आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था

SHARE:

आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी

आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था


चार राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेश के चुनाव समाप्त होते ही पेट्रोल और डीज़ल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं l विधानसभा चुनावों से पहले एक्साइज ड्यूटी में कटौती की मांग की जा रही थी लेकिन सरकार ने इस का ठीकरा तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक प्लस पर फोड़ दिया था । सरकार का कहना था कि ये देश उत्पादन को सीमित कर के कीमतों में तेजी ला रहे हैं। लेकिन सरकारी तेल कंपनियों ने 28 फरवरी से लेकर 23 मार्च तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जबकि इस दौरान भारत की क्रूड कॉस्ट 68 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई थी। अब विधानसभा चुनाव खत्म हो चुके हैं और एक बार फिर पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़नी शुरू हो गई हैं। देश के कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के पार चली गई है।

घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी हैं l इसका मतलब है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरती हैं, तो रिटेल कीमतें कम होनी चाहिए, लेकिन ज्यादा तर बार ऐसा नहीं होता है l ऐसा इसलिए है, क्योंकि क्रूड ऑयल की कीमतें गिरने के बाद सरकार नए टैक्स लगा देती है l देश में पेट्रोल और डीजल की कीमत का सीधा रिश्ता विदेश में कच्चे तेल की कीमत से नहीं टैक्स और डीलर्स के कमीशन से है

पेट्रोल की कीमत कैसे तय होती है ?

दुनिया भर में 160 किस्म के कच्चे तेल का कारोबार होता है l यह उनके घनत्व से ले कर तरलता के स्तर पर निर्भर करता है l ज्यादा तर कच्चे तेल अपने भौगोलिक नामों जैसे ब्रेंट क्रूड, ओमान क्रूड, दुबई क्रूड से पहचाने जाते हैं l भारत अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल बाहर से आयात करता है और इस आयातित कच्चे तेल का भाव ब्रेंटस, ओमान, दुबई के भाव से तय होता है l ऑयल मार्केटिंग कंपनियां और रिफाइनरी इस कच्चे तेल को खरीद कर ले आती हैं और उसे साफ सुथरा कर के अलग-अलग पेट्रोलियम पदार्थों- पेट्रोल, डीजल को देश भर में भेजती हैं l गौरतलब है कि जिस पेट्रोल के एक लीटर की मूल कीमत पर एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और वैल्यू ऐडेड टैक्स (VAT) जुड़ने के बाद उस की कीमत दुगनी हो जाती है l यानी कि अगर टैक्स कम हो जाए तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं l 

देश के भीतर पेट्रोल या डीजल की कीमतों के तय होने के लिए हम दिल्ली का उदाहरण लेते हैं l सबसे पहले पेट्रोल की कीमत में बेस कीमत जुड़ती है, जैसे दिल्ली में 16 फरवरी 2021 के हिसाब से बेस कीमत 31.82 रुपए प्रति लीटर थी l उसके बाद उसमें भाड़े के 28 पैसे और जुड़ गए l इसके बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियां यह तेल 32 रुपए 10 पैसे  के भाव से डीलर्स को बेचती हैं l इसके बाद केंद्र सरकार हर लीटर पेट्रोल पर 32 रुपए 90 पैसे उत्पाद शुल्क लगाती है l एक झटके से पेट्रोल की कीमत 65 रुपये हो जाती है l इसके अलावा हर पेट्रोल पंप डीलर हर लीटर पर 3 रुपए 68 पैसे का कमीशन जोड़ता है l इसके बाद जहां पेट्रोल बेचा जाता है उसकी कीमत में उस राज्य सरकार (उदाहरण के लिए दिल्ली) की ओर से लगाए गए वैट या बिक्री कर यानी 20 रुपए 61 पैसे और जुड़ जाते है, और कुल मिला कर अंत में एक लीटर पेट्रोल के लिए आम आदमी को 89 रुपए 29 पैसे चुकाने पड़ते हैं l  

बता दें कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हर रोज सुबह 6 बजे बदलाव होता है l पेट्रोल-डीजल के दाम में एक्साइज ड्यूटी, डीलर कमीशन और दूसरी चीजें जोड़ने के बाद इस का दाम करीब दोगुना हो जाता है l विदेशी मुद्रा दरों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतें क्या हैं, इस आधार पर रोज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव होता है l इसे डायनामिक प्राइसिंग कहाँ जाता हैं l 

डायनामिक प्राइसिंग

इस व्यवस्था के तहत पेट्रोल और डीजल के रेट की रोज समीक्षा होती है। इसके आधार पर रोज सुबह पेट्रोल और डीजल का रेट तय किया जाता है इस से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमत 15 दिन के अंतराल पर निर्धारित की जाती थी

तेल का सफ़र

जितनी तेल की कीमत होती है लगभग उतना ही टैक्स भी लगता है l कच्चा तेल ख़रीदने के बाद रिफ़ाइनरी में लाया जाता है और वहां से पेट्रोल-डीज़ल की शक्ल में बाहर निकलता है l इसके बाद उस पर टैक्स लगना शुरू होता है l सबसे पहले एक्साइज़ ड्यूटी केंद्र सरकार लगाती है l फिर राज्यों की बारी आती है जो अपना टैक्स लगाते हैं l इसे सेल्स टैक्स या वैट कहा जाता है l इसके साथ ही पेट्रोल पंप का डीलर उस पर अपना कमीशन जोड़ता है l अगर आप केंद्र और राज्य के टैक्स को जोड़ दें तो यह लगभग पेट्रोल या डीजल की वास्तविक कीमत के बराबर और कभी कभी उस से ज़्यादा होती है l उत्पाद शुल्क से अलग वैट एड-वेलोरम (अतिरिक्त कर) होता है, ऐसे में जब पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ते हैं तो राज्यों की कमाई भी बढ़ती है l 


इतना लंबा सफर तय करने के बाद पेट्रोल आम लोगों तक पहुँचता हैं l अब फ़र्ज़ कीजिए कि एक्साइज़ ड्यूटी और वैट, दोनों हटाकर पेट्रोल को भी जी.एस.टी. के दायरे में लाने का फ़ैसला कर लिया जाए तो क्या होगा ? एक्साइज़ ड्यूटी और वैट, दोनों हटाकर पेट्रोल को भी जी.एस.टी. के दायरे में लाने का फ़ैसला कर लिया जाए तो पेट्रोल की कीमतें कुछ यूँ होगी l 



हालांकि यह मुश्किल हैं क्योंकि सरकार चाहे राज्य की हो या केंद्र की भले ही वो जनता को लुभाने के लिए पेट्रोल को जी.एस.टी. की कक्षा में लाने की वकालत करें परंतु वास्तव में लाएगी नहीं क्योंकि पेट्रोल पर लगाए गए टैक्स सरकार की आय का मुख्य स्त्रोत हैं l 

क्या कहना है सरकार का ?

ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों के आधार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संशोधन करती हैं l भारत में कीमतों के इस तरह से तय होने की प्रक्रिया को डायनमिक प्राइसिंग कहते हैं और यह हर रोज तय होती है l सरकार का मूल्य निर्धारण पर कोई नियंत्रण नहीं है l इस बाबत पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने सदन में बयान दिया है

सरकार का कहना है कि, "पेट्रोल कंपनियां कीमतों को तय करने के लिए स्वतंत्र होती है और सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करती l राज्य सभा के एक सवाल के जवाब में पेट्रोलियम मंत्री धर्मंद्र प्रधान ने कहा कि “पेट्रोलिम पदार्थों की कीमतों को तय करने की  एक अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया है जो कि दशकों से चली आ रही है l हमारा देश जरूरत का करीब 80 फीसदी कच्चा तेल बाहर से आयात करता है l जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ती है तो हमें उसी हिसाब से घरेलू कीमत को बदलना होता है l जब कीमत कम होती है तो घरेलू बाजार में भी कीमत घट जाती है l कीमतों को तय करने का यह तरीका सभी मार्किटिंग कंपनियों ने मिलकर विकसित किया है l हमने इसके लिए इन कंपनियों को पूरी आजादी दी है l"

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ रही है l पिछले हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच ग थी l लॉकडाउन खत्म होने और कोरोना की दवा (वैक्सीन) आने के बाद से कच्चे तेल के बाजार मे उछाल जारी है और घरेलू बाजार में कीमतें तकरीबन ह रोज बढ़ रही है, लेकिन सवाल है कि कच्चे तेल के भाव बढ़ने से घरेलू कीमत बढ़ जाती है लेकिन जब कच्चे तेल की कीमत नीचे जाती है तो उसका फायदा आम लोगों को पूरा क्यों नहीं मिलता ?

अब आइये समझते हैं उन टैक्सों को जो पेट्रोल पर राज्य एवं केंद्र सरकारों द्वारा लगाए जाते हैं l 

क्या है एक्साइज ड्यूटी ?

एक्साइज ड्यूटी एक तरह का टैक्स है, जो भारत के अंदर कोई प्रोडक्ट प्रोड्यूस करने या उसे बेचने पर लगाया जाता है। सरकार इस पैसे से रेवेन्यू जनरेट करती है और फिर उस से समाज कल्याण के काम करती है। ध्यान रहे कि यह कस्टम ड्यूटी से बिल्कुल अलग है, जो बाहर से देश में आने वाली चीजों पर लगता है। 

VAT क्या हैं ?

वैट / VAT (Value Added Tax) एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तु और सेवा पर लगाया जाता है। क्योंकि वस्तु और सेवा उत्पादन के हर पड़ाव में मूल्य की वृद्धि होती जाती है इसलिए वस्तु के उत्पाद से लेकर बिक्री तक, हर पड़ाव में वैट / VAT (Value Added Tax) लगाया जाता है। वैट (VAT) किसी भी देश के GDP का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। हलाकि, वैट (VAT) निर्माताओं द्वारा सरकार को भरा जाता है, परन्तु वास्तव में यह टैक्स, ग्राहक, वस्तु को खरीदने के समय भरते है, निर्माता सिर्फ कर सरकार तक पहुँचाने का काम करता है।

सरकार के खाते में जाती है कमाई

पेट्रोल-डीजल पर कई तरह के टैक्स लगते हैं l इनमें रोड सेस भी लगाया जाता है l पेट्रोल खरीदते वक्त आप एक बड़ा हिस्सा रो सेस के रूप में चुकाते हैं, जो एक तरह का टैक्स ही है l पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले इस रोड सेस से तेल कंपनियों को कोई कमाई नहीं होती, न ही रिटेलर इससे कमाते हैं l बल्कि यह पूरी कमाई सरकार के खाते में जाती है

क्यों और कब से लग रहा है रोड सेस ?

रोड सेस की शुरुआत 1998 में हुई थी l पहले इसे सिर्फ पेट्रोल पर लगाया जाता था  मगर, 1999 में इसे डीजल पर भी लगाया जाने लगा l रोड सेस से होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश में सड़क, ब्रिज, अंडरपास बनाने के लिए किया जाता है l सरकार इसे पेट्रोल और डीजल का इस्तेमाल करने वालों से वसूलती है l मतलब इस का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है l एक वक्त था, जब सरकार सिर्फ 1 रुपए रोड सेस वसूलती थी l लेकिन, धीरे-धीरे इसे बढ़ाया जाता रहा l आज एक लीटर पेट्रोल-डीजल खरीदते वक्त 18 रुपए प्रति लीटर तक चुकाने पड़ते हैं l  

कभी 1 रुपए था रोड सेस

1998 में जब रोड सेस की शुरुआत हुई तो एक लीटर पर सिर्फ 1 रुपए वसूला जाता था l अप्रैल 2003 में पहली बार रोड सेस में 50 पैसे की बढ़ोतरी हुई l अप्रैल 2005 में फिर से 50 पैसे की बढ़ोतरी की गई l 2005 तक यह 2 रुपए प्रति लीटर वसूला जाने लगा l इस के बाद धीरे-धीरे इस में बढ़ोतरी होती रही l 

पेट्रोल के दाम और अर्थव्यवस्था

ऐसे समय में जब भारत की जी.डी.पी. (India GDP) लगातार दो तिमाहियों से संकुचन के बाद ग्रोथ के लिए तैयार है, तो ईंधन की बढ़ती कीमतें (Fuel price hike) विलेन बन कर ग्रोथ की रफ्तार को घटाने का काम कर रही हैं l यदि ईंधन की कीमतें उच्च स्तर पर बनी रहती हैं, तो इस से उच्च मुद्रास्फीति का दौर शुरू हो सकता है l जिस का देश की आर्थिक रिकवरी की गति पर सीधा प्रभाव पड़ेगा l 

सरकार को क्यों घटानी चाहिए ईंधन की कीमतें ?

जानकारों का मानना है कि सरकार को महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले करों को युक्तिसंगत बनाने का तरीका खोजने की जरूरत है, क्योंकि मुद्रास्फीति का प्रभाव पहले से ही देश के लाखों उपभोक्ताओं, कई क्षेत्रों और व्यवसायों द्वारा महसूस किया जा रहा है l 

बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज (BOAS) ने हाल ही में यह चिंता जाहिर की थी कि भारत में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है और अर्थव्यवस्था के सही ट्रैक पर आने के बवजूद भी खपत कम हो सकती है l नोट में कहा गया है कि ईंधन पर करों में कटौती करने से ज्यादा नुकसान होने की गुंजाइश भी नहीं रहेगी और इससे उपभोग का स्तर भी बना रहेगा l सीधे शब्दों में कहें तो, बढ़ती कीमतों का मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जो जी.डी.पी. वृद्धि को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है l इसके साथ यह भी कहा गया है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती हैं, तो भारत सरकार को पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए उच्च उत्पाद शुल्क और अन्य शुल्कों में कटौती करके उपभोक्ताओं के बोझ को कम करना चाहिए l 

हालांकि, यह बात सर्व विदित है कि भारत लगातार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है l लेकिन, उस ट्रैक पर से अगर विकास की गाड़ी उतरती है तो यह अच्छा नहीं होगा, क्योंकि लाख विकास के बाद भी भारत अभी भी एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था है l  जिसकी अधिकांश आबादी में कम आय वर्ग के लोग शामिल हैं l इसके विपरीत, यहां पर क्या किया जा रहा है ? यहां पर पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ाकर आम लोगों पर बोझ को बढ़ाया जा रहा है l साथ ही तेल के महंगे होने से महंगाई बढ़ रही है l महंगाई से खपत पर असर हो रहा है l खपत घटने से उत्पादन कम करना पड़ रहा है l उत्पादन कम किए जाने पर बेरोजगारी बढ़ रही है l इस तरह से भारत एक चक्र में फंसता जा रहा है l 

क्योंकि ईंधन के बढ़ते दामों का सीधा संबंध महंगाई से हैं l जब ईंधन के दाम बढ़ते हैं तो महंगाई भी बढ़ती हैं जिस का विपरीत परिणाम सत्ताधारी राजनीतिक दल की लोकप्रियता एवं देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता हैं l 

भारत में पेट्रोल की कीमत का 69 प्रतिशत हिस्सा अलग-अलग टैक्सेज का है, वहीं, डीजल के मामले में यह 54 प्रतिशत से अधिक है l लेकिन, ईंधन की कीमतों पर इतना ज्यादा टैक्स लगाना एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है, क्योंकि भारत में प्रति व्यक्ति आय अपेक्षाकृत कम है l 

तेल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत बढ़ जाती है l जिसका कई वस्तुओं पर व्यापक असर पड़ता है l कॉरपोरेट कार्यालयों से लेकर मंडियों तक, कई क्षेत्रों में इस समय ईंधन की बढ़ती कीमतों की गर्मी महसूस हो रही है l ईंधन की उच्च कीमतें, खास कर के डीजल के दाम बढ़ने से समस्त नागरिकों पर इस का असर पड़ता है l हर किसी को किसी भी चीज के लिए ज्यादा भुगतान करना पड़ता है l जिसका सीधा असर उनकी बचत पर होता है l कम बचत होने से उनकी कंजम्प्शन पॉवर कम हो जाती है l इसके बाद मांग में कमी देखी जाती है l मांग घटने पर कंपनियां उत्पादन घटाने के लिए मजबूर हो जाती है l 

विपक्षी दलों समेत देश के नागरिकों की बड़ी संख्या में लोगों ने केंद्र सरकार से ईंधन की कीमतों को लेकर कुछ विशेष कदम उठा कर राहत प्रदान करने का आग्रह किया है l  हालांकि, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ दिनों पहले कहा था कि केंद्र और राज्यों को समन्वय करना चाहिए और ईंधन की कीमतों को कम करने पर काम करना चाहिए l 

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने भी भारत में ईंधन की बढ़ती कीमतों के बारे में चिंता व्यक्त की है l रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के मुद्रास्फीति प्रभाव और पेट्रोल और डीजल पर उच्च अप्रत्यक्ष कर की दरों और विशेष रूप से प्रमुख वस्तुओं और सेवाओं की मुद्रास्फीति में पिक-अप के कारण सीपीआई मुद्रास्फीति खाद्य और ईंधन को छोड़कर 5.5 प्रतिशत पर बनी रही l 

पिछली सरकार से तुलना 

पिछली सरकार से तुलना करने पर हम पाते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल के दाम अधिक होने के बावजूद पेट्रोल देश में कम कीमतों पर बिकता था और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमतें घटने पर आम जनता को राहत मिलती थी क्योंकि उस समय ईंधन पर सरकारों द्वारा कम टैक्सेज़ लगाए जाते थे l इसे हम निम्नलिखित चार्ट द्वारा समझ सकते हैं l 





विश्व और हम

इस समय विश्व में पेट्रोल पर सब से अधिक टैक्सेज़ भारत में लगाए जाते हैं l जो कि 69 प्रतिशत से अधिक हैं l जबकि यह दर इटली में 64 %, जर्मनी और फ्रांस में 63 % हैं l असल में केंद्र और राज्य दोनों तरह की सरकारें अपने खजाने की भरपाई के लिए तेल पर टैक्स लगाने का सहारा ले रही हैं l केंद्र सरकार ने इसके पहले मार्च महीने में ही पेट्रोल-डीजल पर 3 रुपये लीटर तक टैक्स बढ़ा दिया था, एक बार फिर इसे बढ़ाया गया है ताकि कच्चे तेल की घटी कीमत का फायदा उठाया जा सके


जल्द ही सरकार ने ईंधन के दामों को कम कर के जनता को राहत पहुँचाने का प्रबंध करना चाहिए वरना इस का खमियाज़ा आम जनता, देश की अर्थव्यवस्था के साथ साथ सत्ताधारी दल को अगले चुनावों में भुगतना पड़ सकता हैं l पिछले दिनों हुए चार राज्यों एवं एक केंद्रशासित प्रदेशों के चुनावों में हम इस का ट्रेलर देख चुके हैं l  



- प्रा. शेख मोईन शेख नईम ,
डॉ. उल्हास पाटील लॉ कॉलेज, जलगांव

COMMENTS

LEAVE A REPLY
नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,28,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,7,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,179,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,17,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,1086,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,41,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,117,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,9,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चमरासुर उपन्यास,7,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,34,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,6,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,29,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,172,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,94,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,85,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,125,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,14,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,9,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,22,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,17,राजभाषा हिंदी,58,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,19,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,99,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,27,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,6,शमशेर बहादुर सिंह,5,शमोएल अहमद,4,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,31,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,26,समसामयिक हिंदी लेख,56,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,14,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,24,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,27,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,216,हिंदी लेख,444,हिंदी समाचार,104,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,58,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,2,baccho ke liye hindi kavita,66,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 11 Hindi Antral NCERT Solution,3,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,Class 9 Hindi Sparsh,15,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,10,hindi essay,208,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,63,hindi stories,557,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,lok-sabha-in-hindi,12,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions Class 7 Hindi Durva,12,NCERT Solutions Class 8 Hindi Durva,17,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Solutions for class 12 Humanities Hindi Antral Bhag 2,4,NCERT Solutions Hindi Class 11 Antra Bhag 1,19,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,NCERT/CBSE Class 9 Hindi book Sanchayan,6,Nootan Gunjan Hindi Pathmala Class 8,18,Notifications,5,question paper,12,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Sankshipt Budhcharit,5,Shayari In Hindi,14,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था
आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था
आसमान छूते पेट्रोल के दाम राजनीति और अर्थव्यवस्था घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी
https://lh4.googleusercontent.com/yEy8d61AgsNSnwSbdSF5mXctY-YqETSi_Wfji5RxbK_7naWPxdXR454hBpo9MI2dkAEQIqOnYwn-xsdC71ioN_hNScB2f91W4aBJQiLNNLybWAruCYg7zQZuR8Hh2_58_wy-jM0
https://lh4.googleusercontent.com/yEy8d61AgsNSnwSbdSF5mXctY-YqETSi_Wfji5RxbK_7naWPxdXR454hBpo9MI2dkAEQIqOnYwn-xsdC71ioN_hNScB2f91W4aBJQiLNNLybWAruCYg7zQZuR8Hh2_58_wy-jM0=s72-c
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2021/05/petrol-price-politics-economy.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2021/05/petrol-price-politics-economy.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका