हरयाणवी भाषा और लोक साहित्य के अकादमिक पुनर्स्थापन की दिशा में पहल किसी एक पुस्तक तक सीमित न होकर एक व्यापक सांस्कृतिक-भाषायी हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्
हरयाणवी भाषा और लोक साहित्य के अकादमिक पुनर्स्थापन की दिशा में
नई दिल्ली / हरियाणा | समकालीन भारतीय साहित्य के परिदृश्य में आनन्द कुमार आशोधिया एक ऐसे विशिष्ट साहित्यकार के रूप में स्थापित हो चुके हैं, जिनका कार्य लोक-परंपरा, भाषाशास्त्र, सांस्कृतिक अध्ययन और अनुवाद-साहित्य के संगम पर आधारित है। एक सेवानिवृत्त वारंट ऑफिसर (भारतीय वायुसेना) के रूप में प्राप्त अनुशासन, नैतिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रीय अनुभव उनकी साहित्यिक चेतना में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
आनन्द कुमार आशोधिया का साहित्यिक योगदान केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हरयाणवी भाषा और लोक-साहित्य के संरक्षण, पुनर्पाठ और मानकीकरण की दिशा में एक दीर्घकालिक और संगठित अकादमिक प्रयास के रूप में सामने आता है।
भाषायी एवं अकादमिक कार्यक्षेत्र
लेखक का कार्यक्षेत्र बहुआयामी है, जिसमें—
- हरयाणवी, हिंदी एवं अंग्रेज़ी में सृजन और शोध
- लोक-काव्य (रागनी, सांग) का शास्त्रीय विश्लेषण
- भाषाशास्त्र एवं समाज-भाषाविज्ञान (Sociolinguistics)
- महाकाव्यात्मक पुनर्पाठ (Epic Reinterpretation)
- द्विभाषिक एवं त्रिभाषिक अनुवाद व ट्रांसक्रिएशन
- पिंगल छंद, लोक-छंद एवं प्रतीकात्मक इतिहास-लेखन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र सम्मिलित हैं।
प्रकाशित कृतियाँ एवं सृजनात्मक निरंतरता
अब तक लेखक की 14 से अधिक प्रकाशित कृतियाँ ISBN सहित उपलब्ध हैं, जिनमें हरयाणवी लोक-महाकाव्य, रागनी-संग्रह (शास्त्रीय समीक्षा सहित), आधुनिक हरयाणवी एवं हिंदी कविता, अंग्रेज़ी अनुवाद तथा प्रतीकात्मक ऐतिहासिक महाकाव्य सम्मिलित हैं। प्रमुख कृतियों में—
- Adhirājan — Folk Epic in Ragni Form (Vol. I & II)
- Thara Mudda Thari Baat — Modern Haryanvi PoemsKissa Bhagat Puranmal — Ragni with Pingal Samiksha
- Heer Ranjha — Ragni with Pingal Samiksha
- Avikāvani Haryanvi Ragni Sangrah (with Samiksha)
- Draupadi: A Folk Consciousness
- Prem ke Sau Rang — Modern Hindi Poems
- Sākēt — An English Trans-creation
- Niswarthi Udyoga Parva — English Translation
- Kahaan Kahaan Paiband Lagau — English Translation
- Ath Marjarika Uvaach — Grand Epic: Symbolic Rereading of Indian History (up to 2025)
यह सतत प्रकाशन-क्रम उन्हें “एकल-पुस्तक लेखक” नहीं, बल्कि निरंतर शोध और सृजन में संलग्न विद्वान लेखक के रूप में स्थापित करता है।
हरयाणवी भाषा के लिए त्रयी अकादमिक मिशन
वर्तमान में आनन्द कुमार आशोधिया हरयाणवी भाषा के मानकीकरण और अकादमिक स्वीकृति हेतु एक त्रयी शोध-मिशन पर कार्यरत हैं, जिसमें—
- हरयाणवी: बोली से भाषा तक — भाषावैज्ञानिक एवं समाज-भाषावैज्ञानिक अध्ययन
- हरयाणवी मानक महाशब्दकोश (हरयाणवी–हिंदी–अंग्रेज़ी)
- हरयाणवी व्याकरण: मानक एवं प्रमाणिक नियमावली
ये तीनों ग्रंथ परस्पर संबद्ध होकर हरयाणवी को लोक-बोली से मानक भाषा की दिशा में एक ठोस अकादमिक आधार प्रदान करते हैं।
संस्थागत एवं विद्वत्-स्थिति
आनन्द कुमार आशोधिया—
- त्रिभाषी लेखक (हरयाणवी–हिंदी–अंग्रेज़ी)
- लोक-साहित्य, शब्दकोश और व्याकरण—तीनों क्षेत्रों में सक्रिय
- स्वयं का प्रकाशन संस्थान Avikavani Publishers संचालित
- सृजन के साथ-साथ संपादन, मानकीकरण और अभिलेखन में संलग्न
- साहित्य को “सांस्कृतिक स्मृति” और “नैतिक साक्ष्य” के रूप में देखने वाले लेखक
सम्मान एवं मान्यता
- हरयाणवी साहित्य रत्न सम्मान (2025)
- हरियाणा संस्कृति गौरव रत्न
ये सम्मान उनके साहित्यिक योगदान की सामाजिक और सांस्कृतिक स्वीकृति को प्रमाणित करते हैं।
निष्कर्ष
आनन्द कुमार आशोधिया का साहित्यिक कार्य किसी व्यक्तिगत आकांक्षा का परिणाम नहीं, बल्कि हरयाणवी भाषा और संस्कृति के दीर्घकालिक अकादमिक पुनर्स्थापन का एक सुविचारित और संरचित प्रयास है। उनकी साहित्यिक यात्रा यह स्पष्ट करती है कि यह पहल किसी एक पुस्तक तक सीमित न होकर एक व्यापक सांस्कृतिक-भाषायी हस्तक्षेप का प्रतिनिधित्व करती है।


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