स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी

SHARE:

स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी आधुनिकता के इस दौर में जब शहर के तकरीबन हर दूसरे-तीसरे घर के लोग आरओ का फिल्टर पानी पीते हैं

स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी


धुनिकता के इस दौर में जब शहर के तकरीबन हर दूसरे-तीसरे घर के लोग आरओ का फिल्टर पानी पीते हैं तो वहीं देश के ग्रामीण इलाकों में कुछ ऐसे भी गांव हैं जहां वर्षों से सरकारी तंत्र की अनदेखी के कारण लोगों को पीने के लिए साफ पानी तक नसीब नहीं हो रहा है। सरकार द्वारा पेयजल को लेकर प्रति वर्ष लाखों रुपया खर्च जरूर किया जाता है, लेकिन इसका लाभ देश में ग्रामीण अंचल को मिल रहा है या नहीं, इसकी निगरानी व्यवस्था अब भी कमजोर है। मसलन छत्तीसगढ़ के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के आदिवासी परिवार आज भी पीने के साफ़ पानी जैसी अपनी मूलभूत आवश्यकता के अभाव में पीढ़ियों से अपना जीवन जीते आ रहे हैं।

रोजाना सूरज के उजियारे के साथ घर की महिलाएं हाथ में पानी का बर्तन लिए एक किलोमीटर पैदल चलकर नदी किनारे पहुंचती हैं, फिर झरिया (नदी किनारे की ज़मीन) खोदकर प्यास बुझाने के लिए पानी निकालती हैं। वह पानी भी साफ नहीं रहता है, इसीलिए उसे घर ले जाकर पहले गन्दे पानी को छानती हैं और फिर पीने लायक बनाती हैं। यह स्थिति है छत्तीसगढ़ में दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा जिला स्थित पोंदुम ग्राम पंचायत के बुरकापारा क्षेत्र की। जो आज आजादी के सात दशक बाद भी पीने के साफ पानी के लिए तरस रहा है। यहां आज तक कोई भी सरकार ग्रामीण आदिवासियों के लिए स्वच्छ जल की व्यवस्था नहीं करा पाई है।
स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी

दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 11 किलोमीटर की दूरी पर लगभग 3 हजार की जनसंख्या वाला गांव है पोंदुम। यह गांव दो भागों में बंटा है, जिसमें पोंदुम 1 तथा पोंदुम 2 है। गांव के आधे हिस्से में तो पेयजल की व्यवस्था थोड़ी ठीक-ठाक है, लेकिन पोंदुम 2 के बुरकापारा क्षेत्र में पेयजल की कोई भी व्यवस्था नहीं है। तीन तरफ से घिरे हुए गांव के एक भाग में डंकनी नदी, दूसरी तरफ एक नाला और तीसरी तरफ रेल पटरी है। ग्रामीण यहां से पानी लाने या तो डंकनी नदी जा सकते हैं या फिर रेलवे पटरी को पार करके मौजूद एक हैंडपंप तक पहुंच सकते हैं। लेकिन उसके लिए भी एक से डेढ़ किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। अन्य मौसम में तो ग्रामीण नदी के पानी से जैसे-तैसे अपनी जरूरतें पूरी कर लेते हैं लेकिन बारिश के मौसम में जब नदी का पानी बहुत गंदा होता है तो उनके सामने समस्या और विकराल हो जाती है। इसलिए यहां के लोग बरसात के दौरान घर की छप्पर से गिरने वाले पानी को बर्तनों में इकट्ठा करके पीने के लिए उपयोग में लाते हैं। इस तरह से बुरकापारा में 30 आदिवासी परिवारों के लगभग 90-100 लोग रोजाना पानी की जद्दोजहद में लगे रहते हैं, बावजूद उन्हें पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल पाता है। तो दूसरी तरफ गंदा पानी पीने से उनके स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


स्थिति यह है कि पानी की तलाश में गांव की 60-70 वर्षीय वृद्ध महिलाओं को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी लाने नदी जाना पड़ता है। बुरकापारा की वार्ड पंच मंगों मण्डावी के साथ साथ अन्य महिलाएं आयते मण्डावी, बुधरी, लक्में और पायकों ने बताया कि हमारे क्षेत्र में एक भी हैंडपंप नहीं है। जो भी पानी के स्रोत हैं वह यहां से बहुत दूर हैं। महिलाओं ने बताया कि रोजाना लगभग एक किलोमीटर से ज्यादा दूर जाकर हम सभी पानी लाते हैं। नदी का पानी कभी थोड़ा साफ रहता है तो कभी बहुत गंदा, फिर भी हम मजबूरी में उसी पानी का उपयोग करते हैं। बुरकापारा निवासी एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लक्ष्मी मण्डावी कहती हैं कि हमें पानी की बहुत ही ज्यादा समस्या है। घर की हर जरूरतों के लिए नदी से ही पानी लाना पड़ता है और पानी लाने में ही हमारे दिन का आधा समय चला जाता है। उसके बाद ही आंगनबाड़ी का कार्य कर पाती हूं। इससे हमें शारीरिक के साथ साथ मानसिक थकान भी बहुत होती है और पीने के लिए स्वच्छ पानी नहीं मिलने से विभिन्न बिमारियों का खतरा भी बना रहता है।

वहीं इस समस्या के संबंध में पोंदुम पंचायत के सरपंच भानुप्रताप कर्मा ने बताया कि बुरकापारा क्षेत्र में 5 बार बोर खनन (बोरिंग) का कार्य किया जा चुका है लेकिन इस इलाके में जमीन के अंदर चट्टान होने के कारण बोर खनन में पानी नहीं निकलता है। इसलिए यहां पानी की समस्या है जबकि गांव के अन्य जगहों में पानी के लिए हैंडपंप है। उन्होंने बताया कि पंचायत को नलजल योजना के लिए राशि मिल गई है, कोरोना का प्रकोप कम होने पर हम पाइप लाइन के द्वारा एक स्थान पर टंकी बनाकर पानी पहुंचाने का कार्य शुरु करेंगे। पेयजल के अभाव पर बात करते हुए स्थानीय कुम्मा मण्डावी ने बताया कि बुरकापारा के साथ-साथ गांव के अन्य जगहों अलीकोंटा, घोरकुट्टा और दरशाबलुम गांव के लोग भी नदी के पानी का उपयोग करते हैं। पेयजल के लिए सबसे ज्यादा महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है, क्योंकि घर का सारा काम वही करती हैं। उन्होंने बताया कि हमारी समस्या से जिला कलेक्टर को भी अवगत कराया जा चुका है। उनके आदेश के बाद एक हैंडपंप खनन गाड़ी आती है। एक जगह खोदकर देखती है और पानी नहीं निकलने पर चली जाती है। इस तरह सालों से हमारी यह समस्या जस की तस बनी हुई है। उन्होंने बताया नदी से भी पाइप लगाकर पानी यहां तक पहुंचाया जा सकता है लेकिन स्थानीय प्रशासन ने वह भी नहीं किया है।

इस संबंध में दंतेवाड़ा जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता देवेन्द्र आर्मो ने बताया कि पोदुंम के बुरकापारा क्षेत्र ड्राई जोन में आता है, इसलिए वहां बोर खनन सफल नहीं हो रहा है। हालंकि एक पुराने हैण्डपंप को फिर से शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है। हमारी तकनीकी टीम ने वहां दौरा कर काम भी शुरू कर दिया है। इसके अलावा पाइपलाइन से पानी पहुंचाने की भी वहां कार्य योजना तैयार की गई है, जिस पर जल्द ही टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा स्थित पोदुंम गांव का बुरकापारा ही ऐसा एकलौता स्थान नहीं है जहां पेयजल का अभाव हो, बल्कि राज्य में कई ऐसे गांव हैं जहां लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं और ग्रामीण नदी-नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। बस्तर जिले के नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत कुंगारपाल, भालूगुड़ा पारा में निवासरत लगभग 400 परिवार भी झरिया का पानी पीने को विवश हैं क्योंकि गांव में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी तरह कांकेर जिले के ग्राम पंचायत लोहतर के आश्रित ग्राम पिड़चोड़ के स्कूलपारा के ग्रामीण मुहल्ले में भी हैंडपंप नहीं होने के कारण महिलाएं रोज़ाना एक किलोमीटर दूर स्थित कुएं से पानी लाती हैं। उन्होंने प्रशासन को पेयजल समस्या के समाधान के संबंध में आवेदन किया है लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।

देश का कोई भी राज्य या गांव हो, 21वीं सदी में भी लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिलना दुर्भाग्य है। ऐसे हालात को देखकर सरकार के सर्वांगीण विकास के दावे पर भी प्रश्नचिन्ह लग जाता है। भारत सरकार की जल जीवन मिशन वेबसाइट के अनुसार प्रदेश में 19 हजार से ज्यादा गांव हैं, जिनमें से 6 हजार से ज्यादा गांवों में पाइप लाइन वाटर कनेक्शन नहीं है। वहीं 61 फीसदी गांवों में ही कनेक्शन काम कर रहे हैं। रिपोर्ट की माने तो प्रदेश के तकरीबन 13 हजार 900 से ज्यादा गांवों में कनेक्शन 100 फीसदी नहीं है यानि वहां आधे लोगों तक ही पानी पहुच पाया है। पेयजल स्त्रोतों की गुणवत्ता को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जारी आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ का स्थान 14वां है यानि 91.1 फीसदी घरों के पेयजल स्रोतों में सुधार हुआ है।

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था ज्यादा बेहतर नजर आता है जो कि 97 फीसदी तक है। वहीं इस मामले में राष्ट्रीय औसत 89.9 फीसदी है। इस आधार पर छत्तीसगढ़ का औसत राष्ट्रीय औसत से 2 फीसदी तक ज्यादा है। हांलकि जमीनी हकीकत देखें तो वह सरकार के आंकड़ों से मेल नहीं खाती है। जबकि केन्द्र सरकार की जल जीवन मिशन एवं राज्य सरकार की अमृत मिशन जैसी योजनाएं केवल पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही चलाई जा रही हैं। बावजूद इसके छत्तीसगढ़ के दुर्गंम स्थानों पर रहने वाले ग्रामीणों को पीने के लिए साफ पानी का नहीं मिलना दावे और व्यवस्था दोनों को कटघरे में खड़ा करता है। (यह आलेख संजॉय घोष मीडिया अवार्ड 2020 के अंतर्गत लिखा गया है)


- सूर्यकांत देवांगन,
रायपुर, छत्तीसगढ़

COMMENTS

LEAVE A REPLY
नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,28,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,7,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,179,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,17,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,1086,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,41,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,117,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,9,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चमरासुर उपन्यास,7,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,34,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,6,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,29,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,172,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,94,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,85,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,125,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,14,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,9,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,22,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,17,राजभाषा हिंदी,58,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,19,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,99,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,27,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,6,शमशेर बहादुर सिंह,5,शमोएल अहमद,4,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,31,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,26,समसामयिक हिंदी लेख,56,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,14,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,24,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,27,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,216,हिंदी लेख,444,हिंदी समाचार,104,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,58,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,2,baccho ke liye hindi kavita,66,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 11 Hindi Antral NCERT Solution,3,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,Class 9 Hindi Sparsh,15,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,10,hindi essay,208,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,63,hindi stories,557,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,lok-sabha-in-hindi,12,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions Class 7 Hindi Durva,12,NCERT Solutions Class 8 Hindi Durva,17,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Solutions for class 12 Humanities Hindi Antral Bhag 2,4,NCERT Solutions Hindi Class 11 Antra Bhag 1,19,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,NCERT/CBSE Class 9 Hindi book Sanchayan,6,Nootan Gunjan Hindi Pathmala Class 8,18,Notifications,5,question paper,12,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Sankshipt Budhcharit,5,Shayari In Hindi,14,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी
स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी
स्वच्छ जल से आज भी वंचित हैं आदिवासी आधुनिकता के इस दौर में जब शहर के तकरीबन हर दूसरे-तीसरे घर के लोग आरओ का फिल्टर पानी पीते हैं
https://1.bp.blogspot.com/-E4jXocUTOrQ/YKS0EjsP9BI/AAAAAAAAP5w/cynqfRtN54sOO00F5EopGOYcUmx0L7A3wCNcBGAsYHQ/s320/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259B%2B%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25B2%2B%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587%2B%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%259C%2B%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580%2B%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%2B%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582%2B%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A6%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2580%2BPic%2B4.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-E4jXocUTOrQ/YKS0EjsP9BI/AAAAAAAAP5w/cynqfRtN54sOO00F5EopGOYcUmx0L7A3wCNcBGAsYHQ/s72-c/%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%259A%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259B%2B%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25B2%2B%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2587%2B%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%259C%2B%25E0%25A4%25AD%25E0%25A5%2580%2B%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25A4%2B%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%2588%25E0%25A4%2582%2B%25E0%25A4%2586%25E0%25A4%25A6%25E0%25A4%25BF%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B8%25E0%25A5%2580%2BPic%2B4.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2021/05/swachh-jal-vanchit-aadivasi.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2021/05/swachh-jal-vanchit-aadivasi.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका