बिस्मार्क की गृह नीति का मूल्यांकन Core Components of Bismarck's Domestic Policy बिस्मार्क की गृह नीति का मूल मंत्र "साम्राज्य की सुरक्षा" था।
बिस्मार्क की गृह नीति का मूल्यांकन | Core Components of Bismarck's Domestic Policy
जर्मनी के एकीकरण के बाद 18 जनवरी 1871 को 22 राज्यों के एक अपूर्ण संघ के रूप में जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गयी । राज्यों में अपना विधान मण्डल, कार्य पालिकायें एवं न्यायपालिकायें थीं परन्तु राष्ट्र की एकता की दृष्टि से केन्द्रीय संघ का निर्माण किया गया । सेना, माप-तौल, बैंकिंग, मुद्रा, विदेशी व्यापार, डाकतार के अधिकार संघ के हाथ में रखे गये । संघ के दो सदनों में प्रथम सदन संघीय सदन (Federal Council) या बुन्देसरात (Bundesrat) था। सदस्य संख्या 58 थी। ये सदस्य राज्यों के शासकों के रूप में थे। दूसरा सदन रीश्तांग (Reichatag) या राष्ट्रीय सदन (Imperial Diet) था जिसमें 397 सदस्य वयस्क मताधिकार से पाँच वर्षों के लिये राज्यों से चुन कर आते थे। बुन्देसरात को व्यापक शक्ति दी गयी जबकि रीश्ताग विधेयकों पर मात्र बहस करने वार्ता व सुझाव देने वाली संस्था थी ।
संघीय कार्यपालिका शक्ति प्रशा के राजा केसर विलियम प्रथम को दी गयी तथा वह संघ का सम्राट घोषित किया गया। संघ का चांसलर या प्रधानमंत्री विस्मार्क को नियुक्त किया गया । सम्राट कैसर विलियम प्रथम की आयु 74 वर्ष की थी, अतः राज्य चलाने की समस्त शक्ति एकीकृत जर्मनी के निर्माता एवं कुटनीतिज्ञ विस्मार्क के हाथ में थी ।
जर्मन साम्राज्य में पाँच राजनीतिक दल थे । कन्जरवेटिव (अनुदार), लिबरल (उदार), नेशनल लिवरल दल और फ्री कन्जरवेटिव दल तथा सेन्टर पार्टी। इनमें से सेण्टर पार्टी रोम के पोप एवं कैथोलिकों की समर्थक एवं विस्मार्क की विरोधी थी।
गृहनीति के उद्देश्य और मूल्यांकन
यद्यपि जर्मनी एक राष्ट्र बन गया था परन्तु अभी भी वहाँ के लोगों में सामूहिकता एवं एकता की भावना उत्पन्न नहीं हुई थी । विस्मार्क ने अपनी गृहनीति के अन्तर्गत विविधताओं को समाप्त कर जर्मन साम्राज्य को सुदृढ़ करने का प्रयास किया । आंतरिक क्षेत्र में कैथोलिक चर्च एवं समाजवादियों के विरोध को कुचलने का प्रयास किया । विस्मार्क ने अपनी गृहनीति के अन्तर्गत निम्नलिखित कार्य किये :
- जर्मनी के विभिन्न राज्यों में सामान्य व्यवस्था लागू करना - विस्मार्क ने समस्त जर्मन राज्यों को एक सूत्र में पिरोने के लिये अनेक प्रयास किये। जर्मन साम्राज्य की भिन्न मुद्राओं के स्थान पर मार्क नामक समान मुद्रा व्यवस्था लागू की। बैंकों को केन्द्रीकृत करने के उद्देश्य से एम्पीरियल बैंक की स्थापना की। समस्त साम्राज्य में समान माप तौल के नियम लागू किये गये । वेवेरिया और वटेम्वर्ग को छोड़ कर समस्त राज्यों में डाकतार की व्यवस्था की । 1876 ई. में जर्मनी में सामान्य कानूनी प्रक्रिया लागू की । लिपलिंग में अपील का सुप्रीमकोर्ट स्थापित किया गया । सामूहिकता स्थापित करने के लिये तथा साम्राज्यों की रेल व्यवस्था को नियंत्रित करने के उद्देश्य से इम्पीरियल रेलवे बोर्ड की स्थापना की । 1874 में विस्मार्क ने प्रशा की सैन्य व्यवस्था को समस्त राज्य में लागू किया लेकिन बवेरिया, वर्टेम्वर्ग और सैक्सनी ने अपनी ही सैन्य व्यवस्था लागू रखी । इस प्रकार विस्मार्क ने आन्तरिक क्षेत्र में जर्मनी में एकता स्थापित करने के उद्देश्य से कानूनी, सामाजिक तथा अन्य क्षेत्रों में विभिन्न प्रयत्न किये ।
- अजर्मन जातियों को जर्मन बनाने का प्रयत्न - जर्मनी के कुछ प्रान्तों में भाषा एवं संस्कृति की दृष्टि से गैर जर्मन जातियाँ भी निवास करती थीं। श्लेसविग में डेन जाति के लोग तथा आल्सेस एवं लारेन में 20 लाख लोग फ्रांसीसी संस्कृति के मानने वाले बसे थे । इन अजर्मन जातियों को जर्मन बनाने के लिये आर्थिक एवं शैक्षणिक सुधार प्रदान करके इनमें राष्ट्रीयता उत्पन्न करने का प्रयास विस्मार्क ने किया। लेकिन जर्मन राष्ट्र के प्रति सहानुभूति की भावना उनके हृदय में उत्पन्न न हो सकी ।
- कैथोलिक चर्च में संघर्ष या कुल्टर कैम्फ (Kultur Kamph) - विस्मार्क के आन्तरिक क्षेत्र में चर्च से संघर्ष को कुल्टर कैम्फ या सभ्यता की रक्षा के लिये युद्ध कहा गया । जर्मनी के एकीकरण के पश्चात सेन्टर पार्टी का प्रयास कर रही थी कि रोमन कैथोलिक चर्च की शक्तियों व गौरव को हानि न पहुंचे। रोमन कैथोलिक चर्च की राज्य से पुरानी शत्रुता थी। आस्ट्रिया एवं फ्रान्स के साथ युद्धों में भी चर्च की सहानुभूति प्रशा के साथ नहीं थी । प्रशा की अधिकांश जनता एवं स्वयं राजा प्रोटेस्टेन्ट था । विस्मार्क राज्य शक्ति की सर्वोच्चता का समर्थक था जबकि कैथोलिक चर्च सम्राट के प्रति भक्ति न रखकर पोप के प्रति भक्ति रखते थे । इस कारण वे विस्मार्क की नीतियों का विरोध करते हुए राज्य भक्ति को चर्च के अधीन रखना चाहते थे ।1870 ई. में वेटिकल कौन्सिल के आदेशानुसार पोप के समस्त कार्य पवित्र एवं मान्य बताये गये। दूसरे शब्दों में धर्म एवं नैतिकता के विषय में पोप के आदेश सर्वमान्य कहे गये । जर्मनी के कुछ सनातनी कैथोलिकों (Old Catholics) ने इस आदेश को मानने से इन्कार कर दिया । पोप ने सनातनी कैथोलिकों को धर्म वहिष्कृत करते हुए प्रशा की सरकार से अपील की कि उनके पादरियों को स्कूलों, विश्वविद्यालयों और पादरी पद से हटा दिया जाय । सेन्टर पार्टी ने भी पोप का समर्थन करते हुए उनकी बातों को मान लेने का दवाब विस्मार्क पर डालना शुरु किया। इस प्रकार के व्यवहार से विस्मार्क क्रुद्ध हो उठा । कैथोलिक चर्च के इस व्यवहार को वह राज्य की शक्तियों को चुनौती देने वाला मान कर पोप के आदेशों को अनुचित ठहराया। उसने चर्च की शक्तियों को कुचलने के लिये अनेक उपाय प्रारम्भ किये ।
- साम्राज्यवादी आन्दोलनकारियों से संघर्ष - जर्मनी में समाजवादी विचारों को विकसित करने का श्रेय कार्ल मार्क्स के विचारों एवं फार्डनेण्ड लोसेले के प्रयत्नों को दिया जा सकता है । 1863 ई. में लोसेले ने मजदूरों को संगठित कर यूनिवर्सल जर्मन वर्क मेंस एसोसियेशन (Universal German workmens association) नामक राजनीतिक दल की स्थापना की । इस प्रकार ऊपरी जर्मनी में लोसेले के समाजवादी विचारों का प्रभाव पड़ा । 1869 ई. में मार्क्स के विचारों से प्रभावित होकर दक्षिण जर्मनी के राज्यों में समाजवादी दलों की स्थापना की गयी । 1871 के चुनाव में दोनों समाजवादी दल ने मिलकर चुनाव लड़ा और रिश्ताग में दो स्थान प्राप्त किया। दोनों दलों ने समझौता कर 1890 में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थापना की। समाजवादी लोग जर्मनी को राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र में न्याय दिलाना चाहते थे। विस्मार्क देश हित में समाजवादी विचार को उचित नहीं मानता था । अतः उसने समाजवादी आन्दोलन के दमन की नीति अपनायी ।
- विस्मार्क की आर्थिक नीति - विस्मार्क ने जर्मनी के उद्योग- व्यापार को बढ़ाने के लिये 1879 ई. में उच्च दर के व्यापार कर और अधिकाधिक संरक्षण (High Tariff and Pronounced Protection) की नीति को अपनाया । इस नीति के अन्तर्गत विस्मार्क ने विदेशी वस्तुओं पर अत्यधिक कर लगा दिया ताकि जर्मनी के उद्योग धन्धों को अधिक से अधिक प्रोत्साहन मिल सके। विदेशी वस्तुओं को अबाध गति से आने जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया। 1880 के पश्चात जर्मन उद्योग धन्धों ने प्रभावशाली उन्नति की।
इस प्रकार बिस्मार्क की गृह नीति का मूल मंत्र "साम्राज्य की सुरक्षा" था। उन्होंने दमन और कल्याण (Carrot and Stick policy) का एक अनूठा संतुलन बनाया, जिससे जर्मनी आंतरिक रूप से एक शक्तिशाली राष्ट्र बन सका।


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