विज्ञापन जगत के दिग्गज पियूष पांडे को समर्पित “पियूष रंग महोत्सव”महोत्सव के अंतर्गत 17 अप्रैल 2026 को नाटक “दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद” तथा 18 अप्रैल 2026
विज्ञापन जगत के दिग्गज पियूष पांडे को समर्पित “पियूष रंग महोत्सव”
नई दिल्ली। स्वर्गीय पद्मभूषण एवं प्रख्यात विज्ञापन विशेषज्ञ पियूष पांडे जी की 71वीं जयंती के अवसर पर उनकी बहन सुश्री रमा पांडे उनके सम्मान में “पियूष रंग महोत्सव” नामक दो दिवसीय नाट्य उत्सव का आयोजन कर रही हैं। यह महोत्सव 17 एवं 18 अप्रैल को श्री राम सेंटर, मंडी हाउस में आयोजित होगा। रतनव (रामा थिएटर नाट्य विद्या) द्वारा आयोजित दो दिवसीय पियूष रंग महोत्सव भारतीय विज्ञापन जगत के दिग्गज स्वर्गीय पियूष पांडे की पावन स्मृति और और उनके समर्पण को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। पीयूष पांडे का 70 साल की उम्र में पिछले साल 23 अक्टूबर को निधन हो गया था।
महोत्सव के अंतर्गत 17 अप्रैल 2026 को नाटक “दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद” तथा 18 अप्रैल 2026 को “ठाकुर ज़ालिम सिंह” का मंचन किया जाएगा। दोनों प्रस्तुतियाँ श्री राम सेंटर, मंडी हाउस, नई दिल्ली में प्रतिदिन सायं 6:30 बजे आयोजित होंगी।
इस अवसर पर दो विशिष्ट सम्मानों से भी विभूतियों को अलंकृत किया जाएगा। पहला सम्मान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) के सदस्य सचिव श्री सचिदानंद जोशी को भारतीय संस्कृति के संरक्षण में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए ‘संस्कृतशील फॉर प्रेज़र्विंग कल्चर ऑफ इंडिया’ पुरस्कार के रूप में प्रदान किया जाएगा। वहीं, दूसरा ‘साहित्यश्री’ सम्मान 98 वर्षीय पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला को उनके साहित्यिक अवदान के लिए अर्पित किया जाएगा।
पियूष पांडे युवाओं के सशक्त समर्थक थे। उनका मानना था कि “यह मशाल अब नौजवानों के हाथों में जानी चाहिए।” इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए इस महोत्सव में पाँच प्रमुख कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है, जिनमें सेंट स्टीफंस कॉलेज (उनका अपना शिक्षण संस्थान) भी शामिल है।महोत्सव में एक विशेष “फोटो कॉर्नर” भी बनाया जाएगा, जो पियूष पांडे की विशिष्ट पहचान—उनकी ट्रेडमार्क मूंछों—को समर्पित होगा। साथ ही, छात्रों के लिए “कुछ मीठा हो जाए” की भावना के तहत कैडबरी डेयरी मिल्क चॉकलेट का वितरण भी किया जाएगा।इस आयोजन में नेपाल, मॉरीशस और गुयाना के राजदूतों की गरिमामयी उपस्थिति प्रस्तावित है।
महोत्सव की आयोजक रमा पांडे ने कहा,“मेरे लिए ‘पियूष रंग महोत्सव’ बेहद भावनात्मक और विशेष महत्व रखता है। मेरे भाई, पद्मभूषण पियूष पांडे, अपने एक-एक वन लाइनर से लोगों के दिलों को छू लेते थे। वे कम शब्दों में गहरी बात कहने की अद्भुत क्षमता रखते थे। उनके जाने के बाद हमें एहसास हुआ कि वे अपने शब्दों के माध्यम से किस तरह दुनिया से जुड़े थे।यह मंच भी वही कार्य करता है—लोगों से संवाद करता है, उनकी भावनाओं को व्यक्त करता है। इसी भावना के साथ हम इस नाट्यांजलि के माध्यम से उन्हें अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।”
श्री सचिदानंद जोशी ने कहा “पियूष रंग महोत्सव हमारी रचनात्मक ऊर्जा की मनोरम अभिव्यक्ति है जिसमे कलात्मकता और भावनात्मक चेतना का अनूठा संगम है”।
पद्मश्री श्रीमती शीला झुनझुनवाला ने कहा “पीयूष पांडे जी रचनात्मक प्रतिभा के धनी थे जिन्होंने भारतीय विज्ञापन जगत को एक वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की l”
नाटक परिचय:
दरख़्त-ए-आज़ाद-ए-हिंद
1920 के दशक के उत्तर प्रदेश के एक गाँव पर आधारित यह कथा एक 200 वर्ष पुराने नीम के पेड़ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो आज़ादी के संघर्ष का साक्षी रहा है। विकास के नाम पर जब उसे काटने का निर्णय लिया जाता है, तो चौधराइन उसके संरक्षण के लिए संघर्ष करती हैं। अंततः पेड़ गिर जाता है, लेकिन उसकी जड़ों से उगते नए पौधे आशा और नई शुरुआत का संदेश देते हैं।
ठाकुर ज़ालिम सिंह
यह नाटक सत्ता, लोभ और आत्मबोध की कहानी है, जो हमें अपने असली स्वरूप की ओर लौटने का संदेश देता है। कथा एक निर्दयी शासक ठाकुर ज़ालिम सिंह के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने कर्मों के परिणामों से जूझता है। क्या उसे प्रायश्चित का अवसर मिलेगा या वह विनाश की ओर अग्रसर रहेगा—यही इस नाटक का केंद्रीय प्रश्न है।
रतनव (RATNAV) के बारे में:
रतनव (RATNAV) भारत की पारंपरिक मौखिक और लोक कलाओं के संरक्षण हेतु समर्पित एक संस्था है। प्रख्यात रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म हस्ती रमा पांडे ने इसकी परिकल्पना और स्थापना की है। रमा पांडे दूरदर्शन पर प्रसारित अपने कार्यक्रम “जाने अपना देश” के माध्यम से भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर निरंतर कार्य करती रही हैं।
रतनव के माध्यम से वे विभिन्न सामाजिक और समसामयिक विषयों पर जागरूकता फैलाने, संरक्षण करने और शिक्षा प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। भारत में मौखिक परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है, किंतु आज कई परंपराएँ लुप्त होने की कगार पर हैं। रतनव इन कलाओं को जीवित रखने के लिए कलाकारों के आजीविका समर्थन पर कार्य करता है और रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से उनकी कला को व्यापक मंच प्रदान करता है।
रतनव का मूल उद्देश्य विभिन्न लोक और जनजातीय कला रूपों को थिएटर और कहानी कहने (स्टोरीटेलिंग) के माध्यम से सामने लाना और उन्हें नई पहचान दिलाना है।
निर्देशक के बारे में
रमा पांडे एक बहुआयामी और सृजनशील व्यक्तित्व हैं, जो रंगमंच, टेलीविजन, फिल्म और अन्य माध्यमों के जरिए अपनी कला को अभिव्यक्त करती हैं। उनका प्रसिद्ध टीवी कार्यक्रम “जाने अपना देश” पिछले 15 वर्षों से दूरदर्शन राजस्थान पर प्रसारित हो रहा है, जिसके माध्यम से वे भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत और संरक्षित कर रही हैं।
वे “रामा थिएटर नाट्य विद्या” (RATNAV) और “मॉन्टाज फिल्म्स” का संचालन करती हैं। RATNAV उनका स्वप्न प्रकल्प है, जो भारत की लुप्त होती मौखिक और लोक परंपराओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित है। जयपुर में जन्मी रमा पांडे ने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की और आगे चलकर “शतरंज के मोहरे”, “आषाढ़ का एक दिन”, “भूमिजा”, “जसमा ओडन” और “शुतुरमुर्ग” जैसे चर्चित नाटकों में मुख्य भूमिका निभाई।
उन्हें रंगमंच, टेलीविजन और फिल्म के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है। वे दूरदर्शन, आकाशवाणी के साथ-साथ बीबीसी हिंदी, वॉयस ऑफ अमेरिका, सीबीसी कनाडा और रेडियो नीदरलैंड्स से भी जुड़ी रही हैं। उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री, टेलीफिल्म और टीवी कार्यक्रमों का निर्माण व निर्देशन किया है।महिला और बाल विषयों पर उनकी पुस्तकें—“बेगम बानो और खातून”, “फैसले” और “सुनो कहानी”—प्रसिद्ध हैं। उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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