दशहरा पर भाषण 2026 | Dussehra Speech in Hindi | विजयदशमी भाषण

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दशहरा पर भाषण 2026 हिंदी में: विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए सरल, प्रेरक Dussehra Speech। रावण दहन का संदेश और सत्य की जीत का सार पढ़ें।

दशहरा पर भाषण 2026 | Dussehra Speech in Hindi | विजयदशमी भाषण

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मंच पर विराजमान गुरुजनों, उपस्थित साथियों और प्रिय विद्यार्थियो,
आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ!आज हम सब एक ऐसे पर्व के उपलक्ष्य में यहाँ एकत्र हुए हैं, जो हमें बार-बार यह स्मरण कराता है कि अंततः विजय सत्य की ही होती है। विजयदशमी, जिसे दशहरा भी कहा जाता है, अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 20 अक्टूबर 2026 को पड़ रहा है।

इस पर्व के साथ दो कथाएँ जुड़ी हैं। पहली, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा अहंकारी रावण का वध, जिसने सीता का हरण कर अधर्म का मार्ग अपनाया था। दूसरी, माँ दुर्गा द्वारा नौ दिनों के युद्ध के बाद महिषासुर का संहार, जिसकी स्मृति में नवरात्रि मनाई जाती है। दोनों कथाओं का सार एक ही है कि अन्याय कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, धर्म और सत्य के सामने उसे झुकना ही पड़ता है।

दशहरा पर भाषण 2026 | Dussehra Speech in Hindi | विजयदशमी भाषण
भारत की विविधता इस पर्व में भी झलकती है। उत्तर भारत में रामलीला और रावण-दहन होता है, बंगाल में दुर्गा पूजा और सिंदूर खेला की धूम रहती है, मैसूर का दशहरा अपनी भव्य शोभायात्रा के लिए प्रसिद्ध है, तमिलनाडु और आंध्र में गोलू सजाया जाता है, और कुल्लू का दशहरा अपनी अलग पहचान रखता है। रूप अनेक हैं, पर भाव एक है।

रावण महाविद्वान था, वेदों का ज्ञाता और शिवभक्त। फिर भी उसका पतन हुआ, क्योंकि उसके पास ज्ञान तो था पर विनय नहीं, शक्ति थी पर संयम नहीं। उसके दस सिर काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, ईर्ष्या और स्वार्थ के प्रतीक हैं। असली रावण-दहन तब होगा जब हम इन बुराइयों को अपने भीतर पहचानकर उन्हें जलाएँगे।

आज हमारे समय के रावण बाहर कम, भीतर अधिक हैं। झूठ, भ्रष्टाचार, भेदभाव, नफ़रत, नशा, दूसरों की सफलता से जलन और सुविधा के लिए सिद्धांतों से समझौता, ये सब आज के दशानन हैं। विद्यार्थियों के लिए आलस्य, ध्यान भटकाने वाली आदतें और अनुचित तरीक़ों से आगे बढ़ने का लोभ भी ऐसी ही चुनौतियाँ हैं।

राम का जीवन हमें सिखाता है कि जीत केवल शस्त्र से नहीं, चरित्र से मिलती है। उन्होंने साधनों की कमी में भी धैर्य, मित्रता, सहयोग और नैतिकता नहीं छोड़ी। वानर सेना जैसे साधारण साथियों के साथ मिलकर उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया।

आइए, इस विजयदशमी पर हम संकल्प लें कि हम सत्य बोलेंगे और सही के पक्ष में खड़े होने का साहस रखेंगे, अपने भीतर की कम से कम एक बुराई को चुनकर उसे छोड़ने का प्रयास करेंगे, और समाज में सद्भाव, सम्मान और सहयोग का वातावरण बनाएँगे।

दीपक की तरह छोटा-सा सत्य भी अंधकार के विशाल साम्राज्य को चुनौती दे सकता है। यही विजयदशमी का संदेश है।

आप सभी को एक बार फिर विजयदशमी की अनेकानेक शुभकामनाएँ!

जय श्रीराम! 

धन्यवाद!

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