नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 2026 पर भाषण Subhash Chandra Bose Jayanti Speech नेताजी! आपका दिया हुआ खून आज भी हमारी रगों में दौड़ रहा है। आपका दिया हु
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती 2026 पर भाषण
आदरणीय अतिथिगण, सम्माननीय शिक्षकगण, प्रिय साथियों और मेरे प्यारे देशवासियों,
आज, 23 जनवरी 2026 को, हम सब एक ऐसे महान व्यक्तित्व की जयंती मना रहे हैं जिसके नाम से हर भारतीय के सीने में गर्व की लहर दौड़ जाती है। आज पराक्रम दिवस है। आज नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती है। एक ऐसा नाम जो न केवल स्वतंत्रता संग्राम की सबसे तेज़ धड़कन था, बल्कि आज भी हर उस युवा की रगों में जोश भरता है जो सपने देखता है, जो संघर्ष करता है, और जो हार मानने से इनकार करता है।नेताजी का जन्म उस समय हुआ था जब भारत गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ था। एक सामान्य-सा दिखने वाला युवा, जिसने पढ़ाई में अव्वल आने के बावजूद आईसीएस की नौकरी ठुकरा दी, क्योंकि वह नौकरी नहीं, आज़ादी चाहता था। वह समझ गया था कि सच्ची आज़ादी किसी की दया से नहीं, बल्कि अपने खून-पसीने से मिलती है। उन्होंने कहा था – "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।" यह कोई साधारण वाक्य नहीं था, यह एक वचन था, एक चुनौती थी, एक आग थी जिसने लाखों भारतीयों के अंदर क्रांति की चिंगारी जला दी।
जब अधिकांश नेता सत्याग्रह और अहिंसा के रास्ते पर चल रहे थे, तब नेताजी ने कहा कि गुलामी से छुटकारा पाने के लिए तलवार भी जरूरी है। उन्होंने विदेश की धरती पर आज़ाद हिंद फौज खड़ी की। जापान, जर्मनी, सिंगापुर, बर्मा – हर जगह उन्होंने भारतीयों को एकजुट किया। उन्होंने महिलाओं को भी सेना में शामिल किया। रानी झाँसी रेजिमेंट की कैप्टन लक्ष्मी सहगल जैसी वीरांगनाओं ने दिखा दिया कि आज़ादी की लड़ाई में पुरुष और महिला में कोई भेद नहीं होता।नेताजी ने सिर्फ़ अंग्रेजों से नहीं लड़ा, उन्होंने उस मानसिकता से भी संघर्ष किया जिसमें हम स्वयं को कमज़ोर समझते थे। उन्होंने हमें सिखाया कि हम हारे हुए नहीं हैं, हम बस जागे नहीं थे। "जय हिंद" और "चलो दिल्ली" जैसे नारे उनके मुँह से निकले और पूरे देश में गूँज उठे। आज भी जब हम "जय हिंद" कहते हैं, तो अनजाने में नेताजी का आशीर्वाद हमारे साथ चलता है।
आज 2026 में जब हम एक उभरती हुई महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं, तब भी नेताजी की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। आज हमें भ्रष्टाचार से, बेरोज़गारी से, सामाजिक असमानता से, और सबसे बड़ी बात – अपनी ही नकारात्मक सोच से लड़ना है। नेताजी हमें याद दिलाते हैं कि पराक्रम का मतलब सिर्फ़ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में भी साहस दिखाना है। पढ़ाई में मेहनत करना, समाज के लिए कुछ करना, देश के प्रति ईमानदार रहना – यही आज का पराक्रम है।नेताजी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने कहा था – "मैं भारत की आज़ादी के लिए जीऊँगा और मरूँगा।" आज हमें भी यह संकल्प लेना होगा कि हम अपने देश के लिए कुछ करेंगे। चाहे छोटा सा योगदान हो, लेकिन ईमानदारी से, निष्ठा से, और पूरे जोश से। क्योंकि नेताजी ने हमें सिखाया है कि एक व्यक्ति भी अगर दृढ़ संकल्प ले ले, तो वह इतिहास बदल सकता है।
आज हम सब मिलकर यह प्रण लें कि हम उस भारत का निर्माण करेंगे जिसका सपना नेताजी ने देखा था – एक ऐसा भारत जो आत्मनिर्भर हो, समृद्ध हो, एकजुट हो और सबसे ऊपर – गर्व से अपना सिर ऊँचा करके खड़ा हो सके।
अंत में, मैं बस यही कहना चाहूँगा –
नेताजी! आपका दिया हुआ खून आज भी हमारी रगों में दौड़ रहा है।
आपका दिया हुआ जोश आज भी हमारे सीने में जल रहा है।
हम वादा करते हैं कि आपका सपना पूरा होगा।
हम वादा करते हैं कि भारत माता फिर कभी गुलाम नहीं होगी।
जय हिंद! जय हिंद! नेताजी अमर रहे!
भारत माता की जय!
धन्यवाद।


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