समाज सेवा सच्ची मानव सेवा विषय पर निबंध

SHARE:

समाज सेवा सच्ची मानव सेवा विषय पर निबंध मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।समाज में वह एक-दूसरे के साथ हिल-मिल कर रहता है तथा एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहयोगी

समाज सेवा सच्ची मानव सेवा विषय पर निबंध

नुष्य एक सामाजिक प्राणी है।समाज में वह एक-दूसरे के साथ हिल-मिल कर रहता है तथा एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहयोगी बनता है। मानव-समाज के सुसंचालन के लिए मानव-हृदय में मानव के प्रति सेवा करने का होना अत्यन्त आवश्यक है।
 
समाज सेवा की भावना ही सच्ची मानव सेवा स्वीकारी गई है।वास्तव में मानवता को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है। कवि मैथिलीशरण  गुप्त ने कहा है-यही पशु प्रवृन्ति है कि आप, आप ही चरे। मनुष्य है वही जो कि मनुष्य के लिए मरे। 

प्रकृति की सीख

प्रकृति का भी यही स्वाभाविक नियम है। प्रकृति के सभी अंग किसी न किसी रूप में दूसरों की भलाई में तत्पर रहते है फिर मनुष्य क्यों नहीं ?

वृक्ष कबहुँ नहि फल भखै नदी न संचै नीर । 
परमारथ के कारने साधुन धरा सरीर ।।

यदि मनुष्य अपने स्वार्थ की चिन्ता करता है तो वह पशु की श्रेणी में आ जाता है, स्वार्थी कहलाता है। 

समाज सेवा मानव का परम कर्त्तव्य

समाज सेवा सच्ची मानव सेवा विषय पर निबंध
सामाजिक प्राण होने के नाते, दूसरों के सुख-दुःख की चिन्ता करना, उनका हित सोचना, सहयोग है। मानव का परम कर्त्तव्य समाज सेवा माना गया है। मानव सेवा के पथ पर चलने हेतु हमें स्वीकारना होगा कि हमारा शरीर परोपकार के लिए है। परोपकार के भावों से ही सच्ची मानव सेवा एवं मानवता के आदर्श को माना जा सकता है।

वास्तव में जब प्रकृति के जीव-जन्तु निःस्वार्थ भाव से दूसरों की भलाई में तत्पर रहते हैं तब विवेक प्राणी होते हुए भी मनुष्य यदि मानव जाति की सेवा न कर सका तो उसका जीवन कलंक स्वरूप ही है। मनुष्य होते हुए भी मनुष्य कहलाने का उसे कोई अधिकार नहीं । जिसमें समस्त मानव समुदाय के लिए सहानुभूति व प्रेम का भाव रहता है। वही सच्ची समाज सेवा, मानव सेवा के रूप में अपना सकता है।

यदि किसी व्यक्ति के मन में मनुष्य सेवा की भावना नहीं है, अपने पीड़ित भाई के देखकर जिसके दिल में कसक नहीं उठती । उसकी सहायता के लिए वह तत्पर नहीं होता उसका मन्दिर में जाकर पूजा और अर्चना करना यह सब पाखण्ड है।
 
प्रसिद्ध नीतिकार सादी ने कहा है-"अगर तू एक आदमी की तकलीफ को दूर करता है तो यह कहीं अधिक अच्छा काम है, बजाये तू हज को जाये और मार्ग की हर एक मञ्जिल पर सौ बार नमाज पढ़ता जाए।"

दूसरों के सुख-दुःख की चिन्ता

सामाजिक प्राणी होने के नाते प्रत्येक मनुष्य का वह कर्त्तव्य भी है कि वह दूसरों के सुख-दुःख की चिन्ता करे, क्योंकि उसका सुख-दुःख दूसरों के सुख-दुःख के साथ जुड़ा हुआ है। सच ही कहा गया है- वह शरीर क्या जिससे जग का कोई भी उपकार न हो। वृक्षा जन्म उस नर का जिसके मन में सेवा भाव न हो। " वैसे जीने को तो सभी मनुष्य जीते हैं। सिर्फ अपने लिए जीना न तो मनुष्यता का लक्षण है और न सच्चे अर्थों में जीवित रहने का लक्षण। महानता के आदर्श को लेकर जीने वाले बुद्ध, जैन तीर्थंकर, महात्मा गाँधी, मदर टेरेसा ये सभी इसीलिए महान बने क्योंकि वह केवल अपने लिए नहीं बल्कि मानवता के लिए जिये-मरे।
 

मदर टेरेसा की मानव सेवा

जिस संवेदनहीन संसार में दुख व पीड़ा हाहाकार मचा रही थी, प्रेमपूर्ण मधुर मुस्कान व वात्सत्य पूर्ण स्पर्श से मदर टेरेसा ने समाज के सबसे दलित, शोषित, वंचित वर्ग की सेवा का भार अपने कन्धों पर लेकर ऐसी उच्च कोटि की मानवता का उदाहरण प्रस्तुत किया जहाँ मानव सेवा ही परम धर्म बन गई। उनके शब्दों में 'मानवता की सेवा ही ईश्वर की सच्ची प्रार्थना थी।' समाज सेवा का बीड़ा उठाकर, समाज द्वारा परित्यक्त, रुग्ण व्यक्तियों के कल्याण एवं सेवा भावों उनके आदर्शों, विचारों एवं कर्म से निराश निर्धनों को न केवल आशामयी भविष्य की प्राप्ति हुई बल्कि जीवन जीने की इच्छा खो चुके कुष्ठ रोगियों को ममतामयी छांव मिल सकी।

समाज सेवा के इसी भाव के परिणामतः सच्ची मानव सेवा का आदर्श रूप हमें दिखाई देता है। वास्तव में मदर टेरेसा मानवता की सेवा करके न केवल समाज के प्रति दया, प्रेम, सेवा भाव दिखाया बल्कि हमें मानव सेवा की महानता से अवगत करा दिया। हमें स्वीकारना ही होगा कि सच्ची मानव सेवा ही समाज सेवा है व हमारा परम धर्म भी है।

COMMENTS

Leave a Reply
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy बिषय - तालिका