गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण

SHARE:

गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण गोदान के नारी पात्र गोदान में स्त्री पात्र का चरित्र चित्रण मालती पात्र है मालती का चरित्र चित्रण गोदान प्रेमचंद मालती का चरित्र godan novel malti godan novel malti characters in hindi मालती अपने परिवार के प्रति पूर्णरूप से समर्पित है। वह अपनी सीमित आय से अपने परिवार का जीवनयापन करती है। उसके अपाहिज माता-पिता - बिगडे रईसों की आदतों से ग्रसित हैं। उन्हें मांस-मदिरा के बिना भोजन भी नहीं रुचता।

गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण


गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण  गोदान के नारी पात्र गोदान में स्त्री पात्र का चरित्र चित्रण मालती पात्र है मालती का चरित्र चित्रण गोदान प्रेमचंद मालती का चरित्र godan novel malti godan novel malti characters in hindi - उपन्यास सम्राट प्रेमचन्द नारी को सदैव त्याग, मंगल और पवित्रता की अधिष्ठात्री देवी के रूप में मानते थे। इसी प्रेरणा के वशीभूत होकर अपने 'गोदान' में उन्होंने मालती का चरित्र उज्जवल रूप में चित्रित किया है। मालती का चरित्र न केवल स्त्री-पात्रों में वरन् पुरुष पात्रों में भी अधिक विकासमान है। मालती का चरित्र बडा ही आकर्षक और रहस्यात्मक है कि पाठक उपन्यास के प्रारम्भ से अन्त तक उसे जिज्ञासु की भाँति बडे कौतुहल से देखता रहता है। जहाँ प्रारम्भ में वह घृणा की पात्र बनती है वहीं बाद में वह पाठकों की श्रद्धा का पात्र बन जाती है। 'गोदान' में उसकी निम्नलिखित चारित्रिक विशेषताएँ उभरकर हमारे सामने आती हैं -  

सौम्य व्यक्तित्व

मालती कमल की भाँति खिली, दीपक की भाँति प्रकाशवती, स्फूर्ति एवं उल्लास की प्रतिमा तथा नि:शंक सौम्य व्यक्तित्व वाली स्त्री है। उसे यह पूर्ण विश्वास है कि संसार में उसके लिये आदर और सुख का द्वार सर्वथा खुला हुआ है। वह इंग्लैण्ड से डॉक्टरी पास करके आयी है और लखनऊ में अपनी प्रैक्टिस करती है। भारतीय संस्कार तो उसमें कूट-कूट के भरे हुए हैं। वहीं वह एक विचारशील स्त्री है। विदेशी तड़क-भड़क तो उसका ऊपरी मुलम्मा प्रतीत होता है। प्रेमचन्द की दृष्टि में उसका स्वरूप आधुनिक 'सोसाइटी गर्ल' की समता रखता है। उसके वाह्य व्यवहार से तो ऐसा प्रतीत होता है कि वह किसी की भी अंकशायिनी बनने को उद्यत रहती हो परन्तु उसकी सौम्यता उसकी नारी सहज दृढ़ता को पूर्णरूप से स्पष्ट कर देती है।उसे सम्पूर्ण वाह्य प्रदर्शन केवल अपनी विषम परिस्थितियों द्वारा उत्पन्न समस्याओं के निराकरण के लिए ही करने पड़ते हैं। स्वयं प्रेमचन्द जी भी उसके सम्बन्ध में कहते हैं- "मालती बाहर से तितली है भीतर से मधुमक्खी।" उसका यही व्यक्तित्व उसकी विवशताओं का अनुचित लाभ उठाने की अभिलाषा वालों को अपना जहरीला दंश मारकर दूर भगाने की पूर्ण सामर्थ्य रखता है। 

परिवार के प्रति समर्पण 

 मालती का चरित्र चित्रण
 मालती का चरित्र चित्रण
मालती अपने परिवार के प्रति पूर्णरूप से समर्पित है। वह अपनी सीमित आय से अपने परिवार का जीवनयापन करती है। उसके अपाहिज माता-पिता - बिगडे रईसों की आदतों से ग्रसित हैं। उन्हें मांस-मदिरा के बिना भोजन भी नहीं रुचता। अपनी दोनों बहनों सरोज और वरदा की शिक्षा का भार भी उसे वहन करना पड़ता है। उन सभी के जीवन और उज्जवल भविष्य की कामना के लिए वह अपना विवाह करके अपने में ही सीमित रहना नहीं चाहती। वह तन, मन, धन से अपने परिवार की मर्यादा की रक्षा के लिए सजग रहती है। इसके साथ ही वह क्षणभर के लिए अपना मन भी बहला लेती है। डॉ. मेहता के सम्पर्क में आने पर उसमें जिन गुणों का समावेश होता है वह तो उसके पारिवारिक विरासत में उसे मिले थे। अपने जीवन के बोझिल मन को थोड़ा-सा आनन्द प्रदान करने के लिए वह अपनी मित्र मण्डली में थोडा-सा चंचल और रसिक बन जाती है। खन्ना, डॉ. मेहता, रायसाहब, मिर्जा खुर्शीद, तंखा आदि उसके मित्र हैं। खन्ना तो उसके प्रति अधिक अनुरक्त प्रतीत होता है, परन्तु मालती इस प्रकार के लोगों के प्रति बहुत सजग है क्योंकि वह भली-भाँति जानती है कि ऐसे व्यक्ति केवल स्त्री के रूप में भोग की लालसा रखने वाले ही होते हैं। 

वीरता की उपासक 

यद्यपि पठान के वेश में मेहता उसे उठा ले जाने की धमकी देते हैं और वह सभ्य समाज के पुरुषों को देखकर एक बार तो तिलमिला उठती है। साथ ही वह यह भी  देखती है कि खन्ना आदि उसे एक पठान से बचाने में असमर्थ रहते हैं तो मालती अपना साहस नहीं छोड़ती। वह उठा ले जाने की धमकी से आतंकित नहीं होती। वह पठान के पौरुष से ओत-प्रोत हो जाती है। नारी वीरता की उपासक होती है। अत: वह भी ऐसे वीर पुरुष के शक्तिशाली रूप को देखकर उसके प्रति समर्पित हो उठने की नारी सुलभ आकांक्षा से अपने हृदय में सिहरन का अनुभव करने लगती है। 


पौरुष के प्रति आकर्षण

मालती सच्चे पौरुष के प्रति आकर्षित होने वाली नारी है।वह प्राचीन नारी का आधुनिक संस्करण है। उसका जीवन पौरुष के खेलों में ही व्यतीत हुआ है। उसका यह आकर्षण मेहता के पठान वेश में प्रदर्शित पौरुष उसे उसकी ओर आकर्षित कर देता है। मालती अपने अन्य पुरुष मित्रों के खोखलेपन को भली-भाँति जानती है। यही कारण है कि वह उन्हें सदैव उल्लू बनाया करती है। इसमें उसे कोई सन्तोष या तृप्ति प्राप्त नहीं होती। उसका नारीत्व तो एक दृढ़ और स्थायी आश्रय चाहता है। मेहता में उसे अपना वह आश्रय दिखायी देता है। वह उसके प्रति आकर्षित भी होती है परन्तु मेहता उसके बाह्य रूप को ही उसका वास्तविक रूप मानते हैं। यही कारण है कि वह उसकी अवहेलना करते हैं। मेहता उसके प्रेम में पूर्ण समर्पण की आकांक्षा करते हैं। वह स्वयं बर्बर प्रेम के पक्षधर हैं इसीलिए वह बिना शर्त आत्मसमर्पण चाहते हैं। वह मालती में अपनी जीवन-संगिनी के सर्वगुण नहीं देखते इसी कारण वह उसकी उपेक्षा भी करते हैं। मालती फिर भी उनके प्रति आकर्षित बनी रहती है। 

उदारता

मालती का हृदय उदार है। मेहता के द्वारा उपेक्षित होने पर भी वह उसके प्रति अपनी उदारता को नहीं छोड़ती। मेहता भी उसकी वृत्ति को आखिर समझ ही लेते हैं। उनका मन सहज ही मालती की ओर आकर्षित होने लगता है। मालती में भी परिवर्तन होने लगता है और वह उसके प्रभाव से सेवा-वृत्ति को अपनाने लगती है। अब वह गरीबों की उपेक्षा नहीं करती। वह मेहता को अपना आदर्श मानने लगती है और त्याग और सेवा को अपने जीवन में अपनाने लगती है, परन्तु उसे विलास से विरक्ति हो उठती है। मालती झुनियाँ के बच्चे की माँ के समान सेवा करती है।गाँव की स्त्रियों को, जोकि त्याग और श्रद्धा की जीवित देवियाँ है, उनके समक्ष वह अपने आपको तुच्छ समझती है।मेहता में अब भी उसकी उतनी ही अनुरक्ति है परन्तु सेवा-भाव से वह गम्भीर हो जाती है।वह मेहता की अनियमितताओं में सुधार लाने के लिये उन्हें अपने बंगले पर ले जाती है और उनकी पूरी देखभाल भी करती है परन्तु एकान्त में मिलने का अवसर नहीं देती।उसकी उदारता मेहता को उसका अनुरागी बना देती है। 

दूरदर्शिता

मेहता उपास्य से उसके उपासक बन जाते हैं और उसके देवी रूप में लीन हो जाना चाहते हैं परन्तु मालती यह भली-भाँति जानती है कि मन के मोह में आसक्त होते ही मेहता की मानवता का क्षेत्र संकुचित हो जायेगा और उनकी सम्पूर्ण शक्ति नयी-नयी जिम्मेदारियों को परा करने में ही व्यय होने लगेगी।ऐसी स्थिति में वह त्याग और सेवा के कार्य पूर्ण नहीं कर पायेंगे। इसीलिये मालती उनसे स्पष्ट शब्दों में अपने मन की बात को कह देती है- "तुम्हारे जैसे विचारवान, प्रतिभाशाली मनुष्य की आत्मा को मैं इस कारागार में बन्द नहीं करना चाहती।" इस प्रकार उसकी दूरदर्शिता से डॉ. मेहता का एक नया जन्म होता है और वह मालती के समक्ष अपना. आत्मसमर्पण करते हुए कह उठते हैं "तुम्हारा आदेश स्वीकार है मालती।" 

वीतरागी आदर्श समाजसेविका

मालती जो कि लुभाने और रिझाने की कला में निपुण है आगे चलकर हाव-भाव निपुण अर्वाचीन नारी से वीतरागी समाज सेविका बन जाती है। उसके शील का यह परिवर्तन एक छोर से दूसरे छोर तक की सहज यात्रा करता है। मालती में आये  परिवर्तन का प्रभाव स्वयं मेहता की आत्मा को भी छू गया है।वह स्वयं अपने विचार व्यक्त करते हुए कहते हैं- "मालती नारीत्व के उस ऊँचे आदर्श पर पहुँच गयी थी,जहाँ वह प्रकाश के एक नक्षत्र-सी नजर आती थी। अब वह प्रेम की वस्तु नहीं, श्रद्धा की वस्तु थी।अब वह दुर्लभ हो गयी थी और दुर्लभता मनस्वी आत्माओं के लिये उद्योग मन्त्र है।" वास्तव में वह अपना सर्वस्व न्यौछावर करके बस समाज-सेवा में लीन हो जाती है।अब उसका प्रेम, त्याग सभी कुछ सेवा में ही निहित रहता है।इसी को वह अपना आदर्श मानती है।वह जानती है कि मन के मोह में आसक्त होते ही उसकी मानवता का क्षेत्र संकुचित हो सकता है। अत: वह इस ओर अग्रसर नहीं होती। 

वास्तव में प्रेमचन्द जी ने 'गोदान' में मालती की दृढ़ता के द्वारा मेहता के भौतिकतावाद पर आत्मा की विजय को प्रदर्शित किया है। मालती प्रेमचन्द की एक ऐसी अनुपम कृति है कि उनके कला-कौशल को देख मुग्ध रह जाना पड़ता है। उपन्यास में मालती के चरित्र का विकास आरम्भ से अन्त तक गुप्त रूप से होता रहता है। ऊपर से तितली के समान आकर्षित करने वाली नारी वास्तव में हृदय से संस्कारों से पूर्ण है। जब वह डॉ. मेहता के साहचर्य में आती है तो उसका यही संस्कार उसके बाह्य रूप को दबाकर ऊपर उभर आते हैं। यही आगे चलकर उसके मधुमक्खी स्वरूप को सार्थकता प्रदान करते हैं। खन्ना आदि के संसर्ग में रहते हुए भी वह सर्वथा अछूती ही बनी रहती है। मालती में विलासिता की कलुषता का आरोप लगाया जा सकता है, परन्तु यदि वह ऐसी विलासिनी होती तो क्या वह मेहता जैसे पुरुष को पाकर भी उसे अपने निकट न आने देती। वह अपनी दृढ़ता के बल पर ही मेहता को दूर हटा देती है। 

मालती का संयम, दृढ़ता, प्रबल इच्छाशक्ति एवं मननशीलता उसके चरित्र की आधारशिला है। यही कारण है कि स्वयं उपन्यासकार का यह कथन मालती के चरित्र पर सार्थक सिद्ध होता है कि वह बाहर से तितली और भीतर से मधुमक्खी है।

प्रेमचन्द का आदर्शवाद

सारांशतः हम कह सकते हैं कि मालती के चित्रांकन में प्रेमचन्द जी का आदर्शवादी स्वरूप : स्पष्ट रूप से मुखर हो उठा है। वह सदैव नारी को त्याग, मंगल और पवित्रता की देवी मानते थे। यही कारण है कि अपनी इसी प्रेरणा से प्रेरित होकर उन्होंने 'गोदान' में मालती का इतना उज्जवल चरित्र प्रदर्शित किया है। श्री जितेन्द्रनाथ पाठक के यह शब्द इसी सार्थकता को और भी बल प्रदान करते हैं- "कुल मिलाकर मालती और मेहता में प्रेमचन्द का आदर्शवाद मूर्त हुआ है।" 


COMMENTS

LEAVE A REPLY

Advertisements

आपको ये भी रोचक लगेगा $hide=404

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,853,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,35,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,88,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,26,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,144,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,72,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,84,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,123,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,13,राजभाषा हिंदी,48,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,18,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,78,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,24,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,5,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,19,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,24,समसामयिक हिंदी लेख,6,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,13,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,188,हिंदी लेख,407,हिंदी समाचार,91,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,57,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,58,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,9,hindi essay,180,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,60,hindi stories,503,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,2,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,12,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,Notifications,5,question paper,10,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Shayari In Hindi,13,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण
गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण
गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण गोदान उपन्यास में मालती का चरित्र चित्रण गोदान के नारी पात्र गोदान में स्त्री पात्र का चरित्र चित्रण मालती पात्र है मालती का चरित्र चित्रण गोदान प्रेमचंद मालती का चरित्र godan novel malti godan novel malti characters in hindi मालती अपने परिवार के प्रति पूर्णरूप से समर्पित है। वह अपनी सीमित आय से अपने परिवार का जीवनयापन करती है। उसके अपाहिज माता-पिता - बिगडे रईसों की आदतों से ग्रसित हैं। उन्हें मांस-मदिरा के बिना भोजन भी नहीं रुचता।
https://1.bp.blogspot.com/-OcUl9QkVXzo/Xj-W2GTj5RI/AAAAAAAAM8Q/od0Fbru9RG4V-wGtzOPdrZHJ2XGyUmIbgCNcBGAsYHQ/s320/20200209_104711.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-OcUl9QkVXzo/Xj-W2GTj5RI/AAAAAAAAM8Q/od0Fbru9RG4V-wGtzOPdrZHJ2XGyUmIbgCNcBGAsYHQ/s72-c/20200209_104711.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2020/02/godan-novel-malti.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2020/02/godan-novel-malti.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका