सूरज का गुस्सा

SHARE:

प्रोफेसर अरविंद शर्मा, ४८ साल के, एक सम्मानित इतिहास के प्रोफेसर थे। उनकी पत्नी राधिका पारिवारिक कारोबार चलाती थीं।

सूरज का गुस्सा


प्रोफेसर अरविंद शर्मा, ४८ साल के, एक सम्मानित इतिहास के प्रोफेसर थे। उनकी पत्नी राधिका पारिवारिक कारोबार चलाती थीं। उनका इकलौता बेटा, आर्यन, १२ साल का था — चंचल, पढ़ाकू और पापा का बहुत बड़ा फैन। परिवार छोटा-सा लेकिन खुशहाल था। लेकिन जिंदगी ने उन्हें एक अनोखा तोहफा दिया।

राधिका के ४२ साल की उम्र में, जब अरविंद सोच भी नहीं रहे थे, उन्हें एक बेटी हुई। नाम रखा — आन्या।

आन्या के जन्म के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जैसे पुराना घर अचानक नया हो गया हो। सुबह की धूप में राधिका आन्या को गोद में लेकर गुनगुनातीं, तो अरविंद अपनी किताबों के ढेर के बीच से मुस्कुराते हुए देखते। आर्यन स्कूल से आते ही सबसे पहले आन्या के पास भागता — “मेरी छोटी प्रिंसेस कैसी है?”आन्या बहुत खास थी।

वह बेहद संवेदनशील और खुशमिजाज थी। सिर्फ तीन महीने की उम्र से ही वह पापा की आवाज सुनकर मुस्कुराती। जब भी अरविंद घर आते, आन्या रोना बंद कर उनके चेहरे को टकटकी लगाकर देखती। जैसे पूरा संसार पापा ही हों। जैसे-जैसे वह बड़ी हुई, वह पापा के बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती। शाम को अरविंद अपनी पुरानी आर्मचेयर पर बैठकर पढ़ते, तो आन्या अपने छोटे-छोटे पैरों से भागती हुई उनके घुटनों पर चढ़ जाती। “पापा, कहानी सुनाओ ना…”
 
वह सूरज से बहुत डरती थी। दोपहर की तेज धूप में बाहर निकलते ही उसके छोटे चेहरे पर डर छा जाता। “पापा, सूरज बहुत गुस्सा है,” कहकर वह पापा की गोद में मुंह छिपा लेती। अरविंद हंसते हुए उसे छाता लेकर बाहर ले जाते और कहते, “देखो बेटा, सूरज हमें रोशनी देता है, डरने वाली कोई बात नहीं।” लेकिन आन्या फिर भी पापा का हाथ कसकर पकड़े रहती।

घर में अब हर शाम रोमांटिक और खुशहाल माहौल होता।राधिका चाय बनातीं, अरविंद पुरानी यादें सुनाते, आर्यन आन्या को गोद में लेकर घुमाता। कभी-कभी अरविंद और राधिका एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते — इस उम्र में मिली ये छोटी सी खुशी उनके रिश्ते को और गहरा बना रही थी। अरविंद अक्सर कहते, “मैंने सोचा नहीं था कि जिंदगी मुझे इतना प्यारा तोहफा देगी।”

आन्या की सूरज से डरने की बात परिवार के लिए एक प्यारी-सी रहस्यमयी बात बन गई थी। लेकिन इसका एक गहरा और भावुक कारण था।

सूरज का गुस्सा
आन्या जब सिर्फ २ साल की थी, तब की बात है।उस दिन गर्मी का मौसम था। अरविंद प्रोफेसर की छुट्टियाँ चल रही थीं। परिवार पार्क में घूमने गया था। आन्या उस समय बहुत चंचल थी — वह दौड़-दौड़कर फूल तोड़ रही थी। अचानक तेज धूप निकल आई। सूरज इतना तीखा था कि आसमान सफेद पड़ गया था।

आन्या ने ऊपर देखा। उसकी नन्ही आँखों में तेज रोशनी चुभ गई। ठीक उसी पल एक तेज हवा चली और पास के पेड़ से एक सूखी टहनी उसके सिर के पास गिर गई कोई चोट नहीं आई थी, सिर्फ आवाज हुई थी। आन्या डर के मारे रो पड़ी।

राधिका ने तुरंत उसे गोद में उठा लिया, लेकिन आन्या ने पापा को पुकारा। अरविंद भागते हुए आए और उसे अपनी छाती से लगा लिया। उन्होंने अपना बड़ा छाता खोलकर आन्या को छाया में ले लिया और फुसफुसाकर कहा,
“डरो मत मेरी जान, पापा है ना। सूरज हमें नुकसान नहीं पहुँचाएगा।”
उस दिन के बाद से आन्या के मन में एक छोटा-सा डर बन गया,
तेज सूरज = डर + अकेलापन + तेज रोशनी।
वह छोटी थी, इसलिए उसने इसे इस तरह समझा कि “सूरज गुस्सा होकर चिल्लाता है और मुझे पापा से दूर कर देता है।” 
जब आन्या ४ साल की हुई, तो एक बार वह रात को नींद में बड़बड़ाई:
“सूरज पापा को ले जाएगा… पापा दूर चले जाएँगे…”

असल में, आन्या ने सुना था कि पापा की उम्र ज्यादा है। पड़ोस की एक आंटी ने अनजाने में कह दिया था — “अरे, इतनी छोटी बेटी… पापा तो बुजुर्ग हो गए…” यह बात बच्चे के मन पर बैठ गई। उसने सोचा कि सूरज, जो दिन का राजा है,  पापा को भी “बड़ा” और “दूर” ले जा सकता है।

इसलिए वह हमेशा पापा के पास चिपकी रहती थी। तेज धूप देखते ही उसे लगता कि पापा का समय कम हो रहा है। यही कारण था कि वह पापा के बिना एक पल भी नहीं रहना चाहती थी और सूरज देखकर डर जाती थी।आन्या का भाई और पूरा परिवार उसे  संभालता था .

अरविंद रोज शाम को उसे छत पर ले जाते और सूर्यास्त दिखाते। कहते, “देखो बेटा, सूरज थककर आराम करने जा रहा है। जैसे पापा भी कभी-कभी थक जाते हैं, लेकिन सुबह फिर वापस आ जाते हैं।”
आर्यन भैया उसे कार्टून में “सूरज वाला दोस्त” दिखाते और कहते, “सूरज हमें रोशनी देता है, फल उगाता है।”
राधिका ने आन्या के लिए एक छोटी-सी “सन प्रोटेक्शन स्टोरी” किताब बनाई, जिसमें सूरज एक अच्छा राजा था।
धीरे-धीरे आन्या का डर कम होने लगा, लेकिन पापा की गोद में छिपने की आदत बनी रही। यह डर अब परिवार के लिए प्यार का प्रतीक बन गया था।

अरविंद अक्सर राधिका से कहते,“इस डर ने हमें याद दिलाया है कि समय कितना कीमती है।”

आन्या बड़े होने पर भी पापा की सबसे बड़ी फैन रही। स्कूल से आकर सबसे पहले पापा को हग करती। अगर पापा थोड़ी देर लेट हो जाते तो वह दरवाजे पर खड़ी रहकर इंतजार करती। उसकी आँखें हमेशा मासूम रहतीं — छोटी-छोटी बात पर भी भावुक हो जाती।

आर्यन अब १५-१६ साल का हो चुका था। आन्या उसे “भैया” कहकर पुकारती और हमेशा कहती, “भैया, तुम बड़े होकर बहुत अच्छे इंजीनियर बनना।” आर्यन मुस्कुराता और उसके सिर पर हाथ फेरता। लेकिन अंदर ही अंदर अरविंद और राधिका दोनों चिंतित रहते — आर्यन की पढ़ाई, उसका भविष्य, और अब आन्या की भी।
 
अरविंद रात को राधिका से कहते, “हमारी सेविंग्स बढ़ानी होंगी। आन्या के लिए अलग से फंड बनाना है। आर्यन की हायर स्टडीज भी।” राधिका उनका हाथ थामकर कहतीं, “हम साथ हैं ना। सब ठीक हो जाएगा।”

फिर अरविंद आन्या के कमरे में जाते। वह सो चुकी होती, लेकिन पापा को देखते ही आधी नींद में भी मुस्कुरा देती और अपना छोटा सा हाथ बढ़ाती। अरविंद उसके माथे को चूमते और फुसफुसाते, “पापा हमेशा तुम्हारे साथ है, मेरी जान।”

घर में हँसी, प्यार, थोड़ी चिंताएँ, बहुत सारी उम्मीदें और एक नन्ही सी लड़की का निःस्वार्थ प्रेम, यह था प्रोफेसर अरविंद शर्मा का परिवार।एक उम्र में मिली बेटी ने उनके पूरे जीवन को नया अर्थ दे दिया था।



- डॉ अतुल गोयल
सहायक आचार्य, अर्थशास्त्र
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय,झाँसी (उप्र)

COMMENTS

Leave a Reply

इन्हें भी अवश्य पढ़ें -

Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy बिषय - तालिका