Rang Jati Ek Ritu Poem Hindi Class 8

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रंग जाती एक ऋतु भारत भूषण अग्रवाल Rang Jati Ek Ritu Poem Hindi Class 8 नूतन गुंजन हिंदी पाठ्यपुस्तक question answer रंग जाती एक ऋतु कविता का भावार्थ

रंग जाती एक ऋतु - भारत भूषण अग्रवाल


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रंग जाती एक ऋतु कविता का भावार्थ व्याख्या 


हँसते-खिलखिलाते रंग-बिरंगे
फूल क्यारी में देखकर 
जी तृप्त' हो गया।
नथुनों से प्राणों तक खींच गई 
गंध की लकीर-सी
आँखों में हो गई रंगों की बरसात
अनायास कह उठा
वाह 
धन्य है वसंत ऋतु!

भावार्थ - प्रस्तुत पंक्तियाँ  रँग जाती एक ऋतु  कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता कवि  भारत भूषण अग्रवाल  जी हैं | इन पंक्तियों के माध्यम से कवि फूल और वसंत ऋतु का वर्णन करते हुए कहते हैं कि क्यारी में कितने सुन्दर-सुन्दर फूल खिले हैं, रंग-बिरंगे इन सुन्दर हँसते हुए फुलों को देखकर मन में आंनद की अनुभूति हो रही है | लग रहा है जैसे इसकी सुगन्ध एक लकीर खींचते हुए नाकों से होकर सीधे मन के भीतर चले गए हों। आँखों को ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे बरसात की बूँदों की तरह फूलों का बरसात हो रहा है। यह सब देखकर कवि यूँ ही कहते हैं कि वाह धन्य है वंसत ऋतु जो इतना सुहावन है | 

लौटने को पैर ज्यों बढाए तो 
क्यारी के कोने में दुबका 
एक नन्हा फूल अचानक बोल पड़ा
सुनो,
एक छोटा-सा सत्य तुम्हें सौंपता हूँ
धन्य है वसंत ऋतु, तो ठीक है! 
पर उसकी धन्यता उसकी कमाई नहीं
वह हमने रची है,
हमने 
यानी मैंने

भावार्थ - 
प्रस्तुत पंक्तियाँ  रँग जाती एक ऋतु  कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता कवि  भारत भूषण अग्रवाल  जी हैं | इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने फूल और वसंत ऋतु का वर्णन किया है | जब कवि वसंत ऋतु की तारीफ करते हैं और वापस जाने के लिए जैसे ही पैर उठाते हैं, तभी क्यारी का एक नन्हा सा फूल कवि को कहता है सुनो एक छोटी सी सच्चाई तुम्हें बताती हूँ | तुम वंसत ऋतु की तारीफ कर रहे हो वो धन्य है, वो सब तो ठीक है लेकिन यह धन्यता उसकी खुद की मेहनत नहीं है, यह सुन्दरता और खुशबू हमने रची है यानी कि मैंने यह सब किया है | 

Rang Jati Ek Ritu Poem Hindi Class 8
रंग जाती एक ऋतु

मुझ जैसे अनगिनत साथियों ने 

जिन्होंने इस क्यारी में अपने-अपने ठाँव पर
धूप और बरसात,
जाड़ा और पाला झेल
सूरज को तपा है पूरी आयु  एक पाँव पर।
तुमने ऋतु को बखाना,
पर क्या  कभी पल भर भी 
तुम उस लौ को भी देख सके

भावार्थ - 
प्रस्तुत पंक्तियाँ  रँग जाती एक ऋतु  कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता कवि  भारत भूषण अग्रवाल  जी हैं | इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने फूल और वसंत ऋतु का वर्णन किया है | नन्हा फूल कवि को कहता है कि वसन्त ऋतु की सारी सुंदरता हमने रची है, मुझ जैसे और कितने नन्हें-नन्हें फूल हैं इस क्यारी में जो अपने स्थान में रहकर धूप, बरसात, ठण्ड और ठंडी से पड़ने वाले पाले को झेला है। उस सूरज की भीषण गर्मी को सहकर हमने पूरा जीवन इस क्यारी में बिताया है एक ही पौधे में रहकर और तुम आकर उस वसंत ऋतु का बखान कर रहे हो | कभी हमारे बारे में नहीं सोचा,  हमारी मेहनत और परिश्रम को कभी नहीं समझा।  

जिसके बल 
मैंने और उसने 
यानी मेरे एक-एक साथी ने
मिट्टी ने अँधेरा फोड़
सूरज से आँखें मिलाई हैं?
उसे यदि जानते तो तुमसे भी
रँग जाती एक ऋतु।

भावार्थ - प्रस्तुत पंक्तियाँ  रँग जाती एक ऋतु  कविता से उद्धृत हैं, जिसके रचयिता कवि  भारत भूषण अग्रवाल  जी हैं | इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने फूल और वसंत ऋतु का वर्णन किया है | नन्हा सा फूल कवि को अपनी जीवन के संघर्ष को बताते हुए आगे कहता है कि क्या तुम्हें पता है मैं और मेरे सभी साथी एक रौशनी की तलाश में धरती का अँधेरा चिर कर अंकुरित होते हैं और बाहर निकलते हैं और उस तपते सूरज से सामना करके संघर्ष करते हुए आगे बढ़ते हैं। अगर तुम लोग भी उस संघर्ष और परिश्रम को समझ पाते तो तुम से भी एक नई ऋतु की शुरुआत हो जाती एक ऋतु तुम्हारे रंग से भी रंग जाती। 


रंग जाती एक ऋतु कविता का सारांश

प्रस्तुत पाठ रँग जाती एक ऋतु , कवि भारत भूषण अग्रवाल जी के द्वारा लिखित है। इस कविता के माध्यम से कवि बताना चाहते हैं कि परिश्रम और साधना का फल जरूर मिलता है। जैसे नन्हें-नन्हें पौधे सारे कष्ट सहकर आगे बढ़ते गए और साधना की तो उन पर सुंदर-सुन्दर फूल खिलने लगे और उन फूलों की सुंदरता से ही क्यारी की शोभा बढ़ गई। और चारों ओर सुगंध फैल गई, मौसम भी सुहावन लगने लगा | इन फूलों ने ही वसंत ऋतु की शोभा बढ़ाई है इन्हीं फूलों के कारण ही वसंत ऋतु को ऋतुराज भी कहा जाता है। कवि इस कविता में यही सीख देना चाहते हैं कि हमें जीवन में हमेशा संघर्ष करना चाहिए | सामने आए मुसीबतों का दृढ़ता से सामना करना चाहिए, क्योंकि मेहनत कभी खाली नहीं जाती | उसका परिणाम हमें अच्छा ही मिलता है | जैसे फूलों को सुंदरता, अच्छी सुंगध और रँग मिली है, वैसे ही मनुष्य का जीवन भी परिश्रम करके खुशियों और अनेक रंगों से भर सकती है | बस हमें मेहनत के साथ आगे बढ़ना है। फूलों ने सर्दी, गर्मी, बरसात, पाला सभी कष्टों को झेला लेकिन कभी मायूस नहीं हुए, बल्कि मुसीबतों का सामना किया, सूरज की धूप को सहकर भी उन्होंने एक पौधे में रहकर संघर्ष किया। नन्हें फूलों को भी जब अपने-आप को जीवित रखने के लिए प्रकृति से संघर्ष करना पड़ता है तो मनुष्य को भी करना पड़ेगा, क्योंकि प्रकृति में सब को संघर्ष करना पड़ता है...|| 



Question Answer of Rang Jati Ek Ritu Poem


प्रश्न-1 फूल को देखकर कवि को क्या अनुभव हुआ ? 

उत्तर - हँसते-खिलखिलाते, रंग-बिरंगे फूल क्यारी में देखकर कवि का मन तृप्त हो गया, उन्हें आंनद का अनुभव हुआ। 

प्रश्न-2 कवि ने बसंत ऋतु को धन्य क्यों माना ?

उत्तर- कवि ने वसंत ऋतु को धन्य इसलिए माना है क्योंकि इस मौसम में चारो तरफ हरियाली होती है, रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं जिसमें से मन को तृप्त करने वाली खुशबू चारों ओर बिखर जाती है, पेड़-पौधों में नए-नए पत्ते और कलियां निकल आते हैं | 

प्रश्न-3 नन्हें फूल ने कवि से क्या कहा ? 

उत्तर- नन्हें फूल ने कवि से कहा कि सुनो एक छोटा सा सच तुम्हें बताती हूँ | बसन्त ऋतु धन्य है वह बात तो ठीक है लेकिन उसकी धन्यता उसने कमाई नहीं है, उसे हमने रची है। मुझ जैसे कितने और साथियों ने इसे धूप, सर्दी, गर्मी, बरसात को झेल कर इस ऋतु में सजाया है और तुम ऋतु का बखान कर रहे हो। 

प्रश्न-4 'लौ' तथा 'अँधेरा' किसके प्रतीक है ? 

उत्तर-  इस कविता में 'लौ' का अर्थ है सूरज की तपती किरण, जिसे फूलों ने देख है और 'अँधेरा' का अर्थ मिट्टी में दबा होना, जिससे निकल कर फूल सूरज की ताप से सामना करते हैं। 

प्रश्न-5 'खिंच गई गन्ध की लकीर-सी' द्वारा कवि क्या कहना चाहते हैं ? 

उत्तर- प्रस्तुत कविता में कवि प्रदत्त पंक्ति के माध्यम से कहना चाहते हैं कि वसंत ऋतु में चारों तरफ फूलों की खुशबू बिखर जाती है | वातावरण सुगंधमय हो जाता है | मन को आनंद की अनुभूति होती है। खुशबू नाकों से होते हुए भीतर तक पहुँच जाती है ऐसा लगता है मानो यह सुगंध लकीर बनाते हुए भीतर तक पहुँच गई हो। 

प्रश्न-6 फूलों के रंगों से कवि को 'रंगों की बरसात' का अनुभव क्यों होने लगा ? 

उत्तर- फूलों के रंगों से कवि को 'रंगों की बरसात' का अनुभव इसलिये होने लगा क्योंकि वसंत ऋतु का मौसम ही ऐसा होता है, चारो ओर रंग-बिरंगे फूल खिले होते हैं, लगता है बसारत के दिनों में बून्द-बून्द बारिश हो रही है | उसी तरह से रंग-बिरंगे फूलों का भी बरसात हो रहा है। सभी जगह सुन्दर-सुन्दर फूल बिखरे हुए हैं। 

प्रश्न-7 फूल ने अपनी किन-किन कठिनाइयों का वर्णन किया ? 

उत्तर- 
फूलों ने अपनी कई कठिनाईयों का वर्णन किया है , वे कहते हैं कि किस प्रकार से वे सर्दी, गर्मी, बरसात, पाला सभी को सह कर खुद को सुरक्षित रखते हैं | मिट्टी में दबे रहने के बाद जब अंकुरित होकर बाहर निकलते हैं तो सूरज के तपती धूप का सामना करना पड़ता है | वे इन सभी कठिनाई को झेल कर एक फूल के रूप में खिलते हैं। 

प्रश्न-8 'सूरज को तपा है पूरी आयु एक पाँव पर' का भावार्थ क्या है ? 

उत्तर- 
प्रस्तुत पंक्ति में फूल कवि से कहते हैं कि मैं और मेरी साथियों ने सर्दी, बरसात, गर्मी और पाले को झेला है | हमने सदा ही उस सूरज की तपती धूप को देखा और महसूस किया जिसे कोई नहीं देख सकता | हमने सभी कठिनाई का साहसपूर्वक सामना किया है।  

प्रश्न-9 इस कविता के द्वारा कवि क्या संदेश देना चाहते हैं ? 

उत्तर- 
इस कविता के द्वारा कवि यह संदेश देना चाहते हैं कि हमे सदा फूलों की मेहनत और परिश्रम का सम्मान करना चाहिए | उनकी देख-भाल करनी चाहिए और जीवन में कैसी भी परिस्थिति सामने  हो उनका हमेशा सामना करना चाहिए। उससे डरना नहीं चाहिए। फूल भी हमें यही सिखाते हैं वे स्वयं दुख सहकर हमें खुशी देते हैं, हमें भी फूलों की भांति बनना चाहिए। 

प्रश्न-10 सही उत्तर पर √ लगाइये --- 

(क)- कवि का जी कैसे तृप्त हो गया ? 
भारत भूषण अग्रवाल
भारत भूषण अग्रवाल

उत्तर- 
क्यारी में रंग- बिरंगे फूल देखकर (√)


(ख)- वसंत ऋतु की धन्यता किसने रची है ? 

उत्तर-    फूलों ने (√)

(ग)- फूल को कवि से क्या शिकायत है ? 

उत्तर- उसने फूलों के संघर्ष को नहीं देखा (√)

प्रश्न-11  इन शब्दों के समानार्थी पाठ से चुनकर लिखिए --- 

उत्तर- उत्तर निम्नलिखित है - 

• खुशबू - सुगन्ध
• सहसा - अनायास
• बारिश - बरसात
• संतुष्ट - तृप्त
• मौसम - ऋतु
• शरदी - जाड़ा
• सुमन - फूल
• सूर्य - सूरज

प्रश्न-12 अनगिनत शब्द में 'अन' उपसर्ग जोड़ा गया है। अधि (ऊपर), अप (बुरा, हीन), अव (नीचे, बुरा), अभि (सामने), उप (निकट, गौण), सम् सहित) भी उपसर्ग है। 

इन उपसर्गों से एक-एक शब्द बनाइये --- 

उत्तर- 
उत्तर निम्नलिखित है - 
• अधि - अधिपति
• अभि - अभिमुख
• अप - अपशब्द
• उप - उपस्थित
• अव - अवगुण
• सम् - संकल्प

प्रश्न-13 नन्हा फूल अनगिनत साथी - इन शब्दों में नन्हा तथा अनगिनत विशेषण हैं और फूल तथा साथी विशेष्य हैं। 

इन पदबंधों से विशेषण और विशेष्य अलग करके लिखिए --- 

रंग-बिरँगे फूल, छोटा-सा सत्य, सुगन्धित हवा, संतुष्ट व्यक्ति, गंभीर प्रश्न, छोटी-छोटी आँखें

उत्तर-  उत्तर निम्नलिखित है -  

विशेषण                  विशेष्य

• रंग-बिरँगे                   फूल
• छोटा-सा                   सत्य 
• सुगन्धित                   हवा 
• संतुष्ट                        व्यक्ति
• गंभीर                       प्रश्न
• छोटी-छोटी            आँखें


प्रश्न-14 अंतर जानिए - रंग (वर्ण) संज्ञा शब्द है जबकि उससे बना रँगना क्रिया शब्द है, जिसकी धातु है रँग। इससे शब्द बने रँग जाना, रँग देना, रँगाई। 

इसी प्रकार 'बंधन' शब्द से क्रिया के रूप बनाइये --- 

उत्तर- 
उत्तर निम्नलिखित है -  

बंध जाना, बंधना, बाँध देना।

प्रश्न-15 अनगिनत का अर्थ है- जिसकी गिनती न की जा सके ।

इसी प्रकार इन वाक्यांशों के लिए एक शब्द लिखिए --- 

उत्तर- उत्तर निम्नलिखित है - 

• जो देखने के योग्य हो - दर्शनीय
• दूसरों पर आश्रित रहने वाला - पराश्रित
• जिसे जितना कठिन हो - दुर्जेय
• पत्तों से बनाई गई कुटी - पर्णकुटी

प्रश्न-16 दिए गए अनुच्छेद को कोष्ठक में से सही शब्द चुन कर पूरा कीजिये --- 

उत्तर- बसंत ऋतु को ऋतुराज ( रितुराज, ऋतुराज) भी कहा जाता है। इस ऋतु में प्रकृति (प्रकृति, पृकृति) का अनूठा श्रृंगार (श्रंगार, श्रृंगार) देखने को मिलता है। चारों ओर रंग-बिरँगे पुष्पों की सुंदरता और सुगन्ध मन को हर लेती है। यह ऋतु सुहावनी, अदभुत तथा आकर्षक  ( आकर्षक, आर्कषक) होती है। मनुष्यों तथा पशु-पक्षियों में भी नए रक्त का संचार (संचार, सचंर) होने लगता है। पुष्पों पर तितलियाँ मंडराने लगती है, भंवरे  गुँजार  (गुँजार, गुंजार) करने लगते हैं। कोयल वृक्षों पर कूकने लगती हैं। वसंत-पंचमी और होली इस ऋतु के प्रमुख (प्रमुख, प्रमूख) पर्व हैं। 


रंग जाती एक ऋतु कविता के शब्दार्थ 

सुगन्ध - खुशबू
अनायास - सहसा
बारिश - बरसात
तृप्त - संतुष्ट
ऋतु - मौसम
जाड़ा - शर्दी
सुमन - फूल
सूरज - सूर्य
• अनगिनत - असंख्य
क्यारी - बगीचा
लौ - रौशनी
नन्हा - छोटा 
                              

 © मनव्वर अशरफ़ी 

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