मुझे कदम कदम पर कविता की सप्रसंग व्याख्या | गजानन माधव मुक्तिबोध

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मुझे कदम कदम पर कविता की सप्रसंग व्याख्या गजानन माधव मुक्तिबोध यह कविता जीवन के संघर्षों, अनुभवों की विविधता और एक रचनाकार की बेचैनी को दर्शाती है।

मुझे कदम कदम पर कविता की सप्रसंग व्याख्या | गजानन माधव मुक्तिबोध


जानन माधव मुक्तिबोध की कविता 'कदम-कदम पर' प्रगतिवादी काव्यधारा की एक सशक्त रचना है। यह कविता जीवन के संघर्षों, अनुभवों की विविधता और एक रचनाकार की बेचैनी को दर्शाती है।'कदम-कदम पर' कविता यह स्पष्ट करती है कि मुक्तिबोध केवल अपनी पीड़ा के कवि नहीं थे, बल्कि वे पूरे समाज की धड़कन को अपनी कविताओं में उतारना चाहते थे। उनके लिए अनुभव का हर कतरा मूल्यवान है।

मुझे कदम-कदम पर....... चमकता हीरा है।
 

संदर्भ- प्रस्तुत कविता-अंश 'मुझे कदम-कदम पर' प्रयोगवादी कविता के श्रेष्ठतम कवि गजानन माधव मुक्तिबोध' द्वारा रचित 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' नामक कविता-संग्रह से हमारी पाठ्य-पुस्तक 'काव्य' में संकलित किया गया है।
 
प्रसंग- इस कविता में कवि ने बाह्य जगत को देखकर उससे प्रेरणा ग्रहण की है। बाह्य जगत के अनेक रमणीय चित्र प्रस्तुत करते हुए मुक्तिबोध कहते हैं कि-

व्याख्या- मुझे कदम-कदम पर अपनी बाहें फैलाये हुए असंख्य चौराहे मिलते हैं। उन चौराहे पर आगे बढ़ने के लिए मैं जैसे ही अपना कदम आगे बढ़ाता हूँ वैसे ही उनमें से कितने ही दूसरे मार्ग निकलते हुए दिखाई देने लगते हैं और मैं उन समस्त मार्गों से होकर जाना चाहता हूँ। कविवर मुक्तिबोध का आशय यह है कि जीवन में आगे बढ़ने के अनेक विकल्प हैं। ये विकल्प नित्यप्रति व्यक्ति को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यदि व्यक्ति कोई विकल्प स्वीकार कर लेता है तो उसमें से भी अनगिनत विकल्प प्रकट होने लगते हैं। इन मार्गों या विकल्पों के अनुभव और उन सभी के अपने स्वप्न भी मुझे अच्छे लगते हैं। उन अनुभवों और स्वप्नों के कारण मेरे हृदय में एक विचित्र-सी व्याकुलता पैदा होने लगती है। मैं उन अनुभवों से सीखकर और भी अधिक गहराई में उतरना चाहता हूँ। मेरे मन में यह जिज्ञासा बनी रहती है कि अनुभवों से अलग कोई और विचित्र अनुभव भी मुझे कभी- न-कभी प्राप्त हो सकता है। मुझे यह भ्रम होने लगता है कि प्रत्येक पत्थर चमकते हुए हीरे के समान हैं। 

काव्य-सौन्दर्य- (1) भाषा-खड़ीबोली। (2) रस- शृंगार । (3) शब्दशक्ति - लक्षणा ।

मुझे कदम कदम पर कविता की सप्रसंग व्याख्या | गजानन माधव मुक्तिबोध

हर-एक छाती में .....उपन्यास मिल जाते । 

व्याख्या - कवि कहता है कि मुझे ऐसा लगता है जैसे इस संसार के प्रत्येक व्यक्ति की आत्मा में अधीरता, बेचैनी है तथा प्रत्येक व्यक्ति की मुस्कान कल-कल करती हुई नदी के समान है। प्रत्येक व्यक्ति की वाणी में इतनी पीड़ा समाई हुई है कि उस पर एक महाकाव्य लिखा जा सकता है। पलभर में ही मैं प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में प्रविष्ट होकर उस पीड़ा को समझने का प्रयास करूँगा और इस प्रकार स्वयं को दे-देकर उस पीड़ा का स्रोत खोज रहा हूँ। वास्तव में यह जिन्दगी बड़ी अजीब-सी है जहाँ हर व्यक्ति का जीवन एक कहानी है। किसी से थोड़ी देर भी बात करो तो लगता है कि इसके जीवन पर तो एक उपन्यास लिखा जा सकता है ।

काव्य-सौन्दर्य- (1) सरल, सहज खड़ीबोली का प्रयोग। (2) मुक्तछन्द। (3) प्रसाद गुण ।

कविताएँ मुस्करा.. जीना ही चाहिए। 

व्याख्या - दुःख की बातें, अनेक प्रकार की शिकायतें, घमण्ड, चरित्र-सम्बन्धी बातें आदि आज सुनने को मिल रही हैं। कविताएँ तो मुस्करा कर प्यारी बात करती हैं तथा मृत्यु एवं जीवित सम्बन्धी सीढ़ियों पर श्रद्धाएँ चढ़ती हैं। जब मैं घर वापस आता हूँ तो अनेक उपमाएँ जैसे कह रही हों कि तुम्हें सौ वर्ष और जीने का प्रयास करना चाहिए।
 
काव्य-सौन्दर्य- (1) भाषा-खड़ीबोली। (2) गुण - प्रसाद । 

घर पर भी ....चुनाव कर नहीं पाता है!
 
प्रसंग- अपने दुराग्रहों को छोड़कर हृदय की सच्ची आवाज को ही प्रकट करना चाहिए, तभी उसकी रचनाओं में नवीनता और मौलिकता बनी रह सकती है। कवि इन्हीं भावनाओं को प्रकट करते हुए प्रतीकात्मक शैली में कहता है-
 
व्याख्या-  मैंने घर से बाहर भ्रमण करते समय बहुत से चौराहे और उन चौराहों के मार्गों से निकली हुई अनेक गलियाँ और उपगलियाँ देखीं। उनमें से गुजरते हुए मुझे अनेक अनुभव प्राप्त हुए। जब मैं घर लौटा, तब मुझे वहाँ भी कदम-कदम पर अनेक चौराहे मिले और उनमें से अनेक शाखाएँ तथा उपशाखाएँ निकलती दिखाई दीं। वहाँ प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में मिलते-जुलते रहते हैं। उनमें दिन-प्रतिदिन नये-नये रूपों को धारण करने वाले दृश्य दिखाई देते हैं।
 
कहने का भाव यह है कि संसार तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में असंख्य दृश्य तथा घटनाएँ दिखाई देती हैं जो रचना का विषय हो सकती हैं, अतः आज के साहित्यकार के सामने रचना के विषयों की कमी नहीं है। उसके लिए विषयों की यह अधिकता एक पहेली बन गयी है और इसलिए वह उपयुक्त विषयों का चुनाव नहीं कर पाता है।

काव्य-सौन्दर्य - 1. प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने एक श्रेष्ठ साहित्यकार तथा साहित्य के विषय में अपना मत व्यक्त किया । 2. भाषा-खड़ीबोली। 3. शैली-प्रतीकात्मक ।

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