नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा

SHARE:

नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा Neend Uchat Jaati Hai class 11 explanation कविता की व्याख्या summary कविता के प्रश्न उत्तर cbse ncert class 11

नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा


Neend Uchat Jaati Hai class 11 explanation class 11 Neend Uchat Jaati Hai summary Neend Uchat Jaati Hai summary class 11 नींद उचट जाती है कविता की व्याख्या नींद उचट जाती है कविता Neend Uchat Jaati Hai summary explanation Neend Uchat Jaati Hai explanation in hindi Neend Uchat Jaati Hai cbse ncert class 11 cbse Class 11 Hindi antra nind uchat jati hai vyakhya nind uchat jati hai saransh nind uchat jati hai class 11 hindi khanani nind uchat jati hai class 11 hindi vyakhya nind uchat jati hai kavita vyakhya nind uchat jati hai class 11 Hindi nind uchat jati hai kavita saransh Ch 16 nind uchat jati hai Hindi Kavita Class 11 Hindi अंतरा 


नींद उचट जाती है कविता की व्याख्या भावार्थ

जब-तब नींद उचट जाती है
पर क्या नींद उचट जाने से
रात किसी की कट जाती है?

   देख-देख दुःस्वप्न भयंकर,
   चौंक-चौंक उठता हूँ डरकर;
   पर भीतर के दुःस्वप्नों से
   अधिक भयावह है तम बाहर!
   आती नहीं उषा, बस केवल
   आने की आहट आती है!


नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा
नींद उचट जाती है

भावार्थ -
 
प्रस्तुत पंक्तियाँ 'नींद उचट जाती है' कविता से उद्धृत हैं, जो कवि 'नरेन्द्र शर्मा' जी के द्वारा रचित है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि कभी-कभी रात में नींद खुल जाती है, लेकिन क्या रात में किसी की नींद खुल जाने के बाद रात कटती है या एक बुरे समय के जैसा पूरी रात ही ख़राब हो जाती है। इसमें कवि ने समाज में जागृति, विकास और चेतना का अभाव को बताया है | जैसे समाज में जागृति ना होने से पूरा समाज अँधेरे में डूब जाता है। 
                   
कवि कहते है कि रात में भयंकर बुरा सपना देखकर मैं चौक कर उठ जाता हूँ। उस भयंकर सपने से डरकर मेरी नींद उचट जाती है। लेकिन मेरे अंदर जो बुरे सपने हैं, उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक अँधेरा तो बाहर छाया हुआ है | समाज में कोई विकास, और जागृति नही हैं, बस चेतना और जागृति आने की आश होती है | लेकिन जो समाज में कभी आती नहीं है | 


देख अँधेरा नयन दूखते,
दुश्चिंता में प्राण सूखते!
सन्नाटा गहरा हो जाता,
जब-जब श्वान शृगाल भूँकते!
भीत भावना, भोर सुनहली
नयनों के न निकट लाती है!

भावार्थ - प्रस्तुत पंक्तियाँ 'नींद उचट जाती है' कविता से उद्धृत हैं, जो कवि 'नरेन्द्र शर्मा' जी के द्वारा रचित है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि समाज में कोई जागृति नहीं है | समाज में अँधेरा छाया हुआ है | यह अँधेरा देख आँखों को तकलीफ़ होती है। मन मे बुरे ख्याल आते हैं। चिंता से प्राण सूखने लग जाते हैं, जब-जब यह अँधेरा बढ़ता है। पूरी तरह से सन्नाटा गहरा होने लगता है | चारों ओर खमोशी होती है, लेकिन जब-जब कुत्ते और सियार भौंकने लगते हैं, तब-तब मन मे शंका और भय की भावना होती है। इसके बाद सुनहरी सुबह भी आँखों को नहीं भाती है | 

मन होता है फिर सो जाऊँ,
गहरी निंद्रा में खो जाऊँ;
जब तक रात रहे धरती पर,
चेतन से फिर जड़ हो जाऊँ!
उस करवट अकुलाहट थी, पर
नींद न इस करवट आती है!

भावार्थ - प्रस्तुत पंक्तियाँ 'नींद उचट जाती है' कविता से उद्धृत हैं, जो कवि 'नरेन्द्र शर्मा' जी के द्वारा रचित है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि समाज में घोर अँधेरा देख मन करता है की फिर  से गहरी नींद में सो जाऊँ जब तक कि समाज में अँधेरा रहेगा जागृति नही आएगी तब तक मैं स्थिर रहूँ ,जब तक धरती में रात है तब तक विराम रहूँ, यह सोचते-सोचते कवि को नींद नही आती है और बेचैन होकर करवट बदलते रहते हैं रात भर। 

करवट नहीं बदलता है तम,
मन उतावलेपन में अक्षम!
जगते अपलक नयन बावले,
थिर न पुतलियाँ, निमिष गए थम!
साँस आस में अटकी, मन को
आस रात भर भटकाती है!

भावार्थ - 
प्रस्तुत पंक्तियाँ 'नींद उचट जाती है' कविता से उद्धृत हैं, जो कवि 'नरेन्द्र शर्मा' जी के द्वारा रचित है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि रात भर करवट बदलते रह गया लेकिन अँधेरा नहीं जा रहा है | सुबह ही नहीं हो रही है, कवि का मन उतावला से पागल हो रहा है, पूरी रात नयन जाग रहे थे | पलक तक नहीं झपकी, पुतलियाँ तक स्थिर हो गई थी, ऐसा लग रहा था, जैसे यह समय रुक सा गया हो, सांस यह आशा में अटकी हुई है कि जल्दी सुबह हो जाए, मन सुबह के आश में रात भर भटकती है | 

जागृति नहीं अनिद्रा मेरी,
नहीं गई भव-निशा अँधेरी!
अंधकार केंद्रित धरती पर,
देती रही ज्योति चकफेरी!
अंतर्नयनों के आगे से
शिला न तम की हट पाती है!

भावार्थ - प्रस्तुत पंक्तियाँ नींद उचट जाती है कविता से उद्धृत हैं, जो कवि नरेन्द्र शर्मा जी के द्वारा रचित है। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि कहते हैं कि मैं सोया नहीं हूँ जब तक समाज में जागृति नहीं आ जाती मुझे नींद कैसे आएगी, संसार से अभी यह भयवाह अँधेरा गया नही है। इस अँधकार भरे धरती पर  कोई उजाले का फेरा लगा रहा  है । लेकिन अन्तदृष्टि के आगे से अँधेरे का  चट्टान हट नही पता है। समाज के लिए अंतदृष्टि उजाले की खोज करता है। लेकिन समाज से अभी अँधेरा दूर नही हुआ है। 

---------------------------------------------------------

नरेन्द्र शर्मा जीवन परिचय

प्रस्तुत पाठ या कविता के लेखक नरेन्द्र शर्मा जी हैं | इनका का जन्म सन् 1923 में उत्तरप्रदेश के बुलन्दशहर जिले के जहाँगीरपुर गाँव में हुआ था। इन्होंने गाँव में ही प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण किया तथा  शर्मा जी ने प्रयाग विश्वविद्यालय
नरेन्द्र शर्मा
नरेन्द्र शर्मा
से एम.ए. की उपाधि लिया। सन् 1943 में वे मुंबई चले गए और वहाँ फिल्मों के लिए गीत और संवाद लिखने का कार्य करते रहे। शर्मा जी मूल रूप से गीतकार हैं। इनकी भाषा सरल व प्रवाहपूर्ण है। संगीतात्मकता एवं स्पष्टता इनके गीतों की विशेषता है। उनके अधिकांश गीत यथार्थ वादी दृष्टिकोण से लिखे गए हैं। उन्होंने प्रकृति के सौंदर्य का बहुत ही अनूठा चित्रण किया है। उन्होंने प्रेम की भाव और व्याकुलता तथा प्रकृति की कोमल सुंदरता को विशेष रुप से दर्शया है। जिसके कारण उन्हें एक अलग पहचान मिली है। जो गीत उन्होंने फिल्मों के लिए लिखें हैं, वे गीत साहित्यिकता के कारण अलग से पहचाने जाते हैं। शर्मा जी जीवन के अंतिम समय तक फिल्मों से जुड़े हुए थे | उनके अंतिम दौर की रचनाएँ आध्यात्मिक और दार्शनिक पृष्ठभूमि लिए हुए हैं। इन्होंने आम जन-जीवन से जुड़ी कहानियाँ एवं कविताएँ लिखी हैं। समाज की बुराइयों, विषमताओं को इन्होंने अपनी कविताओं में लिखकर व्यक्त किया है। इन्होंने छायावादी एवं प्रगतिवादी दोनों प्रकार की ही कविताएँ लिखी हैं। नरेन्द्र शर्मा जी की मृत्यु सन् 1989 को हृदय की गति रुकने के कारण हुई थी | 


इनकी कुछ प्रमुख कृतियाँ हैं --- प्रभात फेरी, प्रवासी के गीत, पलाश वन, मिट्टी और फूल, हंसमाला, रक्त चंदन, कदली वन, द्रौपदी, प्यासा निर्झर आदि...|| 


नींद उचट जाती है कविता का सारांश मूल भाव 

प्रस्तुत पाठ नींद उचट जाती है कवि नरेन्द्र शर्मा जी के द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने ऐसी लम्बी रात का वर्णन किया है, जिसमें डरावने सपने देखकर आधीरात में नींद खुल जाती है और नींद ख़राब हो जाती है | पूरी रात जागना पड़ता है। यह लम्बी रात का अँधेरा समाप्त ही नहीं होता है | कवि को उम्मीद है कि कोई किरण नज़र नहीं आती है। इस कविता में कवि ने अँधेरे के माध्यम से समाज के स्तर पर विकास, जागृति और चेतना अभाव को बताने का प्रयास किया है तथा बुरे स्वप्न के निराशा का चित्रण हुआ है। कवि इस कविता में समाज की जागृति, और विकास चाहते हैं तथा अँधेरे से मुक्त होकर रौशनी का द्वार खोलने की बात कहते हैं |कवि जीवन में दोनों स्तर के अंधेरे को दूर करने की बात करते हैं | वह चाहते हैं कि समाज में जागृति, चेतना फैले और सभी के जीवन से अंधेरा दूर हो जाए...|| 


नींद उचट जाती है कविता के प्रश्न उत्तर 


निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए --- 
प्रश्न-1 कवि ने भीतर के दुःस्वप्नों से अधिक भयावह किसे माना है और क्यों ? 

उत्तर- प्रस्तुत कविता के अनुसार, कवि ने भीतर के दुःस्वप्नों से अधिक भयावह बाहर के अँधेरे को माना है। क्योंकि समाज में कोई विकास और जागृति नहीं है, बस चेतना और जागृति आने की आश होती है समाज में लेकिन कभी आती नहीं है | 

प्रश्न-2 किस तरह की आश कवि को रात भर भटकाती है और क्यों ? 

उत्तर- 
कवि समाज में छाये अँधेरे रात को लेकर चिंतित है कि कब समाज में विकास होगा ? कब समाज में जागृति और चेतना आएगी ? समाज का उत्थान कब होगा ? ये सब सोच-सोच कर कवि को नींद नहीं आती है | नयन जागते रहते हैं, सांस भी इसी आश में थम गई है और मन की चिंता कवि को रात भर भटकाती रहती है | 

प्रश्न-3 कवि चेतन से फिर जड़ होने की बात क्यों करता है ? 

उत्तर- प्रस्तुत पाठ के अनुसार, कवि समाज की स्थिति को देखकर सोचते हैं कि मैं फिर से गहरी नींद में सो जाता हूँ, जब तक धरती में रात होगी तब तक मैं स्थिर हो जाता हूँ | जब तक कि समाज जागृत और विकसित नहीं हो जाता है, उस समय तक मैं विराम हो जाता हूँ | 

प्रश्न-4 'अंतर्नयनों के आगे से शिला न तम की हट पाती है!' इस पंक्ति में 'अंतर्नयन' और 'तम की शिला' से कवि का क्या तात्पर्य है ? 

उत्तर- 
'अंतर्नयनों के आगे से शिला न तम की हट पाती है!' इस पंक्ति से कवि का तात्पर्य यह है कि मेरे अंतर्दृष्टि से अँधेरे का जो चट्टान है, वह हट नहीं रहा है। अर्थात् समाज में अभी जागृति नहीं आयी है | 

प्रश्न-5 आशय स्प्ष्ट कीजिए --- 

(क)- आती नहीं उषा……………………. आहट आती है!

उत्तर- प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से कवि कहते हैं कि समाज में कोई विकास और जागृति नहीं है, बस चेतना और जागृति आने की आश होती है समाज में लेकिन कभी आती नहीं है | 

(ख)- जागृति नहीं अनिद्रा मेरी……………. भव-निशा अँधेरी!

उत्तर-
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहते हैं कि मैं सोया नहीं हूँ, जब तक समाज में जागृति नहीं आ जाती मुझे नींद कैसे आएगी | संसार से अभी यह भयवाह अँधेरा गया नहीं है। समाज अभी जागृत नहीं हुआ है | 

(ग)- करवट नहीं………………….. में अक्षम!

उत्तर-
प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहते हैं कि रात भर करवट  बदलते रह गया लेकिन अँधेरा नहीं जा रहा है | सुबह ही नहीं हो रही है, कवि का मन उतावलापन से पागल हो रहा है | 

---------------------------------------------------------


नींद उचट जाती है कविता से संबंधित शब्दार्थ


• दुश्चिंता - दुख देनेवाली चिंता
• भीत भावना - भय और शंका की भावना
• निमिष - क्षण, पल
• तम- अँधेरा
• श्वान- कुत्ता
• श्रृगाल - सियार
• भोर - सुबह
• अकुलाहट - बेचैनी
• भव-निशा - संसार रूपी भयावह रात
• चकफेरी - चारों ओर चक्कर काटना 
• अंतर्नयनों - अंतदृष्टि  | 


COMMENTS

LEAVE A REPLY: 1
  1. हां इसलिए हैं आंखें ठीथकी अंधेरा कब चल जा
    कब समाज की आंख खुलेगी और निखार आएगा
    नींद में व्याकुल सपना हमको याद दिलाने आती
    सोच में व्याकुल अपने मन एकाग्र नहीं कर पाए।
    रचनाकार की रचनाएं अपने आप में निराली हैं
    दुनिया में सुख शांति रहे संदेश यही दे डाली हैं।

    जवाब देंहटाएं
आपकी मूल्यवान टिप्पणियाँ हमें उत्साह और सबल प्रदान करती हैं, आपके विचारों और मार्गदर्शन का सदैव स्वागत है !
टिप्पणी के सामान्य नियम -
१. अपनी टिप्पणी में सभ्य भाषा का प्रयोग करें .
२. किसी की भावनाओं को आहत करने वाली टिप्पणी न करें .
३. अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .

data-full-width-responsive="true"

Advertisements

|आपको यह भी रोचक लगेगा_

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,6,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,17,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,1029,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,41,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,107,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,9,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चमरासुर उपन्यास,5,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,31,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,167,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,90,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,85,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,123,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,14,राजभाषा हिंदी,57,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,18,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,91,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,24,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,6,शमशेर बहादुर सिंह,5,शमोएल अहमद,4,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,22,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,26,समसामयिक हिंदी लेख,38,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,14,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,20,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,198,हिंदी लेख,440,हिंदी समाचार,101,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,58,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,63,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 11 Hindi Antral NCERT Solution,3,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,Class 9 Hindi Sparsh,15,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,9,hindi essay,190,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,62,hindi stories,542,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions Class 8 Hindi Durva,10,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Solutions for class 12 Humanities Hindi Antral Bhag 2,4,NCERT Solutions Hindi Class 11 Antra Bhag 1,19,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,NCERT/CBSE Class 9 Hindi book Sanchayan,6,Notifications,5,question paper,12,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Shayari In Hindi,13,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा
नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा
नींद उचट जाती है कविता नरेन्द्र शर्मा Neend Uchat Jaati Hai class 11 explanation कविता की व्याख्या summary कविता के प्रश्न उत्तर cbse ncert class 11
https://1.bp.blogspot.com/-rXl-ZBDMabY/YEGjY9iO0NI/AAAAAAAAPWs/SubZudc2UDE8snT37X808AKlDdx_LxDMwCNcBGAsYHQ/s320/insomina-anidra.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-rXl-ZBDMabY/YEGjY9iO0NI/AAAAAAAAPWs/SubZudc2UDE8snT37X808AKlDdx_LxDMwCNcBGAsYHQ/s72-c/insomina-anidra.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2021/03/neend-uchat-jaati-hai-poem.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2021/03/neend-uchat-jaati-hai-poem.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका