आतंक का शासन | Reign of Terror after the French Revolution

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फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 1793 से 1794 के बीच की अवधि को 'आतंक का शासन' (Reign of Terror) कहा जाता है। यह वह समय था जब क्रांतिकारी सरकार ने "क्रांति

आतंक का शासन | Reign of Terror after the French Revolution


फ्रांसीसी क्रांति के दौरान 1793 से 1794 के बीच की अवधि को 'आतंक का शासन' (Reign of Terror) कहा जाता है। यह वह समय था जब क्रांतिकारी सरकार ने "क्रांति के दुश्मनों" को खत्म करने के लिए कठोर और हिंसक रास्तों को अपनाया।

राष्ट्रीय सम्मेलन के शासन काल में फ्रांस में 9 मार्च 1793 से जुलाई 1794 तक एक ऐसे निरंकुश एवं नृशंस राज्य की स्थापना हुई जिसे इतिहास में आतंक राज्य (Reign of terror) के नाम से जाना जाता है । इस राज्य की स्थापना जैकोबिन दल द्वारा की गयी थी । जिसके प्रमुख नेता थे- हेवर्ट, दाँतो, उगमरत और रोबेस्पियर । इन नेताओं में रोबेस्पियर सबसे प्रभावशाली था ।

आतंक राज्य की स्थापना के कारण

आतंक राज्य स्थापित करने के पीछे कई कारण थे । इनमें मुख्य था फ्रान्स के आन्तरिक क्षेत्र में होने वाले जगह-जगह विद्रोह, विदेशी आक्रमण का भय, लुई सोलहवें की मृत्यु के बाद उभड़ी समस्या एवं सबसे मुख्य कारण था हिंसा के समर्थक जैकोविन दल का राष्ट्रीय सम्मेलन पर आधिकार।
 
पादरी लोग पुरोहित विधान के विरोधी थे तथा अपने विशेषाधिकारों को पुनः प्राप्त करना चाहते थे । अवसर पाकर उन्होंने लावेण्डी के किसानों को उत्तेजित कराकर विद्रोह करा दिया । लायन्स तथा अन्य स्थानों पर भी जनता के एक वर्ग ने क्रान्तिकारियों के शासन के विरुद्ध विद्रोह कर दिया ।

गिलोटिन दल वालों ने यूरोप के विभिन्न शासकों से सम्पर्क किया तथा उन्हें यह समझा दिया कि फ्रांस के क्रान्तिकारी उनके राज्य में भी उत्तेजना फैलाने का प्रयास कर रहे हैं । क्रान्तिकारियों ने भी यह खुली घोषणा कर दी थी कि वे यूरोप के किसी भी देश में होने वाली क्रान्ति का समर्थन करेंगे तथा उन्हें सब प्रकार का सहयोग करेंगे । इससे यूरोप के निरंकुश शासक उत्तेजित हो गये और वे फ्रांस की क्रान्ति को कुचल डालने के लिए योजना बनाने लगे । इन कारणों से आतंक राज्य कायम करना आवश्यक हो गया । 

आतंक राज्य के क्रिया कलाप

आतंक का शासन | Reign of Terror after the French Revolution
आतंकवादियों ने पेरिस की नगर सभा भंग कर दी तथा उसकी जगह नगर परिषद का गठन किया जिसे कम्यून (Commune) कहा जाता है। जैकोविन दल ने 9 सदस्यीय सार्वजनिक सुरक्षा समिति का गठन किया जिसे अधिनायक (डिक्टेटर) जैसे अधिकार प्राप्त थे । एक क्रान्तिकारी न्यायालय का गठन क्रान्ति विरोधियों को दण्डित करने के लिए किया गया। एक क्रान्ति क्षेत्र (Square of the revolution) बनाया गया जहाँ अपराधियों का धड़ सर से अलग किया जाता था ।

आतंक राज्य के प्रमुख समर्थक नेताओं में दाँतो, राब्सपीयर, सेण्ट जस्त एवं कार्नो थे । इन लोगों ने फ्रान्स की आन्तरिक शान्ति एवं सुरक्षा के नाम पर लोक सुरक्षा समिति, सामान्य सुरक्षा समिति, क्रान्तिकारी न्यायालय की स्थापना कर शक्तिशाली आतंक राज्य की स्थापना की ।
 
आतंक राज्य के अन्तर्गत जैकोविन दल ने आदेश जारी किया कि जो लोग क्रान्ति का विरोध करेंगे उन्हें मृत्युदण्ड दिया जायेगा । इस आधार पर हजारों व्यक्तियों को गिलोतिन पर चढ़ा दिया गया । लुई सोलहवें की पत्नी मेरी अन्तोयनेत (Mary Aritoinette), ड्यूक आफ आर्लियस, वेली, वीरो मादाय रोला इत्यादि की मृत्यु दण्ड दे दिया गया ।

आतंक राज्य का पतन

आतंक के शासन काल में जैकोविन दल को तीन गुट थे जिनके नेता क्रमशः दाँतो (Danton), हरबर्ट (Herbert) तथा राब्सपीयर (Robespierre ) थे । इन तीनों में पारस्परिक फूट थी । दाँतें एवं राब्सपीयर ने मिलकर हरवर्ट की हत्या कर दी । आगे चलकर दाँतो एवं उसके साथियों को भी गिलोटिन पर चढ़ाकर मृत्यु दण्ड दिया गया । इस प्रकार राब्सपीयर आतंक राज्य का सर्वेसर्वा बन गया ।

आतंक राज्य में अनेक स्थानों पर हुए विद्रोहों को कठोरता पूर्वक दबाया गया ला बेडी (La Vendee) नामक स्थान पर 1800 व्यक्तियों को नदी में डूबो दिया गया । लियान्ज नगर के विद्रोह को दबाने के लिये पूरे नगर को ही नष्ट-भ्रष्ट कर दिया गया ।
 
राब्सपीयर की निरंकुशता का विरोध धीरे-धीरे बढ़ने लगा । कोई नहीं जानता था कि कब किसको गिलोटिन पर चढ़ा दिया जायेगा । प्रत्येक व्यक्ति का जीवन संकट में दिख रहा था। 27 जुलाई 1794 को राब्सपीयर को उसके विरोधियों ने राष्ट्रीय सम्मेलन में ही घेर लिया व उसे तथा उसके साथियों को बन्दी बना लिया गया। 28 जुलाई को उसे गिलोटिन पर चढ़ा दिया गया । राब्सपीयर को बन्दी बनाने तथा उसे गिलोटिन पर चढ़ाने की घटना को फ्रान्स के इतिहास में थर्मोडोरियन क्रान्ति (Thermidorian Revolution) के नाम से जाना जाता है । थर्मोडोरियन दल अब प्रभावशाली हो गया एवं उसने पेरिस की नगर परिषद भंग कर दी । क्रान्तिकारी न्यायालय और सार्वजनिक सुरक्षा परिषद समाप्त कर दिए गये । जैकोबिन क्लब नष्ट कर दिए गये । जैकोबिन दल के पतन के साथ ही आतंक राज्य भी समाप्त हो गया । 

आतंक राज्य का मूल्यांकन

आतंक राज्य में आन्तरिक शक्ति स्थापित करने हेतु राजतंत्र समर्थक विद्रोहियों को समाप्त कर दिया गया। युद्ध मंत्री कार्नो (Carnot) ने सेना को संगठित व शक्तिशाली बनाया जिसने फ्रान्स को प्रथम संगठन (First Coalition) के हाथों अपमानित होने से बचाया । इतिहासकारों ने आतंक राज्य की कटु आलोचना की है । कुछ इतिहासकारों ने इसे फ्रान्स के इतिहास पर काला धब्बा भी बताया है। कुलीनों एवं उच्चवर्ग के लोगों को गिलोटिन पर चढ़ाये जाने के बाद से इस राज्य की आलोचना तेजी से होने लगी एवं सम्पूर्ण यूरोप इस राज्य का विरोधी हो गया । इस राज्य के संदर्भ में एक बात उल्लेखनीय है कि इस राज्य में न तो निम्न वर्ग के लोगों को गिलोटिन पर चढ़ाया गया और न ही उन्हें परेशान किया गया । इस राज्य से जनसाधारण ने अपने को सुरक्षित अनुभव किया । तत्कालीन परिस्थितियाँ इस प्रकार की थीं जिसमें कठोर शासन के अभाव में फ्रान्स में शान्ति व्यवस्था स्थापित करना सम्भव नहीं था । राइकर ने भी इसी प्रकार का विचार व्यक्त करते हुए लिखा है कि "यह एक स्पष्ट रूप से असाधारण काल का असाधारण एवं असंवैधानिक शासन तंत्र था । इसके लिये यह अनुभव किया गया कि ऐसे समय (संकट काल) में सरकार के हाथ संविधान से बँधे नहीं होने चाहिए ।"

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