मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना Hindi Essay on Mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना निबंध इन हिंदी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना किसने कहा था मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना निबंध इन हिंदी mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna essay in hindi Hindi Essay on Mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna yah pankti kisne likhi hai
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना निबंध इन हिंदी मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना किसने कहा था मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना निबंध इन हिंदी mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna essay in hindi Hindi Essay on Mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna mazhab nahi sikhata aapas mein bair rakhna yah pankti kisne likhi hai - उर्दू के प्रसिद्ध शायर मुहम्मद इकबाल के गीत की यह पंक्तियां अनेक बार दुहराई गई हैं। मजहब, सम्प्रदाय जिसे कभी-कभी धर्म भी कह दिया जाता है. हमें परस्पर शत्रुता करना नहीं सिखाता । इकबाल की इन पंक्तियों में एक ऐसी सच्चाई है जिसे कट्टरपंथी देखकर भी नहीं देखते।धर्म के नाम पर लोगों को उत्तेजित किया जाता है। धर्म के नाम पर हत्याएं की जाती हैं। पड़ोसियों के घरों में आग लगाई जाती है।मजहब की रक्षा या सेवा के नाम पर दंगे किये जाते हैं, मां बहनों की इज्जत नीलाम की जाती है, निरीह बच्चों की हत्या की जाती है। धर्म खतरे में है, की घण्टी बजा कर मुल्ला-मौलवी, पण्डित-पादरी धर्मान्धता को बढ़ावा देते हैं।धर्म के नाम पर मनुष्य को दूसरे मनुष्य से अलग किया जाता है। सम्प्रदाय अत्याचार, भेदभाव तथा शोषण का साधन बन जाता है।साम्प्रदायिकता की आग में मनुष्यता जल जाती है । सन्देह होने लगता है कि कहीं इकबाल की यह पंक्तियां कोरी कल्पना ही तो नहीं है ।
मजहब या सम्प्रदाय का सम्बन्ध पूजा-पद्धति एवं कर्मकाण्डों से है। आत्मा की शुद्धि के लिये और मुक्ति पाने के लिए हर धार्मिक व्यक्ति कोई-न-कोई उपासना पद्धति चुन लेता है। उपासना या पूजा एक नितान्त वैयक्तिक कृत्य है। सभ्य समाज में उपासना की स्वतन्त्रता प्रदान की जाती है। भारतीय संविधान में भारत को धर्म निरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है परन्तु प्रत्येक नागरिक को उपासना पद्धति अपनाने की स्वतन्त्रता दी गई है। धर्म या सम्प्रदाय के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाएगा यह बात भी दुहराई गई है।
धर्म की आवश्यकता मनुष्य को क्यों पड़ी? क्या धार्मिक विश्वास मनुष्य जीवन को सूखमय बनाते हैं ? इन प्रश्नों का उत्तर खोजते हुए हम उस आदिम युग में पहुंच जाते हैं जब कि जंगली मानव प्रकृति की शक्तियों को भय और आश्चर्य की दष्टि से देखा करता था। मनुष्य ने प्राकृतिक शक्तियों को अपने अनुकूल बनाने के लिए उनकी पुजा प्रारम्भ की। धीरे-धीरे अन्य विधि विधान विकसित हो गए। सारी प्राकृतिक शक्तियों के नियन्ता के रूप में एक ईश्वर की कल्पना भी कर ली गई।वास्तव में धर्म का आविष्कार मानव को सुरक्षा प्रदान करने के लिए हुआ। ईश्वर विश्वास भी मनुष्य को भी शक्ति प्रदान करता था।
कोई भी धर्म द्वेष अथवा हिंसा को उचित नहीं मानता। प्रेम को सभी धर्मों, सम्प्रदायों का मूल स्वीकार किया गया है। धर्म तो जीव-मात्र में परमात्मा के दर्शन करवाता है। धार्मिक व्यक्ति सभी प्राणियों में उसी ईश्वर का निवास देखता है।इस लिए सबसे प्यार करता है।महात्मा तुलसीदास के शब्दों में -
'सियाराम मय सब जग जानी, करहूं प्रणाम जोरि जुग पानी।'
अर्थात् मैं सारे संसार में उसी पर ब्रह्म (सीताराम) का निवास मानता हूं इसलिए सारा सृष्टि को हाथ जोड़ कर नमस्कार करता है। महात्मा कबीर ने भी ईश्वर भक्ति को प्रेम का मार्ग माना है। जो प्रेम नहीं कर सकता वह सच्चा भक्त नहीं हो सकता, धार्मिक नहीं हो सकता। कबीर के अनुसार -
'यह तो घर है प्रेम का, खाला का घर नाहीं।
सीस उतारे भुईं धरे, तब पैठे घर मांही ॥
सचमुच धर्म का आधार प्रेम है।सूफी सन्तों ने तो सांसारिक प्रेम और ईश्वर प्रेम में कोई अन्तर नहीं माना है। भक्त कवियों ने प्रेम को ही भक्ति कहा है। संसार का ऐसा कोई धर्म नहीं है जो दुश्मनी को महत्त्व देता है। सभी धर्मों में ईश्वर दयालु, कृपालु, रक्षक एवं दीनबन्धु माना गया है।सभी धर्मों में दीन-दुःखियों की सहायता का विधान है। सभी धर्म या सम्प्रदाय जीव-मात्र की रक्षा पर बल देते हैं। सभी धर्मों के पीर पैगम्बर, अवतार, महात्मा, दया और करुणा को महत्त्व देते आए हैं ।
मजहब बैर कब फैलाता है, इस विषय पर विचार करना भी आवश्यक है ।जिस समय मजहब स्वार्थी लोगों के हाथ की कठपुतली बन जाता है उस समय वह शत्रुता फैलाने का साधन बनता है । स्वार्थी नेता धर्म के नाम पर भोली-भाली जनता को लड़ता है और अपना वोट-बैंक पक्का करता है। सत्ता की दौड़ में अन्धा हुआ राजनेता धर्म या सम्प्रदाय के नाम पर जनता में फूट डाल कर अपनी कुर्सी पक्की करता है।स्वार्थान्ध धर्म का ठेकेदार विभिन्न धर्मों के अनुयाइयों को लड़ा कर अपना नेतृत्व पक्का कर लेता है। शिष्यों की भीड़ उसके हल्वे-मॉड़े का प्रबन्ध करती रहे इसके लिए आवश्यक है कि विभिन्न सम्प्रदायों में तनाव बना रहे।साम्प्रदायिक तनाव का कारण अनेक बार आथिक हित भी होते हैं। यदि व्यापार पर किसी एक जाति का आधिपत्य है तो दूसरी जाति या धर्म के लोग धर्म के नाम पर दंगे करके व्यापारियों को शहर छोड़ने के लिए विवश कर देंगे। इस प्रकार धर्म के नाम पर रक्तपात होगा।कश्मीर और पंजाब के उग्रवादी आज अपनी राजनीतिक लड़ाई धमें की आड़ में लड़ रहे हैं। झगडा हिन्दू सिक्ख या मुसलमान के बीच नहीं है।झगड़ा निहित स्वार्थों का है।
निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि धर्म किसी को वैर भाव रखना नहीं सिखाता।जो लोग धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग करते हैं वे ही धर्म को मनष्यों में फूट डालने के लिए हथियार की तरह प्रयोग करते हैं।
विडियो के रूप में देखें -
Hindikunj
इन्हे भी अवश्य पढ़ें -
Guest Post & Advertisement With Us
For Guest Posts and Advertisement directly contact us at -
Contact WhatsApp +91 9433826946
📢 Join Our WhatsApp Channel
Get the latest Hindi Notes, PDFs, Exam Updates and Study Materials directly on WhatsApp.
📱 Join WhatsApp Channelहिंदीकुंज में अपनी रचना प्रकाशित करें
हिंदीकुंज.कॉम में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत! प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं. ईमेल करें : info@hindikunj.com पर
कॉपीराइट Copyright
हिंदीकुंज.कॉम, वेबसाइट या एप्स में प्रकाशित रचनाएं कॉपीराइट के अधीन हैं। यदि कोई व्यक्ति या संस्था ,इसमें प्रकाशित किसी भी अंश ,लेख व चित्र का प्रयोग,नकल, पुनर्प्रकाशन, हिंदीकुंज.कॉम के संचालक के अनुमति के बिना करता है ,तो यह गैरकानूनी व कॉपीराइट का उलंघन है। ऐसा करने वाला व्यक्ति व संस्था स्वयं कानूनी हर्ज़े - खर्चे का उत्तरदायी होगा।
All content on this website is copyrighted. Do not copy any data from this website without permission. Violations will attract legal penalties.
हिंदी निबंध_$type=list-tab$c=5$meta=0$source=random$author=hide$comment=hide$rm=hide$va=0$meta=0
उपयोगी लेख_$type=list-tab$meta=0$source=random$c=5$author=hide$comment=hide$rm=hide$va=0
उर्दू साहित्य_$type=list-tab$c=5$meta=0$author=hide$comment=hide$rm=hide$va=0
● ऑफिशियल YouTube चैनल
हिन्दीकुंज
साहित्य एवं शिक्षा का वेब मंच
हिन्दीकुंज के ज्ञानवर्धक वीडियो, ऑडियो पाठ और नियमित अपडेट्स के लिए अभी सदस्यता लें!
सब्सक्राइब करें (SUBSCRIBE)
✓ मुफ़्त सदस्यता • 🔔 नए अपडेट्स
Most Helpful for Students
- हिंदी व्याकरण Hindi Grammer
- हिंदी पत्र लेखन
- हिंदी निबंध Hindi Essay
- ICSE Class 10 साहित्य सागर
- ICSE Class 10 एकांकी संचय Ekanki Sanchay
- नया रास्ता उपन्यास ICSE Naya Raasta
- गद्य संकलन ISC Hindi Gadya Sankalan
- काव्य मंजरी ISC Kavya Manjari
- सारा आकाश उपन्यास Sara Akash
- आषाढ़ का एक दिन नाटक Ashadh ka ek din
- CBSE Vitan Bhag 2
- बच्चों के लिए उपयोगी कविता

Bahut hi achhe se explain kiya bai
जवाब देंहटाएंThank you
हटाएंThank you
हटाएं