गुरु पूर्णिमा: अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला महापर्व

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आज हम सब यहाँ एक बेहद पावन और पवित्र उत्सव मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसे हम गुरु पूर्णिमा के रूप में जानते हैं।

गुरु पूर्णिमा: अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला महापर्व


दरणीय प्रधानाचार्य महोदय, पूजनीय शिक्षकगण और मेरे प्यारे सहपाठियों, आप सभी को सादर प्रणाम।
आज हम सब यहाँ एक बेहद पावन और पवित्र उत्सव मनाने के लिए एकत्रित हुए हैं, जिसे हम गुरु पूर्णिमा के रूप में जानते हैं। हिंदू संस्कृति और सनातन परंपरा में गुरु पूर्णिमा का स्थान बेहद अनूठा और सर्वोच्च है। यह दिन केवल एक तिथि मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करने का महापर्व है। 

गुरु पूर्णिमा: अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने वाला महापर्व
आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह उत्सव आदिगुरु, महाभारत के रचयिता और चारों वेदों के विश्लेषक महर्षि वेदव्यास जी के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है, जिन्होंने मानवता को ज्ञान का सबसे बड़ा कोष दिया।

हमारे समाज में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है, क्योंकि भगवान ने हमें इस सृष्टि में भेजा जरूर है, लेकिन इस सृष्टि में सही और गलत की पहचान करना, सही मार्ग पर चलना और एक श्रेष्ठ इंसान बनना हमें गुरु ही सिखाते हैं।जब एक बच्चा जन्म लेता है, तो उसकी पहली गुरु उसकी माता होती है, जो उसे बोलना और व्यवहार करना सिखाती है। इसके बाद जब वह दुनिया में कदम रखता है, तो शिक्षक उसके जीवन को तराशने का काम करते हैं। जैसे एक कुम्हार मिट्टी के ढेले को थपथपाकर एक सुंदर घड़े का रूप दे देता है, ठीक वैसे ही गुरु हमारी कमियों को दूर करके हमें समाज में सिर उठाकर जीने के योग्य बनाते हैं।

आज के इस आधुनिक और डिजिटल युग में, जहाँ ज्ञान हर जगह बिखरा हुआ है, गुरु की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इंटरनेट पर जानकारी तो मिल सकती है, लेकिन उस जानकारी को विवेक में कैसे बदलना है, जीवन की मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य कैसे रखना है और नैतिक मूल्यों का पालन कैसे करना है, यह हमें केवल एक सच्चा गुरु ही सिखा सकता है। गुरु का आशीर्वाद जिसके सिर पर होता है, वह जीवन के हर संकट को आसानी से पार कर लेता है और सफलता के शिखर पर पहुँचता है।

आज गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, हम सभी का यह परम कर्तव्य है कि हम अपने जीवन में आए हर उस व्यक्ति का आभार मानें, जिसने हमें थोड़ा सा भी ज्ञान दिया है। आइए हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम अपने गुरुओं के दिखाए गए सत्य, ईमानदारी और मानवता के मार्ग पर चलेंगे और समाज में उनका नाम रोशन करेंगे। हमें हमेशा याद रखना चाहिए कि एक अच्छा शिष्य वही है जो गुरु की सीख को अपने जीवन में उतारे। अंत में, मैं अपने सभी आदरणीय शिक्षकों और गुरुजनों के चरणों में शीश झुकाकर नमन करता हूँ और ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करता हूँ।

आप सभी को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।

धन्यवाद।

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