मैदान मिले तो ओलंपिक तक उड़ान भर लें गांव की लड़कियां

SHARE:

मैदान मिले तो ओलंपिक तक उड़ान भर लें गांव की लड़कियां स्कूल में मैदान जरूर है, लेकिन पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों के बीच उर्मिला को अभ्यास के लिए बहुत कम

मैदान मिले तो ओलंपिक तक उड़ान भर लें गांव की लड़कियां


राजस्थान के लूणकरणसर से करीब 20 किमी दूर बसे कुजटी गांव की 17 वर्षीय उर्मिला कबड्डी खेलना चाहती है। उसका सपना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने और देश के लिए पदक जीतने का है। लेकिन उसके सामने सवाल यह नहीं है कि वह कितना बड़ा सपना देखती है, बल्कि यह है कि उस सपने को आगे बढ़ाने के लिए उसके पास कितनी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

इस गांव में लड़कियों के लिए नियमित खेल मैदान नहीं है। स्कूल में मैदान जरूर है, लेकिन पढ़ाई और दूसरी गतिविधियों के बीच उर्मिला को अभ्यास के लिए बहुत कम समय मिल पाता है। घर लौटने के बाद घरेलू काम उसकी प्राथमिकता बन जाते हैं। ऐसे में खेल के लिए समय निकालना उसके लिए आसान नहीं है।

परिवार और समाज की सोच भी उसके रास्ते को आसान नहीं बनाती। उनके लिए उर्मिला का भविष्य शादी, घर-परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों से जुड़ा है। इसलिए उन्हें लगता है कि उसे खेल के बजाय घरेलू काम सीखने पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उर्मिला की कहानी केवल एक लड़की के सपने और संघर्ष की कहानी नहीं है। यह उस सवाल को सामने लाती है कि गांवों में लड़कियों को अपनी पसंद का खेल खेलने और उसमें आगे बढ़ने के लिए समान अवसर आखिर कितने मिलते हैं?

करीब 2500 की आबादी और लगभग 400 घरों वाले कुजटी गाँव में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। यहां की साक्षरता दर लगभग 56 प्रतिशत है। पुरुषों की साक्षरता दर 72 प्रतिशत है, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर केवल 40 प्रतिशत है। यह अंतर केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है। शिक्षा, खेल और दूसरे अवसरों तक पहुंच में भी लड़कियों और लड़कों के बीच असमानता दिखाई देती है। लड़कों का मैदान में घंटों खेलना अक्सर सामान्य माना जाता है, जबकि लड़कियों के खेलते ही घर के काम, पढ़ाई, सुरक्षा और भविष्य को लेकर सवाल उठने लगते हैं।

उर्मिला के माता-पिता की सोच को केवल उनकी व्यक्तिगत सोच कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। यह उस सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा है जिसमें लड़कियों के भविष्य को बचपन से ही घरेलू जिम्मेदारियों के साथ जोड़ दिया जाता है। लड़की को घर का काम सीखना चाहिए, समय पर घर लौटना चाहिए और आगे चलकर परिवार संभालना चाहिए, यह अपेक्षा इतनी सामान्य बना दी गई है कि उसके अपने सपनों के लिए समय मांगना भी कई बार अतिरिक्त मांग जैसा लगने लगता है।

मैदान मिले तो ओलंपिक तक उड़ान भर लें गांव की लड़कियां
हाल ही में ग्लासगो में हुए 2026 राष्ट्रमंडल खेलों ने यह दिखाया है कि जब महिलाओं को खेल के अवसर और प्रशिक्षण मिलते हैं तो उनकी उपलब्धियां कितनी दूर तक जा सकती हैं। भारत ने इन खेलों में कुल 39 पदक जीते, जिनमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और 9 कांस्य पदक शामिल हैं। इनमें आठ स्वर्ण अकेले महिला खिलाड़ियों ने ही जीता है। इन उपलब्धियों को केवल पदकों की संख्या के रूप में देखने के बजाय यह समझना जरूरी है कि खेल में महिलाओं की भागीदारी के लिए अवसरों का महत्व कितना बड़ा है।

ग्लासगो में अस्मिता डे का स्वर्ण विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। वह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। उनकी सफलता यह बताती है कि किसी खेल में अवसर और प्रशिक्षण मिलने पर महिलाएं उन क्षेत्रों में भी इतिहास रच सकती हैं, जहां भारत की उपस्थिति पहले सीमित रही है। इन महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों का मतलब यह नहीं है कि हर गांव की लड़की को ओलंपिक या राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतना ही चाहिए।

असली सवाल इससे पहले का है कि क्या उसे अपनी पसंद का खेल खेलने का अवसर मिला? क्या उसके पास अभ्यास के लिए मैदान है? क्या उसे प्रशिक्षण मिलता है? क्या उसके परिवार ने उसे खेलने के लिए समय दिया? क्या उसे इस डर के बिना मैदान तक जाने की स्वतंत्रता है कि उसके खेलने को लेकर समाज सवाल उठाएगा?

उर्मिला की कहानी में इन सवालों के जवाब तलाशना इसलिए जरूरी है क्योंकि प्रतिभा तभी विकसित होती है जब उसके लिए परिस्थितियां भी बनाई जाएं। सवाल यह नहीं होना चाहिए कि उर्मिला खेलकर क्या हासिल करेगी? सवाल यह होना चाहिए कि अगर उसे कबड्डी पसंद है और वह इसे सीखना चाहती है, तो उसे खेलने के लिए पर्याप्त समय और स्थान क्यों नहीं मिलना चाहिए? किसी खिलाड़ी से पदक की उम्मीद करने से पहले उसे अभ्यास की सुविधा देना जरूरी है।

कोई भी खिलाड़ी केवल अपने उत्साह और मेहनत के दम पर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंचता। उसके पीछे मैदान, प्रशिक्षक, खेल सामग्री, नियमित अभ्यास, प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर और परिवार का सहयोग होता है। अगर इनमें से शुरुआती सुविधाएं ही किसी लड़की को उपलब्ध नहीं होंगी, तो उसकी प्रतिभा को आगे बढ़ने का अवसर कैसे मिलेगा?

ध्यान देने वाली एक बात यह भी है कि मैदान का होना और उस पर लड़कियों की बराबर पहुंच होना, दो अलग मुद्दे हैं। यदि गांव में कोई सार्वजनिक या स्कूल का मैदान मौजूद है, तो यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि लड़कियों को वहां नियमित रूप से खेलने का समय और अवसर मिले। किसी लड़की की प्रतिभा केवल उसकी व्यक्तिगत मेहनत से ही नहीं निखरती है बल्कि उसे अवसर, प्रशिक्षण, अभ्यास के लिए समय, सुरक्षित स्थान और यह भरोसा होनी चाहिए कि खेल चुनने के कारण उसके भविष्य पर सवाल नहीं उठाए जाएंगे।

यहां परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। लड़कियों को खेल के लिए समय देना केवल उन्हें प्रोत्साहित करने का सवाल नहीं है, बल्कि घर की जिम्मेदारियों को बराबरी से बांटने का भी सवाल है। अगर एक लड़की सुबह से शाम तक घर के काम में लगी रहे और उसके बाद उससे अभ्यास करने की उम्मीद की जाए, तो उसके सामने दोहरा दबाव खड़ा होगा।

दूसरी ओर, अगर घर के दूसरे सदस्य भी घरेलू जिम्मेदारियों में भागीदारी करें और लड़की को अभ्यास के लिए निश्चित समय मिले, तो खेल उसके लिए अतिरिक्त बोझ नहीं रहेगा। लड़कियों को खेल के लिए समय देना उनके घरेलू दायित्वों से छूट की मांग नहीं, बल्कि उनके समय को भी महत्व देने की जरूरत है।

ग्लासगो में भारतीय महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि उन्होंने खेल को केवल पुरुषों का क्षेत्र मानने वाली धारणा को एक बार फिर से तोड़ा है। भारत के 13 स्वर्ण पदकों में आठ महिला खिलाड़ियों का योगदान यह बताता है कि अवसर मिलने पर वे देश की सफलता में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि का एक अर्थ यह भी है कि खेल की दुनिया में भी लड़कियों के लिए जगह बन चुकी है, जरूरत उन जगहों तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने की है।(यह लेखिका की निजी राय है)

- रक्षा शर्मा,
लूणकरणसर, राजस्थान

COMMENTS

Leave a Reply

इन्हे भी अवश्य पढ़ें -

Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy बिषय - तालिका