राम नवमी 2026 पर भाषण | Speech on Ram Navami

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राम नवमी 2026 पर भाषण Speech on Ram Navami आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, जिसे हम सभी राम नवमी के पावन पर्व के रूप में मनाते हैं।

राम नवमी 2026 पर भाषण | Speech on Ram Navami


प्रिय सभी सज्जनों, माताओं, बहनों, और बच्चों को मेरा सादर प्रणाम।
आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि है, जिसे हम सभी राम नवमी के पावन पर्व के रूप में मनाते हैं। यह वही दिन है जब सूर्यवंश के महान राजा दशरथ और रानी कौशल्या की कोख से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने इस धरती पर जन्म लिया था। आज का दिन केवल एक धार्मिक उत्सव मात्र नहीं है, बल्कि यह हम सभी के लिए यह याद दिलाने का दिन है कि जीवन कैसे जिया जाए, किन मूल्यों को अपनाकर मनुष्य सच्चे अर्थों में मनुष्य बन सकता है। भगवान श्रीराम का जीवन केवल एक आख्यान नहीं है, वह एक आदर्श है, एक प्रेरणा है, और उस आदर्श की शुरुआत आज ही के दिन हुई थी।

राम नवमी 2026 पर भाषण | Speech on Ram Navami
जब हम भगवान श्रीराम के जीवन की ओर देखते हैं, तो हमें उनमें केवल एक देवता नहीं बल्कि एक आदर्श पुत्र, एक आदर्श भाई, एक आदर्श पति और एक आदर्श राजा दिखाई देते हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विषम क्यों न हों, मनुष्य को धर्म का मार्ग कभी नहीं छोड़ना चाहिए। जब उन्हें चौदह वर्ष का वनवास मिला, तो उन्होंने बिना किसी शिकायत के उसे स्वीकार किया, क्योंकि उनके लिए पिता का वचन सर्वोपरि था। उन्होंने राजपाट को त्याग दिया, लेकिन सत्य को नहीं त्यागा। यही उनकी महानता है कि उन्होंने सुख-सुविधाओं की अपेक्षा कर्तव्य को अधिक महत्व दिया।

वनवास के दौरान जब माता सीता का हरण हुआ, तब भगवान श्रीराम ने न केवल एक पति के रूप में अपनी धर्मपत्नी को वापस लाने का संकल्प लिया, बल्कि उन्होंने यह भी दिखाया कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। उन्होंने वानरों और ऋषियों, सभी को साथ लेकर एक विशाल सेना का निर्माण किया और लंका पर आक्रमण करके रावण जैसे शक्तिशाली राक्षस का वध किया। यह केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक था। इस युद्ध में उन्होंने यह भी सिखाया कि किसी भी कार्य को करने के लिए न तो अहंकार होना चाहिए और न ही हीन भावना। उन्होंने हनुमान जी जैसे अनन्य भक्त को अपना सेनापति बनाया और विभीषण जैसे शत्रु के भाई को भी आश्रय दिया, क्योंकि उनके लिए व्यक्ति का कर्म और उसकी निष्ठा अधिक महत्वपूर्ण थी, न कि उसका वंश या संबंध।

राम नवमी का यह पर्व हमें केवल उत्सव मनाने के लिए नहीं आया है, बल्कि यह हमारे भीतर छिपे हुए राम को जागृत करने का अवसर है। आज के समय में जब हर ओर भागदौड़ है, जब रिश्तों में दूरियाँ बढ़ रही हैं, जब सच्चाई और ईमानदारी का मोल कम होता जा रहा है, ऐसे समय में हमें श्रीराम के चरित्र से शिक्षा लेनी चाहिए। उन्होंने अपने जीवन में दिखाया कि भाई-भाई के बीच प्रेम कैसा होता है। भरत ने जब राजगद्दी संभाली तो उन्होंने राम की पादुका को ही सिंहासन पर रखा और उनके लौटने तक एक त्यागी राजा की तरह शासन किया। लक्ष्मण ने सदैव अपने बड़े भाई की सेवा की और उनके सुख-दुख में हर पल उनका साथ नहीं छोड़ा। शत्रुघ्न ने भी अपने भाइयों के प्रति सम्मान और प्रेम का परिचय दिया। यह एक आदर्श परिवार की तस्वीर है, जहाँ सत्ता के लिए संघर्ष नहीं, बल्कि त्याग और समर्पण का भाव था।

राम नवमी के इस पावन अवसर पर हमें यह भी समझना चाहिए कि श्रीराम केवल एक व्यक्ति नहीं हैं, वह एक विचार हैं। वह वह विचार हैं जो हर मनुष्य को यह बताता है कि जीवन में चाहे कितने भी कष्ट क्यों न आएँ, धैर्य नहीं खोना चाहिए। वह हमें सिखाते हैं कि अपने माता-पिता के प्रति हमारा क्या कर्तव्य है, अपने गुरुजनों के प्रति कैसा आचरण होना चाहिए, और समाज में रहते हुए हमें किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची शक्ति किसी पर अधिकार जमाने में नहीं, बल्कि स्वयं पर संयम रखने में होती है। उन्होंने रावण जैसे योद्धा को परास्त किया, लेकिन अपने अंदर कभी अहंकार नहीं आने दिया। उन्होंने राज्य किया, लेकिन प्रजा के प्रति हमेशा एक सेवक की तरह रहे।



हमारे देश की सांस्कृतिक परंपरा में राम को आदर्श माना गया है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में जिस प्रकार से राम के जीवन का वर्णन किया है, वह हर भारतीय के मन-मस्तिष्क पर अमिट छाप छोड़ गया है। राम नवमी का दिन हमें उसी रामचरितमानस के दोहों और चौपाइयों को याद करने का अवसर देता है, जो हमें जीवन की हर परिस्थिति में मार्गदर्शन करते हैं। यह दिन हमें यह सिखाता है कि सत्य, धर्म, करुणा और प्रेम ही वे स्तंभ हैं जिन पर एक सभ्य समाज की नींव टिकी होती है।

इसलिए आज जब हम सभी इस पवित्र अवसर पर एकत्रित हुए हैं, तो हमें केवल पूजा-पाठ और भोग-प्रसाद तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों को उतारेंगे। हम अपने माता-पिता की सेवा करेंगे, अपने भाई-बहनों से प्रेम रखेंगे, अपने मित्रों और पड़ोसियों के साथ सच्चा व्यवहार करेंगे, और समाज में फैली हर बुराई के खिलाफ आवाज उठाने का साहस रखेंगे। जब हम अपने भीतर के राम को जगाएंगे, तभी यह राम नवमी सच्चे अर्थों में सार्थक होगी।

अंत में मैं प्रभु श्रीराम से यही प्रार्थना करता हूँ कि वे हम सभी को सुख, शांति, समृद्धि और सद्बुद्धि प्रदान करें। हम सबके परिवार में सुख-शांति बनी रहे, हम सब धर्म के मार्ग पर चलते रहें, और हमारा यह जीवन राम के दिखाए मार्ग पर चलते हुए सार्थक हो जाए। 

जय श्री राम।

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