जल धारा बहती रहे

SHARE:

गहरी अनुभूतियों से गुजरते हुए जब कवि स्वयं को अभिव्यक्त करता है तो कविता का जन्म होता है। कविता कवि का परिचय भी है और व्यापक अर्थ में समाज का प्रतिबिंब भी।

“जल धारा बहती रहे”: पुस्तक समीक्षा


डॉ. (श्रीमती) अपर्णा शर्मा,
जल धारा बहती रहे (कविता संग्रह),
 इलाहाबाद: साहित्य संगम, संस्करण - 2014, 
पृष्ठ: 112, मूल्य: रू. 220/-, 
आई एस बी एन: 978-81-8097-190-7.
डॉ. अखिलेश कुमार शंखधर 

गहरी अनुभूतियों से गुजरते हुए जब कवि स्वयं को अभिव्यक्त करता है तो कविता का जन्म होता है। कविता कवि का परिचय भी है और व्यापक अर्थ में समाज का प्रतिबिंब भी। कवि मन का उद्वेलन, संवेदना और झंकृति कविता में व्यक्त होती है। आलोड़न-विलोड़न, उमड़-घुमड़ काव्य सर्जना के महत्त्वपूर्ण व्यापार हैं। ‘जल धारा बहती रहे’ कवियित्री का प्रथम काव्य संकलन है जिसकी कविताएं कवियित्री के सहज मन का सजग पाठ हैं। कवि कर्म का पूर्ण मूल्यांकन रचना के जागरूक पाठक के हाथ में पहुँचने पर ही होता है। मेरा विश्वास है कि इस संग्रह की रचनाएं अपने निहित भावों को पाठकों तक पहुँचाने एवं उनके मन को स्पंदित करने में सफल होंगी। 
भूमंडलीकरण और बाजारवाद ने कभी विकास, कभी समानता तो कभी आधुनिकता के नाम पर बहुत सी समस्याओं को जन्म दिया है आज हमारा समाज इन्हीं अनेकानेक समस्याओं से ग्रस्त है। कभी जगत-गुरू की
जल धारा बहती रहे (कविता संग्रह),
इलाहाबाद:साहित्य संगम,
संस्करण - 2014,
पृष्ठ: 112, मूल्य: रू. 220/-
संज्ञा से समादृत इस देश में जहाँ एक तरफ अपसंस्कृति का प्रसार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आज के इस उत्तर-आधुनिक दौर में हम प्रकृति से भी कटते जा रहे हैं। हमने अपनी परंपरा, संस्कृति, जीवन-मूल्य और दर्शन को ताक पर रख दिया है। ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ जैसे आर्ष वाक्य को हम भूलते जा रहे हैं। कवियित्री ने जहाँ भारतीय नारी के त्याग समर्पण-सेवाभाव वाले रूप को पकड़ा है वहीं आज की आधुनिकाओं में स्वतंत्रता के नाम पर व्याप्त स्वच्छंदता पर भी प्रकाश डाला है। स्त्री-विमर्श की राजनीति करने वाले लोगों ने स्त्री स्वतंत्रता के नाम पर नारी को उसके सहज मार्ग से भटकाया ही है। संग्रह की रचनाएं इस बिंदु को रेखांकित करती हैं।
इस कविता संग्रह में विविध भाव-भूमियों से सम्बद्ध कविताएँ संकलित हैं। राजनीति का विद्रूप चेहरा, प्रकृति से तादात्म्यहीनता, गुम होता बचपन, अपसंस्कृति का प्रसार, भारतीय नारी का वैशिष्ट्य साथ ही नारी मुक्ति बनाम उश्रंखलता, बाजारवाद, जीवन मूल्यों का ह्रास, वृद्ध और कृषक समस्यायें कुछ ऐसे वर्ण्य  विषय हैं जिन पर कविताएं रची गई हैं। कुछ कविताएं कविता पर ही हैं। पाठक को इन कविताओं में कहीं जीवन का अंतःदर्शन दिखाई पड़ेगा तो कहीं संवेदित मन की अनुभूतियाँ। कहीं व्यवस्था की विकृति पर गहरी चोट है तो कहीं समाज व राष्ट्र के प्रति चिंतन। कहा जा सकता है कि कहीं भाव-उर्मियों की अठखेलियाँ हैं तो कहीं कोयल की कूक और पपीहे की पीन पुकार। इन कविताओं में सादगी की सरिता का सौंदर्य अजस्र प्रवाहमान दिखाई पड़ेगा। 
संकलन में दो कविताएँ कविता पर लिखी गई हैं- ‘मेरी कविता’ और ‘कविता रानी’। ‘मेरी कविता’ शीर्षक कविता यह स्पष्ट करती है कि कविता की कोई अथ या इति नहीं है। बीज से वृक्ष तक, अवनि से अंबर तक, माँ के वात्सल्य से प्रियतम के प्रेम तक इसकी व्याप्ति है। ‘कविता रानी’ कविता में आज की कविता पर विचार किया गया है। आज की कविता कैसे छंदों के बंधन, अलंकार, रस व विविध उपमानों से मुक्त हो चुकी है। कविता के साथ-साथ कवि को केन्द्र में रखते हुए दो कविताएँ यहाँ संकलित हैं- ‘कवि’ और ‘शासन नहीं विखंडित होता’। ‘कवि’ शीर्षक कविता अत्यंत छोटी है। यह कवि व्यक्त्वि को व्यक्त करती है। कवि शोषण के विरूद्ध अलख जगाता है परन्तु स्वयं शोषित होता है। संगठन की बात करता है परन्तु स्वयं असंगठित रहता है। ‘शासन नहीं विखंडित होता’ कविता में कवि को उसके कर्तव्य  की याद दिलाने की कोशिश की गई है। केवल मनोरंजन ही कवि कर्म नहीं है। इसके साथ ही यह भी कि शब्दाडंबर कविता नहीं है। कबीर, तुलसी और निराला की कवि परम्परा का स्मरण बहुत ही सुन्दर ढंग से इस कविता में कराया गया है। 
कुर्सी की राजनीति और भ्रष्टाचार पर भी संकलन में कविताएं हैं। इस दृष्टि से ‘गाँधी के झंडे के नीचे’, ‘सरेआम’ तथा ‘मेरा अधूरा सपना’ कविताएं उल्लेखनीय हैं। ‘गाँधी के झंडे के नीचे’ कविता में यह दिखाने का प्रयास किया गया है कि कैसे आज के नेतागण घोटालों में लिप्त हैं और उनके वरिष्ठ यह सब जानते हुए भी उनके अपराधों को महज इस लिये अनदेखा कर रहे हैं कि कहीं उनका गठबंधन न टूट जाय। ‘सरेआम’ कविता पद पर बैठे हुए व्यक्ति को यह संदेश देती है कि देशहित में कार्य करना चाहिए, मजबूरी के वशीभूत नहीं। ‘मेरा अधूरा सपना’ मोह भंग की कविता है। आजादी प्राप्ति के बाद यह सपना था कि रामराज आयेगा। सत्य, सदाचार, सन्मार्ग का प्रसार होगा, किन्तु सारे सपने टूट गए। कविता इसी मोह भंग को इंगित करती है किन्तु उम्मीद के साथ। 
संकलन की सबसे अधिक कविताएं नारी को केन्द्र में रखते हुए रची गई हैं। इस प्रकार की कविताओं में- ‘न बूझो’, ‘मैं हूँ’, ‘भारत की नारी’, ‘पेन्शन’ उल्लेखनीय हैं। पहली कविता नारीवादी विमर्शकारों पर प्रश्नचिह्न उठाती है। इस कविता में यह आकांक्षा व्यक्त की गई है कि नारी को उसके सहज मार्ग पर चलने दिया जाय। दूसरी कविता ‘मैं हूँ’ भारतीय परंपरा में प्रसिद्ध द्रोपदी, दमयंती, राधा तथा गौरी के माध्यम से और लोक में विशिष्ट स्थान रखने वाली कालिदास की विद्योत्तमा तथा तुलसीदास की रत्ना की चर्चा द्वारा आज की नारी को प्रेरणा देने की चेष्टा की गई है। ‘भारत की नारी’ कविता भारतीय नारी को अनेक कोणों से देखती है। छोटे से छोटे कार्य से लेकर भारतीय नारी बड़े से बड़ा कार्य करती है। उसके लिये कुछ भी हेय नहीं कुछ भी त्याज्य नहीं। खेती-किसानी, मेहनत-मजदूरी से लेकर ज्ञान-विज्ञान, साहित्य, राजनीति आदि सभी क्षेत्रों में उसकी सक्रिय सहभागिता है। कविता इन्हीं बिन्दुओं पर प्रकाश डालती है। ‘पेन्शन’ कविता बरबस ही अपनी ओर ध्यान आकर्षित करती है। यह कविता एक स्त्री के दुःख और त्याग की कहानी कहती है जिसने अपना पूरा जीवन अपने घर परिवार को अर्पित कर दिया। जीवन के अनेक क्रिया व्यापार-झाड़ना-बुहारना, सीना-पिरोना, कूटना-पीसना एवं बेटे-बेटी, पति सभी की सुख-सुविधा का ध्यान रखना और यह सब करते हुए बूढ़ा हो जाना-एक स्त्री की नियति है। उसे अंत में मिलता क्या है? उसकी पेंशन क्या है?
आज नगरों एवं महानगरों के तेजी से होते विकास ने मानव जीवन में ढेरों समस्याएं उत्पन्न की है। मूल्य-संस्कृति और संस्कारों का लोप हो रहा है और हम सभ्य बन रहे हैं। ‘सभ्य हो रहे हैं हम’ कविता इसी पर प्रकाश डालती है। ‘बेखौफ जिंदगी’, ‘महानगर’, ‘दिन का प्रारंभ’ आदि कविताएँ महानगरीय और शहरी जीवन की विसंगति को केन्द्र में रखकर रची गई हैं। ‘महानगर’ कविता आज की फ्लैट-संस्कृति पर खूबसूरती के साथ रोशनी डालती है। अपसंस्कृति का संकट हमारे समक्ष है। ‘बिगड़ी बात’, ‘जलधारा’, ‘दो बर्र’, ‘देवो भव’, ‘हे हरी’, कविताएँ इस विषय पर लिखी गई हैं। एक दूसरा संकट हमारे सामने यह है कि हम प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं और हमारा बचपन खोता जा रहा है। आज की महानगरीय संस्कृति-कम्प्यूटर, इंटरनेट और टी.वी. ने बचपन को लील लिया है। ‘तुम क्या जानो’ कविता में इसी ओर इशारा किया गया है। 
विषयानुकूल शब्द-चयन, भाव-प्रवणता एवं लय विविध रचनाओं में विद्यमान है। साथ ही ये सरलता और सहज-ग्राह्यता से पूर्ण हैं। छंदमुक्त रचनाएं भी प्रवाहमयी हैं। छंदों एवं शब्दों का विषयानुकूल चुनाव कविताओं को हृदयागंम करने में निश्चय ही पाठकों के लिये सहायक होगा। दैनिक प्रयोग के साधारण और छोटे-छोटे शब्द -- प्याज, बीज, पेंशन रचना की समाप्ति तक एक बड़े अर्थ के द्योतक बन गए हैं।    
(डॉ. अखिलेश कुमार शंखधर) 
सहायक प्राध्यापक, 
हिंदी विभाग, 
मणिपुर विश्वविद्यालय, 
कांचीपुर, इम्फाल - 795003, मणिपुर

------

COMMENTS

BLOGGER

Advertisements

आपको ये भी रोचक लगेगा

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,58,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,2,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,9,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,10,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,653,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,1,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,1,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,34,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,83,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरख पाण्डेय,2,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,18,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,12,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,1,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,130,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,63,प्रेमचंद,22,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,68,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,102,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,59,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,6,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,1,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,11,राजभाषा हिंदी,47,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,17,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,70,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,19,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,3,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शैक्षणिक लेख,11,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संस्मरण,9,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,14,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,13,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,16,सूरदास,4,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,9,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,158,हिंदी लेख,297,हिंदी समाचार,64,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,5,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,31,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,49,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,8,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,55,Beauty Tips Hindi,3,English Grammar in Hindi,3,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,6,hindi essay,150,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,38,hindi stories,445,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,11,Notifications,5,question paper,8,quizzes,8,Shayari In Hindi,12,sponsored news,2,Syllabus,7,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,15,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: जल धारा बहती रहे
जल धारा बहती रहे
गहरी अनुभूतियों से गुजरते हुए जब कवि स्वयं को अभिव्यक्त करता है तो कविता का जन्म होता है। कविता कवि का परिचय भी है और व्यापक अर्थ में समाज का प्रतिबिंब भी।
https://3.bp.blogspot.com/-PyuyDmQX7H8/V43UM34GIZI/AAAAAAAACBg/6Jq_mCbJVzIzx-kdBuvXFHJAG9e8N_dHQCLcB/s320/jaldhara.png
https://3.bp.blogspot.com/-PyuyDmQX7H8/V43UM34GIZI/AAAAAAAACBg/6Jq_mCbJVzIzx-kdBuvXFHJAG9e8N_dHQCLcB/s72-c/jaldhara.png
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2016/07/book-review.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2016/07/book-review.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content