लाल रिपोर्ट में नीला आकाश

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लाल रिपोर्ट में नीला आकाश अंजलि ने जब पहली बार वह रिपोर्ट हाथ में ली, तो कागज़ का रंग सफेद था, लेकिन उसे वह पूरा लाल दिखाई दिया।

लाल रिपोर्ट में नीला आकाश


अंजलि ने जब पहली बार वह रिपोर्ट हाथ में ली, तो कागज़ का रंग सफेद था, लेकिन उसे वह पूरा लाल दिखाई दिया।

एचआईवी पॉज़िटिव।

वे दो शब्द ऐसे थे, मानो उसकी ज़िंदगी के सारे दरवाज़ों को एक साथ लात मारकर तोड़ दिया गया हो।

डॉक्टर कुछ समझा रहे थे। उपचार, दवाइयाँ, वायरल लोड, स्वस्थ जीवन...

लेकिन अंजलि के कानों में केवल एक प्रश्न गूँज रहा था:

"क्या अब भी कोई मुझसे प्रेम करेगा?"

घर लौटते समय बारिश हो रही थी। शहर की व्यस्त सड़कों पर लोग दौड़ रहे थे। किसी ने उसकी ओर नहीं देखा।

लेकिन उसे लगा, पूरी दुनिया उसी को देख रही है।

क्योंकि कुछ समाचार ऐसे होते हैं, जो बाहर बताए बिना ही भीतर एक मुहर बनकर अंकित हो जाते हैं।

अंजलि एक लेस्बियन थी।

यह बात बहुत कम लोगों को पता थी।

परिवार के लिए वह विवाह न करने वाली "ज़िद्दी" बेटी थी।

पड़ोसियों की नज़र में "कुछ अलग स्वभाव" वाली लड़की।

लेकिन मीरा के सामने ही वह पूरी तरह स्वयं थी।

मीरा।

उसका प्रेम।

उसकी शांति।

रिपोर्ट मिलने के दिन से ही अंजलि ने मीरा के फ़ोन कॉल टालने शुरू कर दिए।

संदेशों का उत्तर नहीं दिया।

मिलने के लिए भी तैयार नहीं हुई।

आख़िर एक दिन मीरा सीधे उसके घर के सामने आ पहुँची।

"क्या हुआ है?" मीरा ने पूछा।

अंजलि चुप रही।

"क्या अब मुझसे प्रेम नहीं करती?"

लाल रिपोर्ट में नीला आकाश
यह प्रश्न सुनते ही अंजलि की आँखें भर आईं।

उसने रिपोर्ट मीरा के हाथ में थमा दी।

मीरा ने उसे पढ़ा।

एक क्षण।

दो क्षण।

तीन क्षण।

अंजलि ने सिर झुका लिया।

उसे लगा, मीरा चली जाएगी।

डर जाएगी।

घृणा करेगी।

लेकिन मीरा शांति से उसके पास आकर बैठ गई।

"यही बात थी, जो तुम मुझसे छिपा रही थीं?"

अंजलि रो पड़ी।

"तुम नहीं समझोगी..."

"क्या नहीं समझूँगी?"

"मैं एचआईवी पॉज़िटिव हूँ।"

मीरा ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा:

"तो क्या इससे तुम अंजलि नहीं रहीं?"

अंजलि ने उत्तर नहीं दिया।

"क्या इससे तुम्हारी मुस्कान बदल गई?"

"नहीं।"

"क्या तुम्हारे सपने मर गए?"

"नहीं।"

"तो फिर?"

अंजलि के पास शब्द नहीं थे।

फिर भी वह सिसकते हुए बोली,

"मैं बाइसेक्शुअल थी। मैंने तुम्हें धोखा दिया।"

मीरा मुस्कुराई।

अपना दर्द छिपाते हुए वह अंजलि का हाथ सहला रही थी।

समाज ने वर्षों से जो भय सिखाए थे, उन्होंने अंजलि के भीतर बड़े-बड़े किले बना दिए थे।

मीरा उस समय उन किलों को केवल एक स्पर्श से ढहा रही थी।

शीघ्र ही विशेषज्ञ उपचार शुरू हुआ।

महीने बीत गए।

वायरल लोड कम हुआ।

अंजलि का स्वास्थ्य बेहतर हुआ।

फिर भी जीवन पहले जैसा नहीं रहा।

मीरा की पहल पर उसके भीतर एक नया जीवन विकसित हुआ।

अधिक ईमानदार।

अधिक जागरूक।

अधिक साहसी जीवन।

एक संध्या समुद्र तट पर बैठे हुए अंजलि ने पूछा:

"तुम्हें डर नहीं लगता?"

"लगता है।" मीरा हँसी।

"मुझसे?" अंजलि का चेहरा उतर गया।

"नहीं। तुम्हें खो देने का डर।"

समुद्र उस समय अँधेरा हो रहा था।

लहरें किनारे तक आकर टूट रही थीं।

अंजलि ने आकाश की ओर देखा।

जीवन कभी-कभी एक गलत रिपोर्ट जैसा लग सकता है।

कभी एक दंड जैसा भी।

लेकिन प्रेम...

प्रेम अक्सर एक औषधि है।

रोग के लिए नहीं,

रोग की एकाकीपन को उपचार देने वाली औषधि।

उस दिन पहली बार अंजलि को लगा:

एचआईवी उसकी ज़िंदगी की पूरी कहानी नहीं है।

सिर्फ़ एक अध्याय है।

जब तक मीरा उसके साथ है, उसकी जीवन-कथा अचानक समाप्त नहीं होगी।


- बिनोय एम. बी.
फ्लैट नं. 5,डोर नं. 12/602/8
प्रथम मंजिल,चेलूर, सेवेंथ एवेन्यू
कोरापथ लेन,राउंड नॉर्थ,त्रिशूर - 680001
केरल, मोबाइल :9074487685

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