त्रिपक्षीय समझौता 1907 Formation of the Triple Entente 1907 में ब्रिटेन एवं रूस में ऐक्य हुआ तो तीनों देशों रूस, फ्रांस एवं इंग्लैण्ड में त्रिगुट ऐक्य
त्रिपक्षीय समझौता 1907 | Formation of the Triple Entente
बीसवीं शताब्दी के शुरू होते ही पूरा यूरोप दो दलों में विभक्त हो गया । एकदल में थे जर्मनी, आस्ट्रिया एवं इटली । इसे त्रिगुट संधि (Triple Alliance) कहा जाता था। दूसरे दल के देश थे ब्रिटेन, फ्रांस और रूस। इस दल को त्रिगुट ऐक्य (Triple Entente) कहा जाता था । त्रिगुट ऐक्य का गठन त्रिगुट संधि की प्रतिक्रिया स्वरूप हुआ था।
विस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण कर अपनी सम्राज्यवादी नीति का विस्तार किया।उसने फ्रांस को पराजित कर जर्मनी का एकीकरण किया था। अतः वह फ्रांस को किसी देश से संधि करने देना नहीं चाहता था अतः उसने जर्मनी, आस्ट्रिया तथा रूस को मिलाकर त्रिसम्राट संघ बनाया। बाद में रूस इस संधि से हट गया और इटली शामिल हो गया अतः सन् 1882 में जर्मनी, आस्ट्रिया एवं इटली ने त्रिगुट संधि की, पर विस्मार्क का पतन होने पर जर्मनी के शासक विलियम कैशर द्वितीय ने विस्मार्क की नीतियों का परित्याग कर विश्व के सम्बन्ध में नयी नीति अपनाई। विस्मार्क का ब्रिटेन से मैत्रीपूर्ण सम्बन्ध था, पर जब कैशर द्वितीय ने अपनी नौसेना का विस्तार करना तथा पूरब में अपना अभियान की सोचा तो उसके सम्बन्ध ब्रिटेन से खराब हो गये ।
जर्मनी ने फ्रांस को यूरोप में अकेला कर दिया था, अतः वह भी यूरोप में अपना मित्र खोज रहा था । उसने 1895 में रूस से समझौता किया, पर यह समझौता दोनों के लिए लाभप्रद नहीं था । फ्रांस इंग्लैण्ड से अपना सम्बन्ध सुधारना चाहता था, उधर ब्रिटेन जर्मनी से चिढ़ा था अतः फ्रांस एवं ब्रिटेन पास आने लगे । अतः सन् 1904 में फ्रांस एवं इंग्लैण्ड के बीच एकता आयी जिसे फ्रांस - इंग्लैण्ड ऐम्य (Anglo French Convention) कहा जाता है।
ब्रिटेन रूस से भी मित्रता रखना चाहता था । शुरू में उपनिवेश स्थापना एवं पूर्वी समस्या के कारण रूस एवं इंग्लैण्ड के आपसी सम्बन्ध मधुर नहीं थे और रूस त्रिगुट संधि का समर्थक भी था । इंग्लैण्ड एवं रूस के मध्य कटुता का एक कारण यह था कि रूस भी दक्षिणी पूर्वी एशिया में उपनिवेश बसाना चाहता था । इंग्लैण्ड को यह भय सदा बना रहता था कि रूस उसके उपनिवेश भारत पर आक्रमण न कर दे । यह सब चल ही रहा था कि 1904 में जापान ने रूस पर आक्रमण कर उसे बुरी तरह हरा दिया। रूस ने फ्रांस से जिस सहयोग की आशा की थी, उस प्रकार का सहयोग उसे फ्रांस से नहीं मिला । अतः फ्रांस रूस के सम्बन्धों में खटास आ गयी । विलियम कैसर ने फ्रांस और रूस को पूर्णतया अलगकर देने के लिए रूस से संधि करनी चाही पर रूस जानता था कि कैसर कभी भी पलट सकता है, अतः रूस ने कैसर से संधि नहीं की।
ब्रिटेन रूस से संधि के महत्व को प्रमुखता देता था अतः उसके राजनीतिक रूस को यह समझाना चाहते थे कि ब्रिटेन रूस से मात्र सद्भावना के उद्देश्य से उससे मैत्री करना चाहता है । अतः रूस ने भी ब्रिटेन की तरफ सद्भावना का हाथ बढ़ाया। दोनों ने मैत्री के लिए वार्ता आरम्भ की। सन् 1907 में दोनों देशों ने मैत्री को सुदृढ़ करने का निश्चय किया फलतः इंग्लैण्ड - रूस ऐक्य (Anglo- Russian Convention) का गठन हुआ। रूस ने इस ऐक्य के परिणामस्वरूप पश्चिमी एशिया एवं मिश्र में इंग्लैण्ड के उपनिवेश का समर्थन किया !
कुछ दिनों बाद इंग्लैण्ड एवं फ्रांस में भी ऐक्य स्थापित हुआ।जब 1907 में ब्रिटेन एवं रूस में ऐक्य हुआ तो तीनों देशों रूस, फ्रांस एवं इंग्लैण्ड में त्रिगुट ऐक्य (Triple Entente) की स्थापना हुई । इस ऐक्य से तीनों देशों को तो लाभ हुआ पर इससे जर्मनी अकेला पड़ गया । अपने को अकेला पाकर जर्मनी का विलियम कैसर द्वितीय त्रिगुट ऐक्य के देशों को नीचा दिखाने के लिए अपने को सशक्त करने में लग गया।


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