Holi Speech 2026 होली पर भाषण हिंदी में प्रिय मित्रों, आदरणीय अतिथिगण, सम्माननीय शिक्षकों और मेरे सभी प्यारे साथियों,नमस्कार। आज हम सब इस रंग-बिरंग
Holi Speech 2026 | होली पर भाषण हिंदी में
प्रिय मित्रों, आदरणीय अतिथिगण, सम्माननीय शिक्षकों और मेरे सभी प्यारे साथियों,नमस्कार। आज हम सब इस रंग-बिरंगे उत्सव के बीच एकत्र हुए हैं, जहाँ हवा में गुलाल की महक फैली हुई है, जहाँ हर चेहरा मुस्कान से चमक रहा है और जहाँ दिलों में प्रेम और उल्लास का संचार हो रहा है। यह पल है होली का, फाल्गुन की पूर्णिमा का, वह त्योहार जो सदियों से हमें सिखाता आ रहा है कि जीवन कितना विविधतापूर्ण और कितना सुंदर हो सकता है जब हम एक-दूसरे के साथ रंग बाँटते हैं, जब हम पुरानी कटुता को आग में झोंक देते हैं और नए सिरे से रिश्तों की शुरुआत करते हैं।
इस वर्ष 2026 में होली कुछ खास परिस्थितियों के कारण और भी अधिक चर्चा में है। चंद्र ग्रहण का संयोग, पूर्णिमा तिथि का दो दिनों में फैलाव, भद्रा का प्रभाव और विभिन्न पंचांगों में थोड़ा-बहुत अंतर—इन सबके कारण लोग पूछ रहे हैं कि होलिका दहन कब होगा और रंग वाली होली किस दिन खेली जाएगी। कुछ जगहों पर होलिका दहन 2 मार्च की रात को हो चुका है या हो रहा है, तो कुछ स्थानों पर 3 मार्च को, लेकिन अधिकांश विद्वानों और आम परंपरा के अनुसार चंद्र ग्रहण के प्रभाव को देखते हुए रंगों की होली मुख्य रूप से 4 मार्च को धूमधाम से मनाई जा रही है। यह ग्रहण 3 मार्च को दोपहर से शाम तक रहेगा, जिसके कारण सूतक और अन्य नियमों ने तिथि को प्रभावित किया है। लेकिन इन सब खगोलीय और ज्योतिषीय गणनाओं के बीच एक बात स्पष्ट है—होली की आत्मा तिथि से नहीं, बल्कि हमारे मन की शुद्धता और प्रेम से जीवित रहती है। चाहे रंग 3 मार्च को छिड़के या 4 मार्च को, उत्सव का सार वही रहता है—बुराई का अंत और अच्छाई की स्थापना।
होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है, यह जीवन का एक गहरा दर्शन है। जैसे अलग-अलग रंग एक साथ मिलकर इंद्रधनुष की सुंदरता बनाते हैं, वैसे ही हमारे समाज में अलग-अलग जाति, धर्म, विचार और संस्कृति के लोग मिलकर एक मजबूत इंद्रधनुषी राष्ट्र का निर्माण करते हैं। जब हम किसी के माथे पर गुलाल लगाते हैं तो वह केवल रंग नहीं लगता, बल्कि एक माफी माँगने का, एक स्वीकार करने का और एक नए संबंध की शुरुआत का प्रतीक बन जाता है। जब पिचकारी से रंग की धार छूटती है तो वह सिर्फ पानी और रंग की बौछार नहीं होती, बल्कि खुशियों, हँसी और एक-दूसरे के प्रति स्नेह की वर्षा होती है। और जब हम एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तो वह मिलन सिर्फ शारीरिक नहीं होता, बल्कि आत्माओं का मिलन होता है, जहाँ पुरानी शिकायतें, ईर्ष्या, द्वेष सब कुछ होलिका की आग में जलकर राख हो जाते हैं।
यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि जीवन में रंग कितने महत्वपूर्ण हैं। बिना रंग के जीवन कितना फीका हो जाता है। लेकिन इन रंगों को हमें सावधानी से चुनना चाहिए—प्राकृतिक रंग जो हमारी त्वचा को नुकसान न पहुँचाएँ, जो पर्यावरण को प्रदूषित न करें। आज के समय में जब हम पर्यावरण की रक्षा की बात करते हैं, होली हमें यह भी सिखाती है कि उत्सव मनाना है तो जिम्मेदारी से मनाना है। हम जबरदस्ती किसी पर रंग नहीं डालेंगे, सम्मान और सहमति का पूरा ख्याल रखेंगे। हम बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर दिल वालों का विशेष ध्यान रखेंगे ताकि यह त्योहार सबके लिए आनंददायक बने। और सबसे बड़ी बात, हम नफरत की आग को कभी अपने दिल में नहीं जलने देंगे, बल्कि प्रेम की होली हर दिन जलाए रखेंगे।
आज इस मौके पर मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि इस होली को सिर्फ एक दिन का उत्सव न बनाएँ। इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएँ। हर रोज एक-दूसरे के साथ प्रेम से पेश आएँ, छोटी-छोटी बातों पर मन न जलाएँ, माफ करना सीखें और माफी माँगना भी सीखें। क्योंकि असली होली तो वही है जब हमारे मन रंगों से भर जाते हैं—खुशी के रंग से, प्रेम के रंग से, एकता के रंग से।
तो मेरे प्यारे दोस्तों, इस होली पर आपके जीवन में ढेर सारे रंग भर आएँ। आपकी हर सुबह गुलाल की तरह चमके, हर शाम अबीर की तरह महके और हर रात चंदन की तरह शीतल रहे। आपके रिश्ते मजबूत हों, आपके सपने रंगीन हों और आपका हर पल होली जैसा उत्सवपूर्ण बने।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।
रंग बरसें, खुशियाँ बरसें, प्रेम बरसे।
जय होली! जय भारत!
धन्यवाद।


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