यूरोप में औद्योगिक क्रांति के विकास पर प्रकाश | The Industrial Revolution in Europe

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यूरोप में औद्योगिक क्रांति ने न केवल अर्थव्यवस्था को बदल दिया, बल्कि पूरे विश्व को आधुनिक बनाया। यह प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण, सामाजिक असमानत

यूरोप में औद्योगिक क्रांति के विकास पर प्रकाश | The Industrial Revolution in Europe


यूरोप में औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) मानव इतिहास का एक ऐसा मोड़ थी जिसने समाज को कृषि-प्रधान (farming-based) व्यवस्था से हटाकर एक आधुनिक औद्योगिक और मशीनीकृत समाज में बदल दिया। इसकी शुरुआत 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध (around 1760s) में ब्रिटेन से हुई और धीरे-धीरे यह पूरे यूरोप और दुनिया में फैल गई।

औद्योगिक क्रान्ति के फलस्वरूप इंग्लैण्ड में बड़ी-बड़ी मिलें स्थापित की गयीं । इन मिलों एवं कारखानों में प्रतिदिन के प्रयोग में आने वाली वस्तुओं का उत्पादन बहुत बड़ी मात्रा में होने लगा । इन उत्पादित वस्तुओं की माँग यूरोप के अन्य देशों में भी हुई । यूरोप के बहुत से देश अपनी आवश्यकताओं के लिये इंग्लैण्ड के उत्पादन पर निर्भर रहने लगे । नेपोलियन बोनापार्ट के महाद्वीपीय व्यवस्था के समय यूरोपीय देशों को इस निर्भरता के संकट का पूरा-पूरा आभास हुआ । नेपोलियन ने इग्लैण्ड के आयात-निर्यात को नष्ट-भ्रष्ट कर दिया । इस तरह इंग्लैण्ड के आयात पर निर्भर रहने वाले देश संकट में पड़ गये । इस संकट से उबरने के लिये यूरोपीय देशों में स्वउत्पादन का चिन्तन बढ़ा एवं धीरे- धीरे इंग्लैण्ड के अलावा अन्य देशों में भी औद्योगीकरण शुरू हुआ । नेपोलियन के पतन के बाद से स्वयं फ्रान्स के साथ जर्मनी एवं रूस में औद्योगिक उत्पादन ने जोर पकड़ा। इस तरह इन देशों का औद्योगीकरण भी शुरू हुआ - 

फ्रान्स

यूरोप में औद्योगिक क्रांति के विकास पर प्रकाश
1815 में नेपोलियन की पराजय के बाद यूरोप के देशों ने औद्योगिक विकास की तरफ ध्यान दिया । नेपोलियन बोनापार्ट के विरुद्ध संघर्ष में इंग्लैण्ड जैसे छोटे से राष्ट्र ने यूरोप के अन्य राष्ट्रों को जैसा सहयोग दिया और जिस दृढ़ता के साथ उसने स्वयं नेपोलियन का सामना किया इससे सभी राष्ट्र चकित रह गये। यह सब इंग्लैण्ड की औद्योगिक शक्ति के कारण ही सम्भव हो सका था । अतः फ्रान्स, बेल्जियम, स्विटजरलैण्ड, जर्मनी आदि राष्ट्रों ने भी अपनी औद्योगिक क्षमता बढ़ाने का प्रयास शुरू किया। स्पेन, पोलैण्ड, दक्षिणी अमेरिका ने भी अपने प्रयास तेज किये ।

फ्रान्स में लुई फिलिप के काल में पूँजीपतियों को कारखानों की स्थापना के लिये प्रोत्साहन दिया जाना शुरू किया गया। लेकिन सच्ची औद्योगिक क्रान्ति नेपोलियन तृतीय के काल में हुई। अंग्रेज पूँजीपतियों ने फ्रान्स में रेल लाइनें बिछायी । नेपोलियन के काल में फ्रान्स के अनेक भागों को रेल से जोड़ दिया गया । लौह-इस्पात उद्योग के साथ ही ताम्र शिल्प उद्योग में भी पर्याप्त उन्नति हुई । इस तरह अंग्रेज विशेषज्ञों की सहायता से फ्रान्स धीरे-धीरे औद्योगिक क्षेत्र में आगे बढ़ने लगा ।

जर्मनी

जर्मनी पहले छोटे-छोटे कई राज्यों में विभाजित था, अतः जब औद्योगिक विकास शुरू हुआ तो वहाँ अनेकों तरह की समस्यायें आयीं । राजनैतिक अस्थिरता से औद्योगीकरण प्रभावित रहा, फिर भी प्रशा का क्षेत्र औद्योगिक दृष्टि से उन राज्यों से आगे था जो नेपोलियन के अधीन थे । वास्तव में जर्मनी में औद्योगिक विकास 1870 में उसके एकीकरण के बाद ही सम्भव हो सका। प्रशा में सूती वस्त्र उद्योग शेष जर्मनी राज्यों की अपेक्षा प्रगतिशील अवस्था में था क्योंकि वहाँ सूती वस्त्र उत्पादन हेतु आधुनिक मशीनों का प्रयोग होने लगा था लेकिन फ्रान्स के अधीन जर्मन राज्यों में वस्त्र उद्योग हथकरघा चालित कुटीर उद्योगों के अन्तर्गत ही था। 1839 में ब्रिटेन के पूँजीपतियों के सहयोग से प्रथम रेल लाइन का निर्माण हुआ । 1834 में प्रशा में 18 राज्यों को मिलाकर एक उद्योग संघ बनाया गया जिसे शोल्वेराइन (Zollverein) कहा गया । इन अठारह राज्यों ने एक दूसरे के माल पर चुंगी कर न लेकर अधिकांश माल का स्वतंत्र व्यापार करने का नियम बनाया। इससे प्रशा के उद्योगों को बढ़ावा मिला। 1870-74 के बीच वहाँ तीव्र औद्योगिक विकास हुआ एवं इस अवधि में 857 नये उद्योगों की स्थापना हुई । 1890 के पश्चात जर्मनी प्रथम श्रेणी का औद्योगिक राष्ट्र बन गया।

रूस 

रूस में औद्योगीकरण फ्रान्स एवं जर्मनी के बाद शुरू हुआ। 1852 में मास्को से सेन्ट पीटर्सवर्ग के बीच रेलवे लाईन बिछायी गयी। सबसे पहले यहाँ विदेशी निवेशकों के द्वारा चीनी एवं वस्त्र उद्योग लगाये गये । जार एलेक्जेन्डर द्वितीय के समय रूस का वास्तविक औद्योगीकरण शुरू हुआ । 1861 में भूमिदासों को सामन्ती बन्धन से मुक्ति दी गयी । तब वहाँ औद्योगिक विकास का वातावरण बना। 19वीं सदी के अन्तिम वर्षों में जार एलेक्जेन्डर तृतीय के शासनकाल में कोयला खानों एवं लौह खानों से उत्खनन का कार्य तेज हुआ । रूस के औद्योगीकरण की महत्वपूर्ण बात यह है कि यहाँ विदेशी पूँजी से ही अधिकतर उद्योग लगाये गये ।

इस प्रकार यूरोप में औद्योगिक क्रांति ने न केवल अर्थव्यवस्था को बदल दिया, बल्कि पूरे विश्व को आधुनिक बनाया। यह प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण प्रदूषण, सामाजिक असमानता और शोषण की समस्याएं भी लेकर आई। 20वीं शताब्दी में यह क्रांति एशिया और अन्य महाद्वीपों में फैली, जिसे हम आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था का आधार मानते हैं।

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