सूअर की औलाद

SHARE:

उसने अपनी फटी हुई चोली से छाती को ढकना चाहा और घुटनों के ऊपर खिंची हुए पेटीकोट और साड़ी को पैरों तक खींचने की नाकाम कोशिश की, पर जूते वाले के पैर ने एक झटके से साड़ी को ऊपर कर दिया और उसके खुले रानों पर जूता रख दिया। चमड़े के जूते में लगे कील उसके नर्म माँस में घूमने लगे और वह उठकर बैठ गई। उसके उठते ही बच्चा रोने लगा। अपने नंगे अंगों को ढकने की कोशिश करते हुए वह बच्चे को थपथपाने लगी।

सूअर की औलाद

 ग़लती उसने पहले दिन भी नहीं की थी। अब उसे याद नहीं कि पहला दिन कब था। यह सब यादों की तख़्ती से धुँधला पड़ चुका है। कैसे सब-कुछ हुआ था? सब उसके ज़ह्न में उतर आया।
पिछली रात भी यही हुआ था। इससे पहले वाली रात भी ऐसा ही हुआ था। सब कुछ समान, बिना किसी तब्दीली
चित्र सौजन्य  गूगल .कॉम 
के बीच-बीच में यूँ ही होता रहता है, फिर कुछ दिन खिसक जाते हैं और फिर अचानक यही सब होता रहता है, अरुचिकर, संतापी, घृणादायक।
उसने करवट बदलकर सरकने की कोशिश की। स्तनपान करते बच्चे के मुँह में उसका स्तन था, जो वह चूसते-चूसते सो गया था। अब जब उसने पलटने की कोशिश की, तो बच्चा फिर से स्तन चूसने लगा। उसने बच्चे को थपथपाते हुए सुलाना चाहा ताकि उसकी नींद न टूटे और उसे आधी रात को परेशान न करे। वह ख़ुद भी गहरी नींद में सोई थी। उसके कपड़े अस्त-व्यस्त थे।
वह बाजू बदलना चाह रही थी, लेकिन लेटे-लेटे ही उसने गर्दन फिराकर देखना चाहा जैसे स्तन बच्चे के मुँह से बाहर न निकल जाए और वह रोना शुरू न करे। गहरी नींद में होने के बावजूद भी उसने महसूस किया कि कोई चीज़ उसकी नाभि के नीचेवाले हिस्से में घिसे जा रही थी। रगड़ ने वाली चीज़ और कोई नहीं, बल्कि वही रोज़ वाली चीज़ ही है, जो उसे गहरी नींद में झकझोरकर उठा देती है और उसकी मांसपेशियों को तकलीफ़ देती रहती है। उसने चाहा था कि वह संघर्ष करके उस वस्तु को दूर हटा दे, लेकिन ऐसा मुमकिन न था।
पता नहीं भगवान कौन से जन्म का फल उसे भुगतने के लिए मजबूर कर रहा था। लेकिन भगवान है....ऐसी शंका गहरे साँस के साथ उसके शरीर में समा गई। वह मन-ही-मन में दुःख, पीड़ा की अनुभूति से भर गई। उसने भीतर-ही-भीतर साहस जुटाकर कहना चाहा-‘ओ पापी! ये क्या कर रहे हो? क्यों इस दुखियारी को, इस गंदगी और इस अँधेरे में भोगने पर मजबूर कर रहे हो।’ लेकिन लगातार चुभती उस चीज़ ने उसके साहस को मार डाला। वह सपना देख रही थी। ख़ुद खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर किसी रानी समान सो रही थी, लेकिन आँखे खुलते ही उसका भ्रम टूट गया। उसके ऊपर एक छाया थी। उसे ख़्याल आया कि वह बस स्टैंड के एक अंधकारपूर्ण कोने में खड़ी थी। बस स्टैंड का यह काला हिस्सा, इस चाँद को अपने भीतर समाकर ख़ुश हो रहा था।
हाँ, ऐसा ही अंधकार है उसकी तक़दीर में, जिसमें कहीं भी, कोई भी रोशनी नहीं है। कहीं भी कोई सफेद टुकड़ा नहीं। सिर्फ काले और अंधकारपूर्ण टुकड़े, डीज़ल ऑइल जैसे यहाँ-वहाँ लटक रहे हैं। जैसे भयंकर दुर्घटना में हुए इंसानों को चेहरे, हाथ-पाँव, मांस के टुकड़े, रक्त के फव्वारे, ख़ून के धब्बे, काला ख़ून, बिल्कुल काला, अँधेरे भी ऐसा जैसा उसका नसीब है, बिल्कुल ऐसा।
चुभन बराबर बरकरार थी। वह शिद्दत से महसूस कर रही थी। अब वह उसे पहचानने लगी है और सिर्फ़ हाज़िरी मात्र से वह समस्त घटनाचक्र को समझ जाती है। अब वह कहीं भी, कोई भी ग़लती नहीं करती है और मशीन की तरह वह सब-कुछ करने लगती है। हटकर सो जाती है। साड़ी और पेटीकोट ऊपर कर लेती है। उसे अस्पष्ट घटनाचक्र याद है...।
उस दिन वह कैसे नींद में से अचानक चौंककर थरथराती उठी थी और कैसे उस जूते चुभानेवाले आदमी के सामने खड़ी हो गई थी और गालियाँ देने लगी थी। उसे याद है, तब एक ज़ोरदार चाँटा गाल पर पड़ा था। वह लड़खड़ा कर लगभग गिर ही रही थी कि उस जूतेवाले आदमी ने अपना डंडा उसकी चोली में फँसाकर उसे उठाकर खड़ा करने में मदद की थी। उसके एक झटके से ही चोली के बटन टूट गए थे और वह अपनी छाती को हाथों से ढाँपती डर के मारे काँपने लगी थी और उसको घूरने लगी थी।
‘क्यों मार रहे हो एक दुखियारी औरत को, एक औरत पर हाथ उठाते शर्म नहीं आती?’
जैसे पत्थर से टकराकर आवाज़ वापस उसके ही कानों में गूँज उठी। उसका शरीर काफ़ी मजबूत था। उसकी लाल आँखों में हिंसा और वहशियत नाच रही थी। हिंसक पशु की तरह वह उसके चेहरे और छाती को चाट रहा था। उसका डंडा अभी तक उसकी चोली में फँसा था।
‘यह जगह क्या तुम्हारे बाप की है, जो यहाँ मस्ती से सोई हुई हो?’
वह बेहद घबराई हुई थी, भागना चाह रही थी। ये इतने आदमी इन बेंचों पर सरकारी रोशनी के नीचे जो सोए पड़े हैं, क्यों वह उन्हें कुछ नहीं कहता। पर जब उसने चारों ओर नज़र दौड़ाई, तो वहाँ कोई भी न था। सब कभी के भाग गए थे। वह अकेली ही बची थी, इसका जुल्म सहने के लिए। गहरी नींद में डूबी वह घर बसाने के सपने देख रही थी। वह अपनी मदहोश नींद को कोसते हुए अपनी गठरी लेकर चलने लगी, तब आदमी ने उसकी बाँह को इतना ज़ोर से पकड़ा कि वह कराहने लगी। उसे लगा कि उसकी बाँह कहीं बीच से ही टूट जाएगी और टूटी छत की मानिंद लटकने लगेगी और कोहनी से अलग हो जाएगी। वह बेहोश होने जैसी अवस्था में थी।
देवी नागरानी
देवी नागरानी
‘अब मुझे छोड़ते क्यों नहीं? तुम्हारी जगह है, तो तुम ही जाकर सो जाओ।’
‘और इसका किराया कौन देगा...?’ देख नहीं रही हो, अंधी हो, मैं सरकारी आदमी हूँ। इतनी रातें सरकारी ज़मीन पर सोते मज़ा  किया और अब भाग रही हो। मुझे पहचानती नहीं हो..? चलो सो जाओ तो किराया वसूल करूँ।’
और उस दिन उसने पहली बार चुपचाप ऐसा किया।
बस, उसके बाद तबसे आज तक सब-कुछ ऐसे ही होता रहता है। फ़र्क़ सिर्फ़ इतना है कि बस स्टॉप के कोने और स्थान बदलते रहते हैं और कभी सतानेवालों की सरकारी पोशाकें।
उसने अपनी फटी हुई चोली से छाती को ढकना चाहा और घुटनों के ऊपर खिंची हुए पेटीकोट और साड़ी को पैरों तक खींचने की नाकाम कोशिश की, पर जूते वाले के पैर ने एक झटके से साड़ी को ऊपर कर दिया और उसके खुले रानों पर जूता रख दिया। चमड़े के जूते में लगे कील उसके नर्म माँस में घूमने लगे और वह उठकर बैठ गई। उसके उठते ही बच्चा रोने लगा। अपने नंगे अंगों को ढकने की कोशिश करते हुए वह बच्चे को थपथपाने लगी।
कुछ देर के लिए जूतेवाला आदमी उसे देखता रहा। उसके मुँह से गंदे और सस्ते दारू की बदबू आ रही थी। वह अपने बच्चे की नींद ख़राब होने की वजह से दुखी थी। अपनी नींद खराब होने का इतना दुख न था। कल भी उसे नींद नसीब न हुई थी। कल रात एक कंडक्टर और मुसाफ़िर का किसी बात पर झगड़ा हो गया था। उसके पश्चात जो हंगामा हुआ, तो वह सो न पाई। आज रात भी अगर उसे नींद न मिली, तो वह दिन की रोशनी में कैसे सो पाएगी। ऐसी कितनी ही रातें उसने मासूम बच्चे को छाती से लगाए जागते गुज़ारी हैं। वह मन-ही-मन रोती रही है, पर कर कुछ भी न पाई है। बिल्कुल लाचार, बेबस कभी-कभी हिम्मत करके वह एस॰टी॰ आफ़िसर के पास भी गई है। अपनी तकलीफ़ें रो-रोकर बयान की हैं। आफ़िसर के पैरों पर गिरी है, हाथ जोड़कर विनती भी की है, पर जवाब में उसे मिली है-डाँट।
‘यहाँ बस स्टॉप पर तुम्हें सोने की क्या ज़रूरत है?’ जिसका जवाब उसके पास नहीं है। आहिस्ता-आहिस्ता ये सब तकलीफ़ें वह इच्छा के विरुद्ध सहती रहती है और रोज़मर्रा के जीवन में ये सब दिक्कतें, दुश्वारियाँ, जिल्लतें जैसे शामिल हो गई हैं।
उसने बच्चे को उठाया, अपना स्तन उसके मुँह से लगाया। बच्चा चहक-चहक करता हुआ दूध पीने लगा।
तब जूतेवाले आदमी ने उसे ज़ोरदार लात मारी, तो बच्चा उसके हाथों से छूट गया और वह उससे दूर जा गिरी। बच्चा ज़ोर-ज़ोर  से रोने लगा। जूतेवाले आदमी ने बच्चे को उठाना चाहा, तो वह लपककर उसके सामने जाकर खड़ी हुई एक शेरनी की तरह, अपना सब दुःख, दर्द, पीड़ा भूलकर।
‘बच्चे को हाथ मत लगाना’, वह चीख़ते हुए कह उठी।
‘बच्चे को हाथ लगाया तो बहुत बुरा होगा।’ मैं कहे देती हूँ। मुझे मार लो...माँ के साँढ, बहन के...मुझे मार डाल...। मेरे साथ जो करना है कर, लेकिन बच्चे से दूर रह, इसे हाथ न लगाना। मैं भीख माँगती हूँ, पाँव पड़ती हूँ, उसे कुछ मत करना, हाथ मत लगाना।’
वह झुकते हुए उसके पैरों पर गिर पड़ी। ‘दया कर, दया कर...’ कहते हुए वह सिसकने लगी और ऐसे में उसकी हिचकियाँ बँध गईं। वह दया की भीख माँगती हुई विनम्र आँखों से उस जूतेवाले आदमी को देखने लगी।
‘हरामज़ादी!’ वह ख़ौफ़नाक ढंग से दहाड़ा। बालों से पकड़कर उसे उठाकर खड़ा किया और दूसरे पल एक ज़ोरदार लात उसके पेट पर दे मारी। वह पलटियाँ खाती हुई अपने बच्चे पर जा गिरी। उसकी चीख़ निकल गई। उसकी नाक और मुँह से ख़ून बहने लगा। एक लात और पड़ने पर वह दूसरी ओर जा गिरी। बेहोशी की हालत में बच्चा ज़ोर-ज़ोर से रो रहा था। उस आदमी ने ग़ुस्से में पास पड़े एक ख़ाली टीन के डब्बे को लात लगाई। डब्बा लात लगते ही अजीबो-ग़रीब आवाज़ करता हुआ कोने में जाकर थम गया।
गुस्से से उसके मुँह से बद्-लफ्जों की बारिश हो रही थी। ‘साली, बदचलन, भड़वी! खाने के लिए कुछ नहीं है और बिना सोचे भिखारियों की फ़ौज बढ़ाते जाते हो। कब तक बाप की बस्ती समझकर मौज मनाओगे। मरने दे साली, हराम की औलाद को मरने दे!’ ऐसा कहते हुए वह आगे बढ़ा, बच्चे को बाँह से उछालते हुए ऊपर उठाया। बच्चा निरंतर रो रहा था। घायल शेरनी बनी माँ ने ज़ोर से दाँतों के बीच उसकी बाँह को दबोच लिया और पूरे ज़ोर के साथ काटा। वह लड़खड़ाता, दर्द से चीख़ने लगा। बच्चा अलग होकर दूर जा पड़ा।
बच्चे का रोना बंद हो गया।
वह जैसे बेहोशी से होश में आई। उसे उस कुत्ती की याद आई। जिसने कुछ वक़्त पहले ही पिल्लों को जन्म दिया था और वह किसी को उन पिल्लों की ओर जाते देखती, तो भौंककर उन्हें दूर भाग जाने के लिए मजबूर कर देती थी। किसी बच्चे ने उसके एक पिल्ले को उठाने की कोशिश की, कुत्ती ने उसे काटकर हलाक कर दिया।
पागलपन की इस मदहोशी में, सुध-बुध खोकर वह उसके सामने आई, नाक और मुँह से ख़ून टपकाती वह तड़पती रही। पर अब उसने रोना बंद कर दिया। चुप, बिल्कुल चुप। आँखों से जैसे अंगारे बरस रहे थे। उसने चारों ओर नज़र फिराई। एक टूटी हुई ख़ाली बोतल उसके हाथ में आ गई। उसने एक ख़ौफ़नाक गर्जना की, जो फ़िज़ा में गूँज बनकर फैल गई। वह कुछ सोचे, समझे उसके पहले, टूटी हुई बोतल की तेज़  नोंक पूरी ताक़त के साथ उसके पेट में घुसा दी। वह तड़पने लगा। वह उसे देखकर बरबस कहने लगी-‘हरामज़ादो, सालो! भिखारियों की फ़ौज बढ़ाने का कारण तो तुम ख़ुद हो-सूअर की औलाद।’

लेखक:तीर्थ चाँदवाणी
अनुवाद: देवी नागरानी
Devi Nangrani
09987928358
http://charagedil.wordpress.com/
http://sindhacademy.wordpress.com/

COMMENTS

Leave a Reply: 1
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,35,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,7,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",6,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,7,आषाढ़ का एक दिन,17,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,179,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,2,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,32,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,17,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,15,कमलेश्वर,6,कविता,1413,कहानी लेखन हिंदी,13,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,2,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,3,केशवदास,4,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,52,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,138,गजानन माधव "मुक्तिबोध",14,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,10,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,2,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चमरासुर उपन्यास,7,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,17,जयशंकर प्रसाद,30,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,72,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,5,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,25,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,3,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,6,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,23,नाटक,1,निराला,35,निर्मल वर्मा,2,निर्मला,38,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,174,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',4,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,133,प्रयोजनमूलक हिंदी,24,प्रेमचंद,40,प्रेमचंद की कहानियाँ,91,प्रेरक कहानी,16,फणीश्वर नाथ रेणु,4,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,86,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,5,बैताल पचीसी,2,बोधिसत्व,7,भक्ति साहित्य,138,भगवतीचरण वर्मा,7,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,61,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,10,भाषा विज्ञान,13,भीष्म साहनी,7,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,5,मलिक मुहम्मद जायसी,4,महादेवी वर्मा,19,महावीरप्रसाद द्विवेदी,2,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,11,मैला आँचल,4,मोहन राकेश,12,यशपाल,14,रंगराज अयंगर,43,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,22,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,20,राजभाषा हिंदी,66,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,2,रामधारी सिंह दिनकर,25,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,2,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,118,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,33,विद्यापति,6,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,7,शमशेर बहादुर सिंह,5,शमोएल अहमद,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिक्षाशास्त्र,6,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,53,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,28,सआदत हसन मंटो,10,सतरंगी बातें,33,सन्देश,39,समसामयिक हिंदी लेख,222,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,19,सारा आकाश,17,साहित्य सागर,22,साहित्यिक लेख,70,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,3,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",9,सुभद्राकुमारी चौहान,7,सुमित्रानंदन पन्त,20,सूरदास,15,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,2,हरिवंशराय बच्चन,28,हरिशंकर परसाई,24,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,352,हिंदी लेख,504,हिंदी व्यंग्य लेख,4,हिंदी समाचार,164,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,86,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,45,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,21,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,14,astrology,1,Attaullah Khan,2,baccho ke liye hindi kavita,70,Beauty Tips Hindi,3,bhasha-vigyan,1,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 11 Hindi Antral NCERT Solution,3,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,Class 9 Hindi Sparsh,15,English Grammar in Hindi,3,formal-letter-in-hindi-format,143,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,18,hindi essay,344,hindi grammar,52,Hindi Sahitya Ka Itihas,102,hindi stories,656,hindi-gadya-sahitya,7,hindi-kavita-ki-vyakhya,15,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,icse-bhasha-sanchay-8-solutions,18,informal-letter-in-hindi-format,59,jyotish-astrology,14,kavyagat-visheshta,22,Kshitij Bhag 2,10,lok-sabha-in-hindi,18,love-letter-hindi,3,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,9,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions Class 7 Hindi Durva,12,NCERT Solutions Class 8 Hindi Durva,17,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Solutions for class 12 Humanities Hindi Antral Bhag 2,4,NCERT Solutions Hindi Class 11 Antra Bhag 1,19,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,NCERT/CBSE Class 9 Hindi book Sanchayan,6,Nootan Gunjan Hindi Pathmala Class 8,18,Notifications,5,nutan-gunjan-hindi-pathmala-6-solutions,17,nutan-gunjan-hindi-pathmala-7-solutions,18,political-science-notes-hindi,1,question paper,19,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Sankshipt Budhcharit,5,Shayari In Hindi,16,sponsored news,10,Syllabus,7,top-classic-hindi-stories,40,UP Board Class 10 Hindi,4,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,vitaan-hindi-pathmala-8-solutions,16,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: सूअर की औलाद
सूअर की औलाद
उसने अपनी फटी हुई चोली से छाती को ढकना चाहा और घुटनों के ऊपर खिंची हुए पेटीकोट और साड़ी को पैरों तक खींचने की नाकाम कोशिश की, पर जूते वाले के पैर ने एक झटके से साड़ी को ऊपर कर दिया और उसके खुले रानों पर जूता रख दिया। चमड़े के जूते में लगे कील उसके नर्म माँस में घूमने लगे और वह उठकर बैठ गई। उसके उठते ही बच्चा रोने लगा। अपने नंगे अंगों को ढकने की कोशिश करते हुए वह बच्चे को थपथपाने लगी।
https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgBOTD1kprIcG38a_pcecRiBFQQ0mK34UhQQ805uOuZzblrPN19qu3DJcWlXCYUJXcnmOA8Oy14vhchCCOz2R_wTJplS1AJx3IjtebhRw8JXQgqmQiZQRsNUCGFXjKJn3fHz4zOBN8inOrm/s320/indian-poverty.jpg
https://blogger.googleusercontent.com/img/b/R29vZ2xl/AVvXsEgBOTD1kprIcG38a_pcecRiBFQQ0mK34UhQQ805uOuZzblrPN19qu3DJcWlXCYUJXcnmOA8Oy14vhchCCOz2R_wTJplS1AJx3IjtebhRw8JXQgqmQiZQRsNUCGFXjKJn3fHz4zOBN8inOrm/s72-c/indian-poverty.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2016/12/children-of-pigs.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2016/12/children-of-pigs.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy बिषय - तालिका