भाग्य रेखा कहानी का सारांश उद्देश्य समीक्षा और प्रश्न उत्तर भीष्म साहनी 1953 में प्रकाशित हुई थी यह प्रगतिशील यथार्थवाद की मिसाल है जहां लेखक अंधविश्व
भाग्य रेखा कहानी का सारांश, उद्देश्य, समीक्षा और प्रश्न उत्तर | भीष्म साहनी
भाग्य रेखा कहानी का सारांश
भाग्य रेखा कहानी की समीक्षा भीष्म साहनी
भाग्य रेखा कहानी का उद्देश्य
- संगठन का महत्व : कलियुग में संगठन में ही शक्ति है। 'संघे शक्तिकलियुगे' मजदूरों के पास, शोषितों के पास इस संगठन के अतिरिक्त अन्य कोई मार्ग भी नहीं बचता। जयशंकर प्रसाद ने कहा था- शक्ति के विद्युतकण जो व्यस्त विकल बिखरे हैं हो विरूपाय समन्वय उनका और समस्त विजयिनी मानवता हो जाए।
- शक्ति के केन्द्रीकरण का कारण - शोषक और शोषितों, पूंजीपति और सर्वहारा वर्ग के बीच अंतर आ गया है। भीष्म साहनी इसी अंतर को पाटने की रुपरेखा मजदूरों के संगठन में देखते हैं। इस संगठन पर पूंजीपति के रवैये पर व्यंग्य करता हुआ लेखक कहता है—'जुलूस आ रहा था। नारे गूंज रहे थे।' हवा में तनाव बढ़ रहा था। फुटपाथ पर खड़े लोग भी नारे लगाने लगे। पुलिस की एक और लारी आ लगी, और लाठीधारी सिपाही कूद-कूद कर उतरे । “आज लाठी चलेगी” यजमान ने कहा।
- कर्म में विश्वास : कहानी का सूत्रधार यजमान एक से अधिक स्थलों पर कर्मवादिता में विश्वास को दिखाता है। कहानीकार का सूत्रधार मशीन में अपनी उंगलियों के कट जाने पर खेद प्रकट करता है। कर्म के उत्साहित है, वह अपने भाई के दिए हुए टुकड़े नहीं खाना चाहता। वह ज्योतिषी के गाल पर थप्पड़ भी मारता है। मानो यह थप्पड़ भाग्यवादी मनुष्यों के गाल पर हो। अंत में अपनी हथेली ज्योतिषी के सामने रखकर प्रश्न करता है—तू कहता है भाग्य रेखा कमजोर है । यजमान बहुत स्पष्ट किन्तु मौन शब्दों में कहता है—पुरुषार्थी के भाग्य रेखा कभी कमज़ोर नहीं होती।
- भाग्य गौण तत्व है : यजमान कर्म के प्रति अपने दृढ़ विश्वास को तो रखता है, किन्तु वह भाग्य को गौण रूप में हमारे समक्ष नहीं रखता है। भाग्य, पुरुषार्थ के पीछे चलने वाली इकाई के रुप में हमारे सामने है। भारतीय परंपरा में ज्योतिष विज्ञान के इस नए रुप को दिखाने के लिए मानो ज्योतिषी को विडम्बनात्मक और व्यंग्यात्मक रुप में दिखाया है।
- पूंजी का विकेन्द्रीकरण : मार्क्सवाद मजदूरों की क्रान्ति में विश्वास रखता है और मानता कि जब सत्ता मजदूरों के हाथ में होगी तो शक्ति का विकेन्द्रीकरण होगा और समाज का विकास तीव्र गति से होगा। मजदूरों की शक्ति, संगठन, एकता अधिकारों के सतत्व की मांग को लेकर भी है।
भाग्य रेखा कहानी की भाषा शैली
भाग्य रेखा कहानी का प्रश्न उत्तर
सभी मजदूर अपनी एकता और संगठन को दिखाने के लिए बगीचे में एकत्र होते हैं। भीमाकार जुलूस आगेबढ़ता है। आशंका है कि पुलिस की कार्यवाई भी होगी। पर लोग-बाग डरते नहीं हैं। जुलूस नारे लगाता हुआ आगे बढ़ता है। जुलूस नारे लगाता है। कहानीकार ने कहानी में तनाव की नींव रखकर कहानी की संवेदनीयता को बढ़ा दिया। यह संघर्ष का प्रकट रूप है, जो अन्याय का प्रतिकार करने के लिए संगठित होता है। 'मजदूर दिवस' मजदूरों की सांकेतिक एकता का प्रतीक है। इस दिन मजदूरों पर गोली चली थी। जुलूस अजमेरी गेट, दिल्ली दरवाजा होता हुआ लाल किला जाना है। जुलूस आगे बढ़ता है। कहानी में तनाव की सृष्टि होने लगती है। जुलूस ही संघर्ष तथ्व को मनुष्य की चेतना का अंग बनाता है और जुलूस ही शक्ति, संगठन, एकता और कर्मवादिता को मनुष्य के लिए उपयोगी और आवश्यक बनाता है। लड़ाई पूंजीपति और सर्वहारा वर्ग के बीच में है। संघर्ष अधिकार के होने और खोने का है। शहरी जीवन की विशेषताएँ ही संघर्ष का निर्माण करती हैं और मनुष्य को दो हाथों की बंद मुट्ठी पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है।


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