अगर इंटरनेट एक दिन के लिए बंद हो जाए अगर इंटरनेट एक दिन के लिए बंद हो जाए तो यह हमारे आधुनिक जीवन के लिए एक अकल्पनीय झटका साबित होगा। आज का हर व्यक्ति
अगर इंटरनेट एक दिन के लिए बंद हो जाए
अगर इंटरनेट एक दिन के लिए बंद हो जाए तो यह हमारे आधुनिक जीवन के लिए एक अकल्पनीय झटका साबित होगा। आज का हर व्यक्ति, हर घर, हर कार्यालय और हर शहर इस अदृश्य जाल से इतना गहराई से जुड़ा हुआ है कि इसका अचानक गायब होना पहले तो अविश्वसनीय लगेगा, फिर घबराहट पैदा करेगा और अंत में जीवन की कई रफ्तारों को ठप्प कर देगा।
इंटरनेट के बिना सुबह की शुरुआत
सुबह उठते ही सबसे पहले जो आदत टूटेगी वह है फोन उठाकर स्क्रीन चेक करना। न्यूज़ ऐप, व्हाट्सएप ग्रुप, इंस्टाग्राम स्टोरीज़, ट्विटर ट्रेंड्स—सब कुछ एक झटके में गायब। लोग पहले तो सोचेंगे कि नेटवर्क प्रॉब्लम है, फिर रिचार्ज चेक करेंगे, फिर पड़ोसियों से पूछेंगे। धीरे-धीरे एहसास होगा कि यह समस्या सिर्फ उनका नहीं, पूरी दुनिया की है। सोशल मीडिया पर कोई शिकायत नहीं कर पाएगा, कोई मीम नहीं शेयर कर पाएगा, कोई वायरल वीडियो नहीं देख पाएगा। अचानक लाखों-करोड़ों लोग खुद को अकेला महसूस करने लगेंगे, क्योंकि उनकी रोज़ की भावनात्मक निर्भरता का मुख्य सहारा ही गायब हो गया होगा।कार्यालयों में काम की गति एकदम धीमी पड़ जाएगी। ईमेल बंद, गूगल ड्राइव बंद, ज़ूम मीटिंग बंद, क्लाउड सॉफ्टवेयर बंद। जो लोग घर से काम करते हैं उनके लिए तो दिन व्यर्थ हो जाएगा। बैंकिंग ऐप्स काम नहीं करेंगे, UPI ट्रांजेक्शन रुक जाएंगे, ऑनलाइन पेमेंट ठप। बाज़ार में लोग कैश लेकर निकलेंगे, लेकिन कई दुकानें कार्ड और QR कोड पर निर्भर हैं। छोटे शहरों में तो स्थिति सामान्य रह सकती है, पर महानगरों में लंबी कतारें लगेंगी एटीएम के सामने, क्योंकि कैश की मांग अचानक बढ़ जाएगी। स्टॉक मार्केट, क्रिप्टो ट्रेडिंग, फॉरेक्स—सब ठहर जाएंगे।कार्यालय, व्यापार और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
अनुमान है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक दिन में ही सैकड़ों करोड़ डॉलर का नुकसान हो सकता है।यातायात भी बुरी तरह प्रभावित होगा। उड़ानें तो तकनीकी रूप से हो सकती हैं, पर फ्लाइट बुकिंग, चेक-इन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल के कई सिस्टम इंटरनेट पर निर्भर हैं। हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी मचेगी। ट्रेनों की ऑनलाइन बुकिंग रुकेगी, कई सिग्नलिंग और ट्रैकिंग सिस्टम प्रभावित हो सकते हैं। सड़कों पर गूगल मैप्स और ओला-उबर जैसी सेवाएं बंद होने से लोग पुराने तरीके से रास्ता पूछते नज़र आएंगे। डिलीवरी सर्विसेज़—ज़ोमैटो, स्विगी, अमेज़न—सब ठप। भोजन ऑर्डर करने की आदत वाले लाखों लोग अचानक भूखे रह जाएंगे या घर का खाना बनाने को मजबूर होंगे।अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में भी परेशानी होगी। ऑनलाइन रिपोर्ट्स, टेलीमेडिसिन, दवाओं का ऑर्डर, मरीजों का रिकॉर्ड—सब प्रभावित। इमरजेंसी सेवाएं काम करेंगी, पर कोऑर्डिनेशन में देरी हो सकती है। स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन क्लास रुक जाएंगी। छात्रों को अचानक पुरानी किताबें खोलनी पड़ेंगी।लेकिन इन सबके बीच एक अलग ही दृश्य भी उभरेगा। लोग अचानक एक-दूसरे से बात करने लगेंगे। पड़ोस में जाकर हालचाल पूछेंगे।परिवार के साथ बिना फोन के समय बिताएंगे। बच्चे बाहर खेलेंगे। कई लोग किताबें निकालेंगे, पुराने गाने सुनेंगे, चाय की चुस्कियों के साथ लंबी बातें करेंगे। शहरों की भागदौड़ थम जाएगी। शोर कम होगा। प्रदूषण कम होगा।
शाम की घबराहट और अफवाहों का दौर
प्रकृति को एक दिन का सुकून मिलेगा।शाम होते-होते घबराहट चरम पर होगी। लोग रेडियो और टीवी के सामने बैठेंगे, क्योंकि वे ही बचे हुए सूचना के साधन होंगे। अफवाहें फैलेंगी। कुछ लोग डरेंगे कि यह साइबर अटैक है, कुछ सोचेंगे युद्ध शुरू हो गया। लेकिन अधिकांश सिर्फ इंतज़ार करेंगे कि कब वापस आएगा यह उनका 'साथी'।रात को सोने से पहले कई लोग एहसास करेंगे कि वे कितने असहाय हो गए हैं।जो चीज़ कभी नहीं दिखती, उसी के बिना उनका जीवन कितना अधूरा है। एक दिन का यह अनुभव उन्हें सिखाएगा कि इंटरनेट सुविधा नहीं, अब उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह उन्हें सोचने पर मजबूर करेगा कि क्या वे इसके बिना भी जी सकते हैं, या अब यह उनके अस्तित्व का अंग बन गया है।
अगली सुबह जब इंटरनेट वापस आएगा, तो एक राहत की सांस होगी। लेकिन उस एक दिन ने हमें आईना दिखा दिया होगा—हम कितने स्वतंत्र हैं और कितने ग़ुलाम। शायद कुछ लोग फिर से पुरानी आदतों की ओर लौटना चाहेंगे, पर ज्यादातर उसी रफ्तार में वापस कूद पड़ेंगे। क्योंकि अब इंटरनेट सिर्फ एक टूल नहीं, हमारा दूसरा दिल बन चुका है।


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