लाइक्स का अंतिम संस्कार | एक विडंबनात्मक कहानी

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लाइक्स का अंतिम संस्कार | एक विडंबनात्मक कहानी उसकी मृत्यु की खबर सबसे पहले उसके घरवालों को नहीं मिली।सबसे पहले यह खबर सोशल मीडिया को मिली।

लाइक्स का अंतिम संस्कार | एक विडंबनात्मक कहानी


सकी मृत्यु की खबर सबसे पहले उसके घरवालों को नहीं मिली।सबसे पहले यह खबर सोशल मीडिया को मिली।

"आर.आई.पी." की टिप्पणियाँ सैकड़ों की संख्या में आने लगीं।फूलों वाले इमोजी खिल उठे।रोते हुए चेहरों की बरसात होने लगी।घर में उसकी पत्नी उसे बार-बार पुकार रही थी।

"सुनिए... एक बार अस्पताल चलिए..."

लाइक्स का अंतिम संस्कार | एक विडंबनात्मक कहानी
उसे सीने में तेज दर्द था। साँसें भारी हो रही थीं। लेकिन उस समय भी उसकी उँगलियाँ मोबाइल स्क्रीन पर दौड़ रही थीं।उसने एक पोस्ट लिखी:"ज़िंदगी खूबसूरत है।"कुछ ही मिनटों में पोस्ट पर सैकड़ों लाइक्स आ गए। फिर हजारों।वह मुस्कुराया।उसे लगा, लोग उसे सुन रहे हैं।लोग उसे देख रहे हैं।लोग उसे प्यार करते हैं।लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मृत्यु हो गई।

अंतिम संस्कार के दिन कोई बड़ी भीड़ नहीं थी।क्योंकि उनमें से अधिकांश लोग पहले ही सोशल मीडिया पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित कर चुके थे।किसी ने लिखा था:"आपकी कमी हमेशा महसूस होगी।"किसी ने लिखा:"विश्वास नहीं हो रहा कि आप अब हमारे बीच नहीं हैं।"और किसी ने केवल एक टूटे हुए दिल का इमोजी भेज दिया था।

श्मशान में खड़े लोगों की संख्या उन टिप्पणियों की संख्या से बहुत कम थी।एक व्यक्ति ने फोन पर कहा:"आ नहीं सका... लेकिन दिल से साथ हूँ।"पत्नी ने उसकी बात सुनी।उसके मन में एक कड़वी मुस्कान उभरी।उसने सोचा:"जब वह जीवित था, तब भी तो तुम लोग दिल में ही थे, उसके पास कभी नहीं थे।"बेटा चुपचाप बैठा था।उसने अपने पिता का फोन खोला।

स्क्रीन पर आखिरी सूचना चमक रही थी:"बधाई हो! आपकी पोस्ट इस समय सबसे अधिक चर्चित है।"बेटा कुछ क्षण उस संदेश को देखता रहा।फिर उसने फोन बंद कर दिया।उसी समय ताबूत का ढक्कन भी बंद कर दिया गया।एक तरफ एक जीवन समाप्त हो चुका था।दूसरी तरफ उसकी आखिरी पोस्ट अभी भी लोगों की स्क्रीन पर जीवित थी।अगले दिन सोशल मीडिया पर एक नया विषय चर्चा में आ गया।लोग नई बहसों में व्यस्त हो गए।नई तस्वीरें, नए वीडियो, नई संवेदनाएँ, नया गुस्सा, नए आँसू।

धीरे-धीरे उसका नाम भी भीड़ में खो गया।उसकी प्रोफ़ाइल बची रही।उसकी पोस्टें बची रहीं।उसके लाइक्स भी बचे रहे।लेकिन वह नहीं बचा।घर में उसकी खाली कुर्सी बची रही।दीवार पर टंगी उसकी तस्वीर बची रही।पत्नी की चुप्पी बची रही।बेटे की आँखों में तैरता हुआ प्रश्न बचा रहा।और उस घर में एक सवाल हमेशा के लिए ठहर गया:
"जिस आदमी ने जीवन को ही खो दिया, उसे जीवन के बारे में लिखी गई बातों से आखिर क्या मिला?"

शायद कुछ भी नहीं।क्योंकि जीवन लाइक्स से नहीं चलता।वह उन हाथों से चलता है जो समय पर किसी का हाथ थाम लें।उन आवाज़ों से चलता है जो स्क्रीन के पार नहीं, पास बैठकर सुनाई दें।और उन रिश्तों से चलता है जो चर्चा का विषय नहीं बनते, फिर भी जीवनभर साथ रहते हैं।विडंबना यह थी कि वह पूरी दुनिया को अपनी मौजूदगी दिखाने में इतना व्यस्त था कि अपने ही जीवन की अनुपस्थिति को देख नहीं पाया।जब तक उसे एहसास होता, तब तक उसकी पोस्ट लोगों की चर्चा का केंद्र बन चुकी थी...और वह स्वयं एक स्मृति।


- Binoy.M.B,
Thrissur district, pincode:680581,
Kerala state, email:binoymb2008@gmail.com,
phone:9847245605(office)

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