वन है तो भविष्य है पर निबंध Van Hai Toh Bhavishya Hai प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल उपहार दिए हैं, जिनमें वन सबसे महत्वपूर्ण हैं। वन धरती के फेफड़े कह
वन है तो भविष्य है पर निबंध | Van Hai Toh Bhavishya Hai
प्रकृति ने हमें अनेक अनमोल उपहार दिए हैं, जिनमें वन सबसे महत्वपूर्ण हैं। वन धरती के फेफड़े कहे जाते हैं। ये न केवल हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं। "वन है तो भविष्य है" यह कहावत बिल्कुल सत्य है, क्योंकि वनों के बिना मानव जीवन और पृथ्वी का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा। आज तेजी से हो रही वनों की कटाई ने हमें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि यदि वन नहीं रहेंगे तो हमारा आने वाला कल कैसा होगा?
वन हमारे जीवन के लिए बहुत उपयोगी हैं, किंतु सामान्य व्यक्ति इनके महत्त्व को समझ नहीं पाते। वे वनों को प्राकृतिक सीमा मात्र मानते हैं। दैनिक जीवन में वनों का महत्त्वपूर्ण स्थान है। वन हमें रमणीक स्थान प्रदान करते हैं। वृक्षों के अभाव में पर्यावरण शुष्क हो जाता है और सौंदर्य नष्ट हो जाता है। वृक्ष स्वयं सौंदर्य की सृष्टि करते हैं। गर्मी के दिनों में बहुत-से पर्यटक पहाड़ों पर जाकर वनों की शोभा देखते हैं।
वनों से हमें विभिन्न प्रकार की लकड़ियाँ प्राप्त होती हैं। वनों से लकड़ी के अतिरिक्त अनेक उपयोगी वस्तुओं की प्राप्ति भी होती है, जिनका अनेक उद्योगों में कच्चे माल के रूप में उपयोग किया जाता है; जैसे—फर्नीचर, औषधि इत्यादि । वनों से हमें विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होते हैं, जो मनुष्य का पोषण करते हैं। ऋषि-मुनि वनों में रहकर कंदमूल एवं फलों पर ही अपना जीवन निर्वाह करते थे।
वनों से हमें अनेक जड़ी-बूटियाँ प्राप्त होती हैं। वनों से प्राप्त जड़ी-बूटियों से कई असाध्य रोगों की दवाएँ प्राप्त होती हैं। वनों में अनेक पशु-पक्षी रहते हैं; जैसे— हिरण, नीलगाय, भालू, शेर, चीता, बारहसिंगा आदि। वन इन पशुओं की क्रीडास्थली है। ये पशु वनों में स्वतंत्र विचरण करते हैं तथा भोजन और संरक्षण पाते हैं। गाय, भैंस, बकरी, भेड़ आदि पालतू पशुओं के लिए वन विशाल चरागाह प्रदान करते हैं।
वन वायु को शुद्ध करते हैं, क्योंकि ये कार्बन-डाइऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं, जिससे पर्यावरण शुद्ध होता है। यह सत्य है कि "वृक्ष धरा के हैं आभूषण, करते हैं ये दूर प्रदूषण।” वनों से वातावरण का तापक्रम, नमी और वायु प्रवाह नियमित होता है, जिससे जलवायु में संतुलन बना रहता है।
वन जलवायु की भीषण उष्णता को सामान्य बनाए रखते हैं, ये आँधी-तूफ़ानों से हमारी रक्षा करते हैं तथा गर्मी और तेज़ हवाओं को रोककर देश की जलवायु को समशीतोष्ण बनाए रखते हैं। वृक्ष वर्षा के जल को सोख लेते हैं और उसे भूमि की निचली सतह पर रोके रहते हैं, जिससे भूमि के नीचे का जल स्तर ऊँचा हो जाता है और दूर तक के क्षेत्र हरे-भरे रहते हैं। वनों के कारण वर्षा का जल मंद गति से बहता है, जिससे भूमि कटाव की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।
साथ ही पेड़-पौधों की जड़ें मिट्टी के कणों को सँभाले रहती हैं, जिससे ॐ भूमि कटाव नहीं होता। इससे भूमि ऊबड़-खाबड़ नहीं हो पाती और भूमि की उर्वरा शक्ति बनी रहती है।वन हमारे जीवन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बहुत उपयोगी हैं। इसलिए वनों का संरक्षण और संवर्द्धन बहुत आवश्यक है। इसके लिए जनता और सरकार का सहयोग अपेक्षित है। कुछ स्वार्थी लोग केवल धन के लालच में अमूल्य वनों को नष्ट करते जा रहे हैं। इसलिए आवश्यक है कि सरकार वन संरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन कराकर वनरूपी प्राकृतिक संपदा की रक्षा करे तथा वनों के नष्ट होने से उत्पन्न दुष्प्रभावों को रोके।
वन हमारे जीवन का आधार हैं। यदि वन सुरक्षित रहेंगे तो हमारा भविष्य सुरक्षित रहेगा। हमें यह समझना होगा कि वनों का संरक्षण पर्यावरण संरक्षण है, जो मानवता के लिए आवश्यक है। आइए, हम सब मिलकर वनों को बचाएं और एक हरा-भरा, स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करें। याद रखें, "वन है तो भविष्य है" – यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि जीवन का सत्य है।


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