आउटसाइडर कहानी मालती जोशी

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आउटसाइडर कहानी  मालती जोशी
Outsider Story by Malti Joshi

आउटसाइडर कहानी का सार outsider hindi story summary in hindi - आउटसाइडर कहानी मालती जोशी जी द्वारा लिखित एक पारिवारिक पृष्ठभूमि पर आधारित कहानी है ,जिसमें उन्होंने एक ४५ वर्षीय अविवाहित महिला नीलम का चित्रण किया है। नीलम जिसने अपना सम्पूर्ण जीवन अपने परिवार को दिया ,फिर भी परिवार उसे बाहरी व्यक्ति मानता है। अपनों के बीच में ही पराया बन जाना आउटसाइडर कहानी की मूल कथावस्तु है। कथा का प्रारम्भ परिवार में सबसे छोटे भाई सुमित की शादी से होता है। सुमित की शादी में पूरा परिवार एकत्रित होता है। सुमित का हनीमून के लिए बाहर रवाना होने पर ,घर में सभी लोग दरिंग रूम में नीलम से बैठने की जिद करते है. इसी बैठक में सुदीप नीलम से विवाह करने को कहता है।साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कहा है कि आपको किसी अच्छे इंसान से विवाह करके  गृहस्थी बसा लेनी चाहिए। इस बात पर नीलम क्रोधित हो जाती है।  उसे यह बात बुरी लगी कि दामाद और बहुएँ भी वही बैठी है ,उनके सामने इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए। लेकिन पूनम के पति नरेश भी शादी के लिए अनुरोध करने लगे।  तो नीलम ने अधिक उम्र हो जाने के कारण विवाह न करने का कारण बताया। दूसरे दिन भाई -बहनों ने नीलम के सामने प्रस्ताओं की एक लम्बी -चौड़ी लिस्ट थमा दी और सभी नीलम की प्रतिक्रिया जानने को उत्सुक थे।नीलम ने लखनऊ वाले के प्रस्ताव के बारे में कहा कि मुझे शादी के तुरंत बाद नानी बनने का कोई शौक नहीं है साथ ही बरेली वाले दोमुँहे है।  नरेश के जीजा वाला प्रस्ताव ,जिसमें डिप्टी कलेक्टर है ,लेकिन नीलम ने यह कह कर प्रस्ताव खारिज कर दिया ,उनकी लड़की ने पिता के शादी करने पर आत्म हत्या करने की धमकी दी है।इस प्रकार नीलम ने सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया।
  
इन बातों को सुनकर सुषमा ने कहा कि इन्होने इस घर पर एकक्षत्र राज किया है।शासन चलाया है ,इस हालत में पति की जी हुज़ूरी करना इनके वश की बात नहीं है।छोटी बहन पूनम ने भी नीलम को समझाया कि तुमने चाहे ,जितनी कुर्बानियां दी है ,इस परिवार के लिए ,लेकिन यह घर तुम्हारे लिए पराया ही रहेगा ,तुम हमेशा आउट सीडर की मानी जाओगी।  जब तक नौकरी रहेगी ,तब तक यह परिवार  तुम्हे पूछेगा ,अन्यथा तुम फ़ालतू सामान बनकर रह जाओगी।
  
सुमित की शादी के लिए नीलम ने १५ दिनों की छुट्टी ली थी ,लेकिन वह सुदीप के साथ अधिक वक्त बिताना चाहती थी ,इसीलिए उसने आगे की छुट्टी बढ़ाने के लिए आवेदन करने स्कूल पहुँची ,तो प्रिंसिपल ने बताया कि नीलम को ट्रासंफर आर्डर आया है तथा उसका प्रमोशन करके प्रिंसिपल बनाकर बस्तर जाना होगा।  अतः वह चुपचाप छुट्टी का आवेदन देकर घर आ आ गयी।घर लौटने समय उसने परिवार के लिए ढेर - सारी ख़रीददारियाँ की। सुदीप की लड़की के लिए रसगुल्ले ख़रीदे।
  
घर पहुँच कर अपने कमरे में पहुँचने ही वाली थी  कि अलका व सुषमा की बातें सुनकर ठिठक गयी।  अलका कह रही थी कि सब लोग तो चले जाएंगे, उम्र कैद तो हमें लिखी है।सुषमा कहती है कि यह समझ लो कि यह हम लोगों की ननद नहीं ,सास है।
  
शाम के समय खाने के मेज़ पर जब परिवार के सभी सदस्य खाने के मेज़ पर जब परिवार के सभी सदस्य एकत्रित हुए तो नीलम ने घोषना कि मैं प्रमोशन की मिठाई है। मैं प्रिंसिपल बनकर बस्तर जा रही हूँ। इस बात पर परिवार के किसी सदस्य ने प्रतिरोध नहीं किया। इस प्रकार नीलम को इस बात का  एहसास हो गया कि वह परिवार के लिए आउटसाइडर है।  


आउटसाइडर मालती जोशी Outsider by Malti Joshi  उद्देश्य 

आउटसाइडर कहानी मुख्य पात्र नीलम पर केंद्रित है।  नीलम ,अपरिवार को बसाने - बढ़ाने में अपना जीवन कुर्बान कर देती है।  पिता की मृत्यु के बाद कमाने की जिम्मेदारी नीलम पर आ गयी। इधर नीलम की उम्र बढ़ती गयी। सुदीप के इंजिनियर बनने के बाद ही विवाह हो गया ,इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ कनाडा चला गया।  सुजीत बी.कॉम के बैंक में लग गया। फिर पूनम की शादी ,सुमित की पढ़ाई का खर्च नीलम को ही उठाना पड़ा. सबके विवाह -पठाई में नीलम ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया।
 
भले ही नीलम ने परिवार के लिए त्याग किया लेकिन परिवार उन्हें आउटसाइडर ही मानता है। अतः लेखिका ने परिवार व समाज म होने वाली भेद भाव का अच्छा चित्रण किया है। एक लड़की के लिए पिता का परिवार आउटसाइडर की मानता है। पुरुष प्रधान समाज में स्त्री की नियति का वर्णन करना लेखिका का मुख्य उद्देश्य रहा है।  


आउटसाइडर मालती जोशी outsider by malti joshi आउटसाइडर हिंदी स्टोरी शीर्षक की सार्थकता 

आउटसाइडर कहानी का शीर्षक बहुत ही सार्थक व रोचक है।आउटसाइडर का अर्थ है - बाहरी आदमी। कहानि का शीर्षक पढ़ते ही पाठकों के मन में विचार उठ सकता है कि यह बाहरी आदमी कौन है ? . पूरी कहानी नीलम के इर्द -गिर्द घूमती है।नीलम ,अपरिवार को बसाने - बढ़ाने में अपना जीवन कुर्बान कर देती है।  पिता की मृत्यु के बाद कमाने की जिम्मेदारी नीलम पर आ गयी। इधर नीलम की उम्र बढ़ती गयी। सुदीप के इंजिनियर बनने के बाद ही विवाह हो गया ,इसके बाद वह अपनी पत्नी के साथ कनाडा चला गया।  सुजीत बी.कॉम के बैंक में लग गया। फिर पूनम की शादी ,सुमित की पढ़ाई का खर्च नीलम को ही उठाना पड़ा. सबके विवाह -पठाई में नीलम ने अपना जीवन कुर्बान कर दिया।भले ही नीलम ने परिवार के लिए त्याग किया लेकिन परिवार उन्हें आउटसाइडर ही मानता है।




उसने पुरे परिवार की उन्नति के लिए त्याग किया।विवाह नहीं किया ,अपितु भाई - बहनों की नौकरी विवाह में ही उलझी रही।इसी बीच उम्र उसके हाथों से रेत की भाँती फिसलती चली गयी।वह अपनों के लिए परायी हो गयी। यही कारण है कि उसके प्रमोशन की घोषणा के साथ बस्तर जाने की घोषणा पर किसी ने उसे रोकने का विरोध नहीं किया।सबने मन - ही - मन प्रसन्नता व्यक्त की।
  
अतः लेखिका मालती जोशी जी द्वारा कहानी का शीर्षक आउटसाइडर रखा जाना बहुत ही सार्थक व सफल है।  यह शीर्षक पाठकों तक अपनी बात पहुँचने में सफल है।

आउटसाइडर कहानी के प्रश्न उत्तर


प्रश्न . 'आउटसाइडर' कहानी की नायिका नीलम का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर- नीलम, मालती जोशी द्वारा लिखित कहानी 'आउटसाइडर' की नायिका है। वह सशक्त एवं कर्मठ व्यक्तित्व की धनी है। उसने समय की दुश्वारियों को कभी-भी अपने परिवार की खुशियों के आड़े नहीं आने दिया। उसके चरित्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं- 
  1. प्रेम एवं त्याग की मूर्ति- नीलम प्रेम एवं त्याग की मूर्ति है। एक युवती के जीवन की सबसे बड़ी अभिलाषा होती है-विवाह तथा विवाहोपरांत का खुशियों भरा जीवन। नीलम ने अपने भाई-बहनों के भरण-पोषण व अन्य जिम्मेदारियों को सँभालने के लिए अपने खुशियों भरे जीवन का त्याग कर दिया। वर्षों बाद आए भाई से भी उसे कोई गिला शिकवा नहीं था बल्कि ढेर सारे उपहार खरीदकर वह अपनी खुशियाँ जाहिर कर रही थी। अविवाहित एवं एकाकी जीवन की वेदना को भी उसने परिवार की मुस्कुराहट पर न्यौछावर कर दिया। भाई व भाभी के तीक्ष्ण शब्द-वाणों के कठोर आघात से भी उसका प्रेम कम न हुआ। उसने चुपचाप उनकी खुशियों के लिए अपना ट्रांसफर स्वीकार कर लिया जबकि वह पहले दो बार उन्हीं की खुशियों के लिए अपना प्रमोशन ठुकरा चुकी थी।
  2. कठिन परिश्रमी - नीलम कठिन परिश्रमी है। उसने अपने पूरे जीवन में कठिन परिश्रम किया ताकि भाई-बहनों का जीवन सँवार सके। बड़े भाई सुदीप के इंजीनियर बनने तथा सुजीत के बैंक में नौकरी लग जाने के बाद भी उसने कठिन परिश्रम करना नहीं छोड़ा। उसने अंत तक सभी जिम्मेदारियों का निर्वाहन किया।
  3. स्वाभिमानी- नीलम स्वाभिमानी है। केवल विवाह की रीति की खानापूर्ति करने के लिए वह किसी के भी साथ रिश्ता नहीं जोड़ना चाहती। तभी वह परिवारजनों द्वारा लाए विवाह के सभी प्रस्तावों को ठुकरा देती है। वैवाहिक जीवन को लेकर उसके अपने विचार व भावनाएँ हैं जिनके साथ वह किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करना चाहती। 
  4. भावुक हृदय की धनी- नीलम भावुक हृदय की धनी है। अपनी छोटी बहन पूनम के व्यावहारिक स्वभाव के उलट नीलम हर फैसला दिमाग से न लेकर दिल से लेती है। उसके सभी निर्णय भावनाओं पर आधारित होते हैं। यहाँ तक कि पूनम उसकी भावुकता से परेशान होकर कहती भी है- "ट्राय टू बी प्रैक्टीकल दीदी।" पर नीलम पर उसका कोई असर नहीं होता ।
  5. कार्यकुशल- नीलम कार्यकुशल है। उसने जीवन-भर पारिवारिक एवं व्यावसायिक जिम्मेदारियों का निर्वाहन बड़ी ही कुशलता से किया है। प्रिंसिपल की बातों से पता चलता है कि पूर्व में भी उसे दो बार प्रमोशन मिल चुका था जिन्हें उसने परिवार की खुशियों के लिए ठुकरा दिया था। बार-बार मिलने वाला प्रमोशन उसकी कार्यकुशलता को प्रमाणित करता है।
  6. आत्मनिर्भरता- आत्मनिर्भरता का गुण नीलम के चरित्र को और भी अधिक मजबूती प्रदान करता है। नीलम अविवाहित है पर किसी के सहारे के लिए मोहताज नहीं है। वह आर्थिक रूप से सुदृढ़ होने के साथ-साथ मानसिक एवं भावनात्मक रूप से भी सबल है। वह अपने परिवारजनों से प्रेम करती है, लेकिन उनकी स्वार्थपरता के समक्ष घुटने नहीं टेकती। वह व्यथित है पर लाचार नहीं। 

उपरोक्त चारित्रिक विशेषताओं के आधार पर हम कह सकते हैं कि नीलम एक निष्ठावान, कर्त्तव्यपरायण, भावुक, निडर एवं साहसी नारी है, जिसने जीवन की कठिनाइयों को हँसते हुए पार किया है।
 

प्रश्न. कहानी आउटसाइडर' रिश्तों में स्वार्थ की दास्तान है। उदाहरण सहित समीक्षा कीजिए।
 
उत्तर- ‘परमार्थ मनुष्य का गहना है और स्वार्थ पशु की पहचान।' परन्तु वर्तमान समय में मनुष्य की यह पहचान कहीं खो सी गई है। आज स्वार्थ परमार्थ पर हावी हो गया है। वर्तमान समय की यह दुखद तस्वीर है कि स्वार्थ की जड़ें मानव जीवन में गहराई तक फैल चुकी हैं। आज के समय में स्वार्थ मनुष्य के 'लहू' में मिलकर उसकी रगों में दौड़ रहा है। अपना हित साधने के लिए मनुष्य किसी भी हद तक जा सकता है। इसके लिए चाहे उसे अपनों को ही कष्ट क्यों न देना पड़े।
 
मालती जोशी द्वारा लिखित कहानी 'आउटसाइडर' ऐसे ही स्वार्थपूर्ण, खोखले रिश्तों की गाथा है जो स्वार्थ में अंधे होकर अपनों के ही दुःख का कारण बन बैठे हैं।
 
इस कहानी के सभी पात्र अपना स्वार्थ साधने में लगे हैं। नीलम की माँ उसके जीवन को होम करके अपने अन्य बच्चों का जीवन सँवारने में अपना स्वार्थ सिद्ध करती है। नीलम का बड़ा भाई सुदीप अपनी जिम्मेदारियों को अनदेखा कर सपत्नीक विदेश चला जाता है और फिर पलटकर भी नहीं देखता। यहाँ तक कि जिस माँ ने अपनी बेटी की खुशियों की बलि चढ़ाकर उसे काबिल बनाया, वह उस माँ के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं होता।
 
छोटे भाई सुजीत की पत्नी अलका दोहरे चरित्र की स्त्री है। वह नीलम से मीठी-मीठी बातें करती है और उसकी पीठ-पीछे उसके लिए 'बोझ' और 'बंधन' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करती है। वह सुषमा से कहती भी है :

“आप तो लकी हो जिज्जी। फर्र से उड़ जाएँगी। ये नेहा भी चार दिन बाद छोटू के साथ बंगलौर चली जाएगी। उम्र कैद तो हम लिखवाकर आए हैं, सो भुगतेंगे।"

यहाँ तक कि नीलम की माँ भी बहू का मुँह देखने की बलवती इच्छा को पूरा करने के लिए अपनी अविवाहित बेटी की इच्छाओं/आकाँक्षाओं का गला घोंट देती है।
 
"माँ होकर भी उन्होंने बहुत पक्षपात किया। दीपू के इंजीनियर होते ही अम्मा एकाएक बहू का चेहरा देखने के लिए व्यग्र हो उठी। घर में एक अनब्याही लड़की बैठी है और उसकी शादी बेहद जरूरी है, इस तथ्य से जैसे अम्मा ने आँखें ही मूँद ली थीं।" इन सबसे अलग नीलम, निश्छल व निस्वार्थ भाव से सबकी इच्छाओं व खुशियों की पूर्ति हेतु निरंतर संघर्ष करती रहती है। उसका त्याग अकल्पनीय तथा वंदनीय है, परन्तु उसके अपनों की नजर में उसकी कोई कीमत नहीं है। 

"मुझे मालूम था वे मना कर देंगी, इतने दिनों तक इस घर पर बॉसिंग करती रही हैं। ससुराल में धौंस-डपट सहना उनके बस का थोड़े ही है।"
 
सुषमा के ये शब्द सुनकर भी नीलम विचलित नहीं होती। उसके अपने अपनी-अपनी गृहस्थी जमा चुके हैं इसलिए 'बोझ' बनी नीलम को किसी के भी पल्ले बाँधकर इस नीलम रूपी बंधन से छुटकारा पाना चाहते हैं।
 
नीलम के विवाह को लेकर बेचैनी उनका उसके प्रति प्यार नहीं अपितु निजी स्वार्थ है। अलका कहती है : "हम तो जिंदगी को कभी ठीक से एनजॉय नहीं कर पाते। एक अनब्याही ननद का साया हमेशा हमारी खुशियों पर मँडराता रहता है।"
 
इसलिए जब नीलम उन्हें अपने ट्रांसफर की खबर देती है तो वे सब खुशी से फूले नहीं समाते हैं क्योंकि विवाह द्वारा न सही ट्रांसफर द्वारा ही सही पर उनका उद्देश्य तो पूरा हो गया। उनके सिर से एक बोझ तो उतर गया। इस प्रकार उन सबका उद्देश्य पूरा हो जाता है।
 
हाँ शायद नीलम की बहन पूनम स्वार्थी नहीं है। वह अपने भाइयों की तरह स्वार्थवश नहीं बल्कि अपनी बहन के प्रति संवेदना व सद्भावना के कारण ही उसके विवाह के प्रस्तावों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करती है, क्योंकि एक स्त्री होने के नाते वह अच्छी तरह जानती है कि उस घर में नीलम को कभी यथोचित सम्मान नहीं मिलेगा जिसकी वह हकदार है। वह नीलम से कहती भी है :
 
"तुमने इस घर को लाख अपने खून से सींचा हो, पर यह घर कभी तुम्हारा अपना नहीं हो सकता। तुम यहाँ हमेशा 'आउटसाइडर' ही रहोगी।"
 
उपरोक्त कथनों के आधार पर स्पष्ट होता है कि कहानी 'आउटसाइडर' रिश्तों में स्वार्थ की दास्तान है। अपनों के बीच रहकर भी अजनबी होने के 'अहसास' के अहसहनीय एवं अवर्णनीय दर्द को उकेरती हुई यह कहानी 'आउटसाइडर' अन्तर्मन को झकझोर देने वाली कहानी है। यह पाठक को अपनी-सी लगती है। यह कहानी वर्तमान समाज के स्वार्थपरक रिश्तों का सजीव एवं मार्मिक चित्रण करती है। 

प्रश्न. “तुमने इस घर को लाख अपने खून से सींचा हो पर यह घर कभी तुम्हारा नहीं हो सकता। तुम यहाँ हमेशा आउटसाइडर ही रहोगी।"पम्मी का यह कथन पुरुष-प्रधान समाज में नारी के दोयम दर्जे को प्रदर्शित करता है। स्पष्ट कीजिए।
 
उत्तर- यह कटु सत्य है कि तकनीकि क्षेत्र में विकसित 21वीं सदी का भारत, कहने को तो संवैधानिक रूप से महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा देता है, परन्तु सामाजिक एवं व्यावहारिक तौर पर महिलाएँ पुरुष-प्रधान समाज में रहने को विवश हैं जहाँ नारी आज भी समानता का अधिकार प्राप्त करने के लिए जूझ रही है ।
 
कहानी 'आउटसाइडर' की नायिका नीलम भी इसी पितृसत्तात्मक व्यवस्था की शिकार है। अपने पिता की मृत्यु के पश्चात् अपने परिवार के भरण-पोषण का भार वह अपने कंधों पर ले लेती है। उसकी माँ उसके त्याग की सराहना करने के स्थान पर उसे अनदेखा कर अपने बड़े बेटे के विवाह का आनंद लेती है। बड़ा बेटा भी अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़कर विदेश चला जाता है। माँ भी उसे विदेश जाने की अनुमति खुशी-खुशी दे देती है। क्योंकि वह उनका बेटा है और नीलम उनकी बेटी।
 
नीलम अपना सम्पूर्ण जीवन और खुशियाँ अपने परिवार की खुशियों की खातिर होम कर देती है। घर के सभी सदस्य उसके इस त्याग को महत्व नहीं देते। नीलम आत्मनिर्भर है फिर भी पूरा परिवार उसे बोझ समझता है क्योंकि वह एक अविवाहित महिला है। अलका के अनुसार, "एक अनब्याही ननद का साया हमेशा हमारी खुशियों पर मँडराता रहता है।" नीलम द्वारा अयोग्य विवाह के प्रस्तावों को ठुकरा दिए जाने पर सुषमा का यह कथन, “मुझे मालूम था वे मना कर देंगी। इतने दिनों इस घर में 'बॉसिंग' करती रही हैं। ससुराल में धौंस-डपट सहना उनके बस का थोड़े ही है।" इस कथन को और भी मजबूती प्रदान करता है कि महिलाओं की आत्मनिर्भरता तथा पुरुष के बिना भी कुशलतापूर्वक जीवन-यापन की कला आज भी समाज को अखरती है।
 
नीलम मन से भली व समझदार थी। भावुक हृदय होने के कारण वह वर्षों से इन बातों को अनदेखा करती चली आ रही थी, परन्तु पम्मी की व्यावहारिक नजरों से ये बातें छिपी न थीं। नीलम के विवाह के लिए तैयार न होने पर पम्मी को मजबूरन उसे इस कटु सत्य से रूबरू कराना पड़ा कि नीलम उस घर के लिए 'आउटसाइडर' है। भारत में सामाजिक रूप में महिला की पहचान तथा अस्तित्व उसके पति के नाम का मोहताज होता है, चूँकि नीलम अविवाहित थी अतः उसका अपना कोई घर नहीं था । स्पष्ट है कि पम्मी का यह कथन समाज में स्त्री के दोयम दर्जे को प्रमाणित करता है।
 
प्रश्न. नीलम का परिचय देते हुए बताइए कि उसके परिवार में कौन-कौन था ? वह किस धोखे में अपना जीवन अभी तक व्यतीत कर रही थी ? उसे इसका आभास कैसे हुआ ? स्पष्ट कीजिए।
 
उ. नीलम, मालती जोशी द्वारा रचित कहानी 'आउटसाइडर' की प्रमुख पात्र है। वह अपने परिवार की सबसे बड़ी लड़की है। उसके पिता की आकस्मिक मृत्यु के बाद घर और परिवार की सारी जिम्मेदारी नीलम के ऊपर आ जाती है। वह नौकरी कर घर को चलाने की जिम्मेदारी निभाने का निर्णय लेती है और नौकरी करने लगती है। जिस उम्र में लड़की विवाह के सुन्दर स्वप्न संजोती है उस उम्र में वह अविवाहित रहने का निर्णय लेती है और अपने भाई-बहनों को काबिल बनाती है। वह एक कॉलेज में अध्यापन कार्य कर और अविवाहित रहकर अपने पूरे परिवार के भरण-पोषण का उत्तरदायित्व निभाती है।
 
उसके तीन भाई हैं-सबसे बड़ा सुजीत, मंझला सुदीप और छोटा सुमित। तीन भाइयों के बाद उनकी एक छोटी बहिन भी है जिसका नाम पूनम है। अपने तीनों भाइयों को पढ़ा-लिखाकर उसने इस काबिल बना दिया कि वह अपनी जिम्मेदारी खुद उठा सकें। सुदीप कनाडा में काम करता है, सुजीत बैंक में काम करता है और सुमित मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। पूनम का विवाह हो चुका था। उसके पिता का नाम नरेश है। धीरे-धीरे समय के साथ-साथ सुजीत और सुदीप का विवाह हो जाता है। परिवार में अब छोटे भाई सुमित का विवाह हो रहा है। इस अवसर पर सभी घर पर एकजुट होते हैं और नीलम को विवाह करने के लिए मनाते हैं अब उसकी उम्र पैंतालीस वर्ष हो जाती है।
 
अब उसे लगने लगता है कि उसने अपनी सारी जिम्मेदारियों को पूरा कर लिया है इसलिए घर के सभी लोग उसे विवाह के लिए मजबूर कर रहे हैं।
 
अभी तक वह इस धोखे में जीवन व्यतीत कर रही थी कि उसने सबके लिए अपने जीवन की सभी खुशियाँ न्योछावर कर दीं तो वे सब भी उसका पूरा ध्यान रखेंगे इसलिए अपने ट्रांसफर और प्रमोशन के प्रस्ताव को भी वह ठुकरा देती है। जब वह सबके कहने के बावजूद भी अपने विवाह प्रस्ताव को ठुकरा देती है तो सुदीप की पत्नी से सुजीत की पत्नी कहती है कि वह तो पहले से ही जानती थी कि दीदी शादी करने से मना कर देंगी क्योंकि इतने दिनों तक वह घर की बॉस बनी घूमती रहीं। अब उनके लिए ससुराल के बन्धन में रहना मुमकिन नहीं होगा। उसे भ्रम था कि उसके भाई उसे अपने पास से दूर नहीं जाने देंगे पर उसका यह भ्रम तब चकनाचूर हो जाता है जब वह अपनी भाभी अलका को यह कहते सुनती है कि जब तक नीलम दीदी इस घर में हैं, यह घर उसका नहीं हो सकता। उनके कारण उसे अपनी बहुत सी इच्छाओं का गला घोंटना पड़ता है। अब उसे अपनी बहन पूनम की कही हुई बात याद आती है कि यह घर आज भी तुम्हारे लिए पराया ही है। अभी तो तुम्हारे पास नौकरी है, जब तुम सेवानिवृत्त हो जाओगी तो तुम्हारी हैसियत इस घर में एक फालतू समान जैसी हो जायेगी जिसे न फेंका जा सके और न रखा जा सके। यह सुनकर उसका सारा भ्रम टूट जाता है। 

प्रश्न. 'आउटसाइडर' एक अंग्रेजी शब्द है जिसका अर्थ है : 'बाहरी व्यक्ति'। कहानी के आधार पर इस शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए ।
 
उत्तर. अंग्रेजी शब्द 'आउटसाइडर' का शाब्दिक अर्थ है : 'बाहरी व्यक्ति' । मालती जोशी द्वारा लिखित कहानी 'आउटसाइडर' नीलम नाम की एक ऐसी महिला की जीवन गाथा है जो अपनों के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर करने के बाद भी आउटसाइडर ही रहती है।
 
जब पम्मी नीलम से कहती है "तुमने इस घर को लाख अपने खून से सींचा हो, पर यह घर कभी तुम्हारा अपना नहीं हो सकता। तुम यहाँ हमेशा आउटसाइडर ही रहोगी।" तब नीलम की भावनाओं को ठेस जरूर पहुँचती है पर पाठकों को आभास हो जाता है कि पम्मी जाने-अनजाने में ही सही, परन्तु नीलम को जीवन के कटु सत्य से रूबरू करा गयी है।
 
नीलम अपने कर्त्तव्य पर अडिग है। वह पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने से कभी पीछे नहीं हटती। अपनी व्यक्तिगत अभिलाषाओं और आकांक्षाओं को ताक पर रखकर उसने अपनी माँ और भाई-बहनों की खुशियों को सर्वोपरि समझा।

नीलम नादान और भोली थी। वह इस सच से बिल्कुल अनजान थी कि जिन लोगों को अपना मानकर वह सारी जिन्दगी जीती आई है, उनके लिए वह केवल बोझ और बन्धन मात्र है। उसके भाई-बहनों द्वारा उसके लिए विवाह के प्रस्तावों को लाना उनकी स्वार्थपरता को प्रदर्शित करता है। वे अपनी बड़ी बहन के प्रति विशेष लगाव या प्रेमभाव के कारण प्रस्ताव लेकर नहीं आए बल्कि अपने स्वार्थ से वशीभूत होकर अपनी बड़ी बहन रूपी बोझ को उतारने का रास्ता खोजकर लाए हैं। यदि उन्हें वास्तव में नीलम से प्यार होता और उन्हें उसकी फिक्र होती तो वे उसके लिए योग्य रिश्ता लेकर आते, ऐसे ऊटपटाँग रिश्ते लेकर नहीं। नीलम के सामने मीठी-मीठी बातें करते हुए आगे-पीछे डोलने वाली भाभियाँ उसकी पीठ पीछे बुराई करने से पीछे नहीं हटतीं। यह आघात तब और कष्टदायक हो जाता है जब नीलम को अपनी माँ की स्वार्थपरता याद आती है। उसे अपने भाइयों से कोई शिकायत नहीं है वह तो केवल अपनी माँ से नाराज़ है। अपने दूसरे बच्चों की खातिर उन्होंने नीलम के जीवन की कुर्बानी देने से पहले तनिक भी नहीं सोचा। उन्होंने नीलम के विवाह के सम्बन्ध में भी कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। इसके पीछे उनका गहरा स्वार्थ छिपा था । वह जानती थी कि घर-परिवार के सभी खर्चे नीलम की कमाई से ही चलते हैं। यदि नीलम का विवाह हो जाएगा तो घर की जिम्मेदारी कौन सँभालेगा? और तो और सुदीप की नौकरी लगते ही वह न सिर्फ उसका विवाह करा देती हैं, बल्कि खुशी-खुशी उसे कैनेडा भी भेज देती हैं। तब भी उन्हें नीलम की खुशियों की फिक्र नहीं होती । नीलम परिवार के लिए केवल कमाई का जरिया भर है इसके बावजूद भी जब तीनों भाई काबिल हो जाते हैं तो नीलम उन्हें बोझ के समान लगती है। एक ऐसा बोझ जिससे वे हर हाल में छुटकारा पाना चाहते हैं, चाहे वह छुटकारा नीलम के विवाह से मिले या उसके ट्रांसफर से । जिस प्रकार किसी बाहरी व्यक्ति का स्वयं से दूर चले जाने पर किसी को कोई दुख नहीं होता उसी प्रकार नीलम के दूर चले जाने का किसी को कोई गम नहीं है, बल्कि सभी खुश हैं क्योंकि नीलम उनके लिए 'आउटसाइडर' ही है। इस प्रकार सिद्ध होता है कि कहानी का शीर्षक आउटसाइडर' सर्वथा उचित एवं सार्थक है। 

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