दैनिक जागरण कृति सम्मान समारोह में 2025 की उत्कृष्ट हिंदी पुस्तकों को सम्मान डिया इंटरनेशनल सेंटर में दैनिक जागरण द्वारा ‘हिंदी हैं हम’ पहल के अंतर्गत
दैनिक जागरण कृति सम्मान समारोह में 2025 की उत्कृष्ट हिंदी पुस्तकों को सम्मान
नई दिल्ली, 29 मई, 2026 इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में दैनिक जागरण द्वारा ‘हिंदी हैं हम’ पहल के अंतर्गत ‘जागरण कृति सम्मान समारोह’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न श्रेणियों में कुल 8 साहित्यकारों को ‘जागरण कृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की शुरुआत प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र के निधन पर दो मिनट के मौन और श्रद्धांजलि सभा के साथ हुई। इसके उपरांत बनारस घराने की प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका सुनंदा शर्मा के सुरमय गायन ने समारोह की संगीतमयी शुरुआत की।
इस विशेष अवसर पर एक महत्त्वपूर्ण सत्र ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें श्री विष्णु त्रिपाठी (कार्यकारी संपादक, दैनिक जागरण), डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ (वीसी, आईआईएमसी), सुश्री रुबिका लियाकत (वरिष्ठ पत्रकार) तथा श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी (वरिष्ठ पत्रकार) ने संवाद किया और हिंदी पत्रकारिता के ऐतिहासिक विकास एवं समकालीन परिदृश्य पर विचार साझा किए।
बातचीत के क्रम में विष्णु त्रिपाठी ने प्रिंट मीडिया के भविष्य पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि आज प्रिंट मीडिया को लेकर अनावश्यक असमंजस का वातावरण बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई लोग, यहाँ तक कि मीडिया से जुड़े छात्र भी यह प्रश्न पूछते हैं कि प्रिंट मीडिया का भविष्य क्या है। उनके अनुसार, यह एक संकुचित दृष्टिकोण है, क्योंकि अधिकांश लोग प्रिंट मीडिया को केवल घरों तक पहुँचने वाले छपे हुए अख़बार तक सीमित मान लेते हैं, जबकि वास्तविकता इससे कहीं व्यापक है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आज ई-पेपर भी प्रिंट मीडिया का ही एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए यदि प्रिंट मीडिया के पाठकों की बात की जाए, तो इसमें केवल छपे हुए अख़बार के पाठक ही नहीं, बल्कि वेबसाइट और ई-पेपर के माध्यम से समाचार पढ़ने वाले पाठक भी शामिल हैं। इस दृष्टि से देखा जाए तो प्रिंट मीडिया के पाठकों की संख्या घट नहीं रही, बल्कि उसका स्वरूप बदल रहा है।आगे श्री त्रिपाठी ने ‘उदन्त मार्तण्ड’ और ‘दैनिक जागरण’ की तुलना करते हुए कहा कि दोनों एक ही वैचारिक परंपरा से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि ‘उदन्त मार्तण्ड’ का प्रकाशन कलकत्ता से इसलिए प्रारंभ हुआ, क्योंकि उस समय प्रशासनिक और बौद्धिक गतिविधियों का केंद्र वहीं था, जबकि ‘दैनिक जागरण’ “हृदय और मस्तिष्क दोनों से जन्मा” समाचारपत्र है।
बातचीत की इसी शृंखला में डॉ. प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहा कि जब हम हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं, तब यह भी उल्लेखनीय है कि पत्रकारिता शिक्षा के लगभग 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1920 में मद्रास विश्वविद्यालय में पहली बार पत्रकारिता का पाठ्यक्रम प्रारंभ हुआ था, जिसके बाद समय के साथ इसका निरंतर विस्तार होता गया।उन्होंने कहा कि भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) वर्ष 1965 से पत्रकारिता शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। संस्थान ने अपने विभिन्न परिसरों के माध्यम से पत्रकारों की एक सशक्त पीढ़ी तैयार की है, जो हम सभी के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर बल दिया कि आईआईएमसी के पाठ्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता उसका प्रायोगिक दृष्टिकोण है। यहाँ केवल सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक प्रशिक्षण पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाता है।आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एआई आज न्यूज़रूम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बदल रहा है। ऐसे में यदि विद्यार्थियों को नई तकनीकों की सही जानकारी और प्रशिक्षण नहीं दिया जाएगा, तो उनके दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। इसलिए यह आवश्यक है कि युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग की शिक्षा दी जाए।उन्होंने आगे कहा कि आज के समय में छात्र-छात्राओं को ऐसे मुद्दों को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो समाज और देश के विकास से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हों। पत्रकारिता का उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करना भी है।
टेलीविजन पत्रकारिता में बढ़ते शोर-शराबे पर बात करते हुए रुबिका लियाकत ने कहा कि टीवी डिबेट्स अक्सर भावनाओं से संचालित होती हैं, लेकिन तथ्यों का महत्व हमेशा बना रहना चाहिए। उनके अनुसार, आज मीडिया की सबसे बड़ी चुनौती सेंसरशिप नहीं, बल्कि “विश्वसनीयता का संकट” है, क्योंकि उद्योग अब तेजी से वायरलिटी और टीआरपी के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है।“गोदी मीडिया” शब्द पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, “जब आपके अपने शब्दों का वजन कम हो जाता है, तब आप दूसरों की लकीरें छोटी करने लगते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों को “अपने राष्ट्र और संस्कृति के प्रति पक्षधर” होना चाहिए।
दैनिक जागरण ज्ञानवृत्ति के चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित करने हेतु दैनिक जागरण के कार्यकारी संपादक विष्णु प्रकाश त्रिपाठी तथा स्ट्रेटेजी एंड ब्रांड डेवलपमेंट विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बसंत राठौड़ मंच पर उपस्थित रहे।ज्ञानवृत्ति के अंतर्गत चयनित प्रथम शोधार्थी राहुल कुमार हैं। वे ‘भारतीय कूटनीति में सॉफ्ट पावर की भूमिका : योग, संस्कृति और प्रवासी भारतीयों के संदर्भ में एक अध्ययन’ विषय पर शोध करेंगे।ज्ञानवृत्ति की अगली चयनित प्रतिभागी सुश्री कायनात तरन्नुम हैं। उनका शोध विषय ‘Gen-Z की मुस्लिम महिलाओं में आधुनिक स्त्रीवाद का उदय एवं उस पर सरकारी नीतियों का प्रभाव’ रहेगा।ज्ञानवृत्ति के एक अन्य चयनित प्रतिभागी श्री नकुल शर्मा हैं। वे ‘कर्तव्य आधारित न्याय से अधिकार आधारित न्याय तक : भारतीय विधिक चिंतन का वैज्ञानिक अध्ययन’ विषय पर शोध कार्य करेंगे।
‘हिंदी बेस्टसेलर 2025’ के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में चयनित कृतियों की घोषणा की गई। कथा श्रेणी में लेखक दिव्य प्रकाश दुबे की पुस्तक ‘यार पापा’, कविता श्रेणी में स्वयं श्रीवास्तव की पुस्तक ‘घर के वास्ते’, कथेतर श्रेणी में गौहर रज़ा की पुस्तक ‘मिथकों से विज्ञान तक – ब्रह्मांड के विकास की बदलती कहानी’ तथा अनुवाद श्रेणी में सत्यार्थ नायक की पुस्तक ‘महागाथा – पुराणों की 100 कथाएं’ (हिंदी अनुवाद: आशुतोष गर्ग) को शामिल किया गया।
‘हिंदी बेस्टसेलर 2025 – उत्तम में सर्वोत्तम’ के अंतर्गत विभिन्न श्रेणियों में चयनित कृतियों की घोषणा की गई। कथा श्रेणी में लेखक मनोज राजन त्रिपाठी की पुस्तक ‘कसारी मसारी’, कथेतर श्रेणी में अनिमेष मुखर्जी की पुस्तक ‘ठाकुरबाड़ी – गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर का कुटुंब वृत्तांत’, कविता श्रेणी में नीलेश मिसरा की पुस्तक ‘मैं अक्सर सोचता हूँ’ तथा अनुवाद श्रेणी में सुश्री अमी गणात्रा की पुस्तक ‘महाभारत का अनावरण’ को ‘उत्तम में सर्वोत्तम’ सम्मान से पुरस्कृत किया गया।
‘दैनिक जागरण कृति सम्मान’ के अंतर्गत सभी लेखकों का चयन मौलिकता, साहित्यिक गुणवत्ता, पठनीयता तथा विषय की समसामयिक प्रासंगिकता जैसे मानकों के आधार पर किया गया। ‘जागरण कृति सम्मान’ के लिए निर्णायक मंडल में जितेन्द्र श्रीवास्तव, रजिस्ट्रार, इग्नू तथा सुधीर प्रताप सिंह, अध्यक्ष, भारतीय भाषा केंद्र, जेएनयू शामिल रहे।
यह सम्मान हिंदी लेखकों को एक सार्थक पहचान देने के साथ-साथ समकालीन हिंदी साहित्य के विकास में भी सहायक है। दैनिक जागरण की यह पहल नियमित रूप से तिमाही बेस्टसेलर सूचियों और साहित्यिक योगदान की व्यवस्थित पहचान के माध्यम से हिंदी साहित्य और पाठकों के बीच सेतु का कार्य कर रही है।
‘पत्रकारिता और साहित्य का संबंध’ विषय पर विशेष संबोधन
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने सत्र में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी। पत्रकारिता की अपनी प्रारंभिक समझ को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब पत्रकारिता और साहित्य को एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ माना जाता था और अनेक समाचारपत्रों के संपादक मूल रूप से साहित्यिक पृष्ठभूमि से आते थे। उन्होंने मैक्सिम गोर्की जैसे व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि लेखन और साहित्य समाज की चेतना को समृद्ध करते हैं। जोसेफ स्टालिन का उद्धरण देते हुए उन्होंने कहा, “लेखक आत्मा के इंजीनियर होते हैं।” उन्होंने ऑस्कर वाइल्ड का भी उल्लेख किया, जिन्होंने कहा था—“पत्रकारिता पढ़ने योग्य नहीं होती और साहित्य पढ़ा नहीं जाता।”
उन्होंने आगे कहा कि यदि हम इतिहास पर दृष्टि डालें तो बड़े सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तन—विशेषकर फ्रांसीसी क्रांति से लेकर आधुनिक समय तक—में साहित्यकारों और पत्रकारों की अग्रणी भूमिका रही है। साहित्य केवल विचार नहीं बदलता, बल्कि वह मन और मस्तिष्क दोनों को रूपांतरित करता है। यह समाज में स्थायी परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है और पुस्तकें वास्तव में परिस्थितियों को बदल सकती हैं।ऑस्कर वाइल्ड का उल्लेख करते हुए उन्होंने साहित्य और पत्रकारिता के संबंध पर विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि एक दृष्टि से देखा जाए तो पत्रकारिता तात्कालिक और सूचना-प्रधान होती है, जबकि साहित्य कालजयी और चिंतनप्रधान होता है। इस प्रकार दोनों के बीच मूल अंतर उनके प्रभाव और प्रकृति में निहित है।
इन पुरस्कारों की घोषणा करते हुए दैनिक जागरण के ब्रांड एवं स्ट्रैटेजी विभाग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष बसंत राठौर ने कहा कि दैनिक जागरण सदैव हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध रहा है। ‘दैनिक जागरण कृति सम्मान’ पहल का उद्देश्य हिंदी में उत्कृष्ट लेखन को सम्मानित और प्रोत्साहित करना है, विशेष रूप से उन लेखकों को, जिनकी कृतियाँ बेस्टसेलर सूची में स्थान प्राप्त करती हैं। दरअस्ल दैनिक जागरण हिंदी बेस्टसेलर, हिंदी में प्रकाशित पुस्तकों की लोकप्रियता एवं बिक्री के बारे में जानकारी का एकमात्र प्रामाणिक तंत्र भी है। दैनिक जागरण के इस पहल से हिंदी साहित्य जगत को न केवल श्रेष्ठ युवा लेखकों के बारे में जानने, उनकी कृतियों को पढ़ने का अवसर मिलता है बल्कि नए प्रकाशकों को भी मुख्य धारा में अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है। दैनिक जागरण कृति सम्मान 2025 के सभी विजेताओं और प्रकाशकों को हार्दिक बधाई!
यह समारोह ‘हिंदी हैं हम’ अभियान के तहत दैनिक जागरण की हिंदी साहित्य के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल के माध्यम से कथा, गद्य, कविता और अनुवाद जैसे विभिन्न विधाओं में तिमाही बेस्टसेलर सूचियों को व्यवस्थित रूप से विकसित किया गया है, जो हिंदी साहित्यिक उपलब्धियों को लगातार मान्यता देते हैं और गुणवत्तापूर्ण हिंदी लेखन को बढ़ावा देने का कार्य करते हैं।
दैनिक जागरण कृति सम्मान
हिंदी बेस्टसेलर 2025 : कथा
लेखक श्री दिव्य प्रकाश दुबे
पुस्तक –यार पापा
प्रकाशक- हिन्द युग्म
हिंदी बेस्टसेलर 2025 : कविता
लेखक -श्री स्वयं श्रीवास्तव
पुस्तक –घर के वास्ते
प्रकाशक- अनबाउंड स्क्रिप्ट
हिंदी बेस्टसेलर 2025 : कथेतर
लेखक -श्री गौहर रज़ा
पुस्तक –मिथकों से विज्ञान तक –ब्रह्मांड के विकास की बदलती कहानी
प्रकाशक- पेंगुइन
हिंदी बेस्टसेलर 2025 : अनुवाद
लेखक -श्री सत्यार्थ नायक
पुस्तक –महागाथा –पुराणों की 100 कथाएं
अनुवादक - श्री आशुतोष गर्ग
प्रकाशक- हार्पर
हिंदी बेस्टसेलर 2025-उत्तम में सर्वोत्तम : कथा
लेखक -श्री मनोज राजन त्रिपाठी
पुस्तक –कसारी मसारी
प्रकाशक- एका
हिंदी बेस्टसेलर 2025-उत्तम में सर्वोत्तम : कथेतर
लेखक-श्री अनिमेष मुखर्जी
पुस्तक –ठाकुरबाड़ी –गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर का कुटुंब वृतांत
प्रकाशक- पेंगुइन
हिंदी बेस्टसेलर 2025-उत्तम में सर्वोत्तम : कविता
लेखक-श्री नीलेश मिसरा
पुस्तक –मैं अक्सर सोचता हूँ
प्रकाशक- एका
हिंदी बेस्टसेलर 2025-उत्तम में सर्वोत्तम : अनुवाद
लेखक-सुश्री अमी गणात्रा
पुस्तक –महाभारत का अनावरण
प्रकाशक-ब्लूम्सबरी
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