अपनी खुद की सेवानिवृत्ति पर भाषण Retirement Speech सेवानिवृत्ति का मतलब अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत है। एक ऐसा अध्याय जो सिर्फ मेरे लिए लिखा जाएगा
अपनी खुद की सेवानिवृत्ति पर भाषण | Retirement Speech
आदरणीय मुख्य अतिथि महोदय, प्रिय सहकर्मीगण, मेरे प्यारे साथियों, सम्माननीय वरिष्ठों, मेरे परिवार के सदस्यों और यहां उपस्थित सभी प्रियजनों। आज मैं इस मंच पर खड़ा हूं तो मन में एक अजीब-सी हलचल है। खुशी भी है, भावुकता भी है, थोड़ा सा दुख भी है और बहुत सारा कृतज्ञ भाव भी। आज मेरी सेवानिवृत्ति का दिन है। वह दिन जो सालों पहले दूर-दूर लगता था, आज अचानक इतना जल्दी आ पहुंचा है कि लगता है जैसे कल ही मैंने पहली बार इस संस्थान/कार्यालय में कदम रखा था।जब मैंने अपनी पहली नौकरी शुरू की थी तब बाल बिल्कुल काले थे, उत्साह आंखों में चमकता था और सपने बहुत बड़े-बड़े थे। सोचता था कि मैं बहुत कुछ बदल दूंगा, बहुत कुछ कर दिखाऊंगा। आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि हां, कुछ तो बदला, कुछ तो किया, लेकिन सबसे बड़ी बात यह रही कि इस सफर में मैं अकेला नहीं था। आप सब मेरे साथ थे। मेरे हर छोटे-बड़े कदम में आपका साथ, आपकी हंसी, आपकी डांट, आपकी सलाह, आपका विश्वास—यही सब कुछ मेरी ताकत रहा।
इन सालों में कितनी सुबहें ऐसी आईं जब ऑफिस आते वक्त मन में थकान होती थी, लेकिन जैसे ही आप सबके चेहरे दिखते, सारी थकान गायब हो जाती। कितनी शामें ऐसी बीतीं जब कोई समस्या हल नहीं हो रही होती थी, लेकिन टीम की एक-दूसरे की मदद करने की भावना ने सब कुछ आसान बना दिया। हमने साथ मिलकर कितने प्रोजेक्ट पूरे किए, कितनी मुश्किलों का सामना किया, कितनी बार हारे, कितनी बार जीते—हर पल में एक-दूसरे का कंधा उपलब्ध था। आज मुझे गर्व है कि मैंने आपके जैसे अद्भुत लोगों के साथ इतने लंबे समय तक काम किया।कई बार रातें देर तक जागकर फाइलें देखीं, कई बार छुट्टियों में भी फोन पर बातें कीं, कई बार तनाव में भी हंसी-मजाक किया। लेकिन आज जब सब कुछ खत्म होने वाला है तो लगता है कि वे सारी परेशानियां, वे सारी छोटी-छोटी लड़ाइयां, वे सारी जीतें—सब कुछ कितना अनमोल था। यह सब केवल काम नहीं था, यह जीवन का एक बहुत खूबसूरत हिस्सा था जिसे मैंने आपके साथ जिया।मेरे परिवार की भी बात करनी बहुत जरूरी है। मेरी पत्नी/पति, मेरे बच्चे, मेरे माता-पिता—आप सबने मुझे कभी नहीं रोका। जब मैं ऑफिस के चक्कर में घर से दूर रहता था, जब मैं छुट्टियां भी नहीं मना पाता था, जब मैं थका-हारा घर लौटता था—तब भी आपने सिर्फ समझा, सिर्फ साथ दिया, सिर्फ प्रेम दिया। आज अगर मैं इतने सम्मान के साथ इस दिन को देख पा रहा हूं तो इसका बहुत बड़ा हिस्सा आप सबका है। आपने मुझे वह जगह दी जहां से मैं अपने काम को पूरे मन से कर सका।अब आगे क्या? यह सवाल सबके मन में है और मेरे मन में भी। सच कहूं तो मुझे अभी तक पूरा जवाब नहीं मिला है। लेकिन एक बात तय है—अब समय मेरे हाथ में है। अब मैं उन किताबों को पढ़ सकता हूं जो सालों से अलमारी में धूल खा रही हैं। अब मैं उन जगहों पर जा सकता हूं जहां जाने की इच्छा सालों से मन में थी लेकिन समय नहीं मिला। अब मैं अपने पोते-पोतियों के साथ ज्यादा समय बिता सकता हूं, उनके साथ खेल सकता हूं, उन्हें पुरानी कहानियां सुना सकता हूं। अब मैं सुबह की चाय धीरे-धीरे पी सकता हूं बिना किसी फोन कॉल के डर के।लेकिन सबसे बड़ी बात—अब मैं खुद को और ज्यादा समय दे सकता हूं। खुद से बात कर सकता हूं, अपने उन सपनों को देख सकता हूं जो काम की भागदौड़ में कहीं पीछे छूट गए थे।
सेवानिवृत्ति का मतलब अंत नहीं है, यह एक नई शुरुआत है। एक ऐसा अध्याय जो सिर्फ मेरे लिए लिखा जाएगा, जिसमें नियम कम होंगे, जिम्मेदारियां हल्की होंगी और खुशियां ज्यादा होंगी।अंत में मैं बस इतना कहना चाहता हूं—आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। आपने मुझे सिर्फ सहकर्मी नहीं, परिवार का हिस्सा बनाया। आपने मुझे सिर्फ काम नहीं सिखाया, जीवन जीना सिखाया। आज मैं जा रहा हूं लेकिन मेरे दिल में आप सब हमेशा रहेंगे। जब भी कोई पुरानी याद आएगी, जब भी कोई पुरानी फाइल हाथ लगेगी, जब भी कोई पुराना फोटो देखूंगा—आप सबकी मुस्कान मेरे सामने आएगी।अगर मैंने कभी किसी का दिल दुखाया हो, किसी से गलती से भी कटु शब्द कह दिए हों—उसके लिए दिल से माफी मांगता हूं। और अगर मैंने कभी किसी की मदद की, किसी का हौसला बढ़ाया, किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई—तो उसका श्रेय भी आप सबको जाता है, क्योंकि आप सबके बिना मैं वह इंसान नहीं बन पाता जो आज यहां खड़ा है।अब मैं अपनी बात को विराम देता हूं।
बस इतना कहना चाहता हूं—आप सब स्वस्थ रहें, खुश रहें और हमेशा इसी तरह एक-दूसरे का साथ देते रहें। मैं जा रहा हूं लेकिन मेरी शुभकामनाएं और मेरा प्यार हमेशा आपके साथ रहेगा।
बहुत-बहुत धन्यवाद।
जय हिंद!


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