नटखट खरगोश और सच्चा दोस्त

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नटखट खरगोश और सच्चा दोस्त एक गाँव में मिंटू नाम का एक छोटा, नटखट और बहुत ही प्यारा खरगोश रहता था। सच्ची दोस्ती और सही सोच

नटखट खरगोश और सच्चा दोस्त


क गाँव में मिंटू नाम का एक छोटा, नटखट और बहुत ही प्यारा खरगोश रहता था। मिंटू का एक ही सपना था—उसे आसमान में तैरते हुए सफेद, नरम-नरम बादलों को छूना था। वह जब भी ऊपर देखता, उसे लगता कि बादल वैनिला आइसक्रीम या रुई के बड़े-बड़े गोले हैं।

एक दिन मिंटू ने सोचा कि अगर वह बहुत ऊंचे पेड़ पर चढ़ जाए, तो शायद बादलों को छू सकेगा। वह दौड़ते हुए जंगल के सबसे ऊंचे बरगद के पेड़ के पास गया और वहाँ बैठी गिलहरी दीदी से पूछा, "क्या मैं इस पेड़ पर चढ़कर बादल को छू सकता हूँ?" गिलहरी दीदी हंसकर बोलीं, "नहीं मिंटू भाई! बादल तो बहुत ऊपर होते हैं, वहाँ तक पेड़ भी नहीं पहुँच सकते।"

नटखट खरगोश और सच्चा दोस्त
मिंटू उदास नहीं हुआ। उसने एक और तरकीब सोची। उसने बहुत सारे सूखे पत्ते और पंख इकट्ठे किए और उन्हें अपने हाथों पर बांध लिया। वह एक ऊंची चट्टान पर खड़ा हुआ और जोर-जोर से अपने हाथ हिलाने लगा ताकि पक्षियों की तरह उड़ सके, लेकिन... धप! मिंटू उड़ने के बजाय सीधे हरी-हरी घास पर आ गिरा।

मिंटू को थोड़ी चोट आई और उसकी आँखों में आँसू आ गए। तभी वहाँ से चीकू नाम का एक समझदार हाथी गुजर रहा था। चीकू ने मिंटू को रोते हुए देखा तो अपनी सूंड से उसे सहलाया और पूछा, "क्या हुआ छोटे भाई? तुम रो क्यों रहे हो?" मिंटू ने सिसकते हुए कहा, "मुझे उन सुंदर बादलों को छूना है, पर मैं उड़ ही नहीं सकता।"

चीकू मुस्कुराया और बोला, "बस इतनी सी बात? चलो, मेरे साथ आओ। आज मैं तुम्हें बादलों की सैर कराता हूँ।"

चीकू ने मिंटू को अपनी पीठ पर बिठाया और नदी के किनारे ले गया। शाम का समय था और आसमान में ढलते सूरज की वजह से बादल सफेद से गुलाबी और सुनहरे रंग के हो गए थे। चीकू ने अपनी सूंड में नदी का ढेर सारा पानी भरा और आसमान की तरफ जोर से फव्वारा छोड़ दिया!

जैसे ही पानी की बूंदें हवा में उड़ीं, डूबते सूरज की किरणों से मिलकर उन्होंने एक खूबसूरत, सतरंगी इंद्रधनुष बना दिया। पानी की नन्ही बूंदें हवा में तैरते हुए बिल्कुल छोटे-छोटे बादलों जैसी लग रही थीं। चीकू ने कहा, "मिंटू, अपनी आँखें बंद करो और अपनी छुअन को महसूस करो!"

मिंटू ने जैसे ही हवा में उछलकर उन पानी की बूंदों और धुंध को छुआ, उसे लगा कि उसने सचमुच एक जादुई, ठंडे-ठंडे बादल को छू लिया है। वह खुशी से झूम उठा।

मिंटू समझ गया कि आसमान के बादलों को दूर से देखना ही अच्छा है, लेकिन अगर हमारे पास चीकू जैसे सच्चे दोस्त हों, तो दुनिया का हर सपना सच जैसा महसूस हो सकता है। उस दिन के बाद से मिंटू रोज़ शाम को चीकू की पीठ पर बैठकर उन पानी वाले बादलों से खेलता था।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्ची दोस्ती और सही सोच से हम नामुमकिन लगने वाली चीज़ों में भी खुशी ढूंढ सकते हैं।

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