सतो, रजो, तमो और व्यक्तित्व की जागरूकता

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गुण ये क्या है ? भारतीय या वैदिक ग्रंथों में एक व्यक्ति के तीन गुण बताये गये है जो उसके व्यक्तित्व को बनाते या दिखाते हैं ।

सतो, रजो, तमो और व्यक्तित्व की जागरूकता


गुण ये क्या है ?  भारतीय या वैदिक ग्रंथों में एक व्यक्ति के तीन गुण बताये गये है जो उसके व्यक्तित्व को बनाते या दिखाते हैं । सतोगुण, रजोगुण, और तमोगुण आप में से कुछ या बहुत लोग इसके बारे में जानते होंगे या सुना होगा। मैं आपको वही चीजें नहीं बताने वाला, मेरी बातें थोड़ी अलग होंगी ये मेरा समझा हुआ या अनुभव किया हुआ है। सबसे पहली बात और सबसे जरूरी बात, अपने दिमाग से ये ख्याल निकाल दीजिए कि इन गुणों में से सतोगुण अच्छा है और रजो तो ठीक नहीं और तमो तो पूरा बुरा है। ऐसा बिल्कुल नहीं है ये बातें जैसे कि, हमें तमो से दूर रहना चाहिए या केवल सात्विक व्यक्तित्व रखना चाहिए। ये सारी बातें बस डरपोक या मूर्ख लोगों की है जो अपनी ही ऊर्जा या व्यक्तित्व की गहराई से भय खाते है। जिन्होंने बस किताबें पढ़ी और लोगों की कही मान ली और कभी खुद कुछ जानने की कोशिश नहीं की और न ही कोई प्रश्न पूछा , ये वही मूर्ख या दुखी लोग है। मैं काफी समय से इन गुणों को व्यक्तित्व और मनोविज्ञान के इड (id), ईगो (ego) और सुपरईगो (superego) से जोड़ना चाहता था, और कुछ लिखना चाहता था , पर मुझे किताबी बातें फिर से लिखने या जो मेरा अनुभव नहीं है उस पर बात करने का कोई शौक नहीं। दिक्कत ये थी कि मुझे इड , ईगो और सुपरईगो का अनुभव करा दिया गया था, तो वो मैं आपको बता सकता हूँ या मुझे लगता है कि मैं इनको जानता हूँ। पर मुझे सतो, रजो, और तमो का कोई भी अनुभव नहीं था , मैने इन तीन गुणों को अपने दो सेमेस्टर में पढ़ा है , पर अनुभव नहीं किया। किसी चीज का अनुभव करना और किसी चीज के बारे में जानना, ये दो अलग अलग चीजें है। आप कुछ भी करे परंतु अगर आप जागरूक नहीं है तो फिर आपको उसका कोई भी अनुभव(experience) नहीं होगा , आपके पास बस यादें(memory) होंगी। तो मैं आपसे मेरे अनुभव के बारे में कहूँगा , तो मुझे गुणों पर कुछ लिखना था पर मेरे पास कोई निजी अनुभव नहीं था अब क्या किया जाये। मेरा मानना है कि हर प्रश्न का उत्तर आपके ही पास है ,बस जरूरत है तो खुद को और जागरूक करने की। 

मैं हर बार जागरूकता की बात इस लिए कहता हूँ, क्योंकि यही मेरे प्रोफेसर से मैंने सीखा है , डॉ. चौधरी हमेशा मुझे जागरूक होने के बारे में कहते है , उन्होंने मेरे साथ के सभी को एक किताब पढ़ने को कहा था, वो बस एक सुझाव था , पर मैंने अपना पहला सेमेस्टर खत्म होने के बाद उसे खरीद लिया , वो थी “सद्गुरु” की लिखी किताब “मृत्यु”। तो मेरे इस जागरूकता(awareness) के पीछे पागल होने का कारण मेरे प्रोफेसर और सद्गुरु ये दो लोग है, दो साल लगे मुझे थोड़ा जागरूक होने में। तो हम अपने विषय पर वापस आते है, सतो, रजो, और तमो गुण ये मूल रूप में ऊर्जाएं है और कुछ नहीं। इनमें कुछ भी अच्छा या बुरा जैसा बिल्कुल नहीं है, ये बस ऊर्जा की तीव्रता और उसके संतुलन के बारे में है। तो सतोगुण ये तब होता है जब आप रुक सके, जी हाँ ये रजो और तमो के संतुलन के बारे में है, रजोगुण ये तब होता है जब आप रुक ही न सके बस चलते रहे, और तमोगुण ये तब होता है जब आप चल ही न सके या बदल न सके या जब आप अटक जाये। अब आप इसे ऐसे समझिये आपका ये शरीर एक मशीन है और जब आप इसमें तीव्र ऊर्जा डालते है या ऊर्जा के संपर्क में लाते है तो वो चलने लगती है रुकती नहीं है, यही रजोगुण या रजो ऊर्जा है। अब आप इस मशीन में बहुत तीव्र ऊर्जा देते है , अचानक से बहुत अधिक ऊर्जा आने से ये मशीन बंद हो जायेगी, इसका सिस्टम इसे संभाल नहीं पायेगा और आप इससे डरने भी लगेंगे , यही तमोगुण या तमो ऊर्जा है। अब आप चाहते है कि आपकी मशीन ऐसे चले कि वो बिना किसी मुसीबत के रुक भी जाये और पूरी तरह से बंद भी न हो , तो आप बिल्कुल संतुलित ऊर्जा को उसमें डालते है , यही सतोगुण या सतो ऊर्जा है। जो जानते थे कि तमो और रजो सबके संभालने के लिए नहीं है और सबकी क्षमता इनका उपयोग करने की नहीं है । उन गुरुओं ने सतो ऊर्जा या सतोगुण का उपयोग करने को कहा, या सबसे पहले सतोगुण को जागरूक करने या उसे समझने को कहा उसके बाद ही रजो और तमो गुण तक जाने के बारे में। पर जो लोग इनको कभी समझ नहीं पाये या इनको संभाल नहीं पाये उन्होंने सबको डराना शुरू कर दिया  ये उन्होंने जानबूझ कर नहीं किया । 

आप इतनी तीव्र ऊर्जा जो संभाल नहीं सके और फिर आप डर गये, और आपने अपना अनुभव दूसरों को बताया , पर कुछ लोगों ने उसे समझा ही नहीं और बस। उनके लिए तमो और रजो बुरा है, खतरनाक है और अच्छा नहीं है, ये वही चीज है जिसे हम हमेशा से करते आ रहे है , जिसे समझ नहीं सकते उससे डरते है और फिर उसे ही बुरा मानते है। मनोविज्ञान में इसे “projection” कहते है ये एक रक्षात्मक प्रतिक्रिया(defence mechanism) है ।आप किसी से डरते है या आप उसे समझते नहीं, पर आप मानते है कि वो आपको डराता है या वो आपको समझता नहीं । आप तो अच्छे है पर वो बुरे , इसी तरह डरपोक और मूर्ख लोगों ने तमो और रजो गुणों को बुरा बोला है, जबकि सच तो ये है कि आप इनको समझने में या इस्तेमाल करने में असमर्थ है। ये तीनों गुण आपका ही हिस्सा है और आपको पूरा करते है , कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं जो पूरा सतो हो, या सात्विक हो। आप जिसे ईश्वर कहते है वो भी पूरे सतो नहीं। राम का सागर के सामने तीन दिन बाद धनुष उठाना रजोगुण है , कृष्ण का अश्वत्थामा को श्राप देना भी रजोगुण है, काली का बेकाबू होकर सब कुछ खत्म करने लगना तमो और रजो गुण है, शिव का त्रिनेत्र खोल कर कामदेव को भस्म करना भी तमो और रजो गुण है . परंतु ऐसा नहीं कि इनमें सतोगुण नहीं है , राम का सागर को क्षमा मांगने पर उसे माफ कर देना, कृष्ण का अश्वत्थामा को अमरता का श्राप देना ताकि वो अपनी गलती समझ सके, काली का शिव पर पांव रखने पर रुक जाना , और शिव का कामदेव को भस्म करने के बाद शांत हो जाना , ये सब उनका सतो गुण ही है, समय आने पर रुक जाना ही सतोगुण है। 

सतो, रजो, तमो और व्यक्तित्व की जागरूकता
आपको पूरी जागरूकता के साथ अपने गुणों का अनुभव होना चाहिए, दूसरों का अनुभव क्या है और वो इन गुणों को कैसे देखते है ये उनका दृष्टिकोण है। परंतु आप कितना जानते है, यहाँ जानते है का मतलब है आप कितना महसूस करते है, अपने आप को। तो मुझे इन गुणों को महसूस करने के लिए लंबा समय लगा भी और नहीं भी लगा। जरूरत थी तो थोड़े से ध्यान की और जिज्ञासा की, मैंने कुछ दिन इस पर सोचा , एक दिन ध्यान किया , एक दिन काली मंदिर के मैदान में चलते चलते सोचा। यहाँ ध्यान और सोचने का मतलब है, मैंने खुद से ही बार बार प्रश्न पूछे, हर प्रश्न पर कभी उत्तर मिलता कभी नहीं मिलता। फिर आई अमावस्या, मैं बहुत समय से अपने घर के पास वाले महाकाली मंदिर की अमावस्या पूजा में जाना चाहता था। मैं अपने कॉलेज जाने से पहले एक बार उस पूजा में गया था , और दोबारा जाने की बहुत इच्छा थी पर मैं कभी दोबारा अमावस्या के समय अपने घर में नहीं था और अगर होता तो फिर जा नहीं पाता । पर इस बार मैं लंबे समय के लिए अपने घर आया था और मैंने पूरी तैयारी कर ली थी। मैं रात 8 बजे मंदिर चला गया, ये मंदिर मेरे घर के बिल्कुल सामने ही है , 2 मिनट पैदल चल कर, पर मैं कभी पहले जा नहीं सका, पर इस बार गया। तो मैं वहाँ गया और सभी मूर्तियों को एक एक कर प्रणाम किया, मैंने उनसे जागरूकता माँगी, अब मैं कोई अंधभक्त की तरह हर मूर्ति या खंभे को प्रणाम कर उनसे प्रार्थना नहीं कर रहा था। अगर आप कहें कि उस खंभे में भगवान है तो आपको उनकी अनुभूति होना जरूरी है, सिर्फ मान लेने से कुछ नहीं होता। प्रह्लाद को विष्णु की अनुभूति खंभे से हुई तो उसने कहा इसमें भी मेरे हरि है, और उसमें से नरसिंह प्रकट हुए। ये प्रह्लाद की जागरूकता थी जिसने इतनी प्रबल ऊर्जा को महसूस किया और उसे बुला लिया , क्योंकि वो उससे जुड़ चुका था। पर आपको उससे नहीं जुड़ना और न जागरूक होना है, आप को बस अपना काम निकलवाना है, वो चाहे कैसा भी, और फिर जब आपका काम नहीं होगा तब आप कहेंगे कि ऐसा कुछ भी नहीं है, भगवान जैसा कुछ भी नहीं है।

मैं आपको गलत नहीं कहता , ये सब चीजें मेरे साथ भी हुई है, मैंने भी आपकी तरह ही सोचा था जब मैं थोड़ा और जागरूक हुआ तो मेरी सोच बदलने लगी। जागरूक होने के दो पहलू है या इसमें दो चीजें है। अपने आप की जागरूकता और अपने आस पास की जागरूकता, आपको दोनों की जागरूकता होना और फिर इनको एक साथ जोड़ना बहुत जरूरी है तभी आप सारे ज्ञान को ले पायेंगे। तो हर मूर्ति को प्रणाम और नमस्ते करने के बाद मैं , माँ महाकाली की मूर्ति के सामने ही कुछ दूरी पर बैठ गया। कुछ देर माँ के चेहरे को देखता रहा, आज कल मुझे उनसे बहुत ममता का अनुभव होता है, जैसे वो मुझे बहुत प्रेम से देखती हो । ये क्या है ? मैं नहीं जानता या ठीक से नहीं कह सकता , पर फिर मैं ध्यान लगाने लगा , मतलब प्रश्न पूछने लगा, माँ से या खुद से, कि ये तीन गुण आखिर क्या है, और फिर मुझे एक उत्तर मिला। कुछ चीजें सामने आने लगी, मुझे तीन दृश्य दिखे। पहला था, वैकुंठ के 7 द्वार खुलते हुए और अंदर विष्णु शेषनाग पर लेटे हुए, फिर दूसरा शिव जो ध्यान में श्मशान या वैसी ही किसी जगह में थे, और तीसरा दृश्य था काली का जो शिव के ऊपर खड़ी है, खुली हुई आँखें और जीभ बाहर। अब मैं इनको सतो , रजो और तमो से जोड़ने लगा, और मुझे एक पैटर्न या एक संबंध मिला इनके बीच . ये सभी रूप उनके सबसे सामान्य रूप है, यानी ये कुछ ऐसा है जो बहुत ही सरल है बस समझाने के लिए रूपांतरित(metaphor) किया गया था, पर लोगों को प्रश्न तो पूछने नहीं बस चीजों को मान लेना है। तो हमारे शरीर में 7 ऊर्जा चक्र है, और जब ये सारे खुलते है या एक साथ चलते है या जब आप इनके बारे में जागरूक होते है , तब आप उस महाचेतना से जुड़ते है ,अपने अंदर के ब्रह्म को या ईश्वर से मिलते है। तो इन 7 चक्रों का खुलना और मानव का जागरूक होना ये वैकुंठ के 7 द्वारों के खुलने और विष्णु के देखने या मिलने से, मेल खाता है। 

यहाँ विष्णु हमारे सतोगुण को दर्शाता है, सतोगुण, रजो और तमो के बीच संतुलन बनाता है, और विष्णु भी इस संसार में संतुलन बनाने वाले ईश्वर को माना गया है। तो पहला दृश्य अपने अंदर के सतो गुण को जागरूक करने या उसका अनुभव लेने के बारे में है ,जैसे कि सब कहते है ईश्वर आपके अंदर है, ये वही चीज है, सत्वगुण आपके ही अंदर है कहीं बाहर से नहीं आता, जरूरत है बस उसे जानने की या अपने 7 चक्र या द्वार खोल कर या उनको पार करके विष्णु यानी सतोगुण तक पहुँचने की। अब आप सोचेंगे कि विष्णु को मैंने सतोगुण ही क्यों कहा, इसका जवाब बहुत सरल है क्योंकि वो तमो को नहीं दर्शाते, उस रूप को सात्विक ही दिखाया गया था, और शायद मेरी यही बात उसका एक सत्य हो। अब दूसरा दृश्य, श्मशान में बैठे शिव , अब इसे समझिये शिव भी पूरे सतो है उस एक स्थान या दृश्य में और उनके आस पास का श्मशान या भूत प्रेत, रजो और तमो गुण का प्रतीक है। हम वैकुंठ तक पहुँच गये, सतो को देखा, उसे माना, उसे अपनाया और उसे जागृत किया अब शिव और विष्णु दोनों ही सतोगुण है । श्मशान में शिव दिखाता है कि जागृत सतोगुण को रजो और तमो गुणों से कुछ नहीं होता, और शिव उन भूतों या प्रेतों से लड़ते नहीं यानी कि आपको अपने रजो और तमो गुणों को अपनाने की जरूरत है उनसे लड़ने की नहीं  रजो और तमो आपका ही हिस्सा है । आपके ही अंदर है पर उनका अनुभव करने के लिए आपको और जागरूक होना होगा , ये गुण आपके सचेतन मन से अधिक आपके अचेतन मन में है, जहाँ तक जाने के लिए आपको सतोगुण की आवश्यकता है। अब तीसरा दृश्य काली का है जो शिव पर खड़ी है, काली रजो और तमो गुण का प्रतीक है पर ये जागरूक है, और इनको जागरूक रखता है सतोगुण यानी कि, शिव जो इनके नीचे है यानी कि स्थिरता प्रदान करता है। अब आपको वो कहानी तो पता होगी रक्तबीज और काली का युद्ध, इसका भी एक दूसरा दृष्टिकोण है । बार बार मरने पर भी जिंदा होने वाला रक्तबीज, इच्छाओं का प्रतीक है आप इससे जीत नहीं सकते तो क्या करे आपको इन इच्छाओं को खत्म करने के लिए बहुत अधिक तीव्र ऊर्जा चाहिए, और वो है काली ,यानी पूर्ण तमो और रजो गुण । अब रक्तबीज तो खत्म हो जायेगा ,इच्छाएं तो खत्म हो जायेंगी पर फिर ये जो तीव्र ऊर्जा आपने बुलाई है, वो अभी और खतरनाक हो गई है । 

काली राक्षस को मार कर भी शांत नहीं हुई और सब कुछ खत्म करने को चल रही है ,उसे नियंत्रित कैसे करेंगे तो अब आपको सतोगुण की आवश्यकता है यानी कि शिव की । पर शिव, काली से लड़ते नहीं वो बस शांति से नीचे एक आधार बन जाते है और जब आपकी ये तीव्र ऊर्जा आपकी चेतना के साथ आती है या उस पर पांव रखती है तो जागृत हो जाती है या शांत हो जाती है . हम थोड़ा आगे चले आये अपने विषय से पर ये जरूरी था आपको जानना कि काली क्या है , तो वो अकेले पूरी रजो और तमो ऊर्जा का प्रतीक है वहीं नीचे शिव सतो का प्रतीक। अब मैं इन सब को जोड़ता हूँ, देखिये आपको आनंद आयेगा, तो अपने अंदर के 7 द्वारों को खोल कर अपने सतोगुण को जागृत कीजिये , आपने बहुत पहले इसे अपनाया है। अब इसके जागृत होने के बाद आपके अंदर, जो इसके आस पास रजो और तमो ऊर्जा, है या आपके जो रजो और तमो गुण है उसे अपनाइये, उनको अपना मानिये ,उनसे लड़िये मत। और जब जरूरत पड़े तो इन सभी रजो और तमो गुणों को एक जगह केंद्रित कीजिये पर सतो गुण की जागरूकता के साथ , आपको इनके साथ भी जुड़ना होगा। हालांकि ये आसान नहीं सब इनसे डरते है , अगर आपमें क्षमता नहीं है तो आप इन्हें नहीं संभाल सकते और बस डरते जायेंगे। तो मुझे मेरे पहले ध्यान में ये पता चला कि सतो, रजो, और तमो हमारे ही अंदर है, और इनको एक एक कर जागृत किया जा सकता है या इनकी अनुभूति हो सकती है, बस आपको इनसे लड़ना नहीं है, ये आपके व्यक्तित्व का एक हिस्सा है। तो ये तीन दृश्य एक पल में मुझे इतना कुछ समझा गये, जो समझना इतना मुश्किल लग रहा था। पर अब मैं और ध्यान नहीं लगा सकता मुझे पूरे शरीर में तेज पीड़ा का अनुभव होने लगा,मेरा शरीर इस चीज के लिए अभी तैयार नहीं था , पर मैंने अपनी जिज्ञासा के चक्कर में इसे यहाँ फंसा दिया . उस दर्द को मैं आपको बता नहीं सकता ये बहुत तेज था, मेरे अंदर कुछ शांत भी था। हमारा शरीर सतोगुण या सतो ऊर्जा को संभाल सकता है ये बहुत हल्की ऊर्जा या चेतना है पर रजो या तमो को नहीं संभाल सकता , हम दुःख, ईर्ष्या, क्रोध, उत्साह इन सभी भावनाओं को आम तौर पर नहीं संभाल पाते ,ये सभी रजो और तमो गुण है। 

मेरा शरीर काली के सामने था, मैंने उस महातमो ऊर्जा से प्रश्न पूछे और उसने उत्तर दिये पर उसकी मौजूदगी मेरे शरीर के लिए ठीक नहीं थी ये शरीर बहुत कमजोर था। तो उतनी ऊर्जा के आने पर इसे दर्द होने लगा ये टूटने लगा,और खुद को जिंदा रखने की कोशिश करने लगा। मेरे अंदर एक शांति थी एक ठंडक थी पर इस शरीर को उस रात भीषण अग्नि और पीड़ा का सामना करना पड़ा . मैं तमोगुण को समझना चाहता था, क्योंकि सामान्य दृष्टि से सब लोग इसे बुरा कहते है। आपने सुना होगा सब गुरु या लोग तमो के लिए एक जैसी बात कहते है “ तमोगुण की चीजें मत खाओ”, “तामसिक प्रवृत्ति मत रखो”। परंतु तमोगुण क्या है , उसे कैसे संभाले, ये कोई नहीं बोलता , बोलते है तो कहते है “ हमें सतोगुण का होना चाहिए”, “हमें सात्विक भोजन करना चाहिए”। इसके अलावा उनके पास इसका कोई अनुभव नहीं है, और जिनके पास इसका अनुभव है, वो संसार के किसी कोने में सदाशिव बनके तपस्या में लीन है। ये एक कड़वा पर महासत्य है जो वास्तविक में जागृत है, जिसे अपने तीनों गुणों का बोध है वो इस मानव समाज में नहीं रहना चाहता, ये समाज मूर्खों का समाज है, और वे भी इस बात को जानते है। ये मूर्खता, अज्ञान के कारण नहीं है बल्कि अर्धज्ञान के कारण है, कलयुग का सबसे बड़ा दुख यही है कि लोग अज्ञानी नहीं है बल्कि अर्धज्ञानी है। अर्धज्ञानी यानी कि वो व्यक्ति जिसके पास अधूरा ज्ञान है, ये सोचता है कि उसके पास ज्ञान है, पर उसे इतनी भी जागरूकता नहीं है कि उसका ज्ञान अधूरा है। वो व्यक्ति उसी अर्धज्ञान में फँसा रह जाता है। हमारा ये शरीर बड़ा कोमल और संवेदनशील है, और सबसे ज्यादा हमारा ये मन। ये तीनों गुण ऊर्जाओं के रूप में हर जगह एक साथ ही मौजूद है और जो जिस ऊर्जा का उपयोग कर सकता है वो उसका उपयोग करता है। हम सामान्य रूप से सतो यानी कि सबसे हल्की या सबसे कम तीव्रता वाली ऊर्जा का उपयोग कर सकते है। 

हमारा शरीर कभी कभी इससे थोड़ी तीव्र ऊर्जा का उपयोग भी करता है, उसे हम रजोगुण भी कहते है, ये ऊर्जा साधारण से चलने वाले शरीर को तीव्रता देती है। पर समस्या है इससे भी तीव्र ऊर्जा यानी तमोगुण के साथ ये हमारे शरीर की क्षमता से अधिक है, अगर ये आपके शरीर में चली जाये तो आपका सिस्टम बंद होने लगता है, इसे आपकी सीधी भाषा में “power ka overload” कहते है। अब कभी मैं ऊर्जा कहता हूँ कभी गुण तो , आपकी सुविधा के लिए इसे थोड़ा स्पष्ट करता हूँ। ये तीनों अपने मूल स्वरूप में ऊर्जाएं है, और जब ये ऊर्जाएं आपके शरीर पर अपना प्रभाव डालती है तब इनको गुण कहा जाता है, और उस प्रभाव के कारण आपका जो व्यवहार होता है उसे प्रवृत्ति कहते है। तो इसी कारण से मैंने इस लेख के शीर्षक में ऊर्जा, गुण या प्रवृत्ति किसी भी शब्द का उपयोग नहीं किया है, मैं आपको इन तीनों के बारे में हर स्तर पर बताने की कोशिश करूँगा, जितने ज्यादा पहलू बता पाया उतना अच्छा। पर ये मेरे निजी अनुभव और जागरूकता के बारे में है तो शायद या मुझे पूरा यकीन है कि इसमें सारी बातें नहीं होंगी। तो ये तमो में बहुत भारीपन है, ये आपको चलने नहीं देती, जब मैं ऐसा कहता हूँ तो इसका मतलब है आपका या मेरा शरीर इसे संभाल नहीं सकता . अगर आप इसका इस्तेमाल करते है तो फिर ये ऊर्जा रजो में बदल जायेगी यानी कि आप चलते रहेंगे और रुक नहीं पायेंगे। अब शायद आप समझे कि क्यों रजो और तमो से सब इतना डरते है , एक आपको रुकने नहीं देगी और एक आपको चलने नहीं देगी। वास्तव में सब कुछ ही तमो है यानी कि ऊर्जा है, जब ऊर्जा एक जगह है, इस्तेमाल में नहीं है या चल नहीं रही तो ये तमो है और अगर ये चलने लगे तो रजो है, और अगर इस चलने को आप रोक सकते है यानी कि आप इस अधिक ऊर्जा को अच्छे से संभाल सकते है, तो यही सतो है। 

आपके अंदर जो ऊर्जा दबी हुई है वही तमो है, आप इसका इस्तेमाल बहुत धीरे धीरे करते है, पर यदि ये जरूरत से ज्यादा बाहर आने लगे तो रजो बन जाती है, यानी आपका शरीर इसे थाम नहीं सकता और अधिक रफ्तार के साथ काम करने लगता है। पर यदि ये एक साथ बाहर आ जाये तो आपका शरीर बंद होने लगता है, आपका सिस्टम इसके लिए तैयार नहीं है। चलिए अब मैं आपको भारत की एक देवी की कहानी का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण और तमो कैसे काम करती है वो बताता हूँ। हमारा शरीर खतरे को सामने देख कर या मुसीबत के समय दो तरह से काम करता है ,या तो वो लड़ता है या भाग जाता है, ये चीजें मानसिक रूप से हर एक व्यक्ति के साथ होती है, इसे हम "Fight-or-Flight Response” कहते है। जब आपको डर लगता है तब आपमें बहुत ऊर्जा आती है , बहुत ताकत, आप अपनी क्षमता से बहुत अधिक शक्तिशाली हो जाते है। आपके सामने शेर आ जाये, और आप लड़ने वाले व्यक्ति न हो तो आप चीते की तरह भागेंगे यदि कोई लड़ाकू व्यक्ति, जो लड़ सके ,जैसे कि कोई पहलवान, एक गोरिल्ला बन कर लड़ने लगेंगे। तो कहानी में एक औरत है, जो एक महातपस्विनी और जागरूकता के चरम स्तर पर है, ये सतोगुण की पूरी ऊर्जा का उपयोग करना अच्छे से जानती है। एक बार इसके सामने एक बहुत बड़ा खतरा आया और उसने लड़ना चुना। वो खतरा ऐसा था कि एक बार में खत्म नहीं हो सकता था बार बार वापस आ जाता तो उस औरत ने अपने अंदर की सारी तीव्र ऊर्जाओं को ,तमो ऊर्जा को बाहर लाया और उसे रजो में बदलने लगी । उसने उस खतरे को जड़ से ही खत्म कर दिया पर अब उसने जिस तमो ऊर्जा को ऊपर लाया था उसे एकदम से अंदर नहीं डाल सकती थी, ये तमो ऊर्जा जब काम करती है तो रजो बनती है , इसमें गति आती है। 

वो शांत सी औरत काले रंग की भयानक शक्ति बन चुकी थी, जो रुक नहीं सकती थी , आप तमो को या रजो को बिना सतो की जागरूकता के नहीं रोक सकते। उस औरत के पति, जो एक महायोगी थे इस बात को जानते थे तो ये अपनी पत्नी के सतोगुण को फिर से जागरूक करने के लिए ,उस रास्ते में जा कर लेट गये जहाँ उनकी पत्नी जा रही थी . जैसे ही उस महातपस्विनी ने अपने पति पर पैर रखा वो जाग गई, और शांत हो गई । अब आप इस कहानी को जानते है माँ काली की वही कहानी जिसके बारे में मैंने पहले भी कहा था। काली का बेकाबू होना रजो और तमो को न संभाल पाना है पर यदि आपके पास सतोगुण की जागरूकता हो या आपका सतो सक्रिय हो तो आप इनका उपयोग कर सकते है या इन्हें संभाल सकते है। मैं आपको ये नहीं बोलूँगा कि तमोगुण से दूर रहे या रजो प्रवृत्ति न रखे, मैं कहता हूँ इनको समझे और जाने। मुझे एक और दृश्य दिखा था अमावस्या की उस रात जब हवन हो रहा था पर मैं उसे ठीक से नहीं बोल सकता . वो कुछ ऐसा था पूरा काला अंधकार उसमें ऊपर से नीचे की ओर जाती दो पतली चमकदार रेखाएं , जैसे कुछ आकार ले रहा हो। कुछ समय बाद उनके बीच में एक लाल रंग की धारा जैसा कुछ बह रहा हो, और उसके भी बीच में एक चमकदार पतली सी रेखा। मैंने जो समझा या पूछा था इस संसार या ब्रह्मांड से उसका उत्तर था वो दृश्य, वो अंधकार था तमो जो संसार का प्रतीक है और वो दो रेखाएं थी सतो यानी जागरूकता का प्रतीक है, वो बीच में लाल बहती धारा है रजो और उसमें भी जो रेखा है वो है सतो की जागरूकता। इस पूरे संसार में केवल तमो ऊर्जा है यानी कि एक बहुत भारी स्थिर ऊर्जा और उसमें एक जागरूकता है, इस संसार के बीच में या सारे तमो के बीच कुछ ऊर्जाएं गतिशील है और उनमें भी जागरूकता है। 

जहाँ गति है, वहीं जीवन है, इस संसार में तमो ऊर्जा के गतिशील होने से ही जीवन संभव है। और इसके लिए सतो की जागरूकता चाहिए यानी आपको चलते चलते रुकना भी आना चाहिए। मनोविज्ञान की मानें तो एक व्यक्तित्व या मन के तीन भाग है या दो विपरीत ऊर्जाएं है और एक उनका संतुलन बनाने वाली ऊर्जा है। सिगमंड फ्रायड, ये वो व्यक्ति है जिसका नाम हर मनोवैज्ञानिक की जुबान पर हमेशा रहता है। इसका कारण था कि,  इस व्यक्ति ने अचेतन मन की बात की थी, ऊर्जाओं की बात की, पिछली जिंदगी की बातें की, और भी कुछ। इनकी बातें वैज्ञानिक रूप से इस समय प्रमाणित नहीं की जा सकती, परंतु उनमें कोई तो सत्य छिपा है, कि ये व्यक्ति आज भी सबको याद है। इन्होंने अपनी “स्ट्रक्चर ऑफ माइंड थ्योरी” में “इड, ईगो और सुपरईगो” के बारे में बताया है। ये तीनों मन या व्यक्तित्व के वही भाग है ,जिसके बारे में मैं आपको बता रहा था। इसमें इड और सुपरईगो एक दूसरे के विपरीत है । जहाँ इड आपके व्यक्तित्व का वो रूप है जो तुरंत आनंद की कामना करता है। इड को दूसरों या समाज से कोई फर्क नहीं पड़ता ,उसे आनंद चाहिए तो चाहिए, ये एक बच्चे की तरह है। वही सुपरईगो इसका उल्टा है उसे समाज और लोगों से फर्क पड़ता है, ये नियमों का पालन करने वाला है और सबसे उत्तम(perfect) बनना चाहता है। इन दोनों विपरीत ऊर्जाओं को संभालने या इनके बीच के संतुलन को बनाये रखता है ईगो ( ये अहंकार वाला ईगो नहीं है), ये संतुलन रखता है ताकि व्यक्ति का मन ज्यादा परेशान न हो और अपने आप में ही लड़ता न रहे। 

ये ईगो ध्यान रखता है कि व्यक्ति की इच्छाएं भी पूरी हो और सामाजिक मर्यादा भी बनी रहे। ये ईगो सतोगुण के समानांतर (parallel) है , ये एक नहीं है पर एक जैसे है, दोनों ही संतुलन बनाने का काम करते है . इसी प्रकार यदि हम इड और तमोगुण को देखे तो ये भी एक दूसरे के समानांतर है, इन दोनों को इच्छाओं की पूर्ति चाहिए पर दोनों में से कोई भी उसके लिए कर्मक(active) नहीं है, बस इच्छा है कि, जो मुझे चाहिए वो मिल जाये। सुपरईगो और रजोगुण भी एक दूसरे के समानांतर है, यहाँ कर्मकता या चलताशीलता है, ये इच्छाओं की पूर्ति के लिए कर्म करते है, न कि केवल उनकी कामना। मेरे गुरु की एक बात मुझे अभी याद आई आपको सुनकर थोड़ा अजीब भी लगेगा पर शायद हंसी भी आये। यदि आप इड को अपने मन को काबू करने दोगे तो वो आपको जेल ले जायेगा और यदि सुपरईगो को अपने मन का नियंत्रण दोगे तो वो आपको पागलखाने (मनोचिकित्सालय) पहुँचा देगा, तो आपको अपने मन को ईगो को संभालने देना होगा। इसका कारण यह है कि यदि आप अपनी सारी इच्छाएं पूरी करते रहे तो पक्का आप सामाजिक नियम तोड़ दोगे और जेल जाने की नौबत आ जायेगी . और यदि आप सामाजिक कारणों से अपनी इच्छाओं को बहुत दिन तक दबा कर रखोगे तो आपके मन पर इसका भारी प्रभाव पड़ेगा और आप पागलखाने(मनोचिकित्सालय) पहुंचा देगा । ईगो आपकी इच्छाओं को पूरा भी करवाता है और सामाजिक नियम भी बनाये रखता है। अब आपको ये तो पता है कि एक तमोगुणी व्यक्ति अपनी इच्छाएं पूरी करने के लिए सारे गलत काम कर सकता है , ये तभी होता है जब जागरूकता न हो, और ऐसे व्यक्ति हमेशा से जेलों में ही देखे जाते है। उसी तरफ एक रजोगुणी व्यक्ति जो हमेशा बिना रुके चलता ही जाये, मानसिक रूप से अस्वस्थ हो जाता है। जब हम किसी काम में बिना रुके लग जाये तो शरीर से ज्यादा हम मन से थकने लगते है, और यदि वो काम अधिक समय लेने लगता है तो हम मानसिक रूप से अस्वस्थ होने लगते है और मनोचिकित्सालय पहुँच जाते है । 

फ्रायड के इड, ईगो और सुपरईगो की यदि हम बात करे तो ये गुणों के सामने बहुत छोटे दिखाई पड़ते है . तीनों गुण अपने आप में तीन आयाम जैसे है, बहुत ही विशाल, इसका कारण है कि तीनों गुणों पर हजारों सालों से बहुत काम किया गया है , इनको कई तरीकों से समझने की कोशिश हुई है वहीं इड, ईगो और सुपरईगो के ऊपर काम शुरू हुए बस 100 से 150 साल ही हुए है। हम कुछ कह नहीं सकते, क्या पता ये गुणों का ही एक नया हिस्सा या नया दृष्टिकोण हो, ये तो समय ही बतायेगा। हमने आज कई चीजों पर बातें की, कुछ पुरानी कहानियों को एक अलग दृष्टि से देखा और कुछ चित्रों का एक और अर्थ समझा . इन सब चीजों का एक ही कारण या स्रोत था वो था मेरे प्रश्न, इस ज्ञान का स्रोत मेरी जागरूकता है और उन ब्रह्मांडिक शक्तियों की इच्छा . ज्ञान का स्रोत शायद प्रश्न ही होते है, बिना प्रश्नों के ज्ञान प्राप्त नहीं हो सकता। इसीलिए मैं आपसे हमेशा की तरह कहूँगा प्रश्न पूछिये और अपनी जागरूकता को बड़ा कीजिये , उत्तर आपके पास पहले से है, बस जागरूक होने की देर है।

मैंने जितना हो सका आपको अपने अनुभव के आधार पर तमो, रजो और सतो के बारे में बताने की कोशिश की। पता नहीं मैं आपको सब कुछ अच्छे से बता पाया या नहीं, पर जो नहीं बताया वो आपको किताबों में आसानी से मिल जायेगा । मैं आपको केवल मेरा अनुभव बता रहा हूँ मेरी जागरूकता या मूर्खता ये आपके सोचने का विषय है , मैं अभी यहीं तक पहुँचा हूँ, पर शायद मैं इसके आगे भी जाऊँगा . तब तक आप प्रश्न करे और उत्तर संसार आप तक पहुँचा देगा, जब आप उसके लिए तैयार होंगे।
                                                                                                 
               
- काल(कुमार आर्यन)
नंबर : 9341901449
ईमेल: kumararyan28062003@gmail.com

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