होम रूल आन्दोलन | होमरूल आन्दोलन का उद्देश्य भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में होमरूल आन्दोलन का महत्वपूर्ण स्थान है । इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण
होम रूल आन्दोलन | होमरूल आन्दोलन का उद्देश्य
भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन के इतिहास में होमरूल आन्दोलन का महत्वपूर्ण स्थान है । इसका उद्देश्य शांतिपूर्ण उपायों द्वारा स्वराज्य और स्वशासन प्राप्त करना था । श्रीमती एनी वेसेन्ट और लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक इस आन्दोलन के संचालक थे .आयरिश महिला श्रीमती एनी बेसेन्ट भारत में समाज-सेवा और धर्म-सुधार का कार्य कर रही थीं । उनका प्रमुख उद्देश्य भारत का उद्धार करना था ।
प्रचार कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण करने के बाद उन्होंने उदारवादियों और उग्रवादियों को मिलाने का प्रयास किया । आयरलैण्ड में होमरूल आन्दोलन की सफलता से अंग्रेज चिन्तित थे । लोकमान्य तिलक ने उनके विचारों का समर्थन किया तथा 1916 ई0 में पूना में होमरूल लीग की स्थापना किये । उसके बाद एनी वेसेन्ट ने अखिल भारतीय 'होमरूल लीग' की स्थापना की। कांग्रेस की एकता के बाद कांग्रेस ने भी इस योजना को स्वीकार किया।
इस आन्दोलन को चलाने का श्रेय भी एनी वेसेन्ट एवं तिलक को है। एनी वेसेन्ट ने अपने दैनिक पत्र 'न्यू इण्टिया' तथा साप्ताहिक 'कामन ह्वील (common wheel) द्वारा तथा तिलक ने अपना पत्र मराठा एवं केसरी द्वारा स्वशासन जोर शोर से किया। इस आन्दोलन में नवयुवक वर्ग ने योगदान दिया। इस आन्दोलन को रोकने के लिए सरकार ने एनी वेसेन्ट को गिरफ्तार कर लिया । उनकी गिरफ्तारी का सर्वत्र विरोध हुआ । उनकी देशभक्ति के कारण 1917 में उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया ।एनीवएसेन्ट के दोनों पत्रो पर रोक लगा दी गयी । तिलक एवं विपिन चन्द्र पाल के पंजाब प्रवेश पर भी रोक लग गयी । एनी वेसेन्ट ने कहा कि इस संस्था का उद्देश्य भारत के सम्बन्ध ब्रिटेन से तोड़ना नहीं बल्कि भारत को उसका स्वामी बनाना है । उनका कहना था कि अंग्रेजों ने भारत की दुर्गंत की है, अब उसपर रोक लगनी चाहिए।
इनके प्रयत्नों से देशवासियों में नयी चेतना जागृत हुई । शीघ्र ही यह देश व्यापी आन्दोलन हो गया । महात्मा गांधी ने इस आन्दोलन का समर्थन नहीं किया। उनका विश्वास था कि अंग्रेज युद्ध समाप्ति पर स्वशासन का अधिकार स्वयं देंगे।
होमरूल आन्दोलन का उद्देश्य
इस योजना के उद्देश्य निम्नलिखित थे -
1. स्थानीय संस्थाओं और विधान सभाओं में जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों द्वारा शासन की स्थापना ।
2. भारतीय सेना युद्ध में अंग्रेजों की सहायक थी अतः भारत को गृह शासन देकर संतुष्ट करना ।
3. भारतीय राजनीति में उग्रवाद और आतंकवाद को रोक कर शान्ति पूर्वक राष्ट्रीय आन्दोलन करना ।
4. इसका प्रधान उद्देश्य जन साधारण में स्वशासन और राष्ट्रीय भावना का प्रसार करना था ।
आन्दोलन का परिणाम होमरूल आन्दोलन की शक्ति से अंग्रेज भयभीत हो गये तथा इसका दमन करने का निश्चय किया । 'मराठा' 'केसरी' न्यू इण्डिया आदि समाचार पत्रों पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। इस आन्दोलन के नेता तिलक के पंजाब और दिल्ली में प्रवेश पर प्रतिबंध हो गया। एनीवेसेन्ट को गिरफ्तार कर लिया गया। अंग्रेजों के इस दमन-चक्र से पूरे देश में असंतोष व्याप्त हो गया। एनीवेसेन्ट को गिरफ्तार कर लिया गया । अंग्रेजो के इस दमन चक्र से पूरे देश मे असन्तोष व्याप्त हो गया। सभी राष्ट्रीय नेता जो आन्दोलन से दूर थे उसमें सक्रिय भाग लेने लगे ।
राष्ट्रीय आन्दोलन पुनः उग्रवादियो के प्रभाव में आ गया। आंदोलन के प्रभाव को सपाप्त करने के उद्देश्य से 'मांटेग्यू' ने घोषणा की कि धीरे- धीरे भारत मे स्वशासन स्थापित करने का प्रयास होगा। शासन के हर क्षेत्र में भारत - वासियों से सम्पर्क स्थापित किया जायेगा। इस संस्था के आन्दोलन के कारण वायसराय की कार्यकारिणी में भारतीयों को तीन स्थान दिया गया। इस घोषणा से भारतवासी प्रभावित हुए । श्रीमती एनीवेसेट 1917 के कलकत्ता अधिवेशन में कांग्रेस को अध्यक्ष निर्वाचित हुई। इसका परिणाम यह हुआ कि होमरूल आंदोलन शिथिल पड़ गया ।


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