वह जन्मभूमि मेरी Wah Janmbhumi Meri

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जन्म भूमि कविता वह जन्मभूमि मेरी का केंद्रीय भाव ऊँचा खड़ा हिमालय आकाश चूमता है जन्मभूमि का अर्थ स्वर्ग बना सकते हैं मातृभूमि पर छोटी कविता wah janmabhoomi meri meaning wah janmabhoomi meri summary wah janmabhoomi meri explanation wah janmabhoomi meri summary in hindi wah janmabhoomi meri summary vah janmabhoomi meri poem summary vah janmabhoomi meri bhavarth vah janmabhoomi meri poem explanation

वह जन्मभूमि मेरी Wah Janmbhumi Meri


वह जन्मभूमि मेरी,वह मातृभूमि मेरी .
ऊँचा खड़ा हिमालय ,आकाश चूमता है,
नीचे चरण तले झुक,नित सिंधु झूमता है..!!
गंगा यमुन त्रिवेणी,नदियाँ लहर रही हैं,
जगमग छटा निराली,पग पग छहर रही है..!!
वह पुण्य भूमि मेरी,वह स्वर्ण भूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी,वह मातृभूमि मेरी ..!!

व्याख्या - प्रस्तुत पंक्तियों में कवि सोहनलाल द्विवेदी जी ने अपने मातृभूमि की प्रसंशा करते हुए ,भारत देश की महानता का गुणगान किया है . कवि कहता है कि भारत की उत्तर दिशा में हिमालय पर्वत है .उसकी ऊँचाई आसमान को चूमता है .भारत के दक्षिण में हिन्द महासागर है ,उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे यह चरणों को निरंतर चुप रहा है . गंगा ,यमुना जैसी पवित्र नदियाँ भारतभूमि की शोभा बाधा रही है . इसके अतिरिक्त अन्य नदियों के जल से किसान अपने खेतों को सींचता है . यहाँ की मिटटी बहुत उपजाऊ है  जिसमें फसलें होती हैं .यही कारण है कि इसे स्वर्णभूमि हहते हैं . अतः इसीलिए कवि को भारत भूमि अपनी जन्मभूमि पर गर्व है . यह हमारी मातृभूमि है .

2.झरने अनेक झरते,जिसकी पहाड़ियों में,
चिड़ियाँ चहक रही हैं,हो मस्त झाड़ियों में..!!
अमराइयाँ घनी हैं,कोयल पुकारती है,
बहती मलय पवन है,तन मन सँवारती है..!!
वह धर्मभूमि मेरी,वह कर्मभूमि मेरी,
वह जन्मभूमि मेरी,वह मातृभूमि मेरी ..!!

व्याख्या - कवि कहते है उसके देश में पहाड़ों के बीच अनेक झरने हैं अर्थात वे आगे चलकर नदियों में मिल जाते हैं .चिड़ियाँ जब चह्चाहती रहती है ,जब आमों के बागों में बौर आता है तब कोयल की सुरुली  आवाज सुनाई पड़ती है .मलय पर्वत से आने वाले शीतल वायु सबको मंत्रमुग्ध कर देती है और सभी लोगों का ह्रदय प्रसन्नता से भर जाता है . इस प्राकृतिक सौन्दर्य से कवि का मन झूम जाता है . इसीलिए कवि ने अपनी जन्मभूमि को धर्मभूमि और कर्मभूमि माना है . कवि को गर्व है कि उसका जन्म भारत की भूमि पर हुआ है . अतः हमें अपने देश की सेवा करना चाहिए और यही हमारा धर्म है .

3.जन्मे जहाँ थे रघुपति,जन्मी जहाँ थी सीता,
श्रीकृष्ण ने सुनाई,वंशी पुनीत गीता ..!!
गौतम ने जन्म लेकर,जिसका सुयश बढ़ाया,
जग को दया सिखाई,जग को दिया दिखाया ..!!
वह युद्ध–भूमि मेरी,वह बुद्ध–भूमि मेरी,
वह मातृभूमि मेरी,वह जन्मभूमि मेरी ..!!

व्याख्या - कवि का कहना है कि भारतभूमि पर महापुरषों और वीरों ने जन्म लिया है . जहाँ पर सीता ,राम भगवान् विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया और वंशी बजाकर प्रेम का सन्देश दिया है एवं भगवतगीता की रचना की . यह वह पवित्र भूमि है जहाँ गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर सारे संसार को दया व प्रेम का सन्देश दिया .गौतम ने हमारे जन्मभूमि पर जन्म लिया और संसार को मोहमाया का त्याग कर ज्ञान की खोज की ,जिसके परिणामस्वरूप भारत की प्रसिधी दूर -दूर तक फ़ैल गयी . अतः भारतभूमि बुद्धभूमि और युद्धभूमि है , जहाँ पर राम,कृष्ण और बुद्ध जैसे महापुरषों ने जन्म लिया है .अतः यह हमारे लिए गौरव की बात है .

वह जन्मभूमि मेरी केंद्रीय भाव / मूल भाव 

वह जन्मभूमि मेरी कविता सोहनलाल द्विवेदी जी द्वारा लिखी गयी है . प्रस्तुत कविता में कवि ने भारत के लिए भौगोलिक ,प्राकृतिक एवं आध्यात्मिक रूपों का वर्णन करते हुए गौरवशाली अतीत का वर्णन करते हुए स्वयं को गौरवान्वित महसूस करता है . वह देश के गौरव का गान करते हुए हिमालय , सागर ,झरने तथा अमराइयों की प्रशंसा करता है ., कवि स्वयं को धन्य मानता है कि उसका जन्म उस भूमि पर हुआ है ,जहाँ राम ,कृष्ण और बुद्ध जैसे महापुरषों का जन्म हुआ है . अतः हमें श्रीकृष्ण द्वारा दिखाएँ गए निष्काम कर्म के मार्ग पर चले .बुद्ध द्वारा दिया गया दया का सन्देश ग्रहण करें और अपने देश को गर्व करे .


प्रश्न उत्तर 


प्र .१. कवि ने हिमालय और सिन्धु का उदहारण क्यों दिया है ?

उ . हिमालय पर्वत अपनी ऊँचाई के कारण के लिए आसमान का स्पर्श करती दिखाई देती है . उसके दक्षिण में हिन्द महासागर बह रहा है .उसे देखकर कवि को ऐसा लगता है मानों सिन्धु भारत के चरणों को प्रतिदिन धोता हो .
प्र .२. स्वर्णभूमि किसे कहा गया है और क्यों ?

उ . कवि भारत को स्वर्णभूमि कहा है . कवि का मानना है कि भारत गाँवों और किसों का देश माना जाता है .यहाँ की धरती अनाज के रूप में सोना उगलती है . हमारा देश सदैव समृद्ध रहा है .

प्र .३. कवि ने देश को युद्धभूमि क्यों कहा है ?

उ . कवि का कहना है कि जब - जब देश पर संकट आया , तब तब देश के वीरों ने अपना बलिदान देकर देश की रक्षा करें . अतः देश की रक्षा के लिए देशवासियों ने हर संकट को युद्धभूमि की तरह पार किया .

प्र .४. गीता का पवित्र ज्ञान किसने कहाँ दिया ?

उ . गीता का पवित्र ज्ञान भगवान् श्री कृष्ण ने दिया है . इस ग्रन्थ में कर्म को सबसे महत्वपूर्ण माना है . अतः हमें निष्काम भाव से कर्म करते रहना चाहिए .

प्र. ५. कवि ने भारत को अन्य किन किन नामों से पुकारा है ?

उ . कवि ने भारत को ही अपनी मातृभूमि मानते हुए इसे पुण्यभूमि ,स्वर्ण भूमि ,धर्म भूमि ,युद्ध भूमि ,बुद्ध भूमि आदि नामों से पुकारा है .

प्र.६. कवि ने भारत को बुद्ध भूमि क्यों कहा है ?

उ.भारत वह , पवित्र भूमि है जहाँ गौतम बुद्ध ने जन्म लेकर सारे संसार को दया व प्रेम का सन्देश दिया .गौतम ने हमारे जन्मभूमि पर जन्म लिया और संसार को मोहमाया का त्याग कर ज्ञान की खोज की ,जिसके परिणामस्वरूप भारत की प्रसिधी दूर -दूर तक फ़ैल गयी . अतः भारतभूमि बुद्धभूमि है .

प्र.७. भारत को युद्ध भूमि क्यों कहा गया है ?

उ. भारत की भूमि में बड़े बड़े वीर महापुरुष पैदा हुए हैं ,जिनमें राम ,महाराणा प्रताप ,शिवा जी आदि वीरों ने अपनी देश की रक्षा के लिए वीरता का परिचय दिया .साथ इन वीरों से संसार के सामने धर्म ,मर्यादा ,करुणा व दया के आदर्श रूप प्रस्तुत किया .अतः भारत भूमि, युद्धभूमि है .

प्र.८. कवि स्वयं को धन्य क्यों मानता हैं ?

उ. कवि स्वयं को धन्य मानता है कि उसका जन्म उस भूमि पर हुआ है ,जहाँ राम ,कृष्ण और बुद्ध जैसे महापुरषों का जन्म हुआ है . अतः हमें श्रीकृष्ण द्वारा दिखाएँ गए निष्काम कर्म के मार्ग पर चले .बुद्ध द्वारा दिया गया दया का सन्देश ग्रहण करें और अपने देश को गर्व करे .



विडियो के रूप में देखें :- 




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