गुटका टेस्ट मैच ज्ञान चतुर्वेदी

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गुटका टेस्ट मैच - ज्ञान चतुर्वेदी


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गुटका टेस्ट मैच पाठ का सारांश

प्रस्तुत पाठ या हास्य व्यंग्य  गुटका टेस्ट मैच , लेखक ज्ञान चतुर्वेदी जी के द्वारा लिखित है । इस पाठ में स्कूली बच्चों के द्वारा खेले जाने वाले मिनी क्रिकेट मैचों का वर्णन किया गया है । वास्तव में देखा जाए तो ऐसे मैच लगभग घंटे भर के समय में पूरे हो जाते हैं, इसलिए इन्हें गुटका यानी मिनी क्रिकेट मैच नाम पड़ा । लेखक के घर के सामने एक छोटा-सा ऊबड़-खाबड़ मैदाननुमा भूमि का टुकड़ा है, जहाँ हर रोज़ एक सनसनीखेज टेस्ट मैच खेला जाता है । दरअसल, स्कूल के बच्चों की बस आठ बजे आती है । लेकिन बच्चे सात बजे से ही आकर इस स्थानीय ओवल मैदान में इकट्ठे हो जाते हैं । बस्तों को एक के ऊपर एक रखकर लंबा-चौड़ा स्टम्प बना दिया जाता है । फिर भी किसी को क्लीन बोल्ड से आउट करना मुश्किल है । क्योंकि बॉल बस्ते से टकराई या नहीं, इस बात पर बच्चे कभी एकमत नहीं होते । लेकिन कैच आउट स्वीकारना पड़ता है । उसपर भी बॉल बहुत तेज़ थी या हमारी बारी आने दो तब हम भी बताएंगे, ऐसी अनेक बातें उनकी बहस का हिस्सा हुआ करती है । 

सबसे पहले बच्चे दो टीम में बंट जाया करते । जो बच्चे थोड़े बड़े व दादा किस्म के रहते उन्हें टीम का कप्तान बना दिया जाता । चयन करने वाले पहले अपने यार-दोस्तों को टीम में शामिल करते । फिर पड़ोसियों का नंबर आता, इसके बाद एक-दो अच्छे खेलने वालों को शामिल करते । टीम में उस बच्चे का स्थान पक्का होता, जो बल्ला तथा गेंद अपने साथ लाता । कभी-कभार तो वह ज़िद करके टीम का कप्तान भी बन जाता है । खेल के दौरान रोचकता तब आती है, जब बाहर बैठे बच्चे बार-बार चिल्लाते हैं कि चलो-चलो बस आ गई । उनमें से एकाध को अंपायर बना दिया जाता है, जो गुस्से में किसी को भी आउट दे देता है । अगर बैट वाले लड़के को आउट दे दिया जाता है तो वह अपना बल्ला वापस ले लेने की धमकी दे डालता है, तब अंपायर अपना ही निर्णय रद्द कर देता है । 

गुटका टेस्ट मैच ज्ञान चतुर्वेदी
खेल के मैदान के पश्चिमी छोर पर गंदगी का तालाब निर्मित हो गया है । अगर इस बाउंड्री पर चौका पड़ जाए तो गेंद इस कीचड़ से कौन निकाले ? इस प्रश्न पर टेस्ट मैच की असमय समाप्ति का खतरा लगा रहता है । दर्शक के रूप में बचे बच्चों को फुसलाया जाता है कि यदि आज तुम गंदगी में डूबी गेंद निकालकर घास पर साफ़ करके दे दो, तो कल तुम्हें भी टीम में ले लेंगे और कप्तान भी बना देंगे । बच्चे निकाल भी देते हैं । आदमी कैरियर बनाने के लिए क्या नहीं करता ? मैदान के उत्तरी छोर पर कुछ शेडनुमा गैराज बने है, जिनकी छत पर बॉल चली गई तो बल्लेबाज का खैर नहीं होता । सीढ़ियों के न होने की वजह से जो बच्चा छत पर चढ़कर बॉल उतार लाता था, उसे अतिरिक्त चार रन मिलते हैं और जिस बल्लेबाज ने मारकर फेंकी, वह आउट माना जाता है । 

मैदान के दक्षिणी छोर पर लेखक का मकान है, जहाँ वह कमेंटटेटर की मुद्रा में हर रोज बैठता है । इसी तरह मैदान के पूर्वी छोर पर एक बाग़ है, जिसमें गेंद चली जाने पर प्रायः खो जाती है और जिस खिलाड़ी की गलती से गेंद खोती है, उसकी टीम पराजित मानी जाती है । इसी मैदान में यहाँ-वहाँ कुत्ते, बकरियाँ, गाएँ और भैंसें बैठी-लेटी या टहलती रहती हैं । यब किसी बच्चे से कैच गिर जाता या गेंद हाथ से निकल जाती, तो वह इन चौपायों पर दोष डाल देता है । इस मैदान पर बाधाओं के अलावा बहुत से गड्ढे भी हैं । ऐसी विपरीत परिस्थितियों में बच्चे रोज़ सुबह सात से आठ बजे तक टेस्ट मैच खेलते हैं और बहुत बढ़िया खेलते हैं । सब जानते हैं, भारतीय क्रिकेट विपरीत परिस्थितियों में ही चमकती है ।  

रोज़ खिलाड़ियों का चयन होने और दो टीमें बनने में ही सवा सात बज जाते हैं । स्कूल-बस आने का समय आठ बजे का होता है । पैंतालिस मिनट का समय शेष बचते हैं और दोनों टीमों को बैटिंग भी करनी होती है । इतने कम समय में ही छक्के से लेकर रन-आउट तक सब कुछ संपन्न हो जाता है । अपने आपको कपिलदेव माननेवाला बॉलर, लंबे रन-अप की गुंजाइश छोटे-से मैदान में न होने के कारण दूर सड़क से दौड़कर आता है और बॉल अनाप-सनाप फेंक देता है । गेंद पिच के गड्ढों से टकराकर, आप ही आप लेग्ब्रेअक, बंपर, गुगली, आउटस्विंग इत्यादि कुछ भी हो सकती है, परन्तु क्रेडिट बॉलर को पूरा मिलता है । 

कोई बोलता हुआ नज़र आता है – “क्या बॉल काटी यार, मान गए ।”
तो दूसरा बोलता है – “कितने विकेट लिए तूने ?” 
जवाब मिलता है – “मैंने तो आज सात विकेट लिए ।” 

बच्चे पैंतालिस मिनट में सात विकेट निकाल रहे हैं और माँ-बाप हैं कि चयनकर्ताओं-सा बेरुखी का दृष्टिकोण अपनाए हुए हैं । “कहाँ से फाड़ लाए यह पैंट ? कल से खेले तो ख़बरदार ! टाँगें तोड़ दूँगा !”  परन्तु, बच्चे कभी निरुत्साहित नहीं होते । वे सारा रिस्क लेकर भी लगे रहते हैं । 

खेल के दौरान बल्लेबाजों के तेवर तो देखते ही बनते हैं । उनमें हर बच्चा ख़ुद को गावस्कर या कपिल समझे बैठा है । गेंद चाहे जैसी भी हो हर परिस्थिति में बल्ले को घुमाना ही है । चार कदम पर ही तो चौके की सीमा रेखा है । सारे बच्चे चौका लगा लेते हैं । किरमिच की गेंद उछलती बहुत है, सो छक्के भी सभी लगा डालते हैं । मिनटों में स्कोर पचास-सौ पहुँच जाता है । एक बच्चा स्कोर याद रखता जाता है । मौखिक स्कोर बोर्ड पर किसी को विश्वास नहीं, इसलिए हर बच्चा अपना स्कोर ख़ुद भी याद करता जाता है । इसी चक्कर में बाद में सभी झगड़ते नज़र आते हैं कि असली स्कोर क्या है । दोनों टीमें जीत का दावा करती हैं । आपस में झगड़ने लगते हैं । फिर सारे बच्चे जो लड़ रहे थे, हँसते-खेलते, हो-हल्ला करते, अपने-अपने बस्ते विकेट से निकालकर बस की तरफ़ बेतहाशा भागते हैं । इस प्रकार, उस दिन का टेस्ट मैच बिना किसी मलाल के समाप्त होता है । एकदम क्रिकेट की उस भावना के साथ, जिसके लिए क्रिकेट जानी जाती है । इसके पश्चात् बच्चे अपने बस में बैठकर स्कूल की तरफ़ निकल पड़ते हैं... ।। 



गुटका टेस्ट मैच पाठ के प्रश्न उत्तर 


प्रश्न-1- बच्चे विकेट कैसे बनाते थे ? 
उत्तर- बच्चे सात-आठ बस्ते, एक के ऊपर एक रखकर विकेट बना लिया करते थे । 

प्रश्न-2- अच्छा खेलने वाले बच्चों को बाहर क्यों रह जाना पड़ता था ? 
उत्तर- प्रस्तुत पाठ के अनुसार, जो बच्चे उम्र में कुछ बड़े और मजबूत काठी के थे, उन्हें टीम का कप्तान बना दिया जाता था । वे पहले अपने दोस्तों, फिर पड़ोसियों और कुछ अच्छा खेलने वालों को टीम में शामिल करते थे । लेकिन जो बच्चा बैट-बॉल लेकर आता था, वह अच्छा न खेलने के बावजूद भी टीम का हिस्सा बन जाता था । क्योंकि अगले दिन वह बैट-बॉल न लेकर आने की धमकी दे डालता था । इस प्रकार अच्छा खेलने वाले बच्चों को बाहर रह जाना पड़ता था । 

प्रश्न-3- मैदान पर बकरियाँ होने का क्या परिणाम होता था ? 
उत्तर- प्रस्तुत पाठ के अनुसार, मैदान पर बकरियाँ होने का कारण रन के लिए दौड़ते वक़्त बच्चे कभी-कभी बकरियों से टकराते जाते थे ।  

प्रश्न-4- “आदमी करियर बनाने के लिए क्या नहीं करता ?” - ऐसा क्यों कहा गया है ? 
उत्तर- खेल के मैदान के पश्चिमी छोर पर गंदगी का तालाब निर्मित हो गया है । अगर इस बाउंड्री पर चौका पड़ जाए तो गेंद इस कीचड़ से कौन निकाले ? इस प्रश्न पर टेस्ट मैच की असमय समाप्ति का खतरा लगा रहता है । दर्शक के रूप में बचे बच्चों को फुसलाया जाता है कि यदि आज तुम गंदगी में डूबी गेंद निकालकर घास पर साफ़ करके दे दो, तो कल तुम्हें भी टीम में ले लेंगे और कप्तान भी बना देंगे । बच्चे निकाल भी देते हैं । व्यक्ति अवसर की तलाश में हमेशा रहता है । इसलिए लेखक ने कहा है कि - आदमी कैरियर बनाने के लिए क्या नहीं करता ? 

प्रश्न-5- “एकदम क्रिकेट की उस भावना के साथ, जिसके लिए क्रिकेट जानी जाती है ।” – क्रिकेट किस भावना के लिए जानी जाती है ? 
उत्तर- क्रिकेट के खेल में दो टीमें आपस में भिड़ती हैं, ख़ूब नोंक-झोंक करती हैं, खिलाड़ियों के मध्य ख़ूब ज़ोर-शोर की प्रतिस्पर्धा होती है । लेकिन ये सारी चीज़ें सिर्फ खेल के मैदान तक ही सीमित होती है । मैदान के बाहर सभी आपस में फिर से घुल-मिल जाते हैं । दरअसल, क्रिकेट इसी सौहार्दपूर्ण भावना के लिए जानी जाती है । 

प्रश्न-6- बच्चे अपनी टीम का चयन कैसे करते हैं ? 
उत्तर- प्रस्तुत पाठ के अनुसार, जो बच्चे उम्र में कुछ बड़े और मजबूत काठी के होते हैं, उन्हें टीम का कप्तान बना दिया जाता है । वे पहले अपने दोस्तों, फिर पड़ोसियों और कुछ अच्छा खेलने वालों को टीम में शामिल करते हैं । 

प्रश्न-7- क्रिकेट के विकास में आम आदमी के सहयोग को लेखक ने कैसे व्यक्त किया है ? 
उत्तर- क्रिकेट के विकास में आम आदमी के सहयोग को लेखक ने व्यक्त करते हुए कहा है कि वह सिर तथा खिड़कियाँ तुड़वाता है । क्रिकेट खिलाड़ी की सुझाई गई क्रीम से दाढ़ी बनाता है । उनके बताए सूटिंग का सूट पहनकर शादी करवा लेता है । खिलाड़ी द्वारा प्रशंसित मोटर साइकिल पर दनदनाता टाँग तुड़वाता है । 

प्रश्न-8- इस लेख का शीर्षक गुटका टेस्ट मैच क्यों रखा गया होगा ? तर्क सहित उत्तर दीजिए । 
उत्तर- वास्तव में देखा जाए तो कम अवधि वाले मैच या एक घंटे से भी कम समय में पूरे होने मैच को लेखक के द्वारा गुटका या मिनी क्रिकेट मैच नाम दिया गया है । 


व्याकरण-बोध 
प्रश्न-9- उचित निपात का प्रयोग करते हुए चार वाक्य बनाइए - 
उत्तर- निम्नलिखित उत्तर है - 
मोहन का व्यवहार ही नहीं सोहन का भी व्यवहार अच्छा है । 
उसने मुझे देखा और बुलाया भी । 
वहाँ कोई भी हो सकता है । 
ओह ! वह भी घायल हो गया ! 

प्रश्न-10- सार्वनामिक विशेषणयुक्त वाक्य को पहचानकर लिखिए - 
उत्तर- निम्नलिखित उत्तर है - 
वह लड़की मेहनती है । 
इन जवानों ने शत्रु को खदेड़ दिया । 
इस मैदान पर गड्ढे भी हैं । 
ये बच्चे शरारती हैं । 
हमारी टीम में सभी गुण हैं । 



गुटका टेस्ट मैच पाठ के शब्दार्थ

हैसियत – स्तर 
पराजित – हारा हुआ 
ओवल – इंग्लैंड में स्थित क्रिकेट का एक मैदान 
चौपाये – चार पैरों वाले 
ढीठ – हठी 
कर्णधार – सहारा देने वाला 
बेरुखी – उपेक्षा 
पूर्ववत – पहले जैसा 
निरुत्साहित – जिसमें उत्साह न हो 
बेतहाशा – बहुत ज्यादा 
मलाल – दुःख, विषाद।     

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