अंडे के छिलके एकांकी के आधार पर श्याम का चरित्र चित्रण

SHARE:

अंडे के छिलके एकांकी के आधार पर श्याम का चरित्र चित्रण मोहन राकेश द्वारा विरचित एकांकी 'अण्डे के छिलके' मनोवैज्ञानिक एकांकी है।

अंडे के छिलके एकांकी के आधार पर श्याम का चरित्र चित्रण


मोहन राकेश द्वारा विरचित एकांकी 'अण्डे के छिलके' मनोवैज्ञानिक एकांकी है। भारतीय संस्कृति अपने से बड़ों का आदर करना सिखाती है। पाश्चात्य देशों में पिता-पुत्र, पति-पत्नी, छोटा भाई और बड़ा भाई एक साथ मदिरापान कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति के अनुसार मदिरापान करना बुराई है। जो पढ़े-लिखे और भले लोग हैं, वे परिचितों के सामने भी मदिरापान करने में हिचकते हैं।

पुरानी पीढ़ी के हिन्दू अण्डा नहीं खाते थे। मुसलमान और ईसाई अण्डे का प्रयोग बिना किसी संकोच के करते थे। धीरे-धीरे हिन्दू परिवारों में भी अण्डे खाने का प्रचलन हुआ। पढ़े-लिखे नवयुवक और नवयुवतियाँ अण्डा खाने लगे हैं, वे यह कार्य अपने बड़ों से छिपाकर करते हैं। इस एकांकी में इसी प्रचलन को आधार बनाया गया है।
 
यह एकांकी जिस परिवार से सम्बन्धित है, उसमें छः व्यक्ति हैं-तीन पुरुष और तीन महिलाएँ। माधव, गोपाल और श्याम-तीन सगे भाई हैं। बड़े भाई माधव और मँझले गोपाल का विवाह हो चुका है। माधव की पत्नी का नाम राधा और गोपाल की पत्नी का नाम बीना है। सबसे छोटा श्याम अविवाहित है। तीनों भाइयों की माता और दोनों बहुओं की सास जमुना विधवा है। हिन्दू परिवारों में बिना पढ़ी-लिखी और पिछली पीढ़ी की स्त्रियाँ अण्डे नहीं खाती हैं। विधवाएँ विशेष रूप से शाकाहार व्रत का पालन करती हैं। श्याम, बीना और गोपाल अण्डों का प्रयोग करते हैं, पर लड़के अपनी माता और अपनी सास से यह बात छिपाते हैं। राधा सबसे बड़े भाई की पत्नी है। उससे भी यह बात छिपाई जाती है। अण्डे खाने की इच्छा और बाजार से घर में लाने का कार्य सबसे छोटा भाई श्याम करता है। इस एकांकी का आरम्भ भी श्याम से होता है। इसमें गोपाल का प्रवेश बाद में और माधव का लगभग अन्त में होता है। इस दृष्टि से पुरुष पात्रों में श्याम सबसे महत्वपूर्ण पात्र है। श्याम के चरित्र में निम्नलिखित विशेषताएँ हैं- 

लापरवाह

श्याम किशोर नहीं युवक है। वह कालेज में पढ़ रहा है। उसे न बरसात में भीगने का डर है और न कमरे के फर्श को भिगो देने में कोई अनुचित बात जान पड़ती है। वह बरसात के मौसम में भीगता हुआ आया है। बरसाती उतारे बिना 
अपनी भाभी बीना के कमरे में पहुँच गया है। बरसाती से टपकता हुआ पानी कमरे का फर्श भिगो रहा है। बरसात में हवा में नमी रहती है। भीगा हुआ फर्श देर में सूखता है। मोहन राकेश ने रंगमंच पर इसका प्रवेश जिस प्रकार दिखाया है, वह भी उसकी लापरवाही का प्रमाण प्रस्तुत करता है- "परदा उठने पर गैलरी वाला दरवाजा खुला दिखाई देता है। बाईं ओर के दरवाजे के आगे परदा लटक रहा है, जिससे पता नहीं चलता है कि दरवाजा खुला है या बन्द । कमरे में कोई नहीं है। श्याम, सीटी बजाता गैलरी में आता है, पतलून और कमीज के ऊपर बरसाती पहने। सिर भीगा है। बरसाती से पानी निचुड़ रहा है।"
 

खुशामद करने में चतुर

अंडे के छिलके एकांकी के आधार पर श्याम का चरित्र चित्रण
देवर-भाभी का रिश्ता संकोच भाव से हीन होता है। देवर-भाभी आपस में हँसी-मजाक तो करते ही हैं, एक-दूसरे के रहस्य भी छिपा लेते हैं। श्याम अपनी भाभी बीना के प्रति संकोच की भावना नहीं रखता और खुशामद करने में भी बहुत चतुर है। श्याम बीना के कमरे में पहुँचा तब बीना और उसके पति गोपाल-दोनों कमरे में नहीं थे। श्याम ने आश्चर्य-सा प्रकट करते हुए अपनी भाभी बीना को पुकारा- “अरे ! कमरा खाली है ! न भैया न भाभी ! (पुकार कर) भाभी!"

श्याम की आवाज और पुकार सुनकर बीना दूसरे कमरे से आयी। उसने श्याम के इस प्रकार पुकारने पर आपत्ति की, जैसे वह कोई पराये घर में आया हो। बीना ने कहा- "तुम्हें भी आकर इस प्रकार आवाज देने की जरूरत पड़ती है। इस तरह पुकार रहे थे, जैसे किसी पराये घर में आये हो।"
 
अपनी भाभी बीना के इस कथन को सुनकर श्याम ने जो कुछ कहा, वह बीना की प्रशंसा ही है। इस कथन से खुशामद का भाव पूरी तरह व्यक्त होता है। श्याम ने बीना से कहा- 
“पराया घर तो लगता ही है, भाभी ! तुमने आते ही वह नक्शा बदला है इस कमरे का कि मेरा अन्दर पैर रखने का हौसला ही नहीं पड़ता। पहले तो इस कमरे की वही हालत रहती थी जो आजकल मेरे कमरे की है। जूते को छोड़कर हर चीज चारपाई पर या मेज पर। अब तो मुझे इस कमरे में सिर्फ वही एक कोना गोपाल भैया का नजर आता है, जहाँ पतलूनें और कोट एक-दूसरे के ऊपर टँगे हैं। बाकी कमरे की सरकार ही बदल गयी है। भैया की टेबल भी क्या याद करती होगी कि किसी का हाथ लगा है। आजकल ऐसे चमकती है, नयी-नयी पालिश करके आयी हो।"
 
अपनी भाभी बीना की खुशामद श्याम एक अन्य स्थल पर भी करता है। श्याम ने बीना से अण्डों का हलुआ बनाने का प्रस्ताव किया था। जब श्याम अण्डे लेने जाने लगा तो बीना ने उससे कहा कि किशमिश भी लेते आना। श्याम किशमिश लाना भूल गया। बनाते समय जब बीना को पता लगा कि किशमिश नहीं आयी है तब बीना ने हलुआ स्पष्ट कर दिया-"मुझसे यह नहीं कहना कि हलुआ अच्छा नहीं बना। बगैर किशमिश के अण्डे का हलुआ इस हलुवे को खाते हुए श्याम ने जो कुछ कहा, वह बीना की खुशामद और प्रशंसा के भाव से ही पूर्ण है- “भाभी ! सच कहता हूँ कि बगैर किशमिश के भी इतना मजेदार बना है कि जितनी तारीफ करूँ, थोड़ी है।"

माता से अधिक भयभीत

श्याम बरसात में भीगता हुआ आया था। बीना ने उससे बैठने को कहा और चाय बनाकर पिलाने की बात भी कही। निश्चित हुआ कि अकेली चाय न पीकर साथ में अण्डे का हलुआ भी खाया जाये। श्याम अण्डा शब्द का प्रयोग करने में संकोच करता था, पर बीना बार-बार अण्डा शब्द बोल रही थी। श्याम की माता और बीना की सास जमुना विशुद्ध शाकाहारी थीं। श्याम ने माताजी का भय दिखाते हुए बीना को सावधान किया- 
"संयम, संयम, संयम ! जरा संयम से काम लो, भाभी! चार दिन जो अण्डे खा लिये हैं, वे छिलके समेत वसूल हो जायेंगे। अम्मा के कान में भनक भी पड़ गयी तो सारे घर का गंगास्नान हो जायेगा। और तुम देख ही रही हो कि बादलों का दिन है। किसी को कुछ हो गया तो " 
बीना की मान्यता थी कि माताजी से छिपाने की क्या बात है? अगर खाते हो तो सबके सामने खाओ। बीना ने 'अण्डा' शब्द का अपने कथन में इस प्रकार दो बार प्रयोग किया- 
“और अण्डे में जीव कहाँ होता है? जैसे दूध वैसे अण्डा ।" 
बीना का यह कथन सुनकर श्याम ने जो कहा, वह स्पष्ट करता है कि श्याम अपनी माता से बहुत डरता है। उसने बीना को पुनः सावधान करते हुए कहा- 
"हरि, हरि, हरि! फिर वही बात! आज इस बरसते पानी में तुम जान निकलवाओगी। तुमसे कोई कुछ नहीं कहेगा । अम्माँ मेरे सिर हो जायेंगी कि सब तेरी ही करनी है। तुम खाओ, बनाओ, जो चाहे करो। मगर इस चीज का नाम मुँह पर मत लाओ। लाऔ पैसे निकालो। मैं तुम्हारे रिस्क पर ले आता हूँ। चोरी पकड़ी जाने पर अगर मेरा नाम लिया कि यह लाया है तो मैं साफ मुकर जाऊँगा और बेड-टी के साथ फ्राइंगपेन का रिश्ता भी अम्मा को अच्छी तरह समझा दूँगा।"
 

समझौतावादी

श्याम का स्वभाव समझौता करने का है। वह अपनी भाभी से झगड़ा नहीं करना चाहता। बीना से श्याम ने कह दिया था कि एक-आध अण्डा मेरे कमरे में भी होगा। यह बात उसने संकेत में कही थी- अण्डा शब्द का उच्चारण नहीं किया था। उसने चोरी खुलने पर अण्डे लाने से मना करने और सारा दोष बीना पर मढ़ने की बात कही थी। इस पर बीना उसे धमकाती रही। श्याम ने अपने पक्ष का समर्थन किया, पर अन्त में वह समझौते पर आ गया। प्रस्तुत है इस सम्बन्ध में दोनों का संवाद- 
बीना-अच्छा ! तो यह बात है। आप अपने कमरे में.. 
श्याम- (बात काटकर) फिर कहता हूँ भाभी कि नाम मत लो। अपने कमरे में न फ्राइंगपेन है, न स्टोव, जो कोई चीज साबित की जा सके। कच्चा लाते हैं और कच्चा खाते हैं। इसीलिए सुबह दूध की तलब कमरे में होती है। रखने खाने का इन्तजाम पक्का है। अगर तुम कहो कि अम्मा के सामने भी यह बात जाहिर कर दें तो हरगिज नहीं। हमें 
अपनी अम्मा से भी प्यार है और अपनी खुराक से भी । 
बीना-बहुत अच्छी बात है न ! अम्मा की रसोई के बरतन भ्रष्ट करते हो, यह अच्छा प्यार है ! देख लेना, कल से तुम्हारा दूध का गिलास अलग न रखवा दिया तो... 

श्याम-अच्छी बात है। तुम हमारा दूध का गिलास अलग रखवा देना और हम यह फ्राइंगपैन यहाँ से उठवा देंगे। वैसे चाहो तो अब भी समझौता हो सकता है। तुम जवान से खाने का काम लो शोर मचाने का नहीं और मैं अभी जाकर आधा दर्जन वह जो तुम कह रही थीं, लाये देता हूँ। इस समझौते की खुशी में पैसे भी अपनी जेब से खर्च किये देता हूँ।
 

बड़ी भाभी राधा से भी भयभीत

श्याम अपनी छोटी भाभी बीना से तो खुला हुआ है। दोनों अण्डे खाते हैं। श्याम की बड़ी भाभी राधा पुराने विचारों की हैं और कम पढ़ी-लिखी हैं। वे अण्डे या कोई ऐसी चीज नहीं खातीं, जिससे उनकी सास जमुना देवी नाराज हों। इस दृष्टि से श्याम अपनी राधा भाभी के सामने अण्डे लाना स्वीकार करने से डर रहा है। भय है कि राधा भाभी माताजी से कह देंगी और घर में महाभारत आरम्भ हो जायेगा। श्याम का अपनी राधा भाभी से संकोच और भय यह संवाद स्पष्ट करता है - 
(श्याम बरसाती की जेबों में हाथ डाले हुए बाहर से आता है।) 
श्याम-लो भाभी, ले आया। अब तुम जानो और तुम्हारा काम । 
(राधा को देखकर जरा असमंजस में पड़ जाता है।) 
अरे, बड़ी भाभी भी यहाँ पर हैं? तब तो 
(गला साफ करता हुआ चुप कर जाता है।) 
बीना-यह अपनी बरसाती तो बाहर उतार दो। अभी तक इससे पानी टपक रहा 
श्याम- यह बात तो ठीक है भाभी, मगर.......। 
बीना-मगर क्या ? 
श्याम - मगर यह कि भाभी वह जो वह जो तुमने कहा था, वह...... । 
बीना- लाये नहीं। 
श्याम - ल... लाया तो जरूर हूँ, मगर 
बीना-मगर जीजी से डर लगता है, यही न? डरने की कोई बात नहीं, जीजी किसी से नहीं कहेंगी। लाओ, निकालो। 
श्याम - ( जरा खँखारकर) और अगर बाद में...... । 
बीना- नहीं, बाद में भी कुछ नहीं होता। लाओ, निकालो।
 

बातें बनाने में कुशल

श्याम बातें बनाने और अपनी माता को सन्तुष्ट करना अच्छी तरह जानता है। राधा अपने कमरे में छिपकर 'चन्द्रकान्ता' पढ़ रही थी। बीना उसकी किताब उठाकर अपने कमरे में ले आयी। राधा अपनी सास को यह विश्वास दिला चुकी थी कि वह गीता और रामायण पढ़ती है। बीना भी अपनी सास पर यह स्पष्ट नहीं करना चाहती थी कि वह किस्से-कहानियों की किताबें पढ़ती है। बीना के कमरे में 'चन्द्रकान्ता' रखी देखकर माता जमुना ने पूछा तो श्याम ने अपनी दोनों भाभियों का बचाव इस प्रकार किया- 
जमुना- ला मुझे दे यह किताब और यहाँ आकर लेट जा । 
(उठकर श्याम के हाथ से किताब ले लेती है।) 
यह कौन सी किताब है? 
श्याम - यह किताब ? यह अम्मा 
मेरे कोर्स की.....मतलब मेरे 
कोर्स की किताब नहीं है। यह शायद भाभी की किताब है....। 
बीना- यह जीजी की गुटका रामायण है, माँजी! जीजी पढ़ती-पढ़ती यहाँ ले आयी थीं। 
श्याम - हाँ, हाँ, हाँ। भाभी की गुटका रामायण ही तो है। मैं कह रहा था कि लगती तो गुटका रामायण जैसी ही है। 
जमुना- मगर रामायण तो बहुत छोटी होती है। यह तो इतनी बड़ी किताब है। 
श्याम- हाँ अम्मा, पहले यह छोटी थी, अब यह मेरा मतलब हैं अम्मा कि इसका पहला एडीशन छोटा था, मगर जो नया एडीशन आया है, वह पहले से बड़ा है। इनके साइज बदलते रहते हैं। यह कोई नई बात नहीं है।
 

सहसा घबरा जाने वाला

श्याम का स्वभाव घबरा जाने का है। वह अपने सबसे बड़े भाई माधव से इतना डरता है कि उनके यह पूछने पर कि तुम श्यामबाबू क्या खाकर मुँह पोंछ रहे थे। उत्तर में श्याम बताता है कि भाभी ने मेरे लिए पुलटिस बनायी थी। श्याम को यह ध्यान नहीं रहा कि पुलटिस खाई नहीं जाती। माँ जमुना के सामने इसे पुलटिस बता दिया गया था, इसलिए माधव के सामने भी अण्डे के हलुवे को पुलटिस बता दिया। जब माधव ने पूछा कि पुलटिस तो बाँधी जाती है, खायी कब से जाने लगी तो घबराहट के मारे श्याम कुछ स्पष्ट नहीं कह सका।
 
इस प्रकार श्याम आधुनिक युवक का प्रतिनिधित्व करता है, जो कॉलेज का पढ़ने वाला है और अण्डा खाने में किसी प्रकार का दोष नहीं समझता। वह अपनी माता, भाभी और सबसे बड़े भाई से इतना डरता है कि ठीक से बात नहीं कर पाता।संक्षेप में, श्याम आज की युवा पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करता है जो बड़ों का सम्मान भी करना चाहती है और अपनी स्वतंत्रता भी बनाए रखना चाहती है। वह कोई क्रांतिकारी नायक नहीं है, बल्कि हमारे और आपके जैसा एक आम लड़का है जो परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठाकर जीना जानता है।

COMMENTS

Leave a Reply

इन्हें भी अवश्य पढ़ें -

Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy बिषय - तालिका