जोसेफ स्टालिन का संक्षिप्त परिचय | स्टालिन की नीतियों की विशेषताएँ जोसेफ स्टालिन (Joseph Stalin) सोवियत संघ (USSR) के सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद ने
जोसेफ स्टालिन का संक्षिप्त परिचय | स्टालिन की नीतियों की विशेषताएँ
जोसेफ स्टालिन (Joseph Stalin) सोवियत संघ (USSR) के सबसे प्रभावशाली और विवादास्पद नेताओं में से एक थे। उनका पूरा नाम इयोसिफ विसारियोनोविच द्झुगाश्विली था। 21 जनवरी 1924 को लेनिन के मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकार के दो दावेदार हुए ट्राटस्की (Trotskyleon) तथा जोसेफ स्टालिन (Joseph Stalin)। यद्यपि स्टालिन साम्यवादी दल का नेता चुना गया किन्तु वोल्शेविक दल का एक वर्ग ट्राटस्की के नेतृत्व में स्टालिन का विरोध करता रहा । अन्ततः ट्राटस्की को देश द्रोही सिद्ध कर स्टालिन ने उसे देश छोड़ने को मजबूर कर दिया । ट्राटस्की के साथी कठोरता से कुचल दिये गये। इस प्रकार 1929 के बाद स्टालिन रूस का सर्वेसर्वा बन गया । 6 मार्च 1953 में उसकी मृत्यु हुई। स्टालिन मृत्यु पर्यन्त रूस का अधिनायक बना रहा ।
स्टालिन का जन्म 1879 में जर्जिया प्रान्त में हुआ था । इसका पूरा नाम जोसेफ विसेरियोनोविज जुगाश्विली स्टालिन (Joseph vissarioworich Dzhugasvili Stalin) था । स्टालिन के पिता जूता बनाने का व्यवसाय करते थे । वे स्टालिन को धार्मिक शिक्षा प्रदान कर पादरी बनाना चाहते थे, परन्तु स्टालिन कार्लमार्क्स के विचारों से प्रभावित था। वह सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी का सदस्य बन गया। 1912 में वह वोल्शेविक पार्टी के पत्र प्रावदा का प्रधान सम्पादक बनाया गया। क्रान्तिकारी गतिविधियों के कारण जार ने उसे 6 बार दण्डित किया । 1917 की क्रान्ति के समय वह साइबेरिया में निर्वासित था। क्रान्ति के बाद बनी अस्थाई सरकार ने उसे वापस रूस बुलाया। लेनिन की मृत्यु के बाद वह उसका उत्तराधिकारी नियुक्त हुआ।
स्टालिन ने युद्ध-ग्रस्त, कृषि-प्रधान और पिछड़े सोवियत संघ को एक औद्योगिक महाशक्ति में बदल दिया। उनके मुख्य योगदान निम्नलिखित हैं:
पंचवर्षीय योजनाएँ
स्टालिन का विचार था कि आर्थिक विकास करने के लिये योजनाबद्ध नीतियों का होना आवश्यक हैं। अतः रूस में 1925 में योजना आयोग (Planning Commission) की स्थापना की गयी। योजना आयोग द्वारा पंचवर्षीय योजना (Five Year Plans) को प्रारम्भ किया गया जिसे प्यातीलेत्का कहा गया । रूस की प्रथम पंचवर्षीय योजना (1928-1932) के अन्तर्गत लेनिन की नई आर्थिक नीति को समाप्त कर दिया गया । कृषि, व्यापार, उद्योग और विभिन्न व्यवसायों से पूँजीवादी व्यवस्था के प्रभाव को समाप्त करने के उपाय जुटाये गये । इस योजना में नवीन व्यापारिक विधियों का निर्माण, उत्पादक कारखानों की स्थापना, कृषि सम्बन्धी उपकरणों के कारखानों की स्थापना, इस्पात कारखानों की स्थापना व रेलमार्गों का निर्माण किया जाना था । कृषि के विकास के लिये सामूहिक खेती व राजकीय फार्मो (Collective and State Forms) की संख्या में वृद्धि करना व उसका समाजीकरण करना निश्चित किया गया । द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1933-37) में भी बड़े-बड़े उद्योगों के विकास एवं सामूहिक खेती के लक्ष्य को पूरा करने का प्रयास किया गया । तृतीय पंचवर्षीय योजना (1938- 42) के अन्तर्गत रूस को अस्त्र-शस्त्र के निर्माण पर अत्यधिक खर्च करना पड़ा क्योंकि 1939 में हिटलर ने द्वितीय विश्व युद्ध शुरू कर दिया था ।
पंचवर्षीय योजनाओं से रूस में औद्योगिक विकास की गति तेज हो गयी । द्वितीय विश्वयुद्ध अर्थात् 1939 के पूर्व प्रति वर्ष रूस में 18 करोड़ टन से अधिक कोयला, 8 करोड़ टन तेल, डेढ़ करोड़ टन लोहा, पौने दो करोड़ टन इस्पात का उत्पादन होने लगा था । उस समय तक इन योजनाओं के माध्यम से रूस में बड़े-बड़े बाँध, औद्योगिक नगर, विशाल कारखाने, जल विद्युत केन्द्र आदि बनाये जा चुके थे ।
विरोधियों का सफाया
स्टालिन ने अपने विरोधियों को समूल नष्ट करने के लिये 1936 से 1939 तक विशेष अभियान चलाया । इसे रूसी इतिहास में शुद्धीकरण (Great Purge) आन्दोलन का नाम दिया गया । जिन लोगों पर भी सिन्देह होता था उन्हें गोली से उड़ा दिया गया। इस प्रकार कितने ही शक्तिशाली विरोधियों को सहज की मौत की नींद में सुला दिया गया। इस व्यवस्था से साम्यवादी व्यवस्था की गति में तेजी आयी । सरकार योजनाओं की पूर्ति में विलम्ब की गुंजाइस समाप्त हो गयी तथा रूस के सर्वांगीण विकास में आशातीत सफलता मिली ।
नवीन संविधान को लागू करना रूस में 1936 में स्टालिन संविधान (Stalin Constitution) के नाम से एक नये संविधान की रचना कर उसे लागू किया गया। इस संविधान के द्वारा रूस को 11 गणराज्यों का एक संघ राज्य (Federal Government) बनाया गया।अब रूस को समाजवादी सोवियत गणराज्य संघ (Union of Soviet Socialist Republic) कहा जाने लगा ।
इस संविधान के द्वारा सर्वोच्च शक्ति सुप्रीम कौन्सिल (Supreme Council) में निहित थी। सुप्रीम कौन्सिल की एक कार्यकारणी को प्रेसीडियम (Presidium) कहा गया। सुप्रीम कौन्सिल के एक अन्य समिति को लोक प्रबन्ध समिति (Council of Peoples commissor) कहा गया । संघीय संसद में दो सदन थे 1. संघीय परिषद (Council of union) जो जनता के प्रतिनिधियों की संस्था थी तथा 2. राष्ट्रीयतावादियों की परिषद ((Council of Nationalists) जिसमें जातियों एवं राज्यों के प्रतिनिधि होते थे। इन दोनों परिषदों को संयुक्त रूप से सुप्रीम कौन्सिल (Supreme Council) कहते थे। शासन सत्ता संसद के प्रति उत्तरदायी मंत्रिमण्डल में निहित थी। जिस समय संसद का अधिवेशन चल रहा होता तब मंत्री प्रेसीडियम के प्रति उत्तरदायी होते थे ।
न्याय के क्षेत्र में संघीय सर्वोच्च न्यायालय, गणराज्यों के सर्वोच्च न्यायालय, प्रादेशिक न्यायालय, क्षेत्रीय न्यायालय तथा लोक न्यायालय स्थापित किये गये। 18 वर्षीय सभी नागरिकों को मताधिकार दिया गया। नागरिकों को विभिन्न अधिकार देने के साथ उनके कर्तव्य भी निर्धारित कर दिये गये ।
शिक्षा एवं संस्कृति के क्षेत्र में सुधार
रूस में 3 वर्ष से 16 वर्ष की आयु के बच्चों के लिये निःशुल्क अनिवार्य और समान शिक्षा की व्यवस्था की गयी । नगरों के श्रमिक और गाँव के कृषक बच्चों की अनिवार्य शिक्षा के लिये एक राष्ट्रीय रूप रेखा बनायी गयी। उच्चतर एवं प्राविधिक शिक्षा की भी व्यवस्था की गयी। विश्वविद्यालयों एवं प्राविधिक विद्यालयों में शिक्षा सुविधा के अवसर बढ़ाये गये। इस प्रकार की व्यवस्था के द्वारा जार के शासन काल की तुलना मैं सोवियत गणतंत्र कम से कम तीन गुने बच्चों को शिक्षा प्रदान कर रहा था। रूस के विद्यालयों में समाजवादी सिद्धान्तों की शिक्षा पर बल दिया गया । शिक्षा के क्षेत्र में किये गये प्रयासों से द्वितीय विश्व युद्ध के आरम्भ तक रूस में 87 प्रतिशत जनता शिक्षित हो चुकी थी। शिक्षा प्रसार के साथ ही रूस में एक नये प्रकार की साम्यवादी संस्कृति की रचना का प्रयास किया गया जिसमें सबको समानता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर प्राप्त हो सके। मार्क्सवाद धर्म को अफीम की भाँति हानिकारक मानता था । अतः रूस में चर्च के अस्तित्व को लगभग समाप्त कर दिया गया। चर्च की सम्पत्ति छीन ली गयी एवं पादरियों के समस्त अधिकार वापस ले लिये गये ।
स्त्रियों की स्थिति में सुधार
स्टालिन ने स्त्रियों पर लगे जारकालीन अनेक प्रतिबन्धों को हटा लिया । अब रूस में स्त्रियों को उन्नति के सभी अवसर प्राप्त हुए। देश के नव निर्माण में स्त्रियां भी भाग लेने लगीं। डाक्टरी, वकालत, शिक्षा आदि हर क्षेत्रों में स्त्रियों को सम्मान मिलने लगा ।
स्टालिन की विदेश नीति
स्टालिन ने यूरोपीय देशों से व्यापारिक एवं कूटनीतिक सम्बन्ध स्थापित करने का प्रयास किया। रूस का सम्बन्ध जर्मनी, इटली, फ्रान्स एवं जापान से सामाप्त हो गया । 1925 में रूस ने तुर्की के साथ एक अनाक्रमण समझौता कर लिया । 1934 में रूस को राष्ट्रसंघ की सदस्यता प्रदान कर दी गयी। नाजी हिटलर के उदय के भय से 1935 में फ्रान्स ने भी रूस से संधि कर ली । इसी वर्ष रूस ने चेकोस्लोवाकिया से भी संधि की । 24 अगस्त 1939 को स्टालिन ने जर्मनी के साथ अनाक्रमण संधि (Russo German Non Agression Pact) की किन्तु जर्मन के तानाशाह हिटलर ने 1941 में रूस पर आक्रमण कर दिया । रूसी सेना ने स्टालिनग्रांड के युद्ध में जर्मनी को पराजित कर दिया। रूस की लाल सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध में मित्रराष्ट्रों की सहायता से बर्लिन के पतन में उत्साह पूर्वक भाग लिया ।
इस प्रकार स्टालिन का शासन दोहरा चरित्र वाला था। उन्होंने रूस को आधुनिक औद्योगिक और सैन्य शक्ति बनाया, जिसकी नींव बाद के सोवियत युग और यहां तक कि आधुनिक रूस की कुछ क्षमताओं में भी दिखती है। लेकिन यह लोकतंत्र, मानवाधिकार और मानवीय मूल्यों की भारी कीमत पर हुआ। रूसी इतिहास में वे "लौह диктатор" के रूप में याद किए जाते हैं — जिन्होंने देश को शक्तिशाली बनाया, पर अपनी जनता पर अत्याचार भी किया।आधुनिक रूस में पुतिन युग में स्टालिन को अक्सर "मजबूत नेता" के रूप में सकारात्मक रूप से देखा जाता है, जबकि पश्चिम में वे मुख्य रूप से तानाशाह के रूप में।


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