - गिर्द  घूमती है . अतः काकी शीर्षक सार्थक व उचित है .

श्यामू का चरित्र चित्रण 

श्यामू ५-६ साल का एक अबोध बालक जो प्रस्तुत कहानी का प्रमुख पात्र है . वह अपनी माँ को बहुत प्यार करता है . माँ के मर जाने के बाद वह हमेशा रोया करता है .रोना शांत हो जाने के बाद भी वह शोख में डूबा रहता है . आसमान में उडती पतंगों को देखर वह काकी के पास पतंग भेजना  चाहता है ,जिस पर बैठ कर वह वापस श्यामू के पास आ जाय.
  • भावुक बालक - श्यामू अत्यंत भावुक बालक है . सबेरे जब श्यामू की नींद खुली तो उसने देखा की घर के लोग उसकी काकी को घेर कर बैठे थे और करुण श्वर में विलाप कर रहे हैं. जब लोग काकी को शमशान ले जाने लगे तो वह काकी को नहीं जाने देता .बड़ी कठिनाई से उसे रोका जा सका.
  • दृढ़ बालक - श्यामू बहुत दृढ़ता से काम लेता है . पतंग देखकर वह पतंग को आसमान में भेजकर काकी को नीचे उतरना चाहता है .इसके लिए पिता के जेब से पैसे चोरी करने पर भी नहीं डरता .वह अपने मित्र भोला से मिलकर योजना बनायीं ,रस्सी ,पतंग तथा काकी के नाम का चिट सभी चीजों का प्रबंध किया .
  • सीधा और सरल - श्यामू सीधा व सरल बच्चा है .यही कारण है कि वह काकी को वापस पाने के लिए पतंग का सहारा लेता है .काकी पतली डोर पर नहीं आ पाएंगी इसीलिए वह मोती रस्सी का इंतजाम करता है .काकी अपना नाम पढ़कर वापस आये ,इसीलिए वह काकी के नाम का चिट लगाकर भेजता है .

अतः उपयुक्त बातों से यह पता चलता है कि श्यामू एक नादान बालक है जो की अपनी माँ से बहुत प्रेम करता है और उन्हें हर हाल में पाना चाहता है .उसकी भोलापन ,नादानी पाठकों के मन में गहरा प्रभाव डालती है .

प्रश्न उत्तर 

प्र.१.सुबह जब श्यामू की नींद खुली तो उसने क्या देखा ?

उ.बड़े सबरे जब श्यामू की नींद खुली तो उसने देखा की उसकी माँ काकी कम्बल ओढ़े भूमि शयन  कर रही है और लोग उसे घेर कर रो रहे है . जब लोग काकी को शमशान ले जाने लगे तो श्यामू ने बड़ा उपद्रव मचाया .उसने कहा की "काकी सो रही है ,उन्हें इस तरह उठाकर कहा ले जा रहे हो ? मैं न जाने दूंगा .बड़ी मुस्किल से उसे रोका जा सका.

प्र.२ श्यामू की मनोदशा कैसे हो गयी थी ?

उ.श्यामू की मनोदशा अच्छी नहीं थी . वह एक ५-६ बर्ष का सरल ह्रदय बालक था . अचानक माँ के देहांत हो जाने पर वह संभल नहीं पाया . दिन भर माँ के लिए रोया करता और रोना बंद हो जाने के बाद वह उदास रहने लगा . उसका मन उदास ,दुखी ,परेशां और शोक से भरा हुआ था .

प्र३.भोला, श्यामू से अधिक समझदार क्यों  है ?

उ. भोला ,सुखिया दासी का लड़का है और श्यामू का हम उम्र ही है . वह थोडा अधिक समझदार है तभी तो वह पतंग की पतली डोर को मना करता है .तथा श्यामू से मोती रस्सी लाने के लिए कहता है ,जिसपर बैठकर काकी राम के यहाँ से नीचे आ सके . श्यामू और भोला दोनों ही अबोध है तथा नादानी में ही सही काकी को आसमान से नीचे उतरने के लिए पतंग का सहारा लेना चाहता है .

प्र४ .काकी कौन थी ?

 उ. काकी, विश्वेश्वर की पत्नी और श्यामू की माँ थी। श्यामू उसका बेटा था जो, उसके बहुत करीब था।काकी की अचानक मृत्यु हो जाती है। श्यामू अपनी माँ की कमी को बहुत महसूस करता है और प्रायः अकेला बैठा-बैठा शून्य मन से आकाश की ओर ताका करता था।

प्र.५ विश्वेश्वर हतबुद्धि क्यों रह गए ?

उ. विश्वेश्वर अपने जेब से पैसों की चोरी होने पर जब उन्हें पता चला तो वह श्यामू के पास गए और कहा की तुमने पैसे चुराए है .भोला एक ही डांट में मुखबिर बन गया .इस पर उन्होंने श्यामू को मारा . भोला ने बताया कि श्यामू ने कहा था कि पतंग उड़ाकर काकी को राम के यहाँ से उतरेंगे .इस बात पर विश्वेश्वर हतबुद्धि हो गए .अंत में पतंग उठाकर देखा तो उस पर लिखा था - काकी . 

एक टिप्पणी भेजें

आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

 
Top