ऑनलाइन गेमिंग और हमारे युवाओं का बदलता शौक

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भारतीय गेमिंग सीन अब रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है। आने वाले पाँच सालों में ये इंडस्ट्री और भी बड़ी होने वाली है।

ऑनलाइन गेमिंग और हमारे युवाओं का बदलता शौक


रे भई, मैं तो ये देखकर हैरान रह गया कि पिछले तीन बरस में हमारे यहाँ गेमिंग का माहौल कितना बदल गया है। पहले तो बस कैंडी क्रश चलता था मोबाइल में। अब देखो तो सब प्रोफेशनल गेमर बनने के चक्कर में लगे हैं। मेरी गली में एक उन्नीस साल का छोकरा है ना, वो महीने का पैंतालीस हज़ार रुपये कमा रहा है बस गेम खेलकर। उसकी मेहनत और लगन देखने लायक है।


हमारे देश में गेमिंग का धंधा 2023 में सोलह हज़ार पाँच सौ करोड़ रुपये तक पहुँच गया है। superbull gaming जैसी जगहों ने तो इस बदलाव में धमाल मचा दिया है क्योंकि इन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को वो मज़ा दिया जो पहले बस विदेशी वेबसाइटों पर ही मिलता था।


अब बस टाइमपास नहीं रहा गेमिंग


सुनो, मैं भी पहले यही सोचता था कि गेम-वेम खेलना मतलब टाइम बर्बाद करना। पर अब मेरी सोच पूरी बदल चुकी है। मेरी भांजी ने एक स्ट्रैटेजी वाला गेम खेला तो उससे इतना सीख गई कि स्कूल में मैथ्स के मार्क्स चालीस परसेंट बढ़ गए।


गेम्स दिमाग़ को एकदम तेज़ कर देते हैं। जब तुम गेम में कोई फ़ैसला लेते हो ना, तो सोचने की रफ़्तार बढ़ जाती है। असली ज़िंदगी में भी ये चीज़ काम आती है भाई। सही समय पर सही निर्णय लेना बहुत ज़रूरी होता है।


हमारे यहाँ गेमिंग में क्या दिक्कतें आती हैं


हाँ भई, सब कुछ इतना आसान भी नहीं है। अभी भी बहुत लोग गेमिंग को सीरियसली नहीं लेते। माँ-बाप परेशान हो जाते हैं ना। मेरे एक यार के पिताजी ने तो गुस्से में आकर उसका फ़ोन ही फोड़ दिया था।


इंटरनेट की स्पीड भी बड़ी टेंशन है छोटे शहरों में। मेरे गाँव में अभी तक दो एमबीपीएस से ज़्यादा नेट नहीं चलता। गेम तो लोड होते-होते पंद्रह मिनट निकल जाते हैं।


पैसे कमाने का नया तरीका मिल गया


सच्ची बात कहूँ तो पहले मुझे भी लगता था ये सब धोखाधड़ी है। लेकिन अब तो मैं जान गया हूँ कि असली वाले प्लेटफ़ॉर्म हैं जो सच में पेमेंट देते हैं। मेरे चचेरे भाई ने पिछले महीने बारह हज़ार तीन सौ चालीस रुपये कमाए बस वीकेंड पर खेलकर।


तुम टूर्नामेंट में हिस्सा ले सकते हो। कुछ गेम्स में स्किल वाली कॉम्पिटिशन होती हैं जहाँ अच्छे खिलाड़ियों को इनाम मिलता है। बस तुम्हें समझदारी से चुनना होगा कि कहाँ खेलना है।


सुरक्षा और समझदारी


मैं तो हमेशा कहता हूँ कि हद बनाकर खेलो। मेरा एक साथी रात-रात भर खेलता रहता था। छह महीने में उसकी आँखों का नंबर माइनस डेढ़ हो गया। इसलिए आराम करना भी बहुत ज़रूरी है हर खिलाड़ी के लिए।


तुम्हें टाइम मैनेज करना सीखना पड़ेगा। मैं ख़ुद रोज़ाना बस एक घंटा खेलता हूँ रात नौ बजे के बाद। बाकी सारे काम पहले निपटा लेता हूँ। इससे कोई झंझट नहीं होती और मनोरंजन भी हो जाता है।


भारतीय गेमिंग सीन अब रफ़्तार से आगे बढ़ रहा है। आने वाले पाँच सालों में ये इंडस्ट्री और भी बड़ी होने वाली है। युवाओं के लिए करियर के नए दरवाज़े खुल रहे हैं। बस ज़रूरत है समझदारी से इसका फ़ायदा उठाने की।

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