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मुझे प्यार हुआ था .......
पहली नजर में पहला प्यार' क्या होता हैं ,
'उस' दिन मैंने जाना ...
हर वक्त यही एहसास होता था,--
हर रोज आनेवाली रात भी...
उस दिन, मेरेही ..और सिर्फ मेरेही लिए तारें लेकर आई ...
चाँद भी मेरे लिए ही जगमगा रहा था ...
ठंडी हवाका झोंका सिर्फ मुझसेही होकर गुजरता था...
मन पर मेरें तुम छाए हुए थे,
दिल पर मानों अब तुम्हाराही राज चल रहा था,
हर जगह तुम्हारे होनो का एहसास मज़ा देता था,...
होठों पर एक अंजानी-सी,
अचानक-सी हँसी आकर थम जाती थी ...
जो मानो मुझे छोड़ने का नाम ही नहीं लेती थी,
सब को पता चल गया ...
मैंने कभी किसीको अपने मन की बात ना बताई
फिर भी ......
सभी को इस बात का पता चल चूका था
की....
मुझे प्यार हुआ था .......

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  1. कहते हैं की इश्क और मुश्क छुपायें नहीं छुपते, वैसे भी प्यार का स्वरुप बड़ा ही सुन्दर और गुदगुदाने वाला होता है जिसको शब्दों में बयान करना बड़ा ही कठिन होता है फिर भी आपने प्यार के इस मखमली अहसास का चित्रण शब्दों में ढाल कर सफलतापूर्वक इतना उम्दा किया है की बस इतना ही कह पाऊंगा... माशा अल्लाह !! आभार !

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  2. बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति है.

    sandeep singh

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  3. sundar likha hai netra ne , aage aapki kavita ka intzaar rahega.

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  4. आप ने सचमुच प्यार को ईमानदारी से जिया है ,सुन्दर कविता के लिए बधाई.

    उत्तर देंहटाएं

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