दिल्ली नालंदा डायलॉग 2026 : 9-10 मई को वैश्विक विमर्श का केंद्र बनेगी दिल्ली
दिल्ली नालंदा डायलॉग 2026 : 9-10 मई को वैश्विक विमर्श का केंद्र बनेगी दिल्ली
नई दिल्ली : गहन बौद्धिक संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के मंच के रूप में अपनी पहचान को और सशक्त बनाते हुए, नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल 9 एवं 10 मई 2026 को “दिल्ली नालंदा डायलॉग 2026” का आयोजन कर रहा है। यह दो दिवसीय संवाद इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के कमलादेवी कॉम्प्लेक्स स्थित मल्टीपरपज़ हॉल, नई दिल्ली में आयोजित होगा।
फेस्टिवल की एक प्रमुख पहल के रूप में आयोजित यह डायलॉग 100 से अधिक वरिष्ठ सरकारी प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं, विद्वानों, लेखकों, राजनयिकों, युवा सिविल सेवकों एवं उभरती प्रतिभाओं को एक मंच पर एकत्र करेगा। “शासन, संस्कृति और साहित्य” विषय पर केंद्रित यह आयोजन समकालीन वैश्विक और सांस्कृतिक विमर्श को नई दिशा देने का प्रयास करेगा।
नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल की व्यापक दृष्टि के विस्तार के रूप में यह डायलॉग पारंपरिक साहित्यिक आयोजनों से आगे बढ़कर एक ऐसे सशक्त मंच का निर्माण करता है, जहाँ शासन, ज्ञान परंपराएँ, सभ्यतागत चिंतन और साहित्यिक विरासत मिलकर समकालीन विमर्श को नई दिशा प्रदान करते हैं।
पद्म विभूषण डॉ.सोनल मान सिंह,अध्यक्ष,नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल ने कहा, “सभ्यताएँ केवल शक्ति से नहीं, बल्कि विचारों, अभिव्यक्ति और सतत संवाद की परंपरा से जीवित रहती हैं। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल उसी ज्ञानपरंपरा को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है, जहाँ ज्ञान केवल संचित नहीं होता, बल्कि उसे जिया, साझा किया और पीढ़ियों के बीच निरंतर संवाद एवं प्रश्नों के माध्यम से विकसित किया जाता है।”
सुश्री डी. आलिया, फेस्टिवल चेयरपर्सन ने कहा “अपने मूल में नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल विभिन्न संसारों के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास है—नीति और कविता, परंपरा और परिवर्तन, तथा बुद्धि और कल्पना के बीच। इन्हीं संगमों से सार्थक सांस्कृतिक और बौद्धिक प्रगति की नई दिशाएँ जन्म लेती हैं।”
डॉ. पंकज केपी श्रेयस्कर, फेस्टिवल सलाहकार एवं आधिकारिक प्रवक्ता ने कहा, “तेज़ी और विखंडन के इस दौर में विचारपूर्ण, संतुलित और जिम्मेदार संवाद की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल ऐसा मंच है, जहाँ विचार केवल साझा नहीं किए जाते, बल्कि उन्हें गहराई, संदर्भ और गंभीर विमर्श के साथ परखा भी जाता है।”
शासन, संस्कृति और बौद्धिक विमर्श के अग्रणी विचारकों की सहभागिता के साथ “दिल्ली नालंदा डायलॉग 2026” एक दीर्घकालिक, बहु-शहर एवं अंतरराष्ट्रीय संवाद श्रृंखला की शुरुआत का संकेत देता है। इसका उद्देश्य नीति, संस्कृति और ज्ञान परंपराओं को एक साझा मंच पर लाकर समकालीन वैश्विक चुनौतियों एवं संभावनाओं पर सार्थक विमर्श को आगे बढ़ाना है।
प्राचीन नालंदा की विश्वप्रसिद्ध शिक्षण परंपरा से प्रेरित यह डायलॉग ज्ञान, संवाद और अंतर्विषयक चिंतन की उस विरासत को पुनर्जीवित करने का प्रयास है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में भी उतनी ही प्रासंगिक है।
उद्घाटन सत्र में मुख्य वक्तव्य श्री चंचल कुमार द्वारा दिया जाएगा। इस अवसर पर पद्म विभूषण डॉ. सोनल मान सिंह, श्री अमिताभ कांत एवं श्री के. एन. श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। सत्र में श्री पुरुषोत्तम अग्रवाल, डॉ. शामिका रवि और प्रो. सचिन चतुर्वेदी भी अपने विचार साझा करेंगे, जबकि संचालन श्री गौरव सावंत करेंगे।
दो दिवसीय इस संवाद में शासन, सभ्यतागत दृष्टि, सांस्कृतिक कूटनीति, भाषाएँ, साहित्य, एआई तथा भविष्य के ज्ञान तंत्रों जैसे विषयों पर विस्तृत और गहन चर्चा आयोजित की जाएगी।
पहला दिन शासन व्यवस्था और संस्थागत विकास पर केंद्रित होगा, जिसमें श्री अमरजीत सिन्हा, श्रीमती अंजू रंजन, श्रीमती मुग्धा सिन्हा और श्री त्रिपुरारी शरण शामिल होंगे।सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक सहभागिता पर सत्रों का नेतृत्व श्री के. जे. अल्फोंस, श्री संजीव चोपड़ा और डॉ. वर्षा दास करेंगे।प्रवासी भारतीय और पहचान पर विशेष संवाद में प्रो. अनिल सूकलाल, डॉ. सरिता बोधू, श्रीमती सुमन केशरी और प्रो. अजय दुबे भाग लेंगे।आगे के सत्रों में नेतृत्व, लेखन और सांस्कृतिक निरंतरता पर चर्चा होगी, जिसमें पद्मश्री शोवना नारायण, श्री मुकुल कुमार, श्री नितीश्वर कुमार और डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल होंगे।
दूसरे दिन भारतीय भाषाओं, ज्ञान संरक्षण और भविष्य की बौद्धिक संरचनाओं पर चर्चा होगी, जिसमें प्रो. कपिल कपूर, प्रो. एम. जे. वारसी, श्री कौशल किशोर और श्री सुरेखा साहू शामिल होंगे।जनसंपर्क और अकादमिक संवाद पर सत्रों में श्री विश्वपति त्रिवेदी, श्री तजेंद्र सिंह लूथरा, श्री अशुतोष अग्निहोत्री और श्रीमती शुभा शर्मा भाग लेंगे।तकनीक और ज्ञान के संबंध पर सत्र में प्रो. उमा कंजीलाल, डॉ. आनंद कुमार और डॉ. अमित पांडे एआई और डिजिटल नवाचार की भूमिका पर चर्चा करेंगे।विलियम डैलरिम्पल के साथ एक विशेष सत्र नालंदा की बौद्धिक विरासत पर केंद्रित होगा, जिसके बाद “दिल्ली–नालंदा घोषणा” प्रस्तुत की जाएगी।
यह आयोजन धनु बिहार द्वारा, दिल्ली सरकार के कला, संस्कृति एवं भाषा विभाग के सहयोग से और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के साथ साझेदारी में आयोजित किया जा रहा है। यह साझेदारी दिल्ली को सांस्कृतिक कूटनीति और नीति संवाद के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।इस डायलॉग की एक विशेषता पीढ़ियों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है, जहाँ युवा लेखक और विचारक अनुभवी नीति-निर्माताओं और विद्वानों के साथ संवाद करेंगे।प्रत्येक दिन का समापन सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ होगा, जो बौद्धिक विमर्श और कला के संबंध को दर्शाता है।भारत के समकालीन प्रश्नों—शासन, पहचान और वैश्विक सहभागिता—के संदर्भ में, नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल इस डायलॉग के माध्यम से स्वयं को एक दूरदर्शी मंच के रूप में स्थापित कर रहा है, जो न केवल संवाद करता है, बल्कि उन्हें दिशा भी देता है।
नव नालंदा महाविहारस्स विश्वविद्यालय इस फेस्टिवल का शैक्षणिक साझेदार है।
अधिक जानकारी के लिए: @NalandaLittFest
धनु बिहार के बारे में:
धनु बिहार, वर्ष 2020 में स्थापित एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो बिहार में वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के लिए कार्यरत है। इसके प्रमुख क्षेत्र हैं—महिला सशक्तिकरण, किसान सहयोग, सांस्कृतिक संरक्षण, शिक्षा और सामाजिक कल्याण।
अधिक जानकारी के लिए:
मीडिया संपर्क:
ज़िमिशा कम्युनिकेशन
संतोष कुमार
मो.: +91 99909 37676
ईमेल: santosh@zimisha.com
मनाश प्रतिम देका
मो.: +91 99539 70829
ईमेल: manash@zimisha.com
~समाप्त~

COMMENTS