सुबह की सकारात्मक शुरुआत कैसे करें सुबह की सकारात्मक शुरुआत करना उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है। बस कुछ छोटी-छोटी आदतें और सही दृष्टिकोण अपनाने
सुबह की सकारात्मक शुरुआत कैसे करें
सुबह की सकारात्मक शुरुआत करना उतना मुश्किल नहीं है जितना लगता है। बस कुछ छोटी-छोटी आदतें और सही दृष्टिकोण अपनाने से आपका पूरा दिन ऊर्जा, खुशी और फोकस से भर जाता है।
आपकी सुबह बदल देंगे वे पाँच विचार जो वास्तव में आपके दिन की दिशा तय करते हैं। ये विचार कोई जादू नहीं हैं, बल्कि वे आपके मन की उस पहली लहर हैं जो पूरे दिन की ऊर्जा, फैसलों और भावनाओं को आकार देती है। जब हम आँखें खोलते हैं तो ज्यादातर लोग या तो कल की चिंता में डूब जाते हैं या आज की भागदौड़ की कल्पना करके थक जाते हैं। लेकिन अगर इन पहले कुछ क्षणों में हम जानबूझकर कुछ शक्तिशाली विचारों को आमंत्रित करें तो पूरा दिन अलग रंग ले लेता है।
- सबसे पहले विचार यह है कि आज का दिन मेरे लिए नया अवसर है, न कि कल का बोझ। जैसे ही आप जागें, मन में यह भाव लाएँ कि कल जो हुआ वह कल के साथ ही समाप्त हो गया। आज का सूरज नया है, आपकी साँसें नई हैं, आपके पास अभी भी वही समय है जो हर किसी के पास है। यह विचार आपको तुरंत उस बोझ से मुक्त करता है जो कई बार हमें बिस्तर से उठने से पहले ही हरा देता है। यह एक तरह से मन को रीसेट करने जैसा है – पुरानी फाइलें बंद, नई स्क्रीन खुली।
- दूसरा विचार है कृतज्ञता का। बहुत से लोग सोचते हैं कि कृतज्ञता तभी दिखानी चाहिए जब सब कुछ परफेक्ट हो। लेकिन असल शक्ति तो तब आती है जब आप अभी, इसी हालत में, छोटी-छोटी चीजों के लिए शुक्रिया अदा करते हैं। आपकी साँस चल रही है, आपकी आँखें देख रही हैं, बिस्तर गर्म है, बाहर पक्षी चहचहा रहे हैं या बस चाय की खुशबू आ रही है – इनमें से किसी एक के लिए भी अगर आप दिल से शुक्रगुजार होंगे तो आपका पूरा मूड बदल जाएगा। यह विचार आपको कमी की जगह भरपूर होने की भावना देता है और यही भावना दिन भर आपको आकर्षित करती रहती है।
- तीसरा विचार है – मैं आज सिर्फ़ अपनी क्षमता का एक छोटा सा हिस्सा भी इस्तेमाल कर लूँ तो भी काफी है। हम अक्सर सुबह उठते ही सोचते हैं कि आज सब कुछ परफेक्ट करना है, सारी लिस्ट खतम करनी है, सबको खुश रखना है। यह दबाव इतना भारी होता है कि हम थक जाते हैं बिना कुछ किए ही। इसके बजाय यह सोचें कि आज बस एक छोटा कदम, एक अच्छा काम, एक बेहतर संस्करण का थोड़ा सा प्रदर्शन काफी है। यह विचार आपको दबाव से निकालकर गति देता है। क्योंकि छोटी जीतें ही बड़े बदलाव की नींव रखती हैं।
- चौथा विचार है – मैं अपने विचारों का मालिक हूँ, वे मुझ पर नहीं। सुबह का मन बहुत नरम और प्रभावित होने वाला होता है। अगर पहला विचार नकारात्मक आया तो वह पूरे दिन की तरह फैल जाता है। लेकिन अगर आप जानबूझकर कहें कि “मैं यह विचार चुन रहा हूँ” तो आप तुरंत नियंत्रण में आ जाते हैं। जैसे ही कोई पुरानी चिंता, डर या शिकायत मन में आए, आप उसे देखें और कहें – “यह विचार मेरे लिए उपयोगी नहीं है, मैं इसे जाने दे रहा हूँ।” यह अभ्यास धीरे-धीरे आपके मन को एक शांत और शक्तिशाली जगह में बदल देता है।
- और आखिरी विचार सबसे शक्तिशाली है – आज मैं किसी एक व्यक्ति की जिंदगी को थोड़ा बेहतर बना सकता हूँ। यह विचार आपको खुद से बाहर निकालता है। जब आप सिर्फ़ अपनी समस्याओं में डूबे रहते हैं तो दुनिया भारी लगती है। लेकिन जैसे ही आप सोचते हैं कि आज मैं अपनी मुस्कान से, एक अच्छे शब्द से, किसी की मदद से किसी का दिन बेहतर बना सकता हूँ – आपका पूरा फोकस बदल जाता है। और आश्चर्यजनक रूप से, जब आप दूसरों को देते हैं, तो खुद को सबसे ज्यादा मिलता है।
ये पाँच विचार कोई लंबी रस्म नहीं हैं। इन्हें बिस्तर पर लेटे-लेटे, आँखें खुलते ही 30-60 सेकंड में दोहराया जा सकता है। लेकिन अगर आप इन्हें रोज़ अपनाते हैं तो धीरे-धीरे आप पाएँगे कि आपकी सुबह अब डरावनी नहीं, बल्कि उत्साह से भरी लगने लगती है। और जब सुबह बदलती है तो दिन बदलता है, दिन बदलता है तो जीवन बदलता है।तो कल सुबह जब आँख खुले, सबसे पहले इनमें से किसी एक को चुन लें और उसे अपने मन में गहराई से महसूस करें। देखना, आपका दिन पहले से ही अलग होगा।


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