मादुरो का अंत | अमेरिका का वेनेजुएला पर ऐतिहासिक हमला 3 जनवरी 2026 की सुबह वेनेजुएला के लिए एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाली रात साबित हुई। अचानक आधी रात
मादुरो का अंत | अमेरिका का वेनेजुएला पर ऐतिहासिक हमला
3 जनवरी 2026 की सुबह वेनेजुएला के लिए एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाली रात साबित हुई। अचानक आधी रात के करीब दो बजे काराकास और आसपास के इलाकों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें गूंजने लगीं। बिजली गुल हो गई, सड़कें खाली पड़ गईं और लोग घरों के अंदर छिपने लगे। अमेरिकी विशेष बलों ने एक सुनियोजित और अत्यंत गोपनीय ऑपरेशन चलाया, जिसे 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' नाम दिया गया। इस ऑपरेशन में सैकड़ों लड़ाकू विमान, ड्रोन और स्पेशल फोर्सेस शामिल थीं। पहले हवाई हमलों से वेनेजुएला की वायु रक्षा प्रणाली को निशाना बनाया गया, फिर विशेष बलों की एक टीम राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के आवास या उनके सुरक्षित ठिकाने पर पहुंची। वहां से मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लेकर तेजी से अमेरिकी विमान में सवार कर लिया गया। तीन घंटे से भी कम समय में पूरा ऑपरेशन खत्म हो चुका था।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अगले ही दिन एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस कार्रवाई की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि यह ऑपरेशन मुख्य रूप से ड्रग तस्करी के खिलाफ था, क्योंकि मादुरो पर अमेरिकी अदालतों में दशकों पुराने ड्रग तस्करी के गंभीर आरोप थे। ट्रंप ने इसे एक सफल "कानून प्रवर्तन अभियान" बताया और दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए, जिसमें ड्रग्स से जुड़े जहाजों और सुविधाओं को नष्ट किया गया। लेकिन उन्होंने एक और बड़ा ऐलान किया, जो पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाला था। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला को "अस्थायी रूप से चलाएगा" जब तक कि वहां एक "सुरक्षित, उचित और न्यायपूर्ण" राजनीतिक संक्रमण नहीं हो जाता। उन्होंने खुले तौर पर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडारों का जिक्र किया और कहा कि इनका इस्तेमाल देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने और अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए किया जाएगा।इस हमले से पहले कई महीनों से तनाव बढ़ रहा था। 2025 के अंत में अमेरिका ने कैरिबियन में अपनी नौसेना और सैन्य ताकत बढ़ाई थी। कई युद्धपोत, विमान वाहक पोत और हजारों सैनिक तैनात किए गए थे। पहले छोटे-छोटे हमलों में कथित ड्रग तस्कर जहाजों को निशाना बनाया गया था। वेनेजुएला की सेना और सरकार इसे "आक्रमण की तैयारी" बता रही थी।मादुरो ने अपनी बोलिवेरियन मिलिशिया को तैयार रहने का आदेश दिया था और देश को "अधिकतम सतर्कता" पर रखा था। लेकिन वास्तव में वेनेजुएला की सेना पुरानी रूसी हथियारों और आर्थिक संकट से इतनी कमजोर हो चुकी थी कि अमेरिकी बलों को लगभग कोई प्रतिरोध नहीं मिला। रिपोर्टों के मुताबिक वेनेजुएला पक्ष से दर्जनों सुरक्षा कर्मी और संभवतः कुछ क्यूबाई सैन्य सलाहकार मारे गए, जबकि अमेरिकी ओर से कोई हताहत नहीं हुआ।दुनिया की प्रतिक्रियाएं बंट गईं। रूस, चीन, क्यूबा और कई लैटिन अमेरिकी देशों ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की। इसे संप्रभुता का घोर उल्लंघन, अंतरराष्ट्रीय कानून का हनन और साम्राज्यवादी हस्तक्षेप बताया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इसे "खतरनाक मिसाल" कहा। वहीं कुछ देशों ने चुप्पी साध ली या हल्की प्रतिक्रिया दी। भारत ने "गहरी चिंता" जताई और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।वेनेजुएला में मादुरो के पकड़े जाने के बाद राजनीतिक संकट गहरा गया। उपराष्ट्रपति और अन्य मंत्री स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन देश में विरोध प्रदर्शन, बिजली संकट और अनिश्चितता का माहौल है। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह तेल के उत्पादन और निर्यात को नियंत्रित करेगा, जिससे वैश्विक तेल बाजार में हलचल मच गई है।
कई विश्लेषक इसे तेल के लिए युद्ध मान रहे हैं, कुछ इसे अमेरिकी डॉलर की वैश्विक प्रधानता बचाने की कोशिश बता रहे हैं, क्योंकि वेनेजुएला चीन के साथ युआन में तेल व्यापार कर रहा था।कुल मिलाकर यह हमला सिर्फ एक व्यक्ति या ड्रग्स की गिरफ्तारी से कहीं ज्यादा बड़ा है। यह दशकों पुरानी अमेरिकी नीति का नया अध्याय है, जिसमें लैटिन अमेरिका में अपना प्रभाव बनाए रखना और चीन-रूस के बढ़ते कदमों को रोकना शामिल है। आने वाले दिनों में वेनेजुएला का भविष्य, उसका तेल और पूरे क्षेत्र की स्थिरता इस घटना के इर्द-गिर्द ही घूमेगी।


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