मकर संक्रांति 2026 पर भाषण Makar Sankranti 2026 Speech प्रकृति में एक नई ऊर्जा, एक नया उत्साह और एक नई उम्मीद का संचार होता है।मकर संक्रांति केवल एक
मकर संक्रांति 2026 पर भाषण | Makar Sankranti 2026 Speech
आदरणीय अतिथिगण, सम्माननीय शिक्षकगण, मेरे प्यारे मित्रों और मेरे छोटे-बड़े सभी भाइयों-बहनों,नमस्कार! आज हम सब यहाँ एक साथ इकट्ठा हुए हैं उस महान पावन पर्व मकर संक्रांति के अवसर पर, जो इस बार 14 जनवरी 2026, बुधवार के दिन मनाया जा रहा है। यह वह खास दिन है जब सूर्यदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और हमारी भारतीय संस्कृति में इस क्षण को उत्तरायण की शुरुआत माना जाता है। यह वह क्षण है जब सूर्य की किरणें उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगती हैं, दिन बड़े होने लगते हैं और ठंड धीरे-धीरे विदा लेने की तैयारी करती है।
प्रकृति में एक नई ऊर्जा, एक नया उत्साह और एक नई उम्मीद का संचार होता है।मकर संक्रांति केवल एक तारीख या एक त्योहार नहीं है, यह हमारी सनातन संस्कृति का एक जीवंत प्रतीक है जो हमें हर साल याद दिलाता है कि जीवन में भी परिवर्तन आवश्यक है, गति आवश्यक है और सकारात्मक दिशा में बढ़ना ही जीवन का असली मकसद है। जैसे सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं, वैसे ही हमें भी अपने पुराने नकारात्मक विचारों, आलस्य, क्रोध और ईर्ष्या को छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। यह त्योहार हमें सिखाता है कि जैसे खेतों में नई फसलें लहलहाने लगती हैं, वैसे ही हमारे जीवन में भी नए संकल्प, नए सपने और नई उपलब्धियों की फसल तैयार होनी चाहिए।इस दिन सुबह-सुबह पवित्र नदियों में स्नान करना, सूर्य को अर्घ्य देना, तिल-गुड़ का दान करना, काले तिल से बनी मिठाइयाँ खाना, पतंग उड़ाना और अपने घर-परिवार के साथ मिल-बैठकर खुशियाँ मनाना — ये सब केवल रीति-रिवाज नहीं हैं, बल्कि हमारे पूर्वजों की गहरी समझ का परिणाम हैं। तिल और गुड़ का मिलन हमें सिखाता है कि कड़वाहट और मिठास दोनों जीवन में जरूरी हैं, पर जब दोनों साथ आ जाएँ तो जीवन का स्वाद अनोखा और सुंदर हो जाता है। पतंग उड़ाना हमें याद दिलाता है कि ऊँचा उठना है, पर धागे की मजबूती यानी अपने मूल्यों, संस्कारों और परिवार के साथ जुड़े रहना भी उतना ही आवश्यक है।हमारे देश की विविधता को देखिए — इस एक ही पर्व को अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
उत्तर भारत में खिचड़ी, गुजरात में पतंगबाजी और उत्साह, महाराष्ट्र में तिलगुड़, पंजाब में लोहड़ी का आगाज, आंध्र-तेलंगाना में पोंगल, तमिलनाडु में पोंगल, असम में माघ बिहू और कर्नाटक में एलु नेल्लु पल्ल्य — हर क्षेत्र में यह त्योहार अपनी अलग पहचान के साथ मनाया जाता है, पर भाव एक ही है — कृतज्ञता, एकता और नवजीवन का स्वागत।आज जब हम 2026 में खड़े हैं, तो यह समय बहुत खास है। दुनिया तेजी से बदल रही है, चुनौतियाँ बढ़ रही हैं, पर मकर संक्रांति हमें याद दिलाती है कि कठिनाइयों के बाद भी सूरज उगता है, फसलें लहलहाती हैं और जीवन आगे बढ़ता है।
हमें भी अपने जीवन में उस सूर्य की तरह ऊर्जावान, दृढ़ और दिशा-निर्धारित होना है। पढ़ाई में, काम में, रिश्तों में, समाज सेवा में — हर क्षेत्र में हमें उत्तरायण की तरह आगे बढ़ना है।
मेरे प्यारे दोस्तों,
आइए आज के इस पवित्र दिन पर हम सब संकल्प लें —
हम अपने अंदर की नकारात्मकता को तिल की तरह जलाकर भस्म कर देंगे,
गुड़ की तरह मिठास बिखेरेंगे,
पतंग की तरह ऊँचा उड़ेंगे,
और सबसे महत्वपूर्ण — हम अपने देश, समाज और परिवार के लिए कुछ बेहतर करने का वचन लेंगे।
अंत में बस यही प्रार्थना है कि सूर्यदेव हमें ऐसी शक्ति दें कि हम हर दिन को मकर संक्रांति की तरह उत्साह, प्रकाश और सकारात्मकता से जी सकें।
सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!
जय सूर्यदेव! जय हिंद!
धन्यवाद!


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