भारतीय जीवन मूल्य

SHARE:

भारतीय जीवन मूल्य भारतीय जीवन मूल्य भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इस तथ्य के कारण, भारत में नैतिक शास्त्रों का एक विशाल भंडार है, जिसने युगों से हमारी सभ्यता का मार्गदर्शन किया। भारतीय नैतिकता की नींव समाज की पूजा, प्रार्थना और आदर्शों और सिद्धांतों के रूप में आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं में देखी जा सकती है। भारत में, नैतिकता और धर्म के बीच अंतरंग संबंध मौजूद है।

भारतीय जीवन मूल्य 


भारतीय जीवन मूल्य भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इस तथ्य के कारण, भारत में नैतिक शास्त्रों का एक विशाल भंडार है, जिसने युगों से हमारी सभ्यता का मार्गदर्शन किया। भारतीय नैतिकता की नींव समाज की पूजा, प्रार्थना और आदर्शों और सिद्धांतों के रूप में आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं में देखी जा सकती है। भारत में, नैतिकता और धर्म के बीच अंतरंग संबंध मौजूद है। नैतिक नियम लोगों के सामाजिक और आध्यात्मिक जीवन के तरीकों का एक संकेतक है। मानव जीवन का सच्चा सार सांसारिक आनंद और दुखों के बीच जीना है। नैतिकता मुख्य रूप से दुनिया के नैतिक मुद्दों से संबंधित है। सच्चा धर्म नैतिक गुणों पर जोर देता है। नैतिक संहिता के अनुसार लोगों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना आवश्यक है। नैतिकता दो प्रकार की होती है, व्यक्तिगत और सामाजिक। व्यक्तिगत नैतिकता अच्छे गुणों का सूचक है जो व्यक्तिगत भलाई और खुशी के लिए आवश्यक हैं। सामाजिक नैतिकता उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है जो सामाजिक व्यवस्था और सद्भाव के लिए आवश्यक हैं।यद्यपि हर युग में नैतिकता और आचरण पर विभिन्न मत रहे हैं, लेकिन यह बहुत स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि मानव विज्ञान मानव गतिविधियों और उद्देश्यों के सामान्य सिद्धांतों का अध्ययन और विश्लेषण है। अधिकांश लेखकों और दार्शनिकों ने सर्वसम्मति व्यक्त की है कि नैतिक शास्त्र मूल्यों और मानकों पर अधिक केंद्रित है। 

नैतिकता व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार  के क्षेत्र में नैतिक मुद्दों का अध्ययन है। यह शब्द कभी-कभी कला और विज्ञान, धार्मिक विश्वासों और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं में मुद्दों का वर्णन करने के लिए भी अधिक उपयोग किया जाता है। पेशेवर क्षेत्र जो नैतिक मुद्दों से संबंधित हैं और इसमें चिकित्सा, व्यापार, व्यवसाय, कानून आदि शामिल हैं। नैतिकता और मूल्य इस बात को महत्व देते हैं कि जीवित रहने या करने के लिए सबसे अच्छा क्या है।  
जीवन के मूल सिद्धांतों को भाषा के अधिग्रहण के अलावा और व्यापक रूप से विकसित साहित्य के अलावा किसी और पर नहीं सीखा जा सकता है। स्वयं का आत्मनिरीक्षण और बीते हुए कल की समीक्षा  विशेष रूप से
भारतीय जीवन मूल्य
भारतीय जीवन मूल्य
नैतिक दृष्टिकोण में किसी भी आयाम में आगे के विकास के लिए बहुत जरुरी  हैं। सार्वभौमिक संस्कृति का विकास पूरी तरह से भाषा के विकास पर निर्भर करता है। विकास प्रक्रिया के प्रत्येक चरण को भारतीय संस्कृति की उत्पत्ति और जीविका के विशेष संदर्भ में नैतिक मूल्यों द्वारा नियंत्रित किया जाता है। भारतीय जीवन शैली, दर्शन और नैतिक मूल्यों के पोषण के लिए, रामायण, और भागवतम जैसे महाकाव्य और उपनिषदों, आरण्यकों जैसे साहित्य के विभिन्न रूपों में बहुत गंभीरता से व्याख्यायित है,  साहित्य के माध्यम से निरंतर पुनर्जागरण की क्रिया नैतिक मूल्यों का पुनर्स्थापन में सहायक हुई है । समृद्ध साहित्य से समृद्ध संस्कृति ही भारतीय साहित्य और भारतीय संस्कृति में आत्मनिरीक्षण और पूर्वव्यापीकरण का माध्यम है  एवं इसके माध्यम से नैतिकता और मूल्यों पर व्यवस्थित और वैचारिक विश्लेषण प्रभावित है  जो मूल्य संवर्धन पर कालानुक्रमिक प्रभाव छोड़ता है। नैतिकता का तात्पर्य समाज द्वारा निर्धारित कुछ सिद्धांतों और आचार संहिता के दायरे में रहने वाले जीवन से है। नैतिकता सबसे बुनियादी तत्वों में से एक है जो अच्छे और बुरे के बीच की रेखा का सीमांकन करता है। यह हमें यह बताने का समाज का तरीका है कि सभी की भलाई के लिए क्या हासिल करना है। नैतिकता का तत्व वह है जो मानव समाज को जानवरों से अलग करता है।

व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आकलन उसके जीवन-मूल्यों से किया जाता है। जीवन-मूल्य सफलता के लिए जरूरी हैं।व्यक्ति की प्रतिष्ठा का आकलन उसके जीवन-मूल्यों से किया जाता है। जीवन-मूल्य सफलता के लिए जरूरी हैं। वैदिक काल से होते हुए, गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी तक अनेक महापुरुष जीवन-मूल्यों के कारण इतिहास में अमर हो गए। जीवन मूल्य व्यक्ति को सकारात्मक बनाते हैं। दुनिया की बहुत सी संस्कृतियाँ इसलिए आज लुप्त हो गईं, क्योंकि  उनके मूल तत्वों में कुछ दोष समा गये थे . भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्वों में विविधता तथा विविधता में एकता सबसे महत्वपूर्ण हैं. भारतीय संस्कृति का सबसे प्राचीनतम स्वरूप आज भी विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ हैं. अनेक पंथो और मतों के अनुयायी होने के बावजूद भक्तिकाल में अनेक संतो और भक्तो ने अपनी भक्ति की विभिन्न धाराओ के माध्यम से राष्ट्रिय समन्वय की स्थापना की. ज्ञान और कर्म के दो विभिन्न क्षेत्र क्षेत्र भी जीवन की साधना के ही दो मार्ग लेकिन मंजिल एक दिखाई देती हैं.

प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में उसका मार्गदर्शन करने के लिए कुछ नैतिक दिशानिर्देशों की आवश्यकता होती है। ये नैतिक दिशानिर्देश विभिन्न स्रोतों से प्राप्त होते हैं। भारत में, नैतिकता का एक प्रमुख स्रोत प्राचीन धर्मग्रंथों में पाया जाता है आम तौर पर, वेद और स्मृतियों  को नैतिकता के स्रोत के रूप में माना जाता है। वेदों और स्मृतियों के अलावा, लोगों का आंतरिक विवेक भी नैतिकता का स्रोत बन जाता है। आधुनिक समय में, नैतिकता का स्रोत नेताओं के विचारों में पाया जाता है जैसे- गांधी, अरबिंदो, टैगोर और कई अन्य।भारतीय संस्कृति हमारी मानव जाति के विकास का उच्चतम स्तर कही जा सकती है। इसी की परिधि में सारे विश्वराष्ट्र के विकास के- वसुधैव कुटुम्बकम् के सारे सूत्र आ जाते हैं। हमारी संस्कृति में जन्म के पूर्व से मृत्यु के पश्चात् तक मानवी चेतना को संस्कारित करने का क्रम निर्धारित है । मनुष्य में पशुता के संस्कार उभरने न पायें, यह इसका एक महत्त्वपूर्ण दायित्व है ।जीवन के चार ऐसे लक्ष्य हैं जो  वांछित हैं और मानव आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए भी आवश्यक हैं। ये (1) धार्मिकता (धर्म) हैं; (2) सांसारिक लाभ (अर्थ); (3) इच्छा की पूर्ति; (कर्म) और (४) मुक्ति (मोक्ष)। जीवन के इन चारों लक्ष्यों  की पूर्ति मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस वर्गीकरण में, नैतिक दृष्टि से धर्म और मोक्ष सबसे महत्वपूर्ण हैं। वे मानव जीवन को सही दिशा और उद्देश्य देते हैं। धन (अर्थ) प्राप्त करना एक वांछनीय उद्देश्य है, बशर्ते यह धर्म का कार्य भी करे, अर्थात समाज का कल्याण करे।

भारत में नैतिकता, सामाजिक तर्क पर आधारित है। बौद्ध और जैन धर्म, दोनों सामाजिक तर्क को एक प्रमुख स्थान देते हैं। जैन धर्म केंद्र में सत्य और विश्वास  की अवधारणा रखता है। जैन धर्म व्यक्ति को स्वीकार करने से पहले विभिन्न विचारों और सिद्धांतों की वैधता और मूल्य का पता लगाने में अपने कारण का उपयोग करने की सलाह देता है। इसी तरह, बौद्ध धर्म भी तर्क को महत्व देता है।धर्म की हिंदू अवधारणा को उसके कर्मकांड और जाति के दायित्वों से निकटता से जोड़ा गया है। जैन धार्मिक दर्शन आत्मा की मूल पवित्रता को प्राप्त करने पर केंद्रित है और इसे सर्वोच्च उद्देश्य कहा जाता है। इसमें सबसे बड़ी बाधा "कर्म" है जिसने आत्मा को प्रदूषित कर दिया है जैसे बादल सूर्य को ढक लेते हैं।हिंदू धर्म भी कुछ सार्वभौमिक नैतिक सिद्धांतों का पालन करता है।  इन सिद्धांतों को सर्वधर्म धर्म या सार्वभौमिक कर्तव्य कहा गया है। इस प्रकार, धर्म, शब्द में, दो निहितार्थ हैं:

1. एक जाति / जातीयता के अनुसार अनुष्ठानों और दायित्वों का प्रदर्शन;
2. नैतिक गुणों और मानदंडों का अभ्यास, जो सभी के लिए समान हो सकता है।

धर्मशास्त्र की रूपरेखा सामाजिक जीवन में एक कोशिका के रूप में व्यक्ति की पहचान करती है। इस तरह के विचारों के कारण, मनु के नियम  उनके समय (युग) और स्थान (देश ) के सापेक्ष माने जाते हैं।

इन सिद्धांतों ने विशेष रूप से वर्ण के नियमों को भी सख्ती से परिभाषित किया। इसने विभिन्न युगों में किसी व्यक्ति के जीवन के लक्ष्यों और उद्देश्यों को भी निर्धारित किया। मनु ने कुछ मूल्यों को सार्वभौमिक माना है- संतोष {धैर्य ), क्षमा (क्षेम), आत्म-नियंत्रण (धामा), चोरी न करना (अस्तेय), स्वच्छता (सौका), ज्ञान (धी), सत्यता (सत्य), और क्रोध से घृणा (अक्रोध ) इन गुणों को समाज के लिए नैतिक आदेश कहा जाता है।गीता हमें फल / परिणामों के बिना किसी लगाव / विचार के कर्म का मार्ग सिखाती है। यह ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने का एक साधन है। इस प्रकार, गीता दोनों-कर्म योग और ज्ञान योग की वकालत करती है। हालाँकि, इसमें कर्म योग को ज्ञान योग से ऊपर बताया गया है।महाकाव्यों और दार्शनिक ग्रंथों में नैतिकता और नैतिक मूल्यों का महत्व उजागर किया गया है, जैसे, उपनिषद, रामायण, दर्शन-शास्त्र और धर्म-शास्त्र। दार्शनिक ग्रंथ में जो नैतिक मुद्दों की तर्कसंगत व्याख्या प्रदान करते हैं; दैनिक जीवन में मनुष्य के सामने आने वाली सार्वभौमिक नैतिक समस्याओं को दार्शनिक संदर्भ में रखा गया है। धर्म-शास्त्रों में, सामाजिक नैतिकता पर जोर दिया गया है। इन ग्रंथों में व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों को मार्गदर्शन के लिए  नैतिक ढाँचा का खाका खींचा गया है। इन ग्रंथों में नैतिक समस्याओं पर परोक्ष रूप से चर्चा की गई  है। भारत की ज्ञान परंपरा में, नैतिकता का मूल उसकी धार्मिक और दार्शनिक सोच में है। अनादिकाल से, विभिन्न धार्मिक आस्थाएँ यहाँ पनपी हैं। भारत की प्रत्येक धार्मिक और हर दार्शनिक प्रणाली में एक प्रमुख नैतिक घटक है। नैतिकता इन सभी प्रणालियों का मूल है। प्रत्येक धार्मिक परंपरा में, सुखी और संतुष्ट जीवन के लिए अच्छा नैतिक आचरण आवश्यक माना जाता है। धार्मिकता के मार्ग पर चले बिना कोई भी व्यक्ति जीवन के सर्वोच्च लक्ष्य (मोक्ष) को प्राप्त नहीं कर सकता है। इसके लिए व्यक्ति को अच्छे कर्म करने होंगे और गलत काम करने से बचना होगा।

भारत की आध्यात्मिकता में ही भारतीय संस्कृति और भारतीय मूल्यों का निवास है यही भारतीयता है, इसीलिये ही भारतीय संस्कृति एकमात्र आध्यात्मिक, अति मानसिक- अतिबौद्धिक संस्कृति है। जिस प्रकार परमात्मा सृष्टि के सभी प्राणियों के कल्याण का विधान करता हुआ सृष्टि, रक्षा और संहार करता है-उसी भाँति भारतीय संस्कृति भी सदा सद्गुणों की सृष्टि, उनका संरक्षण एवं कल्याण विरोधी दुष्ट तत्वों के विनाश की व्यवस्था करती है। वस्तुतः यह मानवीय, विश्वव्यापी एवं सर्वलोक हितकारिणी संस्कृति है। जो इसका अपनी अज्ञानता के कारण विरोध करता है, उसका भी कल्याण करने की ही यह संस्कृति सोचती और मार्ग बताती है।  हम कह सकते हैं कि माता-पिता, गुरु, अतिथि आदि का सम्मान, दुखी व्यक्ति के प्रति करुना का भाव, अहिंसा,प्रकृति की रक्षा, समन्वयकारी द्रष्टि तथा विविधता में एकता आदि भारतीय संस्कृति के मूल तत्व हैं. और यही भारतीयता के जीवन मूल्य है। संसार के सभी महापुरुष या सफलतम व्यक्ति अपने ऊंचे आदशरें और मान्यताओं के कारण ही समाज में गाथा बनकर अपना नाम रोशन करते हैं। समाज सर्वदा ऐसे लोगों का अनुकरण करता है। रीढ़विहीन या लिजलिजे व्यक्ति का समाज में कभी आदर नहीं होता। ऐसे लोग सदैव आलोचना और निंदा के पात्र होते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को कुछ मूल्य निर्धारित करने पड़ते हैं। कल्याण और सफलता को पाना है तो हमें मूल्य आधारित जीवन का मार्ग चुनना पडे़गा। इसके अभाव में जीवन की सार्थकता सदा संदिग्ध बनी रहेगी। 
वैदिक नैतिक मूल्य और भारत की अन्य नैतिक मूल्य प्रणालियों जैसे कि बौद्धों ,जैन एवं अन्य धर्म के नीतिशास्त्र  प्रगतिशील दृष्टिकोण का विश्लेषण और व्याख्या करते हैं । प्रत्येक पुरुष या महिला अपने सामाजिक स्थान के बावजूद जीवन के किसी भी पड़ाव पर,चाहे वो  राजा, रानी, व्यापारी, दरबारी, अछूत और यहाँ  तक कि अंगुलिमाल या एक महान नर्तक आम्रपाली हों सबके लिए नैतिक मूल्य उनके कर्मों के सापेक्ष तय हैं। ये नीतिशास्त्र या नैतिकता पर आधारित  मानवीय मूल्य, सभी मनुष्यों को समान दर्जा देकर, समाज के विभिन्न वर्गों के बीच स्वस्थ विकास और सकारात्मक जीवन में योगदान करते हैं।हम अपने देशकाल के अनुसार समाज और राष्ट्र के लिए उपयोगी बनें, और अपने जीवन मूल्यों को पहचान क्र उनके अनुसार अपना जीवन जियें यही हमारी सार्थकता है। इसके लिए हमें मूल्य आधारित जीवन जीने के मार्ग का चयन करना पडे़गा। नि:संदेह मूल्यों का निर्धारण करने में हमारे लिए प्रारंभ में कठनाईयाँ आएँगी  जिनसे हमें जूझना पड़ेगा। जीवन-मूल्य सहज ही निर्धारित नहीं होते, इसके लिए त्याग और सत्य के तत्व जरूरी हैं।


- डॉ सुशील शर्मा 

COMMENTS

LEAVE A REPLY

Advertisements

आपको ये भी रोचक लगेगा $hide=404

नाम

अंग्रेज़ी हिन्दी शब्दकोश,3,अकबर इलाहाबादी,11,अकबर बीरबल के किस्से,62,अज्ञेय,27,अटल बिहारी वाजपेयी,1,अदम गोंडवी,3,अनंतमूर्ति,3,अनौपचारिक पत्र,16,अन्तोन चेख़व,2,अमीर खुसरो,6,अमृत राय,1,अमृतलाल नागर,1,अमृता प्रीतम,5,अयोध्यासिंह उपाध्याय "हरिऔध",4,अली सरदार जाफ़री,3,अष्टछाप,3,असगर वज़ाहत,11,आनंदमठ,4,आरती,11,आर्थिक लेख,5,आषाढ़ का एक दिन,12,इक़बाल,2,इब्ने इंशा,27,इस्मत चुगताई,3,उपेन्द्रनाथ अश्क,1,उर्दू साहित्‍य,177,उर्दू हिंदी शब्दकोश,1,उषा प्रियंवदा,1,एकांकी संचय,7,औपचारिक पत्र,31,कक्षा 10 हिन्दी स्पर्श भाग 2,2,कबीर के दोहे,19,कबीर के पद,1,कबीरदास,10,कमलेश्वर,5,कविता,862,कहानी सुनो,2,काका हाथरसी,4,कामायनी,5,काव्य मंजरी,11,काव्यशास्त्र,4,काशीनाथ सिंह,1,कुंज वीथि,12,कुँवर नारायण,1,कुबेरनाथ राय,1,कुर्रतुल-ऐन-हैदर,1,कृष्णा सोबती,2,केदारनाथ अग्रवाल,1,केशवदास,1,कैफ़ी आज़मी,4,क्षेत्रपाल शर्मा,36,खलील जिब्रान,3,ग़ज़ल,89,गजानन माधव "मुक्तिबोध",10,गीतांजलि,1,गोदान,6,गोपाल सिंह नेपाली,1,गोपालदास नीरज,8,गोरख पाण्डेय,3,गोरा,2,घनानंद,1,चन्द्रधर शर्मा गुलेरी,2,चाणक्य नीति,5,चित्र शृंखला,1,चुटकुले जोक्स,15,छायावाद,6,जगदीश्वर चतुर्वेदी,9,जयशंकर प्रसाद,22,जातक कथाएँ,10,जीवन परिचय,26,ज़ेन कहानियाँ,2,जैनेन्द्र कुमार,2,जोश मलीहाबादी,2,ज़ौक़,4,तुलसीदास,5,तेलानीराम के किस्से,7,त्रिलोचन,1,दाग़ देहलवी,5,दादी माँ की कहानियाँ,1,दुष्यंत कुमार,7,देव,1,देवी नागरानी,23,धर्मवीर भारती,2,नज़ीर अकबराबादी,3,नव कहानी,2,नवगीत,1,नागार्जुन,16,नाटक,1,निराला,27,निर्मल वर्मा,1,निर्मला,26,नेत्रा देशपाण्डेय,3,पंचतंत्र की कहानियां,42,पत्र लेखन,146,परशुराम की प्रतीक्षा,3,पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र',3,पाण्डेय बेचन शर्मा,1,पुस्तक समीक्षा,74,प्रेमचंद,23,प्रेमचंद की कहानियाँ,89,प्रेरक कहानी,15,फणीश्वर नाथ रेणु,1,फ़िराक़ गोरखपुरी,9,फ़ैज़ अहमद फ़ैज़,24,बच्चों की कहानियां,84,बदीउज़्ज़माँ,1,बहादुर शाह ज़फ़र,6,बाल कहानियाँ,14,बाल दिवस,3,बालकृष्ण शर्मा 'नवीन',1,बिहारी,1,बैताल पचीसी,2,भक्ति साहित्य,123,भगवतीचरण वर्मा,5,भवानीप्रसाद मिश्र,3,भारतीय कहानियाँ,60,भारतीय व्यंग्य चित्रकार,7,भारतीय शिक्षा का इतिहास,3,भारतेन्दु हरिश्चन्द्र,7,भीष्म साहनी,5,भैरव प्रसाद गुप्त,2,मंगल ज्ञानानुभाव,22,मजरूह सुल्तानपुरी,1,मधुशाला,7,मनोज सिंह,16,मन्नू भंडारी,3,मलिक मुहम्मद जायसी,2,महादेवी वर्मा,12,महावीरप्रसाद द्विवेदी,1,महीप सिंह,1,महेंद्र भटनागर,73,माखनलाल चतुर्वेदी,3,मिर्ज़ा गालिब,39,मीर तक़ी 'मीर',20,मीरा बाई के पद,22,मुल्ला नसरुद्दीन,6,मुहावरे,4,मैथिलीशरण गुप्त,8,मैला आँचल,3,मोहन राकेश,9,यशपाल,9,रंगराज अयंगर,42,रघुवीर सहाय,5,रणजीत कुमार,29,रवीन्द्रनाथ ठाकुर,21,रसखान,11,रांगेय राघव,2,राजकमल चौधरी,1,राजनीतिक लेख,14,राजभाषा हिंदी,48,राजिन्दर सिंह बेदी,1,राजीव कुमार थेपड़ा,4,रामचंद्र शुक्ल,1,रामधारी सिंह दिनकर,18,रामप्रसाद 'बिस्मिल',1,रामविलास शर्मा,8,राही मासूम रजा,8,राहुल सांकृत्यायन,1,रीतिकाल,3,रैदास,2,लघु कथा,82,लोकगीत,1,वरदान,11,विचार मंथन,60,विज्ञान,1,विदेशी कहानियाँ,24,विद्यापति,4,विविध जानकारी,1,विष्णु प्रभाकर,1,वृंदावनलाल वर्मा,1,वैज्ञानिक लेख,5,शमशेर बहादुर सिंह,5,शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय,1,शरद जोशी,3,शिवमंगल सिंह सुमन,5,शुभकामना,1,शेख चिल्ली की कहानी,1,शैक्षणिक लेख,19,शैलेश मटियानी,2,श्यामसुन्दर दास,1,श्रीकांत वर्मा,1,श्रीलाल शुक्ल,1,संयुक्त राष्ट्र संघ,1,संस्मरण,10,सआदत हसन मंटो,9,सतरंगी बातें,33,सन्देश,24,समसामयिक हिंदी लेख,6,समीक्षा,1,सर्वेश्वरदयाल सक्सेना,16,सारा आकाश,13,साहित्य सागर,21,साहित्यिक लेख,17,साहिर लुधियानवी,5,सिंह और सियार,1,सुदर्शन,1,सुदामा पाण्डेय "धूमिल",6,सुभद्राकुमारी चौहान,6,सुमित्रानंदन पन्त,17,सूरदास,5,सूरदास के पद,21,स्त्री विमर्श,10,हजारी प्रसाद द्विवेदी,1,हरिवंशराय बच्चन,26,हरिशंकर परसाई,21,हिंदी कथाकार,12,हिंदी निबंध,188,हिंदी लेख,410,हिंदी समाचार,92,हिंदीकुंज सहयोग,1,हिन्दी,7,हिन्दी टूल,4,हिन्दी आलोचक,7,हिन्दी कहानी,32,हिन्दी गद्यकार,4,हिन्दी दिवस,57,हिन्दी वर्णमाला,3,हिन्दी व्याकरण,43,हिन्दी संख्याएँ,1,हिन्दी साहित्य,9,हिन्दी साहित्य का इतिहास,22,हिन्दीकुंज विडियो,11,aaroh bhag 2,13,astrology,1,Attaullah Khan,1,baccho ke liye hindi kavita,59,Beauty Tips Hindi,3,Class 10 Hindi Kritika कृतिका Bhag 2,5,Class 9 Hindi Kshitij क्षितिज भाग 1,17,English Grammar in Hindi,3,Godan by Premchand,6,hindi ebooks,5,Hindi Ekanki,9,hindi essay,180,hindi grammar,50,Hindi Sahitya Ka Itihas,60,hindi stories,508,ICSE Hindi Gadya Sankalan,11,Kshitij Bhag 2,10,mb,72,motivational books,10,naya raasta icse,8,NCERT Class 10 Hindi Sanchayan संचयन Bhag 2,3,NCERT Class 11 Hindi Aroh आरोह भाग-1,20,ncert class 6 hindi vasant bhag 1,14,NCERT Class 9 Hindi Kritika कृतिका Bhag 1,5,NCERT Hindi Rimjhim Class 2,13,NCERT Rimjhim Class 4,14,ncert rimjhim class 5,19,NCERT Solutions for Class 11 Hindi Vitan वितान भाग 1,3,NCERT Vasant Bhag 3 For Class 8,12,Notifications,5,question paper,10,quizzes,8,Rimjhim Class 3,14,Shayari In Hindi,13,sponsored news,2,Syllabus,7,UP Board Class 10 Hindi,3,Vasant Bhag - 2 Textbook In Hindi For Class - 7,11,VITAN BHAG-2,5,vocabulary,19,
ltr
item
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika: भारतीय जीवन मूल्य
भारतीय जीवन मूल्य
भारतीय जीवन मूल्य भारतीय जीवन मूल्य भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है। इस तथ्य के कारण, भारत में नैतिक शास्त्रों का एक विशाल भंडार है, जिसने युगों से हमारी सभ्यता का मार्गदर्शन किया। भारतीय नैतिकता की नींव समाज की पूजा, प्रार्थना और आदर्शों और सिद्धांतों के रूप में आध्यात्मिक और धार्मिक मान्यताओं में देखी जा सकती है। भारत में, नैतिकता और धर्म के बीच अंतरंग संबंध मौजूद है।
https://1.bp.blogspot.com/-Y06tdy5ysgw/XvdYoYFhxkI/AAAAAAAANrk/YenF02Q2d5cipv_j6qUsTOzkOkn2AuGiACNcBGAsYHQ/s320/%25E0%25A4%25AD%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25AF%2B%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25A8%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF.jpg
https://1.bp.blogspot.com/-Y06tdy5ysgw/XvdYoYFhxkI/AAAAAAAANrk/YenF02Q2d5cipv_j6qUsTOzkOkn2AuGiACNcBGAsYHQ/s72-c/%25E0%25A4%25AD%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25A4%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25AF%2B%25E0%25A4%259C%25E0%25A5%2580%25E0%25A4%25B5%25E0%25A4%25A8%2B%25E0%25A4%25AE%25E0%25A5%2582%25E0%25A4%25B2%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%25AF.jpg
हिन्दीकुंज,Hindi Website/Literary Web Patrika
https://www.hindikunj.com/2020/06/bharatiya-jevan-mulya.html
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/
https://www.hindikunj.com/2020/06/bharatiya-jevan-mulya.html
true
6755820785026826471
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All आपको ये भी रोचक लगेगा Categories ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy विषय-तालिका