विदाई समारोह पर शिक्षक का भाषण Vidai Samaroh Par Shikshak Ka Bhashan आज तुम्हारी विदाई है, कल तुम्हारी नई शुरुआत होगी।मेरे प्यारे बच्चों, आगे की राह आ
विदाई समारोह पर शिक्षक का भाषण | Vidai Samaroh Par Shikshak Ka Bhashan
प्रिय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित सहयोगी शिक्षकगण, मेरे प्यारे बच्चों, और आज के इस समारोह में उपस्थित सभी अभिभावकगण।
आज मेरी आवाज़ में थोड़ी सी कँपकँपी है, आँखों में थोड़ा सा नमी है, और दिल में एक अजीब-सी उदासी के साथ-साथ बहुत गर्व और अपार स्नेह भी भरा हुआ है। आज हम सब यहाँ इकट्ठा हुए हैं अपने उन बच्चों को विदाई देने के लिए, जिन्हें हमने पिछले कई सालों तक अपनी गोद में संभाला, उनकी हर छोटी-बड़ी गलती पर डाँटा, उनकी सफलता पर सबसे पहले ताली बजाई, और रात-रात भर जागकर उनकी चिंता में डूबे रहे। आज वही बच्चे हमारे सामने खड़े हैं—बड़े हो चुके, आत्मविश्वास से भरे, सपनों के पंख लगाए, नए आकाश की ओर उड़ान भरने को तैयार।
मुझे याद है वह पहला दिन जब तुम लोग कक्षा में घुसे थे—कुछ शरमाते हुए, कुछ उत्सुकता से इधर-उधर देखते हुए, कुछ तो डरे हुए भी। किताबें इतनी बड़ी लगती थीं कि तुम्हारे हाथों में समा नहीं पाती थीं। और आज? आज वही किताबें तुम्हारे लिए छोटी पड़ गई हैं, क्योंकि तुम्हारा मन और सोच अब बहुत बड़ा हो चुका है। तुमने सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं सीखा, तुमने जीवन के सबक भी सीखे—दोस्ती का मतलब क्या होता है, मेहनत का फल कितना मीठा होता है, असफलता से उठकर फिर चलना कितना ज़रूरी है, और सबसे महत्वपूर्ण—अपने आप पर भरोसा रखना।इन सालों में हमने साथ में बहुत कुछ देखा। याद है वह खेल का मैदान जहाँ तुम हँसते-खेलते गिरते और फिर उठ खड़े होते थे? वही मैदान आज तुम्हें जीवन की राह पर चलने की ताकत दे रहा है। याद है वे छोटी-छोटी बातों पर हुई नोंक-झोंक, फिर एक-दूसरे से मन-ही-मन माफी माँग लेना? यही तो दोस्ती की असली ताकत है। और याद हैं वे परीक्षा के दिन, जब तुम रात भर जागकर पढ़ते थे और हम शिक्षक भी चुपके-चुपके तुम्हारे लिए दुआएँ माँगते थे? आज जब मैं तुम्हें जाते हुए देख रहा हूँ, तो लगता है कि मेरे अपने बच्चे घर छोड़कर पराए आँगन में जा रहे हैं।मेरा मन कहता है कि रुक जाओ, अभी तो बहुत कुछ सिखाना बाकी है। अभी तो तुम्हें और डाँटना है, और गले लगाना है, और तुम्हारी हर छोटी उपलब्धि पर गर्व से सीना चौड़ा करना है। लेकिन जीवन की यह सबसे कड़वी सच्चाई है कि हर शुरुआत के साथ एक विदाई भी जुड़ी होती है।
आज तुम्हारी विदाई है, कल तुम्हारी नई शुरुआत होगी।मेरे प्यारे बच्चों, आगे की राह आसान नहीं होगी। दुनिया में बहुत से लोग तुम्हें नीचा दिखाने की कोशिश करेंगे, बहुत से दरवाजे बंद होंगे, बहुत सी मुश्किलें आएँगी। लेकिन याद रखना—तुम अकेले नहीं हो। तुम्हारे अंदर वह आग है जो हमने साथ मिलकर जलाई थी। वह विश्वास है जो हमने तुममें भरा था। वह साहस है जो हमने तुम्हें सिखाया था। जब भी थक जाओ, जब भी लगे कि अब नहीं हो पाएगा, तो बस एक बार आँखें बंद करके सोचना—तुम्हारे पीछे एक पूरा स्कूल है, एक पूरा परिवार है, जो तुम्हारे लिए हर पल दुआएँ माँग रहा है।जाओ, नई उड़ान भरो। नए सपने देखो। नए लक्ष्य बनाओ। नई ऊँचाइयों को छूओ। लेकिन कभी भी उस इंसान को मत भूलना जो तुम थे जब तुम यहाँ आए थे। विनम्र रहना, ईमानदार रहना, और सबसे बढ़कर—अच्छे इंसान बने रहना। क्योंकि डिग्री और नौकरी तो बहुत से लोग पा लेते हैं, लेकिन अच्छा इंसान बनना बहुत कम लोगों के नसीब में होता है।आज मैं तुमसे आशीर्वाद नहीं माँग रहा, बल्कि दे रहा हूँ।
मेरी दुआ है कि तुम्हारी हर सुबह खुशियों से भरी हो, हर शाम संतोष से। तुम जहाँ भी जाओ, लोग तुम्हें देखकर यही कहें—यह बच्चा किसी ने बहुत प्यार से तैयार किया है। अंत में बस इतना कहना चाहता हूँ—तुम्हें बहुत याद आएगा यह स्कूल, यह मैदान, यह कैंटीन की चाय, यह घंटी की आवाज़। और हमें भी तुम बहुत याद आओगे। लेकिन याद रखना, यह विदाई अंत नहीं है। यह तो बस एक नया अध्याय शुरू होने का नाम है। जब भी मन करे, जब भी थक जाओ, बस एक बार लौट आना। तुम्हारा यह घर हमेशा तुम्हारे लिए खुला रहेगा। तुम्हारे शिक्षक, तुम्हारे दोस्त, तुम्हारा पूरा स्कूल—सब यहीं इंतज़ार करेंगे।बहुत-बहुत प्यार और ढेर सारी शुभकामनाएँ मेरे बच्चों।
जाओ, जीतकर आओ। और हाँ... कभी-कभी हमें भी याद करना।
धन्यवाद। जय हिंद।


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