Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8

SHARE:

Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8 मानवता ही विश्व सत्य सुमित्रानंदन पंत कविता प्रश्नोत्तर गुंजन हिंदी पाठमाला भावार्थ सारांश शब्दार्थ

मानवता ही विश्व सत्य - सुमित्रानंदन पंत


मानवता ही विश्व सत्य सुमित्रानंदन पंत नूतन गुंजन हिंदी पाठमाला 8 Manavta Hi Vishva Satya Poem मानवता ही विश्व सत्य कविता का भावार्थ मानवता ही विश्व सत्य का भावार्थ मानवता ही विश्व सत्य कविता मानवता ही विश्व सत्य कविता का सरलार्थ मानवता ही विश्व सत्य कविता के प्रश्नोत्तर गुंजन हिंदी पाठमाला manavta hi vishwa satya poem manavta hi vishva satya poem question answer manavta hi vishva satya poem summary in hindi


Manavta hi Vishva Satya Poem Explanation 


चन्द्रलोक और अंतरिक्ष में
मानव ने किया पदार्पण,
छिन्न हुए लो , देश काल के
दुर्जय बाधा-बंधन।
दिग्विजयी मनु-सुत निश्चय
कितना महत्वपूर्ण यह क्षण
भेद-भाव विरोध शांत कर 
निकट आएँ सब देशों के जन।

भावार्थ - 
प्रस्तुत पक्तियाँ  मानवता ही विश्व सत्य , कविता से उद्धृत हैं, जो कवि सुमित्रानंदन पंत जी के द्वारा लिखित है। इस कविता के माध्यम से कवि कहते हैं कि आज मनुष्य ने विज्ञान में इतनी तरक्की कर ली है कि वह अंतरिक्ष और चन्द्र लोक में पहुँच चुका है और वहाँ भी अपना परचम लहरा रहा है । आज मानव ने इतनी उन्नती कर ली है कि विभिन्न देश के बीच में जो दूरियाँ थी वह भी समाप्त हो गई है। आज मनुष्य बहुत कम समय में ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक आसानी से आ-जा सकता है। पंत जी कहते हैं कि सभी दिशाओं को जीतने वाले मानव के लिए वह पल कितना महत्वपूर्ण होगा जब सभी देश के देशवासी एक दूसरे के निकट आएंगे, आपसी भेद-भाव, द्वेष-भावना, ईर्ष्या, छल, कपट आदि की भवनाओं को मिटाकर मिलजुलकर मानव हित के लिए कार्य करेंगे, वह पल बहुत सुखद और शांत होगा | 

युग-युग का पौराणिक स्वप्न
हुआ मानव का संभव,
शुभ समारंभ नए चंद्र-युग का
भू को दे गौरव।
फहराए ग्रह-उपग्रह में
धरती का श्यामल अंचल
सुख-संपद-संपन्न जगती में
बरसे जीवन-मंगल।

भावार्थ - प्रस्तुत पक्तियाँ  मानवता ही विश्व सत्य  कविता से उद्धृत हैं, जो कवि सुमित्रानंदन पंत जी के द्वारा लिखित है। इस कविता के माध्यम से कवि कहते हैं कि प्राचीन काल से मानव जिस विश्व शांति का सपना देख रहे थे, वह सपना अब पूरा करना सम्भव है। आज हम सब को एक साथ आगे बढ़ना होगा, जिससे एक नए चन्द्रयुग का आरंभ होगा और धरती को गौरव प्रदान होगा। पंत जी कहते हैं कि आज मानव ने जिस तरह से ग्रह और उपग्रह में विकास का परचम फहराया है। इसके लिए सभी राष्ट्र को गौरव होना चाहिए | अपने विकास के बढ़ते कदम पर और इस धरती पर सुख, समृद्धि , धन की वर्षा हो इस धरा पर रहने वाले सभी प्राणियों के जीवन में मंगल ही मंगल हो | 

Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8
मानवता ही विश्व सत्य

देश सभी मिल बनें

नव दिक् - रचना के वाहन,
जीवन पद्धतियों के भेद
समन्वित हों विस्तृत मन!
अणु-युग बने धरा-जीवन हित
स्वर्ग सृजन का साधन,
मानवता ही विश्व सत्य
भू-राष्ट्र करें आत्मापर्ण। 

भावार्थ - 
प्रस्तुत पक्तियाँ  मानवता ही विश्व सत्य  कविता से उद्धृत हैं, जो कवि सुमित्रानंदन पंत जी के द्वारा लिखित है। इस कविता के माध्यम से कवि कहते हैं कि सभी राष्ट्र-देशों को मिलकर सामने आना होगा और एक नई दिशा में काम करना होगा | जीवन को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए मिलकर कार्य करना होगा। सभी देश जीवन पद्धति के भेद-भाव को मिटाकर एक साथ हो जाएँ, हॄदय विशाल हो जाए और सभी देश नए सम्भावनाओं के वाहक बने। इस परमाणु युग में जब सभी देश अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए जब बात कर रहे हैं तो हमें धरती पर रहने वाले सभी प्राणियों के हित में सोचना चाहिए और उनके हित के लिए कार्य करना चाहिए और सभी देशों को मानवता को विश्व सत्य मानते हुए और उसे अपनाकर ही धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है । धरती पर विभिन्न भौगोलिक स्तर पर आधारित दुनिया के सभी देशों को मानवता की भलाई पर ध्यान देने के लिए स्वयं को समर्पित कर देना चाहिए | 

---------------------------------------------------------


मानवता ही विश्व सत्य कविता का सारांश 

प्रस्तुत पाठ  मानवता ही विश्व सत्य , कवि सुमित्रानंदन पंत जी के द्वारा लिखित है। इस कविता के माध्यम के कवि ने मानवता, विश्वबन्धुत्व, सद्भावना और सहयोग पर बल दिया है। पंत जी की इच्छा है कि सभी मिलकर उन्नति करें और यह अणु युग धरती पर स्वर्ग लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँ | सभी देश आपसी भेदभाव का त्याग करें । इस धरती पर आपसी संसाधनों की मारा-मारी से दूर रहें और मानव के कल्याण के लिए कार्य करें।विज्ञान ने आज इतनी तरक्की कर ली है की वह अंतरिक्ष में भी अपना परचम लहरा चुका है। पंत जी कहना चाहते हैं की इस उन्नति का प्रयोग मानव की भलाई में लगाया जाए । सभी राष्ट्रों को मानवता का विश्व सत्य मानते हुए इसके प्रति अपना समर्पण भाव प्रकट करना चाहिए और उसे अपनाकर कर ही इस धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है। जिससे सभी देश और देशवासी भेदभाव मिटाकर आपस में प्रेम से रहेंगे, जिससे राष्ट्र और भी तरक्की की ओर बढ़ेगा...|| 



Manavta Hi Vishva Satya Poem Question Answer


प्रश्न-1 ग्रह-उपग्रह में धरती का आँचल फहराने से क्या तात्पर्य है ? 

उत्तर- ग्रह-उपग्रह में धरती का आँचल फहराने से तात्पर्य यह है की मानव ने इतनी उन्नती कर ली है कि अपने विकास का परचम ग्रह-उपग्रह में भी फहराया है | 

प्रश्न-2 धरती को स्वर्ग कैसे बनाया जा सकता है ? 

उत्तर- धरती को स्वर्ग बनाने के लिए हम सब को आपस में प्रेम व्यवहार से रहना होगा, भेद-भाव, ईर्ष्या, द्वेश की भवना को मिटाकर एक दूसरे का सहयोग करके धरती को स्वर्ग बनाया जा सकता है। 

प्रश्न-3 इस कविता का मुख्य संदेश क्या है ? 

उ.  इस कविता का मुख्य संदेश मानवता, विश्वबन्धुत्व, सद्भावना और सहयोग है तथा सब राष्ट्र-देश एक साथ मिलकर उन्नती करें | 

प्रश्न-4 मानव ने किन बन्धनों को तोड़ा है तथा कहाँ-कहाँ तक अपनी पहुँच बनायी है ? 

उत्तर- 
मानव ने भेद-भाव, ईर्ष्या, द्वेष जैसे बन्धनों को तोड़कर ग्रह-उपग्रह तक अपनी पहुँच बनायी है | 

प्रश्न-5 मानव के लिए कौन-से क्षण को महत्वपूर्ण कहा जा रहा है और क्यों ? 

उत्तर- मानव  के लिए वह क्षण महत्वपूर्ण होगा जब सभी देश के देशवासी एक दूसरे के निकट आएंगे, आपसी भेद-भाव, द्वेष-भावना ईर्ष्या, छल, कपट आदि की भवनाओं को मिटाकर मिलजुलकर मानव हित के लिए कार्य करेंगे। क्योंकि ऐसा करने से इस संसार में रहने वाले भी प्राणी को कोई दुख नहीं होगा और यह धरती स्वर्ग समान हो जाएगा | 

प्रश्न-6 मानव युगों से क्या स्वप्न देख रहा था और वह किस प्रकार पूरा हुआ ? 

उत्तर - प्राचीन काल से मानव विश्व शांति का सपना देख रहे थे, वह सपना आज पूरा हुआ है आज मानव ने इतनी उन्नति की है कि सब दूरियाँ खत्म हो गई,  आज परिवार दूर रहकर भी साथ है। एक देश से दूसरे देश की दूरियाँ समाप्त हो गई है | आज मानव ने वैज्ञानिक तकनीक का प्रयोग कर सब आसान कर दिया | आज प्राचीन काल का स्वप्न इस प्रकार से पूरा हुआ है | 

प्रश्न-7 धरती का जीवन मंगलमय कैसे हो जाएगा ? 

उत्तर- धरती का जीवन तब मंगलमय हो जाएगा, जब सभी देश अपनी स्वार्थ की भावना का त्याग कर एक-दूसरे के साथ मिलजुलकर मानवता की भलाई के लिए कार्य करेंगे | 

---------------------------------------------------------

प्रश्न-8 मंजूषा में से पर्यायवाची शब्द छाँटकर लिखिए --- 

सुमित्रानंदन पंत
सुमित्रानंदन पंत

इंसान , मनुष्य
धरा, भू
सम्पत्ति, समृद्धि        
सृष्टि , निर्माण
कल्याण, शुभ

उत्तर-  निम्नलिखित उत्तर हैं - 

• मानव - इंसान , मनुष्य
• पृथ्वी -  धरा, भू
• संपदा - सम्पत्ति, समृद्धि      
• रचना - सृष्टि , निर्माण
• मंगल - कल्याण, शुभ  | 


प्रश्न-9 पौराणिक शब्द 'पुराण' में 'इक' प्रत्यय लगाने से बना है। इसी प्रकार 'इक' प्रत्यय लगाकर पाँच शब्द बनाइये --- 
उत्तर- 
निम्नलिखित उत्तर हैं - 

• मासिक
• साप्ताहिक
• दैनिक
• वार्षिक
• मौखिक


प्रश्न-10 दिए गए वाक्यांशों के लिए एक शब्द पाठ से छाँटकर लिखिए --- 

उत्तर -  
निम्नलिखित उत्तर हैं - 

i.   जिसे जितना कठिन हो   - दुर्जय
ii.  जो पुराण से सम्बंधित हो - पौराणिक
iii. जो हो सके -  संभव
iv. जो मिला जुला हो - सम्बंधित

प्रश्न-11 नीचे लिखे शब्दों का वर्ण-विच्छेद कीजिये --- 

उत्तर- 
निम्नलिखित उत्तर हैं - 

• दुर्जय - द्+ ऊ+  र् +  ज् + अ + य् + अ
• विरोध - व् +  इ + र् + ओ +  ध् + अ
• ग्रह -ग्+र्+अ+ह्+अ
• सम्पन्न - स् + अ + म् + प् + अ + न् +  न् +अ

प्रश्न-12 देश-काल, बाधा-बन्धन और मनु-सुत सामासिक पद हैं। इन पदों का समाज विग्रह है --- 

उत्तर- निम्नलिखित उत्तर हैं - 

• देश-काल  -  देश और काल
• बाधा-बन्धन  -  बाधा और बन्धन
• मनु-सुत  -  मनु का सुत

प्रश्न-13 पाठ में आये इन सामासिक पदों का विग्रह कीजिये --- 

उत्तर - 
निम्नलिखित उत्तर हैं -  

• भेद-भाव - भेद का भाव
• ग्रह-उपग्रह - ग्रह और उपग्रह
• जीवन-मंगल - जीवन का मंगल
• जीवन-पद्धति - जीवन का पद्धति
• अणु-युग - अणु का युग
• धरा-जीवन - धरा का जीवन

प्रश्न-14 उदाहरण के अनुसार प्रेरणार्थक क्रियाओं का निर्माण कीजिए --- 

उ. 
निम्नलिखित उत्तर हैं - 

धातु          प्रथम प्रेरणार्थक              द्वितीय प्रेरणार्थक


देना                 दिलाना                      दिलवाना

बसना              बसाना                        बसवाना

मिलना            मिलाना                       मिलवाना

उठ                 उठाना                         उठवाना

करना              कराना                         करवाना

---------------------------------------------------------



मानवता ही विश्व सत्य कविता के शब्दार्थ


• पदार्पण - प्रवेश, आगमन
• छिन्न - खंडित
• दुर्जय - जिसे जितना कठिन हो
• दिग्विजयी - सभी दिशाओं को जीतने वाला
• मनु-सूत - मानव-पुत्र
• पौराणिक - पुराणों से सम्बंधित
• समारंभ - प्रारम्भ, उद्घाटन
• संपद - सम्पति, धन
• दिक् - दिशाएँ 
• पद्धतियों - रीतियाँ
• समन्वित - एक साथ, इकट्ठे
• भू-राष्ट्र - भौगोलिक स्तर पर बंटे राष्ट्र
• आत्मापर्ण -  स्वयं को समर्पित कर देना   | 




© मनव्वर अशरफ़ी 

COMMENTS

LEAVE A REPLY: 1
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,28,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,7,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,179,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,17,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,1086,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,41,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,117,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,9,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चमरासुर उपन्यास,7,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,34,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,6,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,29,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,172,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,94,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,85,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,125,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,14,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,9,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,22,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,17,राजभाषा हिंदी,58,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,19,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,99,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,27,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,6,शमशेर बहादुर सिंह,5,शमोएल अहमद,4,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,31,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,26,समसामयिक हिंदी लेख,57,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,14,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,24,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,27,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,216,हिंदी लेख,444,हिंदी समाचार,104,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,58,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,2,baccho ke liye hindi kavita,66,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 11 Hindi Antral NCERT Solution,3,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,Class 9 Hindi Sparsh,15,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,10,hindi essay,208,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,63,hindi stories,557,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,lok-sabha-in-hindi,12,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions Class 7 Hindi Durva,12,NCERT Solutions Class 8 Hindi Durva,17,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Solutions for class 12 Humanities Hindi Antral Bhag 2,4,NCERT Solutions Hindi Class 11 Antra Bhag 1,19,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,NCERT/CBSE Class 9 Hindi book Sanchayan,6,Nootan Gunjan Hindi Pathmala Class 8,18,Notifications,5,question paper,12,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Sankshipt Budhcharit,5,Shayari In Hindi,14,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8
Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8
Manavta Hi Vishva Satya Poem Nutan Gunjan Hindi 8 मानवता ही विश्व सत्य सुमित्रानंदन पंत कविता प्रश्नोत्तर गुंजन हिंदी पाठमाला भावार्थ सारांश शब्दार्थ
https://1.bp.blogspot.com/-C_o8k5o9VUM/YLhz4mwrChI/AAAAAAAAQCI/nxq-NMqjYLsV8ZiocIenbxxi8RVwu8h8gCNcBGAsYHQ/s320/manavta-hi-vishva-satya-poem.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-C_o8k5o9VUM/YLhz4mwrChI/AAAAAAAAQCI/nxq-NMqjYLsV8ZiocIenbxxi8RVwu8h8gCNcBGAsYHQ/s72-c/manavta-hi-vishva-satya-poem.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2021/06/manavta-hi-vishva-satya-poem-nutan.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2021/06/manavta-hi-vishva-satya-poem-nutan.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका