व्यापार मेला पर निबंध Vyapar Mela Par Nibandh स्वयं को प्रदर्शित करना या सबके सामने दिखावा करना मानव की एक महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति है। मानव ने आदिकाल
व्यापार मेला पर निबंध Vyapar Mela Par Nibandh
स्वयं को प्रदर्शित करना या सबके सामने दिखावा करना मानव की एक महत्त्वपूर्ण प्रवृत्ति है। मानव ने आदिकाल से ही अपनी हर प्रथम उपलब्धि का प्रदर्शन करके असीमित प्रसन्नता और आत्मविश्वास का अनुभव किया है। मानव के व्यक्तित्व की यह विशेषता समय के साथ आगे बढ़ती ही गयी। वर्तमान में वैज्ञानिक प्रगति के साथ व्यापार का क्षेत्र भी सम्पूर्ण विश्व तक व्याप्त हो गया है। अपनी वस्तुओं का समय-समय पर राष्ट्रों द्वारा आन्तरिक एवं विश्व स्तर पर सामूहिक रूप में व्यापार मेलों में प्रदर्शन किया जाता रहा है। ऐसा ही मेला सन् 2025, में दिल्ली के प्रगति मैदान में लगा। मेले का विज्ञापन करने के लिये आकाश में एक विशाल गैसीय गुब्बारा ताना गया था जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में 'व्यापार मेला' लिखा था। यह गुब्बारा आस-पास से गुजर रहे लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा था। मेले में प्रवेश द्वार तथा मुख्य मार्ग को कलात्मक ढंग से सजाया गया था।
यह मेला 14 नवम्बर से लेकर 30 नवम्बर तक रहा। इसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस तथा चीन आदि प्रमुख राष्ट्रों ने सक्रिय योगदान किया। उन्होंने अपनी औद्योगिक एवं व्यापारिक प्रगति का प्रदर्शन विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से किया। इसमें मुख्यतः सूचना प्रौद्योगिकी, स्टील उद्योग, कृषि, अभियांत्रिकी (Engineering) तथा यातायात आदि के क्षेत्र में होने वाली प्रगति तथा सम्बन्धित निर्माणों का प्रदर्शन था। यह सामान्य जनता के लिए प्रातः 9.15 से सायं 5.45 तक खुला। इसमें भाग लेने तथा व्यक्तिगत प्रदर्शन हेतु विश्व के सभी राष्ट्रों ने भाग लिया । हम 20 सहपाठी विद्यालय की ओर से 20 नवम्बर को आगरा से दिल्ली के लिए चल दिये।
हम सभी मित्र मालवा एक्सप्रेस में कैण्ट स्टेशन से सवार होकर सुबह 9:00 बजे दिल्ली स्टेशन पर उतरे। वहाँ से हम सब प्रगति मैदान पहुँचे। उस समय तक व्यापार मेला में प्रवेश आरम्भ नहीं हुआ था। कुछ समय तक हम इधर-उधर घूमते रहे। इसके बाद हमने मेले के क्षेत्र में प्रवेश किया। यह लगभग 10 किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ था। भाग लेने वाले हर देश ने अपने-अपने उत्पादों को पृथक्-पृथक् रूप में प्रदर्शित किया था।
सबसे पहले हमने अमेरिकी स्टॉल में प्रवेश किया। यह स्टॉल काफी लम्बे क्षेत्र में फैला हुआ था। उसमें अधिकतर सूचना प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित उत्पाद थे। विभिन्न प्रकार के कम्प्यूटर थे । वहाँ उपस्थित प्रतिनिधि कम्प्यूटर के क्षेत्र में होने वाली प्रगति का विवरण दे रहा था। वहाँ से तत्सम्बन्धी साहित्य लेकर लगभग 45 मिनट बाद हम सोवियत रूस के स्टाल में पहुँचे। वहाँ कृषि उपकरणों तथा उर्वरकों का बाहुल्य था । कृषि के क्षेत्र में रूस ने जो प्रगति की है, वहाँ उससे सम्बन्धित सभी यन्त्र एवं सामग्री उपलब्ध थी । वहाँ कृत्रिम वर्षा के विचार और व्यवहार के विषय में भी पूर्ण जानकारी थी। कुछ ऐसे भी उपकरण तथा वस्त्र थे जो वहाँ के मौसम में उचित थे । वहाँ से पर्याप्त जानकारी लेकर हम सभी बाहर आये।
इसके बाद हम ब्रिटेन, फ्रांस और जापान आदि देशों के स्टॉलों पर एक-एक कर गये। हर देश के स्टॉल पर व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उस देश द्वारा की गयी प्रगति का उल्लेख था।इसके अतिरिक्त वहाँ उससे सम्बन्धित जानकारी प्रदान की गयी थी। इस प्रकार लगभग 4 बजे शाम तक हम विभिन्न देशों के स्टॉलों पर घूमते रहे। वहीं पर भोजन तथा अन्य खाद्य-पदार्थों के स्टॉल से हमने खाना खाया। शाम के 5 बजे मेले से बाहर आकर नई दिल्ली स्टेशन पहुँचे। वहाँ से जी. टी. एक्सप्रेस से आगरा वापस आए।
ऐसे व्यापारिक मेलों से जहाँ हमें विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में होने वाली प्रगति का ज्ञान होता है वहीं हमारा सामान्य ज्ञान भी बढ़ता है।


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